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VIPIN KUMARVIPIN KUMARFollow20 Jul 2024, 11:31 am
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वाराणसी: राजातालाब में बालिकाओं ने निकाली जागरूकता रैली, भ्रूण हत्या और बाल विवाह के खिलाफ उठाई आवाज

Varanasi, Uttar Pradesh:मयंक कश्यप/ जक्खिनी / राजातालाब, वाराणसी। आशा ट्रस्ट के तत्वावधान में शुक्रवार को ढढ़ोरपुर गांव में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बालिकाओं ने रैली निकाली। रैली में लड़कियों ने कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज और यौन उत्पीड़न के खिलाफ नारेबाजी की — भीख नहीं अधिकार चाहिए, जीने का सम्मान चाहिए। रैली ढढ़ोरपुर, जयापुर, चंदापुर, भीखमपुर, असवारी, बूड़ापुर, कोइलीपुर आदि गांवों की सैकड़ों किशोरियों की भागीदारी से निकली। जो कोइलीपुर-ढढ़ोरपुर की बस्तियों से होते हुए आशा सिलाई-कढ़ाई केंद्र पहुंची, जहां बालिका महोत्सव आयोजित हुआ। महोत्सव में लड़कियों ने नाटक, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए कुरीतियों पर प्रहार किया। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि महेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था ने सबको समान अधिकार दिया है, लेकिन सामाजिक व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। सामाजिक कार्यकर्ता रंजीत दहुरी ने कहा कि कानून सख्त होने के बाद भी महिलाओं के खिलाफ अपराध चिंताजनक है। महिला संगठन संयोजिका अनीता पटेल ने लड़कियों से अपने हक के लिए खुद आगे आने की अपील की।
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जयपुर के जंतर-मंतर में पत्थरों से बना विज्ञान, समय और आकाश का अद्भुत हिसाब

Jaipur, Rajasthan:जयपुर- न घड़ी, न मोबाइल… फिर भी वक्त का हिसाब सेकंड तक! सूर्य की छाया से समय और विशाल यंत्रों से ग्रह-नक्षत्रों की गणना। जयपुर का जंतर-मंतर, जहां करीब 300 साल पहले पत्थरों में विज्ञान उतारा गया। यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल जंतर-मंतर आज भी बताता है कि हमारे पूर्वज आसमान को सिर्फ देखते नहीं थे,बल्कि उसकी हर चाल का हिसाब भी रखते थे। देखिए ये खास रिपोर्ट। यह पत्थर नहीं, विज्ञान के औजार हैं। हर कोण, हर निशान और हर संरचना के पीछे एक गणना है। जयपुर का जंतर-मंतर इस बात की गवाही है कि सदियों पहले भी आसमान को समझने के लिए वैज्ञानिक प्रयोग किए जाते थे। ये कोई आम इमारतें नहीं… हर आकार, हर कोण और हर निशान के पीछे छिपा है विज्ञान। कहीं सूर्य की छाया से समय का पता चलता है, तो कहीं ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का अध्ययन होता है। जयपुर के जंतर-मंतर में बने विशाल यंत्र इस बात का प्रमाण हैं कि सदियों पहले भी खगोल विज्ञान और गणित की समझ कितनी विकसित थी। इस वैज्ञानिक विरासत के पीछे हैं जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय। 18वीं सदी में उन्होंने खगोलीय गणनाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पांच वेधशालाएं बनवाईं। जयपुर की वेधशाला इन पांचों में सबसे बड़ी और बेहतर संरक्षित मानी जाती है। यहां पत्थर और धातु को इस तरह आकार दिया गया कि वे आकाशीय घटनाओं के अध्ययन में मदद कर सकें। जंतर-मंतर का वृहद सम्राट यंत्र इसकी सबसे बड़ी पहचान है। विशाल त्रिकोणीय संरचना और उसके आसपास बने माप-चिह्नों की मदद से स्थानीय समय की गणना की जाती है। इसकी गणना की सटीकता दो सेकंड तक बताई गई है। वहीं, लघु सम्राट यंत्र से लगभग 20 सेकंड की सटीकता तक समय मापा जा सकता है। यानी आधुनिक डिजिटल घड़ियों से सदियों पहले समय को मापने की ऐसी व्यवस्था तैयार की गई, जो आज भी लोगों को हैरान करती है। यहां हर यंत्र की अपनी भूमिका है। नाड़ीवलय यंत्र सूर्य की स्थिति और स्थानीय समय बताता है। जयप्रकाश यंत्र से आकाशीय पिंडों की स्थिति समझी जाती है। राशिवलय यंत्र के 12 अलग-अलग उपकरण राशियों से संबंधित खगोलीय गणनाओं के लिए बनाए गए। राम यंत्र से आकाशीय पिंडों की ऊंचाई और दिशा का अध्ययन किया जाता है। यानी एक ही परिसर में आसमान को समझने के लिए कई तरह की वैज्ञानिक व्यवस्थाएं विकसित की गईं। जंतर-मंतर की खूबसूरती सिर्फ इसके आकार में नहीं, इसकी बनावट में भी है। कहीं विशाल पत्थर की संरचनाएं हैं, तो कहीं धातु की डिस्क और संगमरमर पर उकेरे गए माप। हर यंत्र को एक खास उद्देश्य के लिए तैयार किया गया। इनकी बनावट में गणित, दिशा निर्धारण, माप और स्थापत्य का ऐसा मेल दिखाई देता है, जो इस वेधशाला को दुनिया की दूसरी ऐतिहासिक इमारतों से अलग पहचान देता है। जंतर-मंटर को 31 जुलाई 2010 को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यहां आने वाले पर्यटक सिर्फ ऐतिहासिक इमारतें नहीं देखते, बल्कि उस वैज्ञानिक परंपरा को समझने का मौका भी पाते हैं, जिसमें आकाशीय घटनाओं को गणना और यंत्रों के जरिए समझने का प्रयास किया गया। आज समय हमारी कलाई पर बंधी घड़ी और मोबाइल में कैद है, लेकिन जयपुर का जंतर-मंतर याद दिलाता है कि कभी सूर्य की छाया ही समय की सबसे बड़ी गवाह हुआ करती थी। ये यंत्र इतिहास के अवशेष भर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जिज्ञासा, गणितीय समझ और भारतीय स्थापत्य कौशल की जीवंत मिसाल हैं। पत्थरों में दर्ज यह विज्ञान आज भी दुनिया को भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत से रूबरू करा रहा है। नोट-इस खबर की फीड ओएफसी से स्लग से भेजी गई है।
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राहुल गांधी के विदेशी दौरे पर विपक्षी सवाल, अमेरिका-यूरोप से दखल को लेकर सियासी घमासान

Noida, Uttar Pradesh:DELHI : R.P. SINGH (BJP) ON SUDHANSHU TRIVEDI'S ALLEGATIONS REGARDING RAHUL GANDHI'S FOREIGN TRIPS / POLITICAL ROW OVER THE CANCELLATION OF DILJIT DOSANJH'S EVENT / BHAGWANT MANN HITTING BACK AT THE BJP OVER HOME MINISTER AMIT SHAH'S REMARKS ON DRUGS / IMRAN MASOOD'S COMMENTS TARGETING RSS LEADER INDRESH KUMAR / DETENTION OF PROTESTERS DURING THE DELHI MARCH DEMONSTRATIONS दिल्ली: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह कहते हैं, "राहुल गांधी विदेश जाते हैं और ऐसी ताकतों के साथ जुड़ते हैं जो भारत का विरोध करते हैं। वह इल्हान उमर से मिले, जो खुले तौर पर कहती हैं कि कश्मीर को भारत से अलग हो जाना चाहिए। अमेरिका के दौरों के दौरान, उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिका और पश्चिमी यूरोपीय देशों को भारत के मामलों में दखल देना चाहिए, और दावा किया कि यहाँ लोकतंत्र खत्म हो गया है। उनके सलाहकार सैम पित्रोदा ने खुले तौर पर सवाल उठाया है कि अगर जॉर्ज सोरोस 100 मिलियन डॉलर खर्च करते हैं, तो इससे क्या फर्क पड़ता है। जब भी राहुल गांधी विदेश जाते हैं, तो ऐसा लगता है कि ये लोग भारत को तोड़ने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर साजिश रच रहे हैं।"
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वाराणसी: कोटवा बाजार में दिनदहाड़े चोरी, दुकान से ओप्पो F31 लेकर फरार हुए दो चोर

Varanasi, Uttar Pradesh:मयंक कश्यप/वाराणसी। लोहता थाना क्षेत्र के कोटवा बाजार में शुक्रवार दोपहर करीब 12:45 बजे दिनदहाड़े चोरी की सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, कोटवा बाजार निवासी मुस्तफा पुत्र नूर मोहम्मद की दुकान से दो अज्ञात चोर ओप्पो F31 मॉडल का एंड्रॉयड मोबाइल फोन चोरी कर फरार हो गए। बताया जा रहा है कि दोपहर के समय दुकान पर भीड़-भाड़ कम होने का फायदा उठाकर चोरों ने इस वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद बाजार में हड़कंप मच गया और व्यापारियों में आक्रोश है। पीड़ित ने मामले की जानकारी पुलिस को दे दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोरों की तलाश में जुटी है।
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राजस्थान के टोल प्लाज़ा पर गलत माप से चालानों पर उठा सवाल

Jaipur, Rajasthan:जयपुर-Deepak टोल प्लाजा पर तौल का खेल, वाहन चालकों की जेब पर चोट। बिना सर्टिफाइड कांटों से वजन, टोल वसूली पर उठे सवाल। राजस्थान में टोल प्लाजा और धर्मकांटों पर बड़ी गड़बड़ी उजागर। विधिक माप विज्ञान विभाग की प्रदेशभर में बड़ी कार्रवाई। दो दिन में प्रदेश के 380 धर्मकांटों का निरीक्षण। 79 धर्मकांटे बिना वैध सत्यापन के मिले। अनियमितताओं पर 10.95 लाख रुपए का जुर्माना। दौसा के भांडारेज टोल प्लाजा पर बड़ी कार्रवाई। बिना सर्टिफाइड संचालित 16 धर्मकांटे जब्त। जयपुर-आगरा हाईवे पर भांडारेज टोल प्लाजा पर कार्रवाई। जालौर के सांगाणा टोल प्लाजा पर भी कांटा जब्त। अलवर के बहला और चूरू के टिडियासर टोल पर कार्रवाई। बिना सत्यापित कांटों से भारी वाहनों का वजन करने का मामला। गलत वजन से वाहन चालकों से अधिक वसूली की आशंका। वजन ज्यादा दिखा तो टोल के नाम पर ज्यादा वसूली। बिना सत्यापन के तौल की शुद्धता पर सवाल। गलत तौल से मालभाड़े और परिवहन लागत पर भी असर। विधिक माप विज्ञान विभाग के डिप्टी कंट्रोलर आलोक जारवाल ने दी जानकारी।
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101वीं जयंती पर पूर्व उपराष्ट्रपति भैँरोसिंह शेखावत को श्रद्धांजलि

Jaipur, Rajasthan:पूर्व उपराष्ट्रपति भैँरोसिंह शेखावत की एक सौ एक वीं जयंती पर आज श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया राज्यपाल हरिभाउ बागड़े मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पंजाब के भाजपा प्रभारी डॉक्टर सतीश पूनियां भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने विद्याधर नगर स्थित शेखावत के स्मृति स्थल पहुंचकर शेखावत को पुष्पांजलि दी इस मौके पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें स्वर्गीय शेखावत के प्रिय भजनों की प्रस्तुति दी गई उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने शेखावत के जीवन और प्रदेश के विकास में उनके योगदान को याद किया
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हिमालयी बेल्ट में बड़े भूकंप का खतरा: उत्तराखंड से दिल्ली तक असर संभव

Chaka, यहाँ दो प्लेटें हैं - इंडियन प्लेट और तिब्बती प्लेट। ये एक-दूसरे पर दबाव डाल रही हैं, और यह दबाव 18 मिमी प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है। काफी समय से ये एक-दूसरे को धकेल रही हैं। हाल के शोधों से पता चलता है कि यहाँ एक बड़े भूकंप की संभावना बन रही है। हम इसकी सटीक तारीख तो नहीं बता सकते, लेकिन यहाँ जो फॉल्ट लाइन है - जिसे 'मेन हिमालयन थ्रस्ट' कहा जाता है - वह उत्तराखंड के नीचे 115 किमी की गहराई पर स्थित है। तो वहाँ एक बड़ा खतरा पनप रहा है। इसी तरह, हिमालय के अन्य हिस्सों में भी बड़े भूकंप आने की संभावना है। अगर हम पूरे हिमालय क्षेत्र को देखें - जिसमें न केवल उत्तराखंड, बल्कि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश भी शामिल हैं - तो यहाँ ऐसे बड़े भूकंप आ सकते हैं। अगर 8.1 तीव्रता का (या इसके आस-पास, जैसे 8 तीव्रता का) भूकंप आता है, तो यह बहुत विनाशकारी हो सकता है, क्योंकि इसका केंद्र (एपिसेंटर) ठीक नीचे होगा। उदाहरण के लिए, जब जम्मू-कश्मीर में भूकंप आया था, तो उसका केंद्र अक्सर हिंदूकुश पर्वतमाला में होता था; ऐसे में भूकंप का असर केंद्र से दूर होने के कारण कम महसूस होता था। लेकिन अगर भूकंप का केंद्र ठीक नीचे हो, तो 8.1 तीव्रता का भूकंप बहुत ज्यादा जानलेवा साबित हो सकता है। 2005 में जब मुजफ्फराबाद इलाके में भूकंप आया था, तो लगभग 80,000 लोगों की जान चली गई थी। इसलिए, इस बार भी इसका असर सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा। इसके आस-पास के इलाकों में दिल्ली भी है, जो हमारी राजधानी है। यह शोध उत्तराखंड में किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल उत्तराखंड में ही ऐसा खतरा है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बेल्ट में भी ऐसी संभावनाएँ मौजूद हैं, जहाँ दबाव लगातार बढ़ रहा है। हो सकता है कि अगले 5 सालों में ऐसा न हो, लेकिन आने वाले 10-20 सालों में ऐसा होने की आशंका है। लेकिन हमें अगले 20 सालों तक के लिए तैयारी रखनी चाहिए। चूँकि यह हिमालयी बेल्ट है, इसलिए यहाँ कई तरह की भूगर्भीय कमज़ोरियाँ हैं, जिसकी वजह से यहाँ अक्सर भूकंप आते रहते हैं। यहाँ छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप तो आते ही रहते हैं, लेकिन कई ऐसी जगहें हैं जहाँ ज़बरदस्त दबाव (प्रेशर) जमा हो रहा है। अगर हम यहाँ रहने वाले स्थानीय लोगों या पर्यटकों की बात करें, तो पर्यटकों पर शायद उतना असर न पड़े (हालाँकि कुछ पर पड़ सकता है), लेकिन यहाँ की स्थानीय आबादी सबसे ज़्यादा प्रभावित होगी। और बात सिर्फ़ उत्तराखंड की नहीं है; इसके पड़ोसी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गुड़गाँव, यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश और नेपाल तक भी इसका असर फैल सकता है। अगर आने वाले सालों में यहाँ बहुत तेज़ तीव्रता का भूकंप आता है, तो इसका दायरा काफ़ी बड़ा हो सकता है। हम यह तो नहीं बता सकते कि यह किस साल आएगा—हो सकता है अगले ही साल आ जाए, या हो सकता है कि इसमें 50 साल लग जाएँ। लेकिन ज़मीन की परतें लगातार खिसक रही हैं, और अब तक कोई ऐसा बड़ा भूकंप नहीं आया है जिससे यह जमा हुआ दबाव कुछ कम हो सके। इसलिए, यह दबाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अगर ऐसे में भूकंप आ जाता है, तो हम उसका सामना करने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। इसलिए, सबसे पहले सरकारी स्तर पर पहल होनी चाहिए; सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए, जैसे कि भूकंप-रोधी इमारतों का निर्माण अनिवार्य कर देना चाहिए।
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1 नवंबर की ऐतिहासिक रैली: हरियाणा कांग्रेस की सबसे बड़ी भागीदारी का दावा

Noida, Uttar Pradesh:दिल्ली: हरियाणा कांग्रेस नेताओं की केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक पर कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि 1 नवंबर जो रैली होने जा रही है वो ऐतिहासिक रैली है। इसकी तैयारियों की आज बैठक थी और मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि 1 नवंबर की रैली में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की तरफ से सबसे ज्यादा भागीदारी होगी और बढ़-चढ़कर के लोग आएंगे क्योंकि हरियाणा एक ऐसा प्रदेश है जहां वोट चोरी से केवल एक सीट ही चोरी नहीं हुई बल्कि सरकार चोरी हुई है इसीलिए इस रैली में हरियाणा के लोगों में जोश है और हरियाणा के लोग ज्यादा से ज्यादा पहुंचेंगे।
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विद्युत चेकिंग अभियान में 30 घरों के कनेक्शन की जांच, 1.70 लाख की वसूली

ASAmit SinghFollow48m ago
Deoria, Uttar Pradesh:विद्युत विभाग की टीम द्वारा शुक्रवार को गौरीबाजार कस्बे के किसान नगर वार्ड अरडीहा में विद्युत चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने 30 घरों के बिजली कनेक्शनों की जांच की और राजस्व वसूली के तहत कुल 1 लाख 70 हजार रुपये जमा कराए। अभियान का नेतृत्व अवर अभियंता (जेई) सलमान खान ने किया। टीम ने उपभोक्ताओं के विद्युत कनेक्शनों की जांच के साथ ही बकाया बिजली बिलों की वसूली पर जोर दिया। बिजली बिल जमा करने को लेकर उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। जेई सलमान खान ने बताया कि विद्युत विभाग की ओर से राजस्व वसूली और बिजली कनेक्शनों की जांच के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे अपने बिजली बिल का समय से भुगतान करें, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग का उद्देश्य राजस्व वसूली के साथ-साथ बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाना और उपभोक्ताओं को समय पर बिल जमा करने के प्रति जागरूक करना है। चेकिंग अभियान में धर्मेंद्र साहनी, राधाकृष्ण, शैलेंद्र कुमार, नागेंद्र मौर्य, संतोष सिंह, अशोक मिश्रा, अमित कुमार, पवन कुमार सहित विद्युत विभाग के अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
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सोनभद्र: मारकुंडी में अज्ञात वाहन की टक्कर से व्यक्ति की मौत, शिनाख्त में जुटी पुलिस।

Arvind DubeyArvind DubeyFollow50m ago
Shendhuriya, Uttar Pradesh:रिपोर्ट: अरविन्द दुबे | सोनभद्र सोनभद्र के मारकुंडी में अज्ञात वाहन की टक्कर से करीब 35 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। हादसा चोपन थाना क्षेत्र के गुरमा पुलिस चौकी अंतर्गत मारकुंडी मुख्य मार्ग पर डीएस पब्लिक स्कूल, अवई के समीप हुआ। मृतक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजकर शिनाख्त कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, मारकुंडी मुख्य मार्ग पर डीएस पब्लिक स्कूल, अवई के समीप एक व्यक्ति अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी गंभीर थी कि व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर गुरमा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मृतक के हुलिए से पहचान कराने में जुटी पुलिस मृतक की उम्र करीब 35 वर्ष, रंग गेहुँआ और लंबाई लगभग पांच फीट छह इंच बताई जा रही है। उसने नीली शर्ट, मटमैली गंजी और काले रंग का लोअर पहन रखा था। मृतक के गले में रंग-बिरंगी माला भी थी। पुलिस इन विवरणों के आधार पर मृतक की पहचान कराने का प्रयास कर रही है। तीन वर्षों से झोपड़ी में रहने की जानकारी स्थानीय लोगों के मुताबिक, मृतक लंबे समय से आसपास के क्षेत्र में मांगकर अपना गुजारा करता था। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब तीन वर्षों से एक झोपड़ी में रह रहा था। हालांकि, अभी तक उसकी पहचान की पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल पुलिस मृतक की शिनाख्त कराने में जुटी है। पहचान होने के बाद ही उसके परिजनों और अन्य संबंधित जानकारियों का पता चल सकेगा। घटना चोपन थाना क्षेत्र की है।
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नक्सल हिंसा का दर्द पीछे छोड़ प्रगति की राह पर छत्तीसगढ़: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

Chhattisgarh:राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर प्रवास के दौरान ऐतिहासिक मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की और देशवासियों की सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के विकास की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सल हिंसा के दर्द को पीछे छोड़कर अब तेजी से प्रगति और खुशहाली के पथ पर आगे बढ़ रहा है। बस्तर अंचल में शांति बहाली और विकास के नए युग की शुरुआत को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति का यह संदेश क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की पुष्टि करता है।
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