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सीतामढ़ी के डॉ. नवल यादव गरीब बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा ज्योति जलाते रहे
TSTripurari Sharan
Jan 29, 2026 16:04:35
Sitamarhi, Bihar
त्रिपुरारी शरण
बिहार के सीतामढ़ी जिले के एक ऐसे शिक्षक जो शिक्षा सेवा में अपना जीवन समर्पण कर चुके हैं। सरकारी शिक्षक से रिटायर होने के बाद अब भी शिक्षा की ज्योति जला कर रखे हुए हैं। हम बात कर रहे हैं डॉ. नवल यादव... आज कल हर कोई अपने और अपने परिवार तक ही सीमित हैं। बहुत कम लोग है, जो समाज के उन लोगों के लिए भी सोचते है, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होने की वजह से अपने बच्चों को समुचित शिक्षा नहीं दिला पाते है। ऐसे परिवार के बच्चे भी पढ़े और शिक्षित होकर सफल नागरिक बन सके इसकी चिंता डॉ नवल यादव करते है। डॉ यादव समाज एवं राष्ट्र के लिए निस्वार्थ भाव से समर्पित हैं। सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड के दलकावा गांव निवासी है डॉ नवल यादव जो वर्षों से गरीब बच्चों को निःशुल्क पढ़ाते हैं और शिक्षा की ज्योति जलाकर रखे हुए है। उनका संकल्प है कि जबतक सांस है, वे शिक्षा की ज्योति को बुझने नहीं देंगे। डॉ. यादव का मानना है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि समाज की दिशा और दशा बदलने का सबसे सशक्त माध्यम है। वे शिक्षक से रिटायर होने के बाद से लगातार गरीब और मेधावी बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगा रहे हैं। वे बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के साथ ही अपनी पेंशन की राशि से उन बच्चों के लिए किताबें, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक सामग्री की व्यवस्था कराते हैं। उनका मानना है कि पैसे के अभाव में किसी भी बच्चे की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। सरकारी शिक्षक की मूल सेवा से रिटायर होने के बाद कई सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा की सेवा देते रहे। उन्होंने प्राथमिक एवं मध्य विद्यालय, दलकावा के आलावा रजवाड़ा, इंदरवा और सोहरवा में बच्चों को पढ़ाया। वर्तमान में वे सीतामढ़ी शहर के चकमहिला में एक निजी विद्यालय में निःशुल्क शिक्षण कार्य कर रहे हैं। यादव बताते है कि बतौर शिक्षक उनकी पहली बार पोस्टिंग वर्ष- 1973 में बॉर्डर से सटे बैरगनिया प्रखंड के मिडिल स्कूल, पताही में हुई थी। इनकी विशेषता यह है कि सभी विषयों पर मजबूत पकड़ कर है कहते है कि पताही में स्कूल अवधि में वे गांवों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले गरीब बच्चों तक स्वयं पहुंचकर उन्हें पढ़ाया करते थे। इनकी विशेषता पर आज भी आठवीं कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक के विद्यार्थी मार्गदर्शन के लिए उनके पास पहुंचते हैं। बेटे शशिरंजन की सड़क दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद डॉ. यादव ने उसके नाम पर शशिरंजन शिक्षा केंद्र की स्थापना की। यह केंद्र उनके लिए मात्र एक संस्था नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज को बेहतर बनाने का सशक्त माध्यम बन गया। इसके तहत वे जिला स्तरीय कुशाग्र बुद्धि परीक्षा का आयोजन करते हैं और चयनित विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को वे नि:शुल्क मार्गदर्शन और सफलता के टिप्स भी देते हैं। उनके मार्गदर्शन में पढ़े कई छात्र आज बैंक, सेना, मेडिकल और डाक विभाग जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। बहरहाल ऐसी सोच रखने वाले लोगों की कमी आज भी समाज में है लेकिन डॉ नवल यादव ऐसी सोच के साथ समाज के लिए प्रेरणा है और इससे सिख लेने की जरूरत है ताकि समाज की दिशा और दशा बेहतर किया जा सके।
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