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सरकारी अस्पताल में सफाईकर्मी के हाथों इलाज? चौंकाने वाला सच सामने आया!

Kondagaon, Chhattisgarh:ये कोई झोलाछाप क्लिनिक नहीं, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है! लेकिन यहां इंजेक्शन लगाने से लेकर ग्लूकोज चढ़ाने, दवाइयां बांटने और टांके लगाने तक का काम एक सफाईकर्मी करता है। जी मीडिया के कैमरे मे कैद महज 2500 रुपये महीने पर जीवन दीप समिति से रखे गए गणेश शोरी के इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। न मेडिकल ऑफिसर, न पर्याप्त स्टाफ… और जिम्मेदारी 21 गांवों के मरीजों की! आखिर स्वास्थ्य विभाग कर क्या रहा है? सफाईकर्मी के भरोसे इलाज! कोंडागांव जिले के बयानार में स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम की निगरानी पर सवाल खड़े करती है। जी मीडिया के कैमरे मे जो कुछ हो रहा है उसे सफाईकर्मी गणेश शोरी भी कैमरे पर स्वीकार कर रहा है कि वह इंजेक्शन लगाने, ड्रिप चढ़ाने, दवाइयां देने और टांके लगाने तक का काम करता है। सवाल गणेश पर नहीं, उस व्यवस्था पर है जहां प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के बीच मरीजों की सुरक्षा दांव पर नजर आ रही है। बाइट | गणेश कुमार शोरी, सफाईकर्मी “दो साल से सबकुछ संभाल रहा हूं। डिलीवरी छोड़कर इंजेक्शन लगाना, ड्रिप चढ़ाना, टांके लगाना सब करता हूं। जीवन दीप समिति से 2500 रुपये महीने मिलते हैं।” पैसे कम है मगर सम्मान मिलता है यही नहीं डॉक्टर ने भी मानी स्टाफ की कमी बयानार स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर, तीन स्टाफ नर्स, महिला आरएचओ, फार्मासिस्ट और ड्रेसर समेत सात पदों पर नियुक्ति की जरूरत बता रहे है बाइट -आयुर्वेदिक डॉक्टर प्रभजन पुरोहित लेकिन सवाल है—क्या कुछ काम सिखा देना प्रशिक्षित और अधिकृत स्वास्थ्यकर्मियों की कमी का विकल्प हो सकता है? मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? वॉकथ्रू , जी मीडिया बात चित -गणेश शोरी सफाई कर्मी,डॉ प्रभजन पुरोहित आयोर्वेदिक डॉक्टर गांवों के मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं, तो उन्हें सुरक्षित इलाज देने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ क्यों नहीं मिलता? और वर्षों से उठ रही मांगों पर कार्रवाई कब होगी? बाइट - डॉ. आर.के. चतुर्वेदी, सीएमएचओ साहब कहते है ऐसा अभी तक हमारी जानकारी में नहीं है। गंभीर मामला है। जांच करवाएंगे, अगर ऐसा है तो नोटिस जारी किया जाएगा और व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। सीएमएचओ को जानकारी नहीं, तो निगरानी कौन कर रहा है? सीएमएचओ जांच का भरोसा दे रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी स्थिति लंबे समय से है, तो विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां थी? क्या नियमित निरीक्षण हुआ? रिक्त पदों पर नियुक्ति कब होगी? और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल क्या कदम उठाए जाएंगे? नक्सलवाद के साये से निकलते बस्तर में विकास की असली परीक्षा अब स्वास्थ्य व्यवस्था की है। सड़क और भवन से विकास पूरा नहीं होता। ग्रामीणों को डॉक्टर, नर्स और सुरक्षित उपचार भी चाहिए। 21 गांवों की सेहत का सवाल है। अब स्वास्थ्य विभाग को केवल जांच का आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखाना होगा। सवाल सफाईकर्मी पर नहीं, उस सिस्टम पर है जो मरीजों को सुरक्षित इलाज देने की अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में नाकाम नजर आ रहा है। जी मीडिया के लिए चंपेश जोशी की रिपोर्ट
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चंद्रपुर में 15-16 अक्टूबर को 70वां धम्मचक्र अनुप्रवर्तन: लाखों श्रद्धालुओं की तैयारी

Chandrapur, Chhattisgarh:चंद्रपूर में १५ और १६ अक्तोबर २०२६ को दीक्षाभूमी, चंद्रपूर में ७० वां धम्मचक्र अनुप्रवर्तन समारोह आयोजित किया जाएगा। यह समारोह डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी, चंद्रपूर और दीक्षाभूमी विहार विकास समिति, चंद्रपूर की संयुक्त पहल से हो रहा है। कार्यक्रम में श्रद्धेय भिक्खुसंघ व विभिन्न क्षेत्रों के नामवंत आचार्य भाग लेंगे। अस्थिधातूकलश दर्शन के लिए पवित्र अस्थिधातूकलश भी दीक्षाभूमी पर रखा जाएगा। पहले दिन शाम को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा पर अभिवादन और धम्मध्वजारोहण के साथ भव्य मिरवणा शुरू होगी, उसके बाद शाम को धम्मध्वजा एक कार्यक्रम होगा और रात में विशेष परिसंवाद रखा गया है। दूसरे दिन सुबह पुतल्‍यामं अभिवादन के बाद भव्य मिरवणूक दीक्षाभूमी की ओर प्रस्थान करेगी। दीक्षाभूमी पर परिसंवाद, सामूहिक बुद्धवंदना और धम्मप्रवचन होंगे, tandis शाम ५ बजे मुख्य समारंभ किया जाएगा।
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कटवा में तेज बाइक की टक्कर से 64 वर्षीय उत्तम कुंडु की मौत

Katwa, West Bengal:বেপরোয়া বাইকের ধাক্কায় প্রাণ গেল উত্তম কুন্ডু (৬৪) নামে এক প্রৌঢ়ের। ঘটনাটি ঘটেছে কাটোয়ার পানুহাট এলাকায়। রক্তাক্ত সংজ্ঞাহীন অবস্থায় উত্তম বাবুকে স্থানীয় বাসিন্দারা কাটোয়া হাসপাতালে আনলে চিকিৎসক মৃত বলে জানিয়ে দেয়। দুর্ঘটনার পর মোটরবাইক চালক পালিয়ে যায়। উত্তম কুন্ডুর ভাইপো প্রদীপ কুন্ডু বলেন, বুধবার রাতে কাজ সেরে বাড়ি ফেরার সময় বেপরোয়া গতির একটা বাইক কাকাকে পিছন থেকে ধাক্কা মেরে পালিয়ে যায়। কাকা সাইকেল নিয়ে রাস্তায় পড়ে যায়। বাইকটিতে দুজন ছিল। স্থানীয় এক দোকানের সি সি ক্যমেরায় দুর্ঘটনার ছবি পাওয়া গেছে। বাইক চালককে সঠিকভাবে বোঝা যাচ্ছে না। কাটোয়া থানায় দুর্ঘটনার ভিডিও দিয়ে আমরা অভিযোগ করব।স্থানীয় বাসিন্দা ঝন্টু ভট্টাচার্য বলেন, সন্ধ্যে সাতটা থেকে রাত অবধি কাটোয়ার ঘোষহাট এলাকা থেকে পানুহাট হয়ে দাঁইহাট পর্যন্ত রাস্তায় বাইকের দৌরাত্ম্যে জীবন অতিকে ষ্ট হয়ে উঠেছে। প্রশাসনের ব্যবস্থা নেওয়া প্রয়োজন। আমরা পাড়া থেকে বেপরোয়া বাইক বন্ধের জন্য থানায় অভিযোগ জানাব। বাইট:১) প্রদীপ কুন্ডু, মৃতের ভাইপো, ২) ঝন্টু ভট্টাচার্য, স্থানীয় বাসিন্দা।
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जलकपाइगुड़ी नगरपालिका बोर्ड गठन टल गया; तृणमूल-बीजेपी के बीच राजनीतिक घमासान

Jalpaiguri, West Bengal:আদালতের রায় পেয়েও জলপাইগুড়ি পৌর বোর্ড গঠন করতে পারলো না কালীঘাট শিবির। পৌর বোর্ড গঠনের চিঠিতে সই করেও সই প্রত্যাহারের আবেদন কাউন্সিলেরর। আর এর জেরে বোর্ড গঠন করতে পারলো না কালীঘাট শিবির। নাচতে না জানলে উঠোন বাঁকা বলে কটাক্ষ ঋতব্রত শিবিরের। কাউন্সিলরদের অনুপস্থিতি এবং সই প্রত্যাহার করার আবেদন। এই জোড়া সমস্যার জেরে জলপাইগুড়ি পৌর বোর্ড গঠন করতে পারলো না মমতা পন্থী তৃণমূল শিবির। আদালতের নির্দেশের পর আজ বোর্ড গঠন করা হবে বলে দলের তরফে ঘোষণা করা হলেও আজ বোর্ড গঠন করতে পারলো না কালীঘাট শিবির। বিজેપির তরফে লাগাতার হুমকির জেরে নিরাপত্তাহীনতা এবং প্রাণনাশের ভয়ের কারণ দেখিয়ে পুরবোর্ড গঠন থেকে বিরত থাকার অভিযোগ তুলেছে মমতা শিবির। এই মর্মে সাংবাদিক সম্মেলন ডেকে ক্ষোভ প্রকাশ করেন তারা। জানা গেছে বোর্ড গঠন করতে চেয়ে কয়েক দিন আগে এক্সুকেটিভ অফিসারের কাছে চিঠি দিয়েছিল ৩ মমতা পন্থী কাউন্সিলর। কিন্তু গতকাল তাদের মধ্যে পিংকু বিশ্বাস নামে এক কাউন্সিলর প্রশাসন কে চিঠি দিয়ে জানান তাকে ভুল বুঝিয়ে সই করানো হয়েছে। তাই তিনি তার সই প্রত্যাহার করছেন। আর এতেই নতুন করে জটিলতা তৈরি হয়। জলপাইগুড়ি পৌরসভায় মোট কাউন্সিলর ২৫ জন। এরমধ্যে ২ জন কংগ্রেস। ১ জন সিপিএম এবং ২২ জন তৃণমূলের। ২২ জনের মধ্যে প্রথম অবস্থায় ১৭ জন মমতা শিবিরে ছিল। আর বোর্ড গঠন করতে প্রয়োজন ছিল ৯ জন কাউন্সিলরের। প্রথম অবস্থায় সদস্য সংখ্যা প্রচুর থাকলেও বর্তমানে মমতা শিবিরে রয়েছে ৭ জন। ফলায় এরা এখন সংখ্যালঘু। বর্তমানে আদালতের নির্দেশে বোর্ড চালাচ্ছে প্রশাসক। পুরো ঘটনা নিয়ে তীব্র আক্রমণ শানিয়েছে ঋতব্রত শিবিরের পক্ষে প্রাক্তন চেয়ারম্যান সৈকত চট্টোপাধ্যায়। তিনি বলেন, "নাচতে না জানেলে উঠোন বাঁকা"। তাঁর দাবি, বিজেপির সন্ত্রাসের অভিযোগ আসলে অজুহাত মাত্র। আসল কারণ হলো বোর্ড গঠনের জন্য প্রয়োজনীয় কোরামের সংখ্যাই তাদের কাছে নেই। সংখ্যা না থাকার লজ্জায় মুখ ঢাকতেই কাউন্সিলররা পুরসভায় না এসে সাংবাদিক সম্মেলন করছেন। হুমকির অভিযোগ বিজেপির পক্ষ থেকে উড়িয়ে দিয়েছেন জেলা কমিটির সদস্য সৌজিত সিংহ। এই অভিযোগকে ভিত্তিহীন ও মিথ্যা অজুহাত বলে উড়িয়ে দেওয়া হয়েছে। পিংকু বিশ্বাস দাবি করেছেন তাকে বিজেপির তরফে কোনো হুমকি দেওয়া হয়নি। তাকে ভুল বুঝিয়ে সই করানো হয়েছে।
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श्रीमाधोपुर पंचायत समिति में दुर्गा खर्रा का निर्दलीय नामांकन: भाजपा नाराज, सियासी हलचल तेज

Sikar, Rajasthan:लोकेशन श्रीमाधोपुर सीकर रिपोर्टर लक्की अग्रवाल पंचायत समिति सदस्यों के लिए नोमिनेशन,यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बेटे दुर्गा सिंह खर्रा ने निर्दलीय भरा नामांकन, श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड-19 से ठोकी ताल, भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी को बताया निर्दलीय चुनाव लड़ने की वजह, कार्यकर्ताओं की इच्छा को बताया सर्वोपरि,दुर्गा सिंह खर्रा बोले परिवार जनसंघ के समय से विचारधारा से जुड़ा है पार्टी से लेकिन कार्यकर्ताओं की इच्छा का किया सम्मान एंकर पंचायती राज चुनाव को लेकर श्रीमाधोपुर पंचायत समिति में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नामांकन प्रक्रिया के दूसरे दिन आज प्रदेश के यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के पुत्र दुर्गा सिंह खर्रा ने पंचायत समिति सदस्य पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। उन्होंने वार्ड संख्या 19 से अपनी दावेदारी पेश की। रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम सौरव भाम्बू के समक्ष उन्होंने आवेदन प्रस्तुत किया। मंत्री के बेटे के निर्दलीय नामांकन दाखिल करने के बाद श्रीमाधोपुर की स्थानीय राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। दुर्गा सिंह खर्रा ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उन्होंने भाजपा से टिकट नहीं मांगा है। उन्होंने कहा पिछले ढाई साल से पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी और क्षेत्र के कुछ मतदाताओं ने उनसे निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात कही थी। जिस पर उन्होंने निर्दलीय के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। नामांकन दाखिल करने के बाद दुर्गा सिंह खर्रा ने कहा कि पिछले ढाई साल में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच काफी नाराजगी रही है। उन्होंने बताया कि पीढ़ियों से जुड़े मतदाताओं ने उनसे कहा था कि यदि वे पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे तो उनका साथ देना मुश्किल होगा, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने पर वे उनके साथ रहेंगे। दुर्गा सिंह खर्रा ने कहा मतदाताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पार्टी से टिकट मांगने के बजाय निर्दलीय नामांकन दाखिल करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं की इच्छा थी कि वे पार्टी का टिकट लिए बिना चुनाव लड़ें। आगे की रणनीति भी कार्यकर्ताओं की राय के अनुसार तय की जाएगी। दुर्गा सिंह खर्रा ने अपने बयान में भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के मन में आज भी भाजपा है, लेकिन नाराजगी के चलते उन्होंने निर्दलीय नामांकन के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद बैठकर इस पूरे मामले पर मंथन किया जाएगा और कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास भी किया जाएगा।
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सिवनी SNCU वार्ड in six months 80 newborn deaths: Congress protests

Seoni, Madhya Pradesh:सिवनी जिला चिकित्सालय के SNCU वार्ड में पिछले 6 माह में 80 नवजातों की मौत के मामले में अब राजनीति शुरू हो गई है; जिला कांग्रेस द्वारा जिला चिकित्सालय के सामने धरना-प्रदर्शन कर मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन को हटाने की मांग करते हुए SNCU के प्रभारी डॉक्टर पारस पाटेरिया का पुतला फूंका गया। कांग्रेस का कहना है कि नवजात शिशुओं के मामले में प्रभारी डॉक्टर पारस पाटेरिया के ऊपर भी जल्दी कार्रवाई की जाए और उन्हें वहां से हटाया जाए; हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने पहले ही इस मामले की तीन सदस्यीय समिति द्वारा जांच कर ली है और डॉक्टर पारस पाटेरिया का प्रभार हटाते हुए डॉक्टर विनोद दहायत को दे दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि SNCU वार्ड में बहुत क्रिटिकल बच्चे आते हैं जिनका वजन कम होता है, किसी को सांस लेने में तकलीफ होती है या किसी का इन्फेक्शन की वजह से भर्ती किया जाता है; और यदि मानक की बात करें तो 10% बच्चों की मौत स्वाभाविक माना जाता है। जिले में पिछले 6 माह में 1088 बच्चे भर्ती हुए थे, इनमें से 80 बच्चों की मौत हुई है जो लगभग 8% है; अस्पताल प्रबंधन का यह भी कहना है कि यह दुख का विषय है कि बच्चों की मौत हुई है, लेकिन इन सब के बावजूद भी जिले भर से यहां क्रिटिकल बच्चे आते हैं, ऐसे में बहुत से बच्चे सरवाइव नहीं कर पाते हैं।
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