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PKPrashant KumarFollow18 Jul 2024, 06:34 am
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टोंक से चुराए 31 लाख के ट्रक-जिम सामग्री मंडाना पुलिस ने बरामद

Kota, Rajasthan:मंडाना पुलिस की तत्परता: टोंक से चोरी हुआ 31 लाख का ट्रक व जिम सामग्री बरामद ​16 लाख के जिम उपकरणों से भरा ट्रक गोपालपुरा पुलिया के पास लावारिस मिला, दत्तावास पुलिस के किया सुपुर्द ​कोटा। कोटा ग्रामीण के मंडाना थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए टोंक जिले के दत्तावास थाना क्षेत्र से चोरी हुआ आईसर ट्रक (RJ 14 GK 3907) बरामद कर लिया है। ट्रक की बॉडी में 16 लाख रुपए मूल्य का जिम का सामान भरा हुआ था। 15 लाख रुपए कीमत के ट्रक सहित कुल 31 लाख रुपए का मशरूका जब्त किया गया है。 ​कोटा ग्रामीण पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर ने बताया कि 21 अगस्त की सुबह पुलिस कंट्रोल रूम से टोंक के दत्तावास से अज्ञात व्यक्ति द्वारा ट्रक चुरा ले जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही मंडाना पुलिस टीम ने गोपालपुरा टोल प्लाजा पर सख्त नाकाबंदी की और आसपास के होटल-ढाबों पर तलाश शुरू की。 ​सघन जांच के दौरान उक्त आईसर ट्रक फाटाखेड़ा पुलिया सर्विस रोड पर सड़क किनारे खड़ा मिल गया। मंडाना पुलिस ने बरामद ट्रक व जिम का सामान दत्तावास थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया है, जहां दर्ज प्रकरण संख्या 142/2026 धारा 303(2) बीएनएस में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है。
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रावणा राजपूत समाज ने सावन-राखी उत्सव में लहरिया परिधान में झलकाईं राजस्थान संस्कृति

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर रावणा राजपूत समाज ने मनाया सावन-राखी उत्सव, महिलाओं ने लहरिया पहनकर दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रावणा राजपूत समाज की ओर से शनिवार को रेलवे सामुदायिक भवन में सावन एवं राखी उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज की महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। महिलाएं पारंपरिक लहरिया परिधानों में सज-धजकर पहुंचीं, जिससे कार्यक्रम में राजस्थानी संस्कृति की झलक देखने को मिली。 उत्सव के दौरान रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिलाओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में समाज के बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और बालिकाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और उत्सव का आनंद लिया。 आयोजन में रावणा राजपूत समाज के राजेंद्र सिंह, राखी, मनोज कुमार परिहार, किशोर सिंह, वंदना सांखला, देवी सिंह कुड़ी सहित समाज के कई सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान सावन और राखी के पर्व को आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाया गया。
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CAG ने राजस्थान में सड़क सुरक्षा दावों की पोल खोली चार साल बिना योजना मौतें बढ़ीं

Jaipur, Rajasthan:काशीराम चौधरी CAG ने खोली सड़क सुरक्षा दावों की पोल, 4 साल तक बिना कार्य योजना काम करते रहे परिवहन विभाग के अफसर! - भारी-भरकम वित्तीय प्रावधान, रिजल्ट सिफर, घट नहीं, हर साल बढ़ रहे हैं सड़क हादसे, CAG की वर्ष 2026 की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा - वर्ष 2018 की तुलना में 1470 मौतें बढ़ी, 2.35 लाख ड्राइविंग लाइसेंस बिना ट्रैक पर ट्रायल के ही बांट दिए, केवल 7 परसेंट सड़कों की ही थ्री लेवल ऑडिट की गई जयपुर। राजस्थान में सड़क दुर्घटनाएं कम करने की दिशा में केवल कागजी योजनाएं बनाई जा रही हैं। यूं तो लुभावने नारों और भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है, लेकिन सड़कों पर असमय जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में कमी आने के बजाय आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी कैग की वर्ष 2026 की नवीनतम ऑडिट रिपोर्ट राजस्थान में सड़क सुरक्षा के प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या है रिपोर्ट में खास, देखिए, जी मीडिया की यह विशेष न्यूज रिपोर्ट- महा लेखापरीक्षक, राजस्थान की रिपोर्ट 'राजस्थान में सड़क सुरक्षा प्रणाली' ने राज्य सरकार के सड़क सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। रिपोर्ट में साफ है कि नीतिगत निर्णयों में चार-चार साल की भारी देरी, सड़क सुरक्षा ऑडिट में घोर लापरवाही, जानलेवा 'ब्लैक स्पॉट्स' के सुधार में उदासीनता और आधुनिक तकनीकों व ऑटोमेटेड सिस्टम को लागू न करने की वजह से राज्य में सड़क हादसे बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में हादसों में होने वाली मौतें सरकारी आंकड़ों में लगातार बढ़ती जा रही हैं। राजस्थान सरकार ने मार्च 2017 में 'राज्य सड़क सुरक्षा नीति' को स्वीकृति दी थी, जिसके तहत वर्ष 2018-2020 के लिए एक कार्य योजना तैयार की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2015 को आधार वर्ष मानकर 2020 के अंत तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में कुल 50 प्रतिशत की कमी लाना था। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि यह लक्ष्य केवल सरकारी दस्तावेजों तक ही सीमित रहा। वर्ष 2018 में मौतों को घटाकर 8,933 पर सीमित करने का लक्ष्य था, लेकिन वास्तविक मौतें 10,320 यानी 16% अधिक हुईं। वर्ष 2020 तक मौतों की संख्या को 5254 पर लाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इस वर्ष 9250 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जो लक्ष्य से 76% अधिक थी। इसके बाद अगले 4 साल तक सड़क सुरक्षा की व्यवस्था बिना किसी ठोस कार्य योजना के चलती रही। वर्ष 2020 में पिछली कार्य योजना समाप्त होने के बाद नई योजना बनाने में सरकार को 4 साल का लंबा वक्त लग गया। धरातल पर योजना नहीं, बढ़ती गई मौतें - जुलाई 2024 में 'सड़क सुरक्षा कार्य योजना 2024-33' बनाई गई - वर्ष 2021 से 2024 के दौरान विभाग की कोई ठोस योजना संचालित नहीं - तब वर्ष 2020 के ही लक्ष्य को आधार माना गया - इस दौरान निर्धारित आंकड़ों से 91% से 124% तक अधिक मौतें हुईं - वर्ष 2023 में 11762 और वर्ष 2024 में 11790 लोगों की जान गई हादसों में इस तरह बढ़ी मौतों की संख्या - वर्ष 2018 में 8933 अधिकतम मौतें होनी चाहिए थी, वास्तविकता में 10,320 मौतें हुई - निर्धारित सीमा से 1387 यानी 16% मौतें अधिक हुई - वर्ष 2019 में 7356 मौतें होनी चाहिए थी, लेकिन कुल 10,563 मौतें हुई - निर्धारित सीमा से 44 प्रतिशत यानी 3207 मौतें हुई - वर्ष 2020 में 5254 मौतों की सीमा रखी, 9250 की मौतें हुई - निर्धारित सीमा से 3996 यानी 76% अधिक मौतें हुई - वर्ष 2022 में 5254 मौतों की सीमा के विपरीत 11104 मौतें - निर्धारित सीमा से 5850 यानी 111% अधिक मौतें हुई - 2024 में 5254 मौतों की सीमा के विपरीत 11790 मौतें हुई - यानी निर्धारित सीमा से 6536 यानी 124% अधिक मौतें हुई सड़क सुरक्षा ऑडिट से भाग रहा PWD सड़क निर्माण के समय 'सड़क सुरक्षा ऑडिट' दुर्घटनाओं को रोकने का प्राथमिक कदम माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति और इंडियन रोड कांग्रेस के निर्देशानुसार 10 करोड़ से अधिक लागत वाली तथा 5 किलोमीटर से अधिक लंबी हर सड़क का त्रि-स्तरीय ऑडिट करना जरूरी है। सड़क की डिजाइन, निर्माण और परिचालन स्तर पर ऑडिट की जानी चाहिए। सीएजी द्वारा पीडब्ल्यूडी की 425 सड़कों के किए गए ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके तहत कुल 425 प्रमुख सड़कों में से केवल 32 सड़कों यानी 7.53% सड़कों का ही त्रि-स्तरीय सुरक्षा ऑडिट किया गया। 146 सड़कों पर वर्ष 2018-19 से 2024-25 के दौरान किसी भी स्तर का सड़क सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया। पीडब्ल्यूडी ने सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए किसी भी निष्पक्ष थर्ड पार्टी एजेंसी को एम्पैनल तक नहीं किया। सड़कों के दोषपूर्ण डिजाइन, गड्ढों, तीखे घुमावों और अपर्याप्त रखरखाव की वजह से वर्ष 2019 से 2024 के दौरान 11685 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 5184 लोगों की अकाल मृत्यु हो गई। ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने पर जोर नहीं जिस 500 मीटर के सड़क खंड पर 3 साल में 5 गंभीर हादसे या 10 मौतें हों, उसे 'ब्लैक स्पॉट' माना जाता है। सीएजी रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2019 से 2024 के दौरान चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर कुल 41857 दुर्घटनाएं हुईं और 28306 लोगों की जान गई। पीडब्लडी द्वारा चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स में से वर्ष 2023 में 61.08% तथा वर्ष 2024 में 63.16% ब्लैक स्पॉट्स में सुधार कार्य नहीं किए गए। यानी ये ब्लैक स्पॉट इसी तरह हादसों का कारण बने रहे। वर्ष 2019 में चिन्हित 7 ब्लैक स्पॉट्स तो ऐसे थे जो वर्ष 2024 तक नहीं सुधारे गए। इन 7 स्थानों पर 5 वर्षों में 156 हादसे हुए और 110 लोगों की मौत हो गई। एनएच-3/44 पर केवल 4 किमी के फासले में 3 स्थाई ब्लैक स्पॉट्स पाए गए। रोडमैप-2020 में तकनीक-आधारित 'ब्लैक स्पॉट प्रबंधन प्रणाली' बनाने का संकल्प लिया गया था, लेकिन 4 साल बाद भी यह सिस्टम विकसित नहीं किया जा सका। बिना टेस्ट और बिना ट्रैक के बांटे जा रहे ड्राइविंग लाइसेंस - सड़क हादसों में 79 प्रतिशत मौतें चालकों की गलती के कारण होती हैं - योग्य चालकों को लाइसेंस मिले, इसके लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक बनाने थे - सितंबर 2017 में सड़क सुरक्षा कोष से 37 कार्यालयों के लिए 39 करोड़ मंजूर किए - लेकिन 7 साल बाद भी केवल 13 ट्रैक ही सुचारू हालत में - वर्ष 2022-23 में राज्य में 683699 लाइसेंस जारी हुए - इनमें से सबसे अधिक 34.45% (235557 लाइसेंस) 44 परिवहन कार्यालयों में बने - जहां ड्राइविंग टेस्ट ट्रायल के लिए कम से कम एक ट्रैक उपलब्ध नहीं था - ऑटोमेटेड ट्रैक पर सख्त जांच के कारण फेल का आंकड़ा अधिक - जबकि बिना ट्रैक वाले कार्यालयों में फेल होने की दर मात्र 0.32% थी - 24 परिवहन कार्यालय ऐसे, जहां 100% आवेदकों को ड्राइविंग टेस्ट में पास किया गया रॉन्ग-साइड ड्राइविंग और 'जुगाड़' वाहनों से अधिक हादसे वर्ष 2019 से 2024 के दौरान गलत दिशा में वाहन चलाने से 6266 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 2,794 मौतें दर्ज की गईं। पुलिस विभाग ने 15.22 लाख चालान काटे, लेकिन परिवहन विभाग ने इस अवधि में एक भी चालान नहीं काटा। इसके अलावा अवैध 'जुगाड़' वाहनों के खिलाफ 3.72 लाख चालान जारी हुए। नियमानुसार इन्हें जब्त कर कबाड़ किया जाना चाहिए था, लेकिन परिवहन विभाग ने 7 वर्षों में सिर्फ 65 वाहनों को ही कबाड़ किया। हाईवेज पर हर 50 किमी पर इंटरसेप्टर और हाईवे पेट्रोल वाहन तैनात होने थे। 563 इंटरसेप्टर और हाईवे पेट्रोलिंग वाहनों की आवश्यकता थी, लेकिन केवल 74 इंटरसेप्टर और 63 हाईवे पेट्रोलिंग वाहन ही चालू मिले, जो औसतन 381 से 447 किमी की अत्यधिक दूरी पर तैनात थे। भारी वाहनों के पंजीयन में स्पीड गवर्नर की जांच भी नहीं की जा रही है। सीएजी दल ने 4 जिलों दौसा, टोंक, सिरोही, उदयपुर में वाहनों के पंजीयन की जांच की। 23053 व्यावसायिक वाहनों को स्पीड गवर्नर लगाए बिना ही रजिस्टर कर दिया गया। सड़क हादसों में कमी लाने और ई-चालान की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए परिवहन विभाग ने एक और प्रयोग किया। जयपुर-भीलवाड़ा हाईवे पर 9.58 करोड़ की लागत से स्वचालित नंबर प्लेट पहचान वाले ANPR कैमरे लगाने की योजना तैयार की। लेकिन 6 साल बाद भी यह योजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी। सीएजी ने यह मुख्य सिफारिशें की - थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य हो: सभी नई व मौजूदा सड़कों का तृतीय-पक्ष एजेंसीों से त्रि-स्तरीय सुरक्षा ऑडिट कराकर ब्लैक स्पॉट्स को निश्चित समय-सीमा में सुधारा जाए। - स्वचालित ट्रैक की बहाली: सभी परिवहन कार्यालयों में पारदर्शी ड्राइविंग टेस्ट के लिए ऑटोमेटेड ट्रैकों की स्थापना व संचालन तुरंत शुरू हो। - इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन (ANPR/ITMS): ओवरस्पीडिंग व यातायात उल्लंघन रोकने के लिए अधिक जोखिम वाले मार्गों पर ANPR कैमरे व ई-चालान व्यवस्था लागू हो। - कठोर दंडात्मक कार्रवाई: रॉन्ग साइड ड्राइविंग, अवैध जुगाड़ वाहनों और ओवरस्पीडिंग पर भारी जुर्माना लगाया जाए, ऐसे वाहनों को सीधे जब्त किया जाए - बहु विभागीय समन्वय: सड़क निर्माण एजेंसियों, पुलिस, परिवहन विभाग और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच मजबूत समन्वय स्थापित किया जाए।
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सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फरक्का संधि की 30 साल समीक्षा की मांग की

Noida, Uttar Pradesh:सुधाकर सिंह (आरजेडी सांसद) प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संधि की समीक्षा की मांग की। फरक्का बैराज सम्बन्धी भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा समझौते (1996) की दिसम्बर 2026 में होने वाली 30-वर्षीय समीक्षा के सन्दर्भ में बिहार राज्य के जल, नौवहन एवं आर्थिक हितों की रक्षा हेतु आवश्यक एवं तत्काल कदम उठाने के सम्बन्ध में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को लिखा पत्र। 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई 30 साल की गंगा जल बंटवारा संधि यह फरक्का बैराज (पश्चिम बंगाल) पर शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) के दौरान गंगा के पानी के बंटवारे को तय करती है संजय कुमार झा (JDU, राज्यसभा सांसद) मौजूदा स्वरूप में संधि का नवीकरण न हो। बिहार और गंगा बेसिन राज्यों की 2050 तक की जरूरत का वैज्ञानिक आकलन हो। बिहार को करीब 2000 क्यूसेक अतिरिक्त पानी चाहिए। संधि से बिहार को बाढ़ सूखे की दोहरी मार पड़ी है। CM का विदेश मंत्री से मुलाकात भारत सरकार (MEA) तकनीकी स्तर पर चर्चा जारी है। Joint Rivers Commission के तहत बातचीत हो रही है। औपचारिक नवीकरण वार्ता अभी शुरू नहीं हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी, जेडी(यू) के संजय कुमार झा तीनों ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस बैठक में संजय झा ने फरक्का जल संधि का मुद्दा उठाया
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जयपुर में 600 बेड अस्पताल; चरण एक में 300 बेड, महेश्वरी मेडिकल संस्थान बनेगा

Jaipur, Rajasthan:जयपुर में माहेश्वरी समाज की ओर से 600 बेड के अत्याधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का शिलान्यास किया गया। मानसरोवर के गणपतपुरा में करीब 22 हजार वर्गगज क्षेत्र में माहेश्वरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर विकसित किया जाएगा। बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित मुख्य समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और श्री सीमेंट लिमिटेड के चेयरमैन हरिमोहन बांगड़ विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। परियोजना के पहले चरण में 300 बेड और करीब 5 लाख वर्गफीट में निर्माण होगा। इसके बाद इसे 600 बेड के अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। संस्थान में आमजन को किफायती दरों पर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके साथ मेडिकल शिक्षा और रिसर्च को भी बढ़ावा दिया जाएगा। परिसर में करीब 2 हजार वर्गगज में भगवान महेश का मंदिर भी बनाया जाएगा। समारोह में माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष उमेश सोनी, परियोजना अध्यक्ष बजरंग बाहेती सहित समाज के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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पुलिस थाना परिसर में बाल वाहिनी चालकों की आंखों की जाँच शिविर आयोजित

Sikar, Rajasthan:ज़िला - सीकर विधानसभा - लक्ष्मणगढ़ सीकर लोकेशन - लक्ष्मणगढ़ पुलिस थाना परिसर में बाल वाहिनी चालकों की आई जाँच शिविर का आयोजन हुआ एंकर इन्ट्रो- लक्ष्मणगढ़ थाना परिसर कै सभागार में जिला कलेक्टर आशीष मोदी व पुलिस अधीक्षक प्रवीण नुनावत के निर्देशानुसार लक्ष्मणगढ़ जिला चिकित्सालय की ओर बाल वाहिनी चालकों की आंखों की जाँच के लिए शिविर का आयोजन किया गया। जिला चिकित्सालय की टीम के पवन कुमार ने बताया कि सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत जिला कलेक्टर आशीष मोदी व जिला पुलिस अधीक्षक प्रवीण नुनावत ने निर्देशानुसार आंखों की जाँच शिविर का आयोजन किया गया है। आयोजित शिविर में लक्ष्मणगढ़ उपखंड क्षेत्र में संचालित शिक्षण संस्थानों में बाल वाहिनी के चालकों की आंखों की जाँच की जा रही है। निशुल्क चश्मे व दवाईयां दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि थाना परिसर में आज केवल एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें बाल वाहिनी के सभी चालकों ने जाँच करवाकर दवाईयां दी।
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ETIO ने पंजाब में सड़क निर्माण पर विपक्ष का दुष्प्रचार रोकने का दावा किया

Amritsar, Punjab:ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਹਰਭਜਨ ਸਿੰਘ ਈਟੀਓ ਨੇ ਅੱਜ ਪ੍ਰੈਸ ਕਾਨਫਰੰਸ ਕਰਕੇ ਵਿਰੋਧੀ ਧਿਰਾਂ ’ਤੇ ਤਿੱਖੇ ਨਿਸ਼ਾਨੇ ਸਾਧੇ। ਈਟੀਓ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਸੂਬੇ ਵਿੱਚ ਕਰੀਬ 45 ਹਜ਼ਾਰ ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਸੜਕਾਂ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੋਸ਼ ਲਗਾਇਆ ਕਿ ਵਿਰੋਧੀ ਧਿਰਾਂ ਲਗਾਤਾਰ ਸੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਆ ’ਤੇ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਕੰਮਾਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਗਲਤ ਪ੍ਰਚਾਰ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਬੀਤੇ ਦਿਨ ਬਠਿੰਡਾ ਵਿੱਚ ਬਿਕਰਮ ਸਿੰਘ ਮਜੀਠੀਆ ਅਤੇ ਹਰਸਿਮਰਤ ਕੌਰ ਬਾਦਲ ਵੱਲੋਂ ਸੋਸ਼ਲ ਮੀਡੀਆ ’ਤੇ ਇੱਕ ਵੀਡੀਓ ਸਾਂਝੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਸੜਕ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਸਵਾਲ ਚੁੱਕੇ ਗਏ ਸਨ。 ਇਸ ’ਤੇ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਦਿੰਦਿਆਂ ਹਰਭਜਨ ਸਿੰਘ ਈਟੀਓ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਦਾਅਵਾ ਸਰਾਸਰ ਗਲਤ ਹੈ ਅਤੇ ਵਿਰੋਧੀ ਧਿਰਾਂ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਬਦਨਾਮ ਕਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਸੜਕਾਂ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮੁਰੰਮਤ ਅਤੇ ਮੇਨਟੇਨੈਂਸ ਦਾ ਕੰਮ ਵੀ ਕਰਵਾਉਂਦੀ ਹੈ。 ਇਸੇ ਦੌਰਾਨ ਈਟੀਓ ਨੇ ਬਿਕਰਮ ਮਜੀਠੀਆ ਨੂੰ ਖੁੱਲ੍ਹਾ ਚੈਲੇਂਜ ਦਿੱਤਾ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਉਹ ਖੁਦ ਕੱਲ੍ਹ ਸਵੇਰੇ 11 ਵਜੇ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਜਾਣਗੇ ਅਤੇ ਮਜੀਠੀਆ ਵੀ ਉੱਥੇ ਪਹੁੰਚਣ। ਜੇਕਰ ਮਜੀਠੀਆ ਸੜਕ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਉਖਾੜ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਉਹ ਮੌਕੇ ’ਤੇ ਹੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕਰਨਗੇ। ਪਰ ਜੇਕਰ ਸੜਕ ਨਹੀਂ ਉਖੜਦੀ ਤਾਂ ਮਜੀਠੀਆ ਅਤੇ ਹਰਸਿਮਰਤ ਕੌਰ ਬਾਦਲ ਨੂੰ ਮੁਆਫ਼ੀ ਮੰਗਣੀ ਪਵੇਗੀ। ਈਟੀਓ ਨੇ ਇਹ ਵੀ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਰਕਾਰੀ ਕੰਮਾਂ ਸਬੰਧੀ ਝੂਠੀਆਂ ਵੀਡੀਓਜ਼ ਪਾਉਣ ਜਾਂ ਸਰਕਾਰੀ ਕੰਮ ਵਿੱਚ ਵਿਘਨ ਪਾਉਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਨ ਵਾਲਿਆਂ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ। ਉੱਥੇ ਹੀ ਮੁੱਖ ਮੰਤਰੀ ਭਗਵੰਤ ਮਾਨ ਦੀ ਪਤਨੀ ’ਤੇ ਲੱਗ ਰਹੇ ਦੋਸ਼ਾਂ ਬਾਰੇ ਈਟੀਓ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਝੂਠੀਆਂ ਖ਼ਬਰਾਂ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੋਸ਼ ਲਗਾਇਆ ਕਿ ਚੋਣਾਂ ਨੇੜੇ ਆਉਂਦਿਆਂ ਸਿਆਸੀ ਪਾਰਟੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਬਦਨਾਮ ਕਰਨ ਲਈ ਅਜਿਹੀਆਂ ਖ਼ਬਰਾਂ ਫੈਲਾਈਆਂ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵੱਲੋਂ 15 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਮੰਗਿਆ ਗਿਆ ਹੈ, ਉਹ ਇਸ ਬਾਰੇ ਆਪਣਾ ਜਵਾਬ ਦੇਣਗੇ。
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शेखावाटी विश्वविद्यालय ने 10 असिस्टेंट प्रोफेसरों को शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया

Jhunjhunu, Rajasthan:खेतड़ी, झुंझुनूं शेखावाटी यूनिवर्सिटी की नई शोध पर्यवेक्षकों की सूची जारी खेतड़ी के डॉ. जयप्रकाश गर्ग बने पीएचडी गाइड एबीएसटी विषय में शोधार्थियों का करेंगे मार्गदर्शन झुंझुनूं जिले के चार महाविद्यालयों से भी नियुक्तियां सीकर-नीमकाथाना से छह असिस्टेंट प्रोफेसर बने शोध पर्यवेक्षक नई नियुक्तियों से शेखावाटी में शोध गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा खेतड़ी क्षेत्र के शोधार्थियों को स्थानीय स्तर पर मिलेगा मार्गदर्शन पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय सीकर की शोध शाखा ने विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत 10 असिस्टेंट प्रोफेसरों को नवीन शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इनमें राजकीय महाविद्यालय खेतड़ी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जयप्रकाश गर्ग को एबीएसटी विषय में शोध पर्यवेक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। उनकी नियुक्ति से खेतड़ी और आसपास के क्षेत्र के एबीएसटी विषय में पीएचडी करने के इच्छुक शोधार्थियों को स्थानीय स्तर पर अकादमिक मार्गदर्शन उपलब्ध हो सकेगा। विश्वविद्यालय की शोध शाखा की ओर से जारी आदेशों के अनुसरण में सक्षम स्तर से स्वीकृति के बाद नवीन शोध पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है। विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में शोध गतिविधियों को विस्तार देने और शोधार्थियों को विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राजकीय महाविद्यालय खेतड़ी में कार्यरत डॉ. जयप्रकाश गर्ग को एबीएसटी विषय में शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। अब इस विषय में पीएचडी करने वाले शोधार्थी निर्धारित विश्वविद्यालयीय प्रक्रिया के तहत उनके निर्देशन में अपना शोध कार्य कर सकेंगे। डॉ. गर्ग शिक्षण एवं अकादमिक क्षेत्र में अपनी पहचान रखते हैं। इसके साथ ही वे जादू कला के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और बहुमुखी प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं। शोध पर्यवेक्षक के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने से खेतड़ी के साथ आसपास के क्षेत्र के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने की संभावना बढ़ी है। शोध पर्यवेक्षक के रूप में डॉ. गर्ग की भूमिका केवल शोध विषय के चयन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शोधार्थियों को शोध योजना, शोध पद्धति, शोध सामग्री के विश्लेषण, शोध पत्र एवं थीसिस तैयार करने सहित शोध की पूरी प्रक्रिया में अकादमिक मार्गदर्शन देना भी इसका हिस्सा होगा। शेखावाटी विश्वविद्यालय की नवीन सूची में झुंझुनूं जिले के चार राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों को शोध पर्यवेक्षक बनाया गया है। राजकीय कन्या महाविद्यालय झुंझुनूं के डॉ. रोहिताश्व कुमार को इतिहास विषय में शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। इसी प्रकार एसएनएमटी राजकीय कन्या महाविद्यालय, झुंझुनूं के डॉ. राजवीर सिंह को इतिहास तथा एसआरआरएम राजकीय महाविद्यालय, झुंझुनूं के डॉ. वेदप्रकाश को राजनीति विज्ञान विषय में शोध पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। झुंझुनूं जिले में इन नियुक्तियों के साथ अब इतिहास, राजनीति विज्ञान और एबीएसटी जैसे विषयों में पीएचडी शोधार्थियों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे जिले के महाविद्यालयों में शोध संस्कृति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आपको बता दें कि विश्वविद्यालय की सूची में सीकर और नीमकाथाना क्षेत्र के महाविद्यालयों से छह असिस्टेंट प्रोफेसरों को शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। एसके राजकीय कन्या महाविद्यालय, सीकर से डॉ. बबिता और डॉ. डिंपल कुमारी को समाजशास्त्र, डॉ. नरेश चेजारा को भौतिक विज्ञान तथा डॉ. मैना को संस्कृत विषय में शोध पर्यवेक्षक बनाया गया है। वहीं राजकीय कला महाविद्यालय, सीकर के डॉ. पाणिनि नीमर को भूगोल तथा एसएनकेपी राजकीय महाविद्यालय, नीमकाथाना के डॉ. अनूप कुमार को वनस्पति विज्ञान विषय में शोध पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।
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यूथ कांग्रेस ने पंचायत टास्क फोर्स से निकाय चुनावों में युवा प्रत्याशी उतारने की तैयारी शुरू की

Didwana, Rajasthan:एंकर- आगामी निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में यूथ कांग्रेस की ओर से ‘पंचायत टास्क फोर्स’ अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत कांग्रेस के लिए लंबे समय से सक्रिय, समर्पित और निष्ठावान युवाओं को चिन्हित कर उन्हें चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है। कुचामन-डीडवाना जिले के कुचामन सिटी में यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय संयोजक एवं अभियान के जिला प्रभारी आसिफ पंवार ने पोस्टर विमोचन के साथ अभियान का आगाज किया। इस दौरान कांग्रेस नगर अध्यक्ष सुतेंद्र सारस्वत, पूर्व सभापति आसिफ खान, सिकंदर खींची, दुर्गाराम चौधरी, नासिर रंगरेज सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। मीडिया से बातचीत में आसिफ पंवार ने बताया कि ‘पंचायत टास्क फोर्स’ अभियान के तहत क्षेत्रवार और वार्डवार सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें ऐसे युवाओं को चिन्हित किया जा रहा है, जो लंबे समय से कांग्रेस के लिए काम कर रहे हैं, संगठन के प्रति समर्पित हैं और कांग्रेस की रीति-नीति को जनता के बीच ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिन्हित किए जाने वाले युवाओं को यूथ कांग्रेस की ओर से पूरा समर्थन दिया जाएगा और प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक युवा निकाय चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी बनकर चुनाव मैदान में उतरें। पंवार ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं का कांग्रेस को समर्थन मिल रहा है और इस बार निकाय चुनाव में युवा शक्ति को ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया जाएगा। वहीं कांग्रेस के नगर अध्यक्ष सुतेंद्र सारस्वत ने कहा कि कांग्रेस इस बार पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों के साथ-साथ कुचामन नगरपालिका परिषद में कांग्रेस बोर्ड के करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों को चुनावी मुद्दा बनाकर जनता के बीच जा रही है। उन्होंने कहा कि कुचामन में करीब 38 साल तक भाजपा का बोर्ड रहने के बाद पिछले निकाय चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी और इस कार्यकाल में ऐसे विकास कार्य हुए, जो भाजपा अपने लंबे कार्यकाल में नहीं कर पाई। सारस्वत ने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य कुचामन सिटी सहित डीडवाना-कुचामन जिले के सभी आठ निकायों में भारी बहुमत से जीत हासिल करना है। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत के बाद शुरुआती 100 दिनों में बुनियादी सुविधाओं से वंचित वार्डों में विकास कार्य करवाना कांग्रेस की प्राथमिकता रहेगी। नगर अध्यक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने हाल के समय में केवल श्रेय की राजनीति की है और कांग्रेस बोर्ड एवं कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों का फीता काटने के अलावा कोई नया काम नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी और एक बार फिर कुचामन नगरपालिका परिषद सहित जिले के सभी निकायों में जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी।
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अस्पताल में मां के साथ छेड़छाड़: CCTV फुटेज से दोषियों पर कार्रवाई

Ajmer, Rajasthan:अजमेर के जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में बीती रात पीआईसीयू इंस्टेंटिव केयर में भर्ती बच्चे की माँ के साथ अस्पताल कर्मी और चिकित्सक पर अश्लिल हरकतें कर छेड़छाड़ का मामला तुल पकड़ता जा रहा है... बीती रात हुई इस घटना की जानकारी मिलते ही किशनगढ़ निवासी पीड़िता महिला के परिजन बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे और खासा हंगामा खड़ा हो गया .. अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर कोतवाली थाना पुलिस का जाब्ता मौके पर तैनात कर दिया गया.. पीड़िता के पक्ष में आये लोगों ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के आधार पर घटना के दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाही की मांग की.. मामाले में अस्पताल कर्मी और चिकित्सक पर आरोपों लगाते हुए किशनगढ़ से आए पीड़ित परिवार के मित्र और निवर्तमान पार्षद किशन गुर्जर ने बताया कि आरोपियों ने महिला के साथ अश्लिल हरकतें भी की
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