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आस्था से जुड़ी आर्थिकी: गोरखनाथ मंदिर पूर्वांचल का धार्मिक पर्यटन केंद्र बना
NTNagendra Tripathi
Feb 22, 2026 14:35:53
Gorakhpur, Uttar Pradesh
एंकर:
गोरखपुर में आस्था अब आर्थिकी को मजबूती दे रही है। काशी और अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं का रुख अब गोरखनाथ मंदिर की ओर भी बढ़ रहा है। योगी सरकार की धार्मिक पर्यटन नीति के तहत गोरखपुर सहित पूर्वांचल के कई मंदिरों को नई पहचान मिली है। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं।
पर्यटन विकास का सीधा संबंध रोजगार और आर्थिक मजबूती से होता है और जब यह विकास आस्था से जुड़ा हो तो इसकी रफ्तार और तेज हो जाती है। प्रदेश सरकार द्वारा विकसित आध्यात्मिक टूरिज्म सर्किट ने गोरखपुर को अयोध्या और वाराणसी से सीधे जोड़ दिया है। बेहतर फोरलेन सड़कों और हवाई सेवाओं के कारण अब श्रद्धालु एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन कर रहे हैं।
गोरखनाथ मंदिर में उमड़ रही भीड़ इसका प्रमाण है। काशी विश्वनाथ मंदिर और राम मंदिर अयोध्या में दर्शन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु महायोगी गोरखनाथ की तपस्थली गोरखनाथ मंदिर भी पहुंच रहे हैं।
पर्यटन विभाग के उपनिदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव के अनुसार, कोविड काल के बाद गोरखपुर में धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच जनपद में 96 लाख 76 हजार 354 पर्यटक पहुंचे, जिनमें सर्वाधिक संख्या गोरखनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की रही।
धार्मिक पर्यटन के इस उछाल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा संबल मिला है। होटल, ट्रांसपोर्ट, फूल-माला, प्रसाद, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि दर्ज की गई है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।
जनपद के कई प्रमुख मंदिरों को उनकी ख्याति के अनुरूप नई पहचान मिली है। इनमें तरकुलहा देवी मंदिर, बुढ़िया माई मंदिर, मुंजेश्वरनाथ मंदिर, मानसरोवर मंदिर, सूर्यकुंड धाम और दुर्गा मंदिर बांसगांव प्रमुख हैं।
इन स्थलों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के बाद अब यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। तरकुलहा देवी मंदिर, जो अमर बलिदानी बंधू सिंह की कुलदेवी के रूप में प्रतिष्ठित है, वहां सैकड़ों दुकानें सजती हैं। बुढ़िया माई मंदिर परिसर और मुख्य सड़क पर भी खाने-पीने व पूजन सामग्री की दर्जनों रेहड़ियां स्थानीय लोगों के आय का स्थायी स्रोत बन चुकी हैं।
मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत विधानसभा स्तर तक पर्यटन विस्तार के प्रयासों से गांव-जवार तक धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं विकसित हुई हैं। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं और स्थानीय युवाओं व व्यापारियों को नए रोजगार के अवसर।
स्पष्ट है कि आस्था के सम्मान के साथ जुड़ा यह पर्यटन मॉडल गोरखपुर की आर्थिकी को नई गति दे रहा है और पूर्वांचल को धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।
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