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SC में ममता बनर्जी का आरोप- बंगाल को निशाना, नाम हटाने की राजनीति पर हंगामा
ASArvind Singh
Feb 04, 2026 19:01:28
Noida, Uttar Pradesh
हमे कहीं इंसाफ़ नहीं मिल रहा, बंगाल को किया जा रहा टार्गेट, SC में क्या क्या बोली ममता
देश के सवैंधानिक इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि जब किसी सीटिंग सीएम ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी।पश्चिम बंगाल SIR मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ममता बनर्जी को कई बार टोका। पर ममता बार बार उन्हें सुनने का आग्रह करती रही। हिस्सों में ही सही, पर करीब 20 मिनट उन्होंने अपनी बात रखी। उनका अंदाज भी वही चिर परिचित आरोप लगाने वाला था。
कोर्ट का काम शुरू होने से पहले पहुंची ममता
सुप्रीम कोर्ट में मामलों की सुनवाई साढ़े दस बजे से शुरु होती है लेकिन सुनवाई शुरू होने से 20 मिनट पहले ही ममता बनर्जी सफेद रंग की स्कोर्पियो गाड़ी में कोर्ट पहुंच गई। वो सफेद पोशाक पहने और गले में काला स्कार्फ डाले हुए थी। करीब सवा दस बजे वो कोर्ट नंबर 1 की विजिटिंग गैलरी में सबसे पीछे की सीट पर जाकर बैठ गई। जैसे ही उनका मामला सुनवाई पर आया, वो आगे आई।
ममता ने कोर्ट से बार बार आग्रह किया
सबसे पहले उनके वकील श्याम दीवान ने SIR प्रकिया में गड़बड़ी का हवाला देते हुए दलील रखी।इसी बीच ममता ने कोर्ट से हाथ जोड़कर अपनी बात रखने की इजाज़त मांगी। ममता ने कहा कि मैं अपनी ओर से कुछ चीज़े साफ करना साफ करना चाहती हूँ। मैं उसी राज्य से आती हूं।
बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हल्के अंदाज में कहा कि इसमे कोई संदेह नहीं है।(आप इसी राज्य से है)
हाथ जोड़कर अपनी बात शुरू की
ममता बनर्जी ने अपनी बात बेहद विन्रमता के साथ हाथ जोड़कर शुरू की। उन्होंने कहा कि मैं आपकी उदारता के लिए आभारी हूं। मैं चीफ जस्टिस, जस्टिस बागची और जस्टिस पंचोली की आभारी हूँ。
'इंसाफ दम तोड़ रहा'
ममता बनर्जी ने कहा कि हमारे वकील शुरुआत से केस लड़ रहे है। लेकिन हमे कहीं इंसाफ नहीं मिल रहा है। इंसाफ दम तोड़ रहा है। मैंने कई बार चुनाव आयोग को लिखा है। उन्हें 6 पत्र लिखें गए है।पर कोई जवाब नहीं आया है। मै कोई बहुत खास नहीं हूं। मैं बेहद सामान्य परिवार से आती हूँ। लेकिन मैं अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हूँ।
कोर्ट का आश्वासन
ममता के तेवर को देखते हुए चीफ जस्टिस ने उन्हें टोका कि आपके पास पैरवी करने के लिए पहले ही श्याम दीवान और कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ वकील है।
हम पूरी कोशिश करेंगे कि समाधान निकले और किसी वाजिब मतदाता का नाम वोटर लिस्ट न छूटे।पर ममता ने उनसे आग्रह किया कहा कि मुझे सिर्फ 10 मिनट बोलने दीजिए。
सुनवाई के दौरान जब चुनाव आयोग के वकील ने उन्हें टोका तो ममता ने हाथ Joड़कर कहा कि मुझे बोलने दीजिए。
SIR के ज़रिए नाम काटे जा रहे
ममता ने कोर्ट से कहा कि मैं आपको कुछ फोटोग्राफ दिखाना चाहती हूँ। ये मेरी तस्वीरें नहीं हैं, बल्कि बड़े अख़बारों में छपी हैं।हकीकत ये है कि SIR की प्रक्रिया सिर्फ नाम हटाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है।अगर कोई बेटी शादी के बाद ससुराल चली जाती है, तो उससे सवाल किया जा रहा है कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है। ऐसी कई बेटियाँ हैं जो शादी के बाद ससुराल गईं और उनका नाम लिस्ट से हटा दिया गया। गरीब कहीं और शिफ्ट हो जाते हैं,तो उनका नाम भी हटा दिया जा रहा है。
सिर्फ बंगाल ही क्यों, असम क्यों नहीं
ममता बनर्जी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले सिर्फ बंगाल को ही निशाना बनाया जा रहा है।
ममता ने कहा कि बंगाल के लोग बहुत खुश थे कि इस कोर्ट ने आधार कार्ड को एक सबूत के रूप में मानने का आदेश दिया, लेकिन उन्होंने इसकी इजाज़त नहीं दी।दूसरे राज्यों में डोमिसाइल सर्टिफिकेट, फैमिली रजिस्टर कार्ड, सरकारी आवास कार्ड, हेल्थ कार्ड जैसे दस्तावेज़ मान्य हैं।
लेकिन बंगाल में नहीं ! जो काम दो साल में होता है, उसे दो महीने में किया जा रहा है।
जब त्योहारों का मौसम है, जब फसल कटाई का समय है, जब लोग शहर में रहने की हालत में नहीं हैं, तब नोटिस देकर लोगों को परेशान किया जा रहा है।100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।बीएलओ ने चुनाव आयोग की परेशानियों के कारण पत्र लिखते-लिखते जान दे दी।कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं。
माइक्रो ऑब्ज़र्वर की नियुक्ति पर सवाल
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि 8,000 माइक्रो ऑब्ज़र्वर नियुक्त किए गए हैं, जो बीएलओ के अधिकार को दरकिनार कर नाम हटाने का काम कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग व्हाट्सऐप के ज़रिये अनौपचारिक निर्देश दे रहा है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ये इलेक्शन कमीशन नहीं बल्कि व्हाट्सएप्प कमीशन है।
चुनाव आयोग के वकील की दलील
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार ने SIR के काम के लिए पर्याप्त ग्रुप-बी अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराया, जबकि चुनाव आयोग ने कई बार याद दिलाया था। इसी वजह से चुनाव आयोग को माइक्रो ऑब्ज़र्वर नियुक्त करने पड़े।
कोर्ट ने नोटिस जारी किया
सुनवाई के अंत में बेंच ने ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और उनसे अगले सोमवार तक जवाब मांगा।माइक्रो-ऑब्ज़र्वर के मसले पर कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार SIR के काम के लिए उपलब्ध कराए जा सकने वाले ग्रुप-बी अधिकारियों की सूची दे देती है, तो माइक्रो-ऑब्ज़र्वरों को हटाया जा सकता है।
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