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माघ मेला 2026: भगवान श्रीकृष्ण को भी वादी ठहराते हुए सीधे परिवाद दर्ज
DKDeepesh Kumar
Feb 16, 2026 16:18:19
Noida, Uttar Pradesh
प्रेस विज्ञप्तिमाघ मेला–2026 प्रकरण: पर्याप्त साक्ष्य मानते हुए एसीजेएम कोर्ट ने सीधे परिवाद दर्ज किया
प्रयागराज | दिनांक: 16 फरवरी 2026
माघ मेला–2026 के दौरान 18 जनवरी 2026 (मौनी अमावस्या) को घटित घटना के संबंध में दायर प्रार्थना-पत्र पर माननीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कक्ष संख्या–5, प्रयागराज द्वारा महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है।
न्यायालय ने उपलब्ध चिकित्सीय साक्ष्य, वादी एवं प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की उपस्थिति तथा अभिलेखों को प्रथमदृष्टया पर्याप्त मानते हुए प्रकरण को सीधे परिवाद (Complaint Case) के रूप में पंजीकृत कर लिया है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि जब घायल पक्ष, मेडिकल रिपोर्ट एवं गवाह उपलब्ध हैं, तो पृथक पुलिस विवेचना की आवश्यकता नहीं है और प्रकरण का परीक्षण सीधे न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
भगवान को भी वादी के रूप में अभिहित
इस प्रकरण की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि मुकदमे में धार्मिक आस्था एवं देवस्थान से जुड़े अधिकारों को दृष्टिगत रखते हुए भगवान श्रीकृष्ण (विग्रह स्वरूप) को भी वादी के रूप में अभिहित किया गया है, जिनका प्रतिनिधित्व विधिसम्मत रूप से अधिकृत पक्ष द्वारा किया जा रहा है। भारतीय विधि में स्थापित सिद्धांत के अनुसार देवता को एक न्यायिक व्यक्तित्व (Juristic Person) माना गया है, अतः उनके अधिकारों एवं धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण हेतु यह वाद प्रस्तुत किया गया है।
आरोपों का सार
वादी पक्ष ने आरोप लगाया है कि—
18 जनवरी 2026 को आयोजित धार्मिक यात्रा को त्रिवेणी मार्ग पर अवैध रूप से रोका गया।
सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध कर श्रद्धालुओं के आवागमन में बाधा उत्पन्न की गई।
शांतिपूर्ण अनुरोध के बावजूद हिंसक हमला किया गया।
अगली कार्यवाही
न्यायालय ने वादी के बयान दर्ज करने हेतु अगली तिथि निर्धारित कर दी है। प्रकरण अब न्यायालयीय परीक्षण के रूप में आगे बढ़ेगा।
माघ मेला–2026 की घटना: कैसे रोकी गई धार्मिक यात्रा, कैसे हुआ कथित हमला, और कैसे बना बड़ा सार्वजनिक जाम
18 जनवरी 2026, मौनी अमावस्या — माघ मेला–2026 का प्रमुख स्नान पर्व। इसी दिन श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट द्वारा संगम क्षेत्र में “श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा” का आयोजन किया गया था। आयोजन से पूर्व शिविर सेक्टर–6, संगम लोवर मार्ग, प्रयागराज में धार्मिक अनुष्ठान एवं महायज्ञ शांतिपूर्वक संचालित हो रहे थे。
यात्रा का प्रारम्भ
यात्रा विधिवत रूप से शिविर से प्रारम्भ हुई। यात्रा में साधु-संत, श्रद्धालु एवं सहयोगी शामिल थे। यात्रा का मार्ग त्रिवेणी क्षेत्र की ओर निर्धारित था। प्रारम्भिक चरण में यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रही थी।
कथित अवरोध और सार्वजनिक जाम
वादी पक्ष के अनुसार जैसे ही यात्रा त्रिवेणी मार्ग स्थित एक शिविर के समीप पहुँची, वहाँ पहले से मौजूद समूह द्वारा सार्वजनिक मार्ग पर अवरोध उत्पन्न कर दिया गया।
आरोप है कि—
मुख्य सार्वजनिक मार्ग पर जानबूझकर अवैध रूप से जाम लगाया गया।
बैरिकेडिंग एवं भीड़ खड़ी कर रास्ता पूर्णतः अवरुद्ध कर दिया गया।
संगम की ओर जाने वाले सामान्य श्रद्धालुओं का आवागमन भी बाधित हुआ।
मौनी अमावस्या जैसे राष्ट्रीय-धार्मिक महत्व के दिन इस अवरोध के कारण हजारों श्रद्धालुओं को मार्ग परिवर्तन करना पड़ा और कई स्थानों पर भीड़ का दबाव बढ़ गया। वादी पक्ष का दावा है कि यह अवरोध केवल यात्रा रोकने तक सीमित नहीं था, बल्कि इससे व्यापक सार्वजनिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई।
शांतिपूर्ण अनुरोध और उसके बाद की स्थिति
वादी एवं उनके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से मार्ग देने का शांतिपूर्ण अनुरोध किया गया। आरोप है कि इसी दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।
वादी के अनुसार—
विपक्षी पक्ष के कुछ व्यक्तियों ने आक्रामक रुख अपनाया।
धक्का-मुक्की शुरू हुई जो बाद में मारपीट में बदल गई।
वादी का गला दबाने का प्रयास किया गया।
ऊँचे मंच/स्थान से कठोर वस्तु फेंकी गई, जिससे सिर पर चोट लगी।
कई सहयोगियों को भी चोटें आईं।
चिकित्सीय परीक्षण
घटना के उपरांत वादी एवं एक अन्य घायल का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। मेडिकल रिपोर्ट में शरीर के विभिन्न भागों पर चोटें अंकित होने का उल्लेख किया गया है।
वादी पक्ष का कहना है कि घटना की सूचना संबंधित थाने को दी गई थी, परंतु अभियोग पंजीकृत नहीं किया गया, जिसके बाद न्यायालय की शरण ली गई।
न्यायालय की कार्यवाही
माननीय अपर मुख्य न्यायिक न्यायिक मजिस्ट्रेट, कक्ष संख्या–5, प्रयागराज ने उपलब्ध अभिलेख, मेडिकल साक्ष्य तथा वादी एवं गवाहों की उपस्थिति को पर्याप्त प्रथमदृष्टया साक्ष्य मानते हुए प्रकरण को सीधे परिवाद (Complaint Case) के रूप में पंजीकृत कर लिया है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि जब घायल पक्ष, गवाह और चिकित्सीय साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो पृथक पुलिस विवेचना की आवश्यकता नहीं है। प्रकरण अब सीधे न्यायालयीय परीक्षण के रूप में आगे बढ़ेगा।
भगवान को भी वादी बनाया गया
इस मुकदमे की एक विशेषता यह है कि धार्मिक अधिकारों के संरक्षण हेतु भगवान श्रीकृष्ण (विग्रह स्वरूप) को भी वादी के रूप में अभिहित किया गया है, जिनका प्रतिनिधित्व विधिसम्मत रूप से किया जा रहा है।
अब अगली तिथि पर वादी के बयान दर्ज होंगे और मामला न्यायालय में विधि अनुसार आगे बढ़ेगा।
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