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जयपुर में मंदिर परिसर की संपत्ति खरीद से सामाजिक संतुलन पर उठे सवाल
MIMohammad Imran
Jan 22, 2026 11:16:29
Jaipur, Rajasthan
प्यार और भाईचारे की बातें तो सब करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर जयपुर में मकान कौन खरीद रहा है? इसी सवाल ने हाल के दिनों में राजधानी जयपुर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चारदीवारी क्षेत्र में एक मंदिर परिसर से जुड़ी संपत्ति के बिकने की चर्चा सामने आते ही मामला सिर्फ एक प्रॉपर्टी डील तक सीमित नहीं रहा। बताया जा रहा है कि यह संपत्ति मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों द्वारा खरीदी गई, हालांकि उल्लेखनीय बात यह रही कि मुस्लिम समाज के ही कई लोग इसके विरोध में सामने आए। उनका कहना था—“सद्भावना बनी रहनी चाहिए, ऐसे सौदे समाज में गलत संदेश देते हैं।” सामाजिक संतुलन बनाम बाजार की ताकत यह मामला अब सामाजिक संतुलन, आस्था और शहर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ गया है। जयपुर, जिसे परंपरागत रूप से ‘चौथी काशी’ कहा जाता है, वहां हर गली-मोहल्ले में मंदिरों की मौजूदगी रही है। ऐसे में धार्मिक स्थलों से जुड़ी संपत्तियों के सौदों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ना स्वाभाविक है। विधायक बालमुकुंद आचार्य की चिंता इसी कड़ी में हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा—“जयपुर को छोटी काशी कहा जाता है। चारदीवारी में शायद ही कोई गली हो जहां मंदिर न हो। किसी से कोई आपत्ति नहीं है, सब प्रेम से रहें, लेकिन अगर ऊंची दरों पर मकान खरीदकर कोई विशेष समुदाय एकतरफा कब्जा करता चला जाए, तो यह न समाज के लिए ठीक है और न देश के लिए।” उन्होंने स्पष्ट किया—“मुद्दा धर्म का नहीं, जनसांख्यिकीय संतुलन का है। ऐसा न हो कि बहुसंख्यक अल्पसंख्यक बन जाए।” सरकार के कदम को बताया सही दिशा विधायक ने भजनलाल सरकार के प्रस्तावित कानून को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया। उनका कहना है कि यह फैसला किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द, आस्था की मर्यादा और जयपुर की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है। “संतानी हैं, सब प्रेम से रहें, लेकिन भावनाओं की भी इज्जत होनी चाहिए,” — बालमुकुंद आचार्य सरकार का सख्त रुख इसी पृष्ठभूमि में भजनलाल सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में “राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इम्मूवेबल प्रोपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेन्ट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल–2026” के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। सरकार इसे मौजूदा विधानसभा सत्र में पेश करने की तैयारी में है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह कानून उन क्षेत्रों में लागू किया जा सकेगा जहां • दंगों का इतिहास रहा हो • सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हो • या जनसंख्या असंतुलन की आशंका हो सरकार को ऐसे इलाकों को “अशांत क्षेत्र (डिस्टर्ब्ड एरिया)” घोषित करने का अधिकार मिलेगा। विधेयक की प्रमुख विशेषताएं • दंगा या तनाव प्रभावित क्षेत्रों को डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित करने का अधिकार • ऐसे इलाकों में अचल संपत्ति की खरीद–फरोख्त पर सख्त निगरानी • किरायेदारों को जबरन बेदखली से संरक्षण • दबाव या विवाद की स्थिति में हुए संपत्ति सौदों पर रोक • कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति पर विशेष जोर सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि संवेदनशील इलाकों में शांति, पारदर्शिता और सौहार्द बनाए रखना है। विपक्ष और समाज की चिंता वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने आशंका जताई है कि कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए संवाद, विश्वास और निष्पक्षता उतनी ही जरूरी है जितना कानून। आगे की राह विधानसभा में बिल पेश होते ही इस पर तीखी बहस तय मानी जा रही है। सरकार इसे शांति और संतुलन के लिए जरूरी कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसके व्यावहारिक प्रभावों पर सवाल उठा सकता है। अब देखना यह होगा कि यह कानून सामाजिक संतुलन की रक्षा करता है या राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बनता है। फिलहाल, पूरे राजस्थान की निगाहें विधानसभा और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं。
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