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ED की टीम ने MVKC एप से करोड़ों की धोखाधड़ी की जांच शुरू कर दी
ACAshish Chauhan
Jan 02, 2026 09:09:04
Jaipur, Rajasthan
डिजिटल करेंसी में करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में डिजी मुद्रा कंपनी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. ईडी की जांच में सामने आया कि निवेशकों को ज्यादा रिटर्न का लालच देकर करोड़ों की धोखाधड़ी की. अब प्रवर्तन निदेशालय की जांच बढ़ेगी तो आने वाले दिनों में और चौकाने वाले खुलासे हो सकते हैं.. आखिरकार डीजी करेंसी के नाम पर कैसे लूटा डीजी मुद्रा कनेक्ट कंपनी ने, देखें इस रिपोर्ट में! माई विक्ट्री क्लब एप से खेल हुआ- यदि आप डिजिटल करेंसी में निवेश कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए, क्योंकि डीजी मुद्रा के नाम पर ज्यादा रिटर्न का दावा करने वाली कंपनी निवेशकों से धोखाधड़ी कर रही है. ईडी जांच में सामने आया कि डिजी मुद्रा कनेक्ट कंपनी ने निवेशकों को ज्यादा रिटर्न का दावा कर करोड़ों की धोखाधड़ी की. ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि माई विक्ट्री क्लब एप से निवेशकों को लालच देकर करोड़ों की लूट मचाई. लोगों से करोड़ो का निवेश करवाया, लेकिन रिटर्न नहीं मिला. प्रवर्तन निदेशालय की जांच में अभी और चौकाने वाले खुलासे हो सकते है, क्योंकि ईडी जांच जारी है. ईडी ने हाल ही में कंपनी के निदेशक रवि जैन, प्रकाश जैन की ठिकानों पर रेड मारी थी. जिसमें 11 लाख रुपए नकद ईडी ने जप्त किए. ईडी के मुताबिक 15 करोड़ के गड़बड़ी का मामला सामने आया था, जिसके बाद जांच की गई. एमपी, राजस्थान, हरियाणा में एफआईआर- प्रवर्तन निदेशालय ने जयपुर और किशनगढ़ में 7 ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया था. यह कार्रवाई मेसर्स डिजी मुद्रा कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों रवि जैन और प्रकाश चंद जैन द्वारा करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के संबंध में की गई, जिसमें आरोपियों ने बहुत अधिक रिटर्न का वादा करके अपनी धोखाधड़ी वाली योजनाओं में निवेश करने के लिए लुभाया और प्रेरित किया. ईडी ने मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित STF और राजस्थान, हरियाणा, उड़ीसा और महाराष्ट्र के कई जिलों के पुलिस स्टेशनों द्वारा प्रकाश चंद जैन, रवि जैन और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की. हजारों लोगों को लूटा- ईडी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने आपस में मिलीभगत करके हजारों लोगों को अपने प्लेटफॉर्म एप 'माई विक्ट्री क्लब (एमवीसी)' में निवेश करने का लालच देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की थी. यह प्लेटफॉर्म कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग में शामिल था. निवेशकों को आश्वस्त करने के लिए उन्होंने उनके मोबाइल में 'एमवीसी' नाम का एक मोबाइल ऐप भी इंस्टॉल किया और उनकी आईडी बनाई, जिसमें निवेश की गई सभी रकम और रोजाना लाभ निवेशकों को उनकी ID से जुड़े वर्चुअल माध्यम से दिखाए जाते थे, हालांकी निवेशकों को कोई वास्तविक निकासी या रिटर्न नहीं दिया गया था. ईडी की जांच फिलहाल जारी है, जिसमें कई और खुलासे हो सकते है.
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