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खापों के आशीर्वाद से अभिमन्यु राव की नशा मुक्ति यात्रा हरिद्वार से सोनीपत-झज्जर तक

Jhajjar, Haryana:प्रदेश भर की खाप पंचायतों का आशीर्वाद लेकर अभिमन्यु राव भारत निर्माण युवा दल के बैनर तले हरिद्वार से नशा मुक्ति अभियान की कांवड़ उठाकर जनजागरण यात्रा पर निकले हैं। इसी कड़ी में यात्रा के झज्जर जिले के गांव डिघल पहुंचने पर अहलावत खाप-27 के नेतृत्व में युवाओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। प्रदेश भर की खाप पंचायतों के कोऑर्डिनेटर इंदर सिंह हुड्डा विशेष रूप से मौजूद रहे। वहीं अहलावत खाप के प्रधान जय सिंह सहित खाप के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने अभिमन्यु राव की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे युवाओं के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया। अभिमन्यु राव ने कहा कि आज समाज के सामने नशा एक बड़ी चुनौती बन चुका है। गांवों में बड़ी संख्या में युवा सूखे नशे की चपेट में आ रहे हैं और चिंता की बात यह है कि हर साल इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस गांव की आबादी करीब तीन हजार है, वहां भी पांच दर्जन से अधिक युवा सूखे नशे का सेवन कर रहे हैं। अगर समय रहते समाज ने इस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाए तो आने वाली पीढ़ियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा, “हम फसल और नसल को बचाने के लिए जनजागरण की राह पर निकले हैं। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। संस्कृति और संस्कार बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा।” अभिमन्यु राव ने बताया कि हरिद्वार से शुरू हुई यह यात्रा सोनीपत, रोहतक, झज्जर और महेंद्रगढ़ क्षेत्र से होकर आगे बढ़ेगी। यात्रा का समापन बागेश्वर धाम में भगवान शंकर का जलाभिषेक करने के बाद किया जाएगा। अहलावत खाप-27 के प्रधान जय सिंह और खाप पंचायतों के कोऑर्डिनेटर इंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि अभिमन्यु राव ने जिस उद्देश्य को लेकर यह अभियान शुरू किया है, उसका निश्चित रूप से युवाओं को फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि खाप पंचायतें हमेशा सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं और नशे के खिलाफ इस मुहिम में भी समाज को एकजुट होकर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेल, रोजगार और समाज सेवा जैसे सकारात्मक कार्यों में लगाएं। साथ ही अभिभावकों और ग्रामीणों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और नशे की शुरुआत में ही उसे रोकने के लिए मिलकर प्रयास करें।
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कादम्बिनी की दूसरी मौत की बरसी पर भी न्याय का इंतजार जारी

Ranaghat, West Bengal:দ্বিতীয় মৃত্যুবার্ষিকীতেও অধরা বিচার, কাদম্বিনীর স্মরণে নীরব কল্যাণী মেডিক্যাল কলেজ কল্যাণী: কাদম্বিনীর মৃত্যুর দ্বিতীয় মৃত্যুবার্ষিকীতেও বিচার অধরা। তবে বিচার ব্যবস্থার প্রতি পূর্ণ আস্থা রেখে এখনও সুবিচারের আশায় দিন গুনছেন তাঁর সহপাঠী, শিক্ষক-অধ্যাপক থেকে শুরু করে কলেজের সকলেই। তাঁদের দাবি, এই ঘটনার সঙ্গে প্রত্যক্ষ বা পরোক্ষভাবে যারা জড়িত, তাদের প্রত্যেকের কঠোরতম শাস্তি নিশ্চিত করতে হবে। কাদম্বিনীর দ্বিতীয় মৃত্যুবার্ষিকী উপলক্ষে রবিবার কল্যাণী কলেজ অব মেডিসিন অ্যান্ড জেএনএম হাসপাতালে শ্রদ্ধা নিবেদনের আয়োজন করা হয়। তাঁর স্মৃতিতে দুই মিনিট নীরবতা পালন করেন কলেজের শিক্ষক, অধ্যাপক, সহপাঠী এবং হাসপাতালের চিকিৎসক ও কর্মীরা। এদিন কাদম্বিনীর আত্মার শান্তি কামনা করে শ্রদ্ধা জানানো হয়। কলেজের প্রিন্সিপাল মনিদ্বীপ পাল বলেন, “কাদম্বিনী আমাদের কলেজেরই মেয়ে। আমি ওকে পড়িয়েছি। ওর প্রতি যে বেদনা, তা ভাষায় প্রকাশ করা সম্ভব নয়। অত্যন্ত ভালো ছাত্রী ছিল, পড়াশোনায় ভালো এবং খুবই শান্ত স্বভাবের। আমরা সাধারণ মানুষ মনেপ্রাণে চাই, ও যেন সত্যিকারের বিচার পায়। এই ঘটনার সঙ্গে যারা প্রত্যক্ষ বা পরোক্ষভাবে জড়িত, প্রত্যেকের কঠোরতম শাস্তি হওয়া প্রয়োজন। আইন ব্যবস্থার প্রতি আমাদের সম্পূর্ণ আস্থা রয়েছে। আমরা আশাবাদী, আইন ব্যবস্থা কাদম্বিনীকে সুবিচার দেবে।” তিনি আরও বলেন, “আজকের দিনটা অত্যন্ত দুঃখের। এই কলেজেই আমি পাঁচ বছর কাটিয়েছি। এমন একটি ঘটনা ঘটে যাবে, তা স্বপ্নেও ভাবিনি। আমরা চাই এই ঘটনায় দৃষ্টান্তমূলক শাস্তি হোক。” কাদম্বিনীর সহপাঠী চিকিৎসক সোমনাথ বন্দ্যোপাধ্যায়ও তাঁর স্মৃতিচারণ করেন। তাঁর কথায়, কাদম্বিনী অত্যন্ত শান্ত স্বভাবের মেয়ে ছিলেন। তাঁর মৃত্যু এখনও সহপাঠীদের কাছে গভীর বেদনার। বিচার না পাওয়া পর্যন্ত এই লড়াই থামবে না বলেও জানান তাঁরা। এদিন কাদম্বিনীর মৃত্যুবার্ষিকীতে কলেজ ও hospital চত্বরে শোকের আবহ তৈরি হয়। সহপাঠী, শিক্ষক, অধ্যাপক এবং চিকিৎসকরা তাঁর স্মৃতির প্রতি শ্রদ্ধা জানান। তাঁদের একটাই দাবি—ঘটনার প্রকৃত সত্য সামনে আসুক এবং দোষীদের দৃষ্টান্তমূলক শাস্তি হোক。
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बारुईपुर बायपास से टॉलीगंज तक बीजेपी की तिरंगा यात्रा, लगभग 2000 समर्थक

Kolkata, West Bengal:바이پس থেকে টালিগঞ্জ, প্রায় ২০০০ মানুষের অংশগ্রহণে বিজেপির বর্ণাঢ্য তিরঙ্গা যাত্রা বারুইপুর: দেশাত্মবোধ ও জাতীয় ঐক্যের বার্তা সামনে রেখে যাদবপুর সাংগঠনিক জেলা বিজেপির উদ্যোগে আয়োজন করা হল বর্ণাঢ্য তিরঙ্গা যাত্রা। রবিবার বারুইপুর বাইপাস থেকে 시작 হওয়া এই যাত্রা যাদবপুর হয়ে টালিগঞ্জ পর্যন্ত যায়। বিজেপির দাবি, কর্মসূচিতে অংশ নেন প্রায় ২০০০ মানুষ। জাতীয় পতাকা হাতে নিয়ে মিছিলে পা মেলান বিজেপির নেতা, কর্মী ও সমর্থকরা। বিভিন্ন দেশাত্মবোধক স্লোগান দিতে দিয়ে এগিয়ে চলে তিরঙ্গা যাত্রা। যাত্রাপথের مختلف এলাকায় রাস্তার দু’পাশে বহু মানুষকে দাঁড়িয়ে কর্মসূচি দেখতে দেখা যায়। এই কর্মসূচিতে উপস্থিত ছিলেন যাদবপুর সাংগঠনিক জেলা বিজেপির সভাপতি মনোরঞ্জন জোরদার-সহ দলের একাধিক নেতা ও কর্মী। তিরঙ্গা যাত্রাকে ঘিরে দলীয় কর্মী-সমর্থকদের মধ্যে ব্যাপক উৎসাহ ও উদ্দীপনা লক্ষ্য করা যায়。 বিজেপি নেতৃত্বের বক্তব্য, জাতীয় পতাকার মর্যাদা, দেশাত্মবোধ এবং জাতীয় ঐক্যের বার্তা সাধারণ মানুষের কাছে আরও বেশি করে পৌঁছে দেওয়ার লক্ষ্যেই এই কর্মসূচির আয়োজন করা হয়েছে。 চাইলে এর ইংরেজি হেডলাইন এবং ১ লাইনের হ্যাশট্যাগও তৈরি করে দিতে পারি।
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मानसून में चमोली: बद्रीनाथ-हेमकुंड साहिब यात्रा बिना रुकावट, रिकॉर्ड श्रद्धालु

Karnaprayag, Uttarakhand:एंकर उत्तराखंड में मानसूनी बारिश के बावजूद चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड साहिब और भगवान बद्री विशाल की यात्रा पूरी तरह सुचारू रूप से चल रही है। जिला प्रशासन और पुलिस की बेहतरीन व्यवस्थाओं के चलते इस बार बरसाती मौसम भी श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं दी है । एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष भारी बारिश के बावजूद यात्रा मार्ग एक भी दिन के लिए बाधित नहीं हुआ है, जिसके चलते श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान यात्रा करना अक्सर चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन चमोली जिले में इस बार तस्वीरें बिल्कुल जुदा हैं। चमोली पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी का ही नतीजा है कि लगातार हो रही बारिश के बीच भी बद्रीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा बिना किसी रुकावट के जारी है। मार्ग में किसी भी संभावित भूस्खलन (Landslide) या मलबे की स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील स्थानों पर भारी मशीनरी और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को तैनात रखा गया है। यही वजह है कि इस मानसूनी सीजन में एक भी दिन यातायात ठप नहीं हुआ। एसपी चमोली के मुताबिक, पिछले सालों की तुलना में इस बार आज की तारीख तक रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु दोनों पवित्र धामों में माथा टेक चुके हैं। केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि मानसूनी सीजन में प्राकृतिक सुंदरता से सराबोर 'फूलों की घाटी' (Valley of Flowers) का दीदार करने के लिए भी देश-विदेश से पर्यटक लगातार चमोली पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। संवेदनशील रास्तों और नदी-नालों के आसपास स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के जवानों को अलर्ट मोड पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके। बाईट / सुरजीत पंवार एसपी चमोली अगर आप भी बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब या फिर फूलों की घाटी जाने का प्लान बना रहे हैं, तो सुरक्षा के तमाम इंतज़ामों के बीच यात्रा पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम का मिज़ाज देखते हुए और जारी की जा रही गाइडलाइंस का पालन करते हुए ही अपनी यात्रा पूरी करें।
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समस्तीपुर के बंद ओवरब्रिज से मंत्री-सांसद का काफिला गुजरा, जनता सवाल में

Samastipur, Bihar:समस्तीपुर में बंद लाइफलाइन ओवरब्रिज पर निरीक्षण के बाद दो मंत्री और एक सांसद का काफिला बेरोकटोक गुजरा, आम जनता के लिए बंद पुल से गुजरने पर उठे सवाल। समस्तीपुर शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली रेलवे लाइन के ऊपर बना ओवरब्रिज इन दिनों शहरवासियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बना हुआ है। मरम्मत के लिए बंद इस पुल पर काम अब अंतिम दौर में है और प्रशासन का दावा है कि 80 से 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। यानी 15 अगस्त की तय समय सीमा से पहले ही पुल आम लोगों के लिए खोला जा सकता है। लेकिन इसी बंद पुल पर जब मंत्री और सांसद के काफिले को गुजरने की इजाज़त मिली, तो सवाल भी खड़े हुए... क्या आम आदमी के लिए बंद पुल खास लोगों के लिए खुल सकता है? बताते चले कि समस्तीपुर की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस रेलवे ओवरब्रिज पर इन दिनों मजदूर दिन-रात मरम्मत के काम में जुटे हैं। पुल को मरम्मत के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने 15 अगस्त तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन काम की रफ्तार को देखते हुए अब इसे निर्धारित समय से पहले ही आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी है। पुल के पुराने 17 एक्सपेंशन जॉइंट बदलने का काम पूरा हो चुका है। लंबे समय से खराब पड़े इन जॉइंट की वजह से पुल की लचक प्रभावित हो रही थी। इसके अलावा क्षतिग्रस्त कंक्रीट की मरम्मत, नई बिटुमिनस सड़क, रेलिंग, पैरापेट और पानी निकासी व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है। फिलहाल सड़क की फिनिशिंग, मार्किंग, सफाई और सुरक्षा निरीक्षण का काम अंतिम चरण में है। पुल खोलने से पहले रेलवे और संबंधित इंजीनियरिंग एजेंसी संयुक्त रूप से निरीक्षण करेंगी। लेकिन जब तक पुल आम लोगों के लिए बंद है, तब तक शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। शहर के दो हिस्सों को जोड़ने वाले इस एकमात्र महत्वपूर्ण पुल के बंद होने से वाहन चालकों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। रोजाना स्कूल, कॉलेज, बाजार और दफ्तर जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। करीब 56 साल पुराने इस ओवरब्रिज पर पहली बार 17 एक्सपेंशन जॉइंट बदले गए हैं। एजेंसी के अभियंताओं का दावा है कि जॉइंट बदलने के बाद पुल की मजबूती बढ़ी है और भविष्य में भारी वाहनों के आवागमन में भी परेशानी नहीं होगी। सदर एसडीओ राकेश कुमार के मुताबिक पुल का फिनिशिंग कार्य चल रहा है और निर्धारित समय से पहले ही इसे चालू किए जाने की उम्मीद है। संभावना है कि अगले दो-तीन दिनों में रेलवे के इंजीनियर और संबंधित एजेंसी पुल का अंतिम निरीक्षण कर सकते हैं। मगर इसी बंद पुल को लेकर एक तस्वीर ने सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री डॉ. शैलेंद्र कुमार मरम्मत कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे। मंत्री के साथ बिहार सरकार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी और समस्तीपुर सांसद शांभवी चौधरी का काफिला भी मौजूद था। मंत्री और नेताओं के काफिले को पुल से होकर गुजरने की अनुमति दी गई। काफिला पुल पार कर गया... और इसके बाद पुल को फिर आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया। यानी जिस पुल पर आम लोगों की आवाजाही मरम्मत के नाम पर बंद है... उसी पुल से खास लोगों का काफिला गुजर गया। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नियम सबके लिए एक जैसे हैं? हालांकि पथ निर्माण मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इसे 15 अगस्त तक चालू करना है।
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Bhopal, Madhya Pradesh:
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Dalai Lama का Leh के Devachan Campus दौरा: शिक्षा और शांति के लिए आशीर्वाद

Aram Pora, Ganderbal, Leh, Ladakh | 9 August 2026: The Mahabodhi International Meditation Centre (MIMC), Leh, was blessed with the historic and deeply auspicious visit of His Holiness the 14th Dalai Lama to its Devachan Campus today. His Holiness’s visit holds special significance as it comes 32 years after his first historic visit to the campus in 1994, when he inaugurated and blessed the Devachan Campus at a time when Mahabodhi was still largely a dream and a vision for the future. Today, His Holiness returned to the same campus, blessing its continued journey of education, healthcare, meditation, humanitarian service, environmental responsibility, world peace, and universal compassion. The programme began with a reverential welcome to His Holiness by Ven. Bhikkhu Sanghasena, Founder and Spiritual Director of MIMC, along with monks, nuns, students, staff, volunteers, and members of the Mahabodhi family. As a mark of deep reverence and gratitude, Ven. Bhikkhu Sanghasena offered traditional offerings to His Holiness, followed by his address to His Holiness and the gathering. He recalled the historic beginning of the Devachan Campus and expressed profound gratitude for His Holiness’s continued blessings and guidance over the past more than three decades. Ven. Bhikkhu Sanghasena highlighted the guiding principles of Mahabodhi, particularly “Meditation in Action and Compassion in Action,” inspired by His Holiness’s teachings on compassion, wisdom, non-violence, universal responsibility, and the fundamental understanding that we are all one human family.
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खोखसाहा नहर पर जुगाड़ पुल से बच्चों के स्कूल जाना जोखिम भरा

Saharsa, Bihar:खबर सहरसा से है जहाँ सौरबाजार प्रखंड क्षेत्र के चंदौर पश्चिमी पंचायत के भगवान पुर स्थित खोखसाहा गांव में नहर पर बना जुगाड़ पुल बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहा है. नहर पर बिजली के खम्भे से बने जुगाड़ पुल से आवागमन करना लोगों की मजबूरी बन गई है. ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए आवाजाही का एक मात्र सहारा बिजली के खम्भे से बना यह पुल है. बच्चे और शिक्षक जान जोखिम में डालकर पुल पार करके स्कूल जाने पर मजबूर हैं. लोगों के बीच डर बना रहता है कि पुल पार करते समय बच्चों के साथ कोई बड़ी घटना ना हो जाए. इसको लेकर ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक आईपी गुप्ता और जिला प्रशासन से जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है. यहाँ पुल बन जाने से छात्रों को नजदीक के NPS विद्यालय खोखसाहा जाने में सुविधाएं मिलेंगी और आसपास के गांव के लोगों को भी शहर आने-जाने में काफी सहूलियत होगी.
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बिलासपुर बस अड्डे पर पानी की कमी से यात्रियों को भारी परेशानी

Bilaspur, Chhattisgarh:स्लग- पानी की किल्लत से जूझ रहा बिलासपुर का बस अड्डा, पिछले चार दिनों से पीने के पानी व शौचालय में पानी की कमी से परेशान है राहगीर तो रोजाना काफी संख्या में बस अड्डा आते हैं यात्री, पानी की समस्या को दूर करने की लोगों ने विभाग से करी अपील तो अड्डा प्रभारी ने संबंधित कार्यवाही का दिया आश्वासन. गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश का केंद्र बिंदू बिलासपुर शहर के बस अड्डे पर रोजाना शिमला, धर्मशाला व कुल्लू, मनाली जाने वाले काफी संख्या में यात्री बसों का इंतजार करते हैं, ऐसे में पीने के लिए स्वच्छ जल की उपलब्धता ना होने से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं बसों के चालकों व परिचालकों को भी पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। दूसरी ओर बस अड्डे पर यात्रियों के लिए बनाई गई शौचालय सुविधा भी पानी की कमी के चलते प्रभावित है, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पानी की किल्लत को दूर करने के लिए शौचालय संचालक को अन्य स्थानों से पानी लाना पड़ रहा है या फिर टैंकर के सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चार दिनों से बस अड्डा बिलासपुर में पानी की कमी देखने को मिल रही है जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने जलशक्ति विभाग व बस अड्डा प्रबंधन से पानी की उचित व्यवस्था करने की अपील की है। वहीं इस बावत बस अड्डा प्रभारी फिरोज खान का कहना है कि पानी की समस्या को लेकर जलशक्ति विभाग के अधिकारियों को सूचित किया गया था और चैकिंग के दौरान पता चला कि पाइप जाम होने की वजह से पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है, जिसके समाधान के लिए पाइप बदलवाने व डिस्पेंसरी के पास से पानी का कनेक्शन लेने की बात विभाग द्वारा कही गयी है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को बता दिया गया है और जल्द ही कोई उचित समाधान निकाला जाएगा ताकि पानी की कमी से निपटा जा सके。
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सहरसा के स्कूल में तीन कमरों में 350 बच्चे, बरामदा पढ़ाई— दावों पर सवाल

Saharsa, Bihar:एंकर - एक तरफ सरकार बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा को लेकर बड़े - बड़े दावे करती है, लेकिन दूसरी तरफ सरकार के इन दावों की हकीकत कुछ और ही है. इसकी पड़ताल के लिए जब zee मिडिया की टीम सहरसा मुख्यालय के महावीर चौक स्थित मध्य विद्यालय पश्चिम स्कूल reached तो वहाँ के हालात कुछ और ही थे. तीन कमरों में चल रहे इस स्कूल में करीब साढ़े तीन सौ बच्चे नामांकित है, लेकिन बच्चों को बैठने तक के लिए जगह नहीं हैं, एक कमरे में दो - दो ब्लैक बोर्ड और दो - दो कक्षाओं की एक साथ पढ़ाई कराई जाती है एक कमरे में दो शिक्षक एक दूसरे के विपरीत बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं कौन क्या पढा रहा है यह बच्चो के समझ मे नही आ रहा, वहीं छोटे छोटे नौनिहाल बच्चे इस भीषण गर्मी में स्कूल के बरामदे पर बैठकर पढ़ने को विवश हैं. स्कूल में भवन की कमी रहने से एक कमरे में चौथी और पांचवी क्लास को पढ़ाया जाता है जबकि छठी और सातवीं क्लास के बच्चों को भी इसी तरह एक ही कमरे में दो दो ब्लैक बोर्ड लगाकर पढ़ाया जाता है.ऐसे में बच्चे क्या शिक्षा ग्रहण करते होंगे यह आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं, ऐसा नहीं है कि स्कूल प्रसासन द्वारा विभाग को अवगत नहीं कराया गया है, पिछले कई सालों से स्कूल प्रसासन विभाग को लिखित सूचना दी है लेकिन विभागीय अधिकारियों के कान पर जूं तक रेंग रही है. स्कूल का जायजा लिया जी मिडिया संवाददाता विशाल ने.
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आशोक कीर्तनियार के हस्तक्षेप से 30 मिनट में भू-अधिकार लौटे, पूर्व सैनिक को जमीन मिली

Kolkata, West Bengal:রাজ্যের খাদ্যমন্ত্রী অশোক কীর্তনীয়ার হস্তক্ষেপে মাত্র ৩০ মিনিটের ব্যবধানে মিটে গেল দীর্ঘদিন ধরে ঝুলে থাকা জমির জট! ভুয়ো নথি দেখিয়ে খাস জমি দখলের অভিযোগ উঠেছিল এক দুষ্কৃতীর বিরুদ্ধে। তবে মন্ত্রীর নজর পড়তেই আধ ঘণ্টার মধ্যে নড়েচড়ে বসল ভূমি রাজস্ব দপ্তর। দ্রুত সংশোধন করা হলো রেকর্ডের ভুল এবং জমি ফিরিয়ে দেওয়া হলো তাঁর প্রকৃত মালিক— এক অবসরপ্রাপ্ত সেনাকর্মীকে। ঘটনাটি ঘটেছে বাগদা থানার মণ্ডপঘাটা এলাকায়। বাগদার মণ্ডপঘাটার বাসিন্দা প্রাক্তন সেনা‌কর্মী গোকুলচন্দ্র মজুমদার সেনা থেকে অবসর নেওয়ার পর সরকার কর্তৃক শিঙ্গি গ্রামে প্রায় পাঁচ বিঘা জমি পান। অভিযোগ, রাজ্যে তৃণমূল সরকার ক্ষমতায় আসার পর থেকেই রাজনৈতিক প্রভাব খাটিয়ে গোকুলবাবুর পরিবারকে ওই জমিতে ঢুকতে বাধা দেওয়া হতো। স্থানীয় তৃণমূল নেতাদের মদতে ওই পাঁচ বিঘা জমির মধ্যে প্রায় দেড় বিঘা জমি সম্পূর্ণ জবরদখল করে নেয় ঝড়ু বিশ্বাস নামের এক ব্যক্তি। শুধু দখলই নয়, টাকার বিনিময়ে জাল কাগজপত্র তৈরি করে জমিটি নিজের নামে রেকর্ডও করিয়ে নেয় সে। বহু চেষ্টা করেও যখন জমি উদ্ধার সম্ভব হচ্ছিল না, তখন বিষয়টি নিয়ে খাদ্যমন্ত্রী অশোক কীর্তনীয়ার দ্বারস্থ হয় সেনাকর্মীর পরিবার । মন্ত্রী খবর পাওয়া মাত্রই বিষয়টি গুরুত্ব সহকারে দেখেন এবং ভূমি রাজস্ব দপ্তরের ওপর চাপ সৃষ্টি হয়। মন্ত্রীর বার্তা পাওয়ার মাত্র ৩০ মিনিটের ব্যবধানে বিএলএলআরও (BL&LRO) আধিকারিকরা পুরো রেকর্ডের ভোল বদলে দেন। বেআইনি দখলদারের নাম কেটে জমিটি পুনারায় গোকুলচন্দ্র মজুমদারের নামেই রেকর্ড করে ফিরিয়ে দেওয়া হয়। প্রতারিত সেনা‌কর্মীর পরিবারের স্পষ্ট অভিযোগ, এতদিন ধরে স্থানীয় তৃণমূল নেতাদের প্রত্যক্ষ সহযোগিতাতেই জোরপূর্বক জমি দখল এবং পরবর্তীতে ভুয়ো নথি বানিয়ে বেআইনিভাবে রেকর্ডের খেলা চলছিল। তবে অবশেষে মন্ত্রীর হস্তক্ষেপে নিজেদের জমি ফিরে পাওয়ায় স্বস্তির নিঃশ্বাস ফেলেছে সেনা‌কর্মীর পরিবার。
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दरभंगा की भावना कंठ पहली भारतीय महिला टॉप गन फाइटर पायलट बन गईं

Darbhanga, Bihar:दरभंगा की बेटी भावना कंठ ने रचा इतिहास, ‘टॉप गन’ बनने वाली पहली भारतीय महिला फाइटर पायलट दरभंगा। घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव की बेटी और भारतीय वायुसेना की फाइटर पायलट भावना कंठ ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर मिथिलांचल का नाम रोशन किया है। उन्होंने ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (TACDE) में 20 सप्ताह का प्रतिष्ठित फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस उपलब्धि के साथ वह इस स्तर का प्रशिक्षण हासिल करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनी हैं। FCL को भारतीय वायुसेना के कठिन एडवांस्ड कॉम्बैट कोर्स में माना जाता है। इसमें हवाई युद्ध की रणनीति, मिशन प्लानिंग और जटिल युद्धक परिस्थितियों में नेतृत्व का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी कारण इस स्तर के प्रशिक्षित पायलटों को आम बोलचाल में ‘टॉप गन’ कहा जाता है। भावना कंठ इससे पहले भी देश का नाम रोशन कर चुकी हैं। वर्ष 2016 में वह भारत की शुरुआती महिला फाइटर पायलटों में शामिल हुईं और 2019 में लड़ाकू विमान से दिन के समय कॉम्बैट मिशन के लिए योग्यता हासिल की। भावना की उपलब्धि से बाउर गांव समेत पूरे मिथिलांचल में खुशी का माहौल है। उनके दादा नरेंद्र कुमार दास उर्फ बच्चन ने कहा कि भावना ने प्रारम्भिक शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय से हासिल की थी और बचपन से ही प्रतिभाशाली थीं। उनकी चाची किरण देवी ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि भावना ने अपनी मेहनत से पूरे गांव और बिहार का मान बढ़ाया है।
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74 साल की कृष्णा बम की 42 साल चली डाक कांवड़ यात्रा पर भक्तों की भीड़

Naya Chak, Bihar:एंकर - सावन की सोमवारी से ठीक एक दिन पहले अगर सुल्तानगंज की कच्ची कांवड़िया पथ पर एक चेहरा नजर न आए, तो मानिए श्रावणी मेले की तस्वीर कुछ अधूरी सी है... ये चेहरा कृष्णा बम का। उम्र 74 साल, लेकिन जोश और उत्साह 24 साल का... कदमों में रफ्तार और दिल में सिर्फ महादेव। सुल्तानगंज से देवघर तक लाखों श्रद्धालुओं के बीच कृष्णा बम का इंतजार हर साल बेसब्री से होता है। आज एक बार फिर जैसे ही वह नमामि गंगे घाट पहुँचीं, श्रद्धालुओं में उन्हें देखने और उनके साथ तस्वीर लेने की होड़ मच गई। उत्तरवाहिनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई, गंगाजल उठाया और फिर निकल पड़ीं बाबा बैद्यनाथ के दरबार में जल चढ़ाने। कृष्णा बम की ये यात्रा कोई एक-दो साल पुरानी नहीं, बल्कि 42 साल से लगातार जारी है। यानी चार दशक से भी ज्यादा वक्त से सुल्तानगंज की गंगा से जल लेकर वह डाक बम के रुप में करीब 105 किलोमीटर की दूरी तय कर देवघर पहुंचती हैं। रास्ते में श्रद्धालु उनके पैर छूने को बेताब दिखते हैं, तो कई लोग उनकी एक झलक पाने के लिए इंतजार करते नजर आते हैं। प्रशासन भी रास्ते की सुरक्षा और सुविधाओं का खास ख्याल रखता है। 74 की उम्र में भी कृष्णा बम की ऊर्जा देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। महादेव के प्रति ऐसी आस्था कि हजारों किलोमीटर पैदल चलकर कई ज्योतिर्लिंगों और शक्तिपीठों में जल चढ़ा चुकी हैं। साथ ही, साइकिल से भी हजारों किलोमीटर की धार्मिक यात्राएं कर चुकी हैं। सबसे पहले उन्होंने 1974 में मुजफ्फरपुर के पहलेजा घाट से डाक कर उठाया और बाबा गरीब नाथ मंदिर में जलाभिषेक किया था; 1986 तक वहां जलार्पण किया, इससे पहले 1982 से सुल्तानगंज से देवघर डाक कंवर की यात्रा शुरू कर दी थी जो अब तक अनवरत जारी है। वह हरिद्वार से देवघर के लिए पैदल यात्रा कर चुकी हैं और गंगोत्री से रामेश्वरम की 85 दिनों की पैदल यात्रा की थी; तीन बार वे साइकिल से मुजफ्फरपुर से वैष्णो देवी भी जा चुकी हैं। कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर चुकी हैं, पाकिस्तान जाकर कटासराज जी महाराज महादेव मंदिर समेत कई शक्तिपीठ के दर्शन कर चुकी हैं। कृष्णा बम के लिए यह सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि महादेव के प्रति समर्पण है... यही वजह है कि हर साल सावन में सुल्तानगंज से देवघर तक उनकी कहानी खुद एक आकर्षण बन जाती है। आज बाबा बैद्यनाथ के दरबार की ओर रवाना होने से पहले कृष्णा बम ने Zee Media से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि 42 साल बाद भी उनके कदम क्यों नहीं रुकते और आखिर महादेव की भक्ति उन्हें इतनी ताकत कहां से देती है।
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