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रतलाम की शिव नगर फैक्ट्री में आग, 50 लाख नुकसान, जनहानि नहीं

Ratlam, Madhya Pradesh:रतलाम के शिव नगर क्षेत्र में रविवार सुबह एक बड़ी आगजनी की घटना सामने आई। निराला नगर स्थित ए आर के स्टील एंड फैब्रिकेशन फैक्ट्री में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने फैक्ट्री के अंदर रखी मशीनों और तैयार माल को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की छह फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। फैक्ट्री मैनेजर के अनुसार इस हादसे में लगभग 50 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। आग लगने के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है। गनीमत रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। पुलिस और प्रशासन की टीम मामले की जांच में जुटी है。
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दादरी की खापें विनेश फोगाट के समर्थन में महापंचायत की चेतावनी दे रही हैं

Charkhi, Haryana:अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं विधायक विनेश फोगाट के समर्थन में उतरीं दादरी की खापें, बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी जिला चरखी दादरी की विभिन्न खाप पंचायतों ने एकजुट होकर विनेश फोगाट के समर्थन में आवाज बुलंद की खाप प्रतिनिधियों ने साफ कहा—अगर बेटी के साथ अन्याय हुआ तो पूरे प्रदेश में महापंचायत बुलाकर बड़ा कदम उठाया जाएगा सर्वजातीय फोगाट खाप के प्रधान सुरेश फोगाट ने कहा कि विनेश द्वारा डोप टेस्ट न देने और गोंडा न जाने का फैसला बिल्कुल सही है उन्होंने आरोप लगाया कि वहां जाने पर खिलाड़ी के साथ भेदभाव हो सकता है सुरेश फोगाट बोले—विनेश फोगाट ने मेडल जीतकर देश का नाम पूरी दुनिया में ऊंचा किया है, ऐसे में उसके साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं वर्तमान कुश्ती संघ के पदाधिकारियों पर भी पूर्व अध्यक्ष के प्रभाव में होने के आरोप लगाए खाप प्रधान ने सरकार से मांग की कि डोप टेस्ट दिल्ली या चंडीगढ़ में कराया जाए बाइट--- सुरेश फोगाट सर्वजातीय फोगाट खाप प्रधान
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बरसात से पहले होमगार्ड तैयारी तेज, मानसून आपदा से निपटने की योजना मजबूत

Jabalpur, Madhya Pradesh:बरसात से पहले आपदा से निपटने के लिए होमगार्ड की तैयारी शुरू कर दी है मुख्यालय से मिले आदेश के बाद नर्मदा नदी के ग्वारीघाट में चार दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ। संभागीय स्तर की प्रशिक्षण में जवानों ने करीब 3 घंटे तक अभ्यास किया मुख्यालय भोपाल के निर्देश पर जबलपुर सहित कटनी मंडल नरसिंहपुर सहित कईं जिलों में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य मानसून के दौरान संभावित आपदाओं में राहत और बचाव कार्य को मजबूत करना रहा जबलपुर संभाग के विभिन्न जिलों से चयनित 51 होमगार्ड जवानो ने प्रशिक्षण में भाग लिया जवानों को बाढ़ तेज बहाव और जलभराव जैसी परिस्थितियों में बचाव कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया
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झुंझुनूं में चिड़ावा रोड पर दो बाइक भिड़ंत, चार घायल

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं सुलताना की चिड़ावा रोड पर हादसा चिड़ावा रोड पर गैस एजेंसी के सामने हादसा दो बाइक की भिड़ंत, चार घायल सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई घटना झुंझुनूं जिले के सुलताना कस्बे की चिड़ावा रोड पर गैस एजेंसी के सामने दो बाइक की टक्कर हो गए। हादसे में बाइक सवार चार युवक घायल हो गए। घायलों को एंबुलेंस की मदद से अलग-अलग अस्पताल में भर्ती कराया गया। जानकारी के अनुसार देवरोड़ निवासी अनिल कुमार पुत्र प्यारेलाल अपनी बाइक पर चिड़ावा से सुलताना की तरफ आ रहा था। दूसरी बाइक सवार भी चिड़ावा से सुलताना की तरफ आ रहे थे। जिस पर संदीप पुत्र जयसिंह, जयसिंह पुत्र बनवारीलाल और राजेश पुत्र सीताराम थे। जो अपने गांव केड—भाटीवाड़ के समीप बसंतपुरा की तरफ जा रहे थे। दोनों बाइकों की भिड़न्त हो गई। घायलों को ग्रामीणों की मदद से जोड़िया रोड पर स्थित निजी अस्पताल एवं राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर चारों युवक का उपचार जारी है। घटना की सूचना पर सुलताना थाना से हेड कांस्टेबल भीमकोर एवं कांस्टेबल प्रकाश घटना स्थल और अस्पताल में पहुंचकर घटना के बारे में जानकारियां एकत्रित कर जांच में जुटी हुई है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। जिसमें चिड़ावा की तरफ से आ रही बाइक, अचानक से सड़क पर आई दूसरी बाइक से टकराती हुई दिख रही है।
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भिंड में ट्रैक्टर ट्रॉली की टक्कर: दो छात्र घायल, एक की मौत

Bhind, Madhya Pradesh:कोचिंग जा रहे दो छात्रों को ट्रैक्टर ट्राली ने मारी टक्कर एक की मौत एक घायल, भिंड में एक बार फिर दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है, ट्रैक्टर ट्रॉली की चपेट में आए दो मेधावी छात्रों में से एक की मौके पर ही मौत हो गई जब दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ है जिसे जिला अस्पताल से ग्वालियर रेफर कर दिया गया है, जानकारी के अनुसार उमरी थाना इलाके के अकोडा गांव का रहने वाला 15 वर्षीय अजय यादव उर्फ बेटू अपने दोस्त सुदामा भदोरिया के साथ पैदल कोचिंग जा रहा था। तभी तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्रॉली ने पीछे से दोनों को कुचल दिया और चालक मौके से ट्रैक्टर ट्रॉली को लेकर फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर दौड़े स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी और एंबुलेंस की मदद से दोनों को जिला अस्पताल भिजवाया जहां डॉक्टरों ने बेटू को मृत घोषित कर दिया और सुदामा को गंभीर हालत में ग्वालियर रेफर किया गया है।परिजनों में बताया कि बेटू पढ़ाई में काफी मेधावी छात्र था, उसने हाल ही में घोषित हाई स्कूल परीक्षा में 89% प्राप्त किए थे। बेटू के पिता का बचपन में ही निधन हो जाने के बाद वह अपनी नाना-नानी के घर अकोड़ा गांव में रहकर पढ़ाई कर रहा था। घटना से इलाके में शोक की लहर है। मौके पर पहुंची पुलिस ने अज्ञात ट्रैक्टर और चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आसपास के सीसीटीवी खंगालने शुरू कर दिए है। और दावा किया है कि जल्दी आरोपी ट्रैक्टर चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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कॉर्बेट में बाघिनें मातृत्व निभा रहीं, मदर डे पर संरक्षण का आधार

Noida, Uttar Pradesh:रामनगर एंकर.-विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व एक बार फिर दुनिया के सबसे सफल टाइगर संरक्षण मॉडल के रूप में चर्चा में है,यहां बाघों की बढ़ती संख्या ने जहां वन्यजीव विशेषज्ञों को उत्साहित किया है, वहीं मदर डे के मौके पर कॉर्बेट में बाघिनों की भूमिका को लेकर खास चर्चा सामने आई है,कॉर्बेट में 260 से अधिक बाघ मौजूद हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जा रही हैं यहां की स्वस्थ और सक्षम बाघिनें, जो अपने शावकों को जन्म देने से लेकर उन्हें जंगल का राजा बनने तक हर जिम्मेदारी निभाती हैं। घने जंगल कल-कल बहती राम गंगा नदी और जंगल के बीच अपने शावकों के साथ सतर्क निगाहों में दिखाई देती बाघिन, ये तस्वीर सिर्फ वन्य जीवन की खूबसूरती नहीं, बल्कि संरक्षण की सबसे बड़ी कहानी भी बयां करती है। विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व आज दुनिया में बाघों के सबसे सुरक्षित ठिकानों में गिना जाता है। करीब 1360 वर्ग किलोमीटर में फैले इस विशाल टाइगर रिजर्व में 260 से ज्यादा बाघ मौजूद हैं। खास बात यह है कि इस आंकड़े में दो वर्ष से कम आयु के शावकों को शामिल नहीं किया जाता,यही वजह है कि बाघों के घनत्व के मामले में कॉर्बेट की पहचान विश्व स्तर पर अलग बनी हुई है। लेकिन इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान किसका है? जवाब है—बाघिनों का मातृत्व। मदर डे के मौके पर पार्क प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों ने कॉर्बेट में बाघिनों की अहम भूमिका को रेखांकित किया है। पार्क अधिकारियों का कहना है कि जंगल में बाघों की नई पीढ़ी को तैयार करने का पूरा दारोमदार बाघिनों पर ही होता है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह का कहना है कि जिस तरह इंसानी परिवार में मां बच्चों को जीवन के संस्कार और जरूरी हुनर सिखाती है, उसी तरह जंगल में बाघिन अपने शावकों को हर वो कला सिखाती है, जो उन्हें जंगल में जिंदा रहने के लिए जरूरी होती है। उन्होंने बताया कि जब कोई बाघिन शावकों को जन्म देती है तो वह बेहद सतर्क हो जाती है,शावकों की सुरक्षा के लिए वह हर खतरे से लड़ने को तैयार रहती है,जंगल में कई बार दूसरे शिकारी जानवरों से खतरा बना रहता है, लेकिन बाघिन अपने बच्चों के करीब किसी को आने तक नहीं देती। जंगल में शावकों के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी भी बाघिन ही निभाती है,वह खुद शिकार करती है, भोजन जुटाती है और फिर धीरे-धीरे अपने बच्चों को शिकार की बारीकियां सिखाना शुरू करती है. शुरुआत में शावक सिर्फ अपनी मां के पीछे-पीछे चलते हैं। फिर बाघिन उन्हें जंगल के रास्ते पहचानना सिखाती है, खतरे को भांपना, दुश्मन से बचना, इलाके की पहचान करना और सही समय पर हमला करना—ये सभी हुनर शावक अपनी मां से ही सीखते हैं,पार्क वार्डन के मुताबिक एक बाघिन करीब डेढ़ से दो साल तक अपने बच्चों के साथ रहती है,इस दौरान वह उन्हें इतना सक्षम बना देती है कि वे अकेले जंगल में अपना इलाका बना सकें और शिकार कर सकें। कॉर्बेट में आज जो बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, उसके पीछे बाघिनों की यही सफल परवरिश सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। वहीं वन्यजीव प्रेमी संजय छिम्वाल कहते हैं कि मातृ दिवस केवल इंसानों के लिए नहीं, बल्कि हर जीव-जंतु और पक्षी के जीवन में मां का विशेष महत्व होता है। उन्होंने कहा कि अगर बाघों की बात करें तो बच्चों की देखरेख में नर बाघ की भूमिका बेहद सीमित होती है,शावकों को जन्म देने से लेकर उन्हें बड़ा करने तक लगभग पूरी जिम्मेदारी बाघिन ही निभाती है. संजय छिम्वाल कहते है जंगल में शावकों को बचाकर रखना आसान नहीं होता,कई बार भोजन की कमी, दूसरे शिकारी जानवर और प्राकृतिक खतरे शावकों की जिंदगी के लिए चुनौती बन जाते हैं। ऐसे में बाघिन अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों की रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने मां को सृजन की सबसे बड़ी शक्ति दी है। चाहे इंसानी मां हो, पृथ्वी मां हो या जंगल की बाघिन—हर मां अपनी अगली पीढ़ी को सुरक्षित रखने और आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करती है। कॉर्बेट की सफलता भी इसी मातृत्व की कहानी कहती है,यहां स्वस्थ बाघिनों की अच्छी संख्या और उनकी सफल वंशवृद्धि ने पूरे रिजर्व को टाइगर संरक्षण का मजबूत मॉडल बना दिया है। यही कारण है कि आज देश-विदेश से पर्यटक कॉर्बेट में बाघों के दीदार के लिए पहुंचते हैं, जंगल सफारी के दौरान यदि किसी पर्यटक को अपने शावकों के साथ बाघिन दिखाई दे जाए, तो वह पल उनके लिए जिंदगी भर की याद बन जाता है। वन विभाग का कहना है कि कॉर्बेट में लगातार मॉनिटरिंग, बेहतर संरक्षण रणनीति और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने की वजह से बाघिनों को अनुकूल माहौल मिला है। इसका सीधा असर बाघों की संख्या पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि किसी जंगल में बाघिनें सुरक्षित हैं और लगातार शावकों को जन्म दे रही हैं, तो यह उस जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है। मदर डे पर कॉर्बेट के बाघिनों की यह कहानी केवल वन्यजीव संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि मां की ममता और संघर्ष की भी मिसाल है। चाहे इंसानी दुनिया हो या जंगल हर जगह मां ही भविष्य की सबसे मजबूत नींव होती है। और कॉर्बेट की बाघिनें आज इसी सच्चाई को जीवंत कर रही हैं। मदर डे पर कॉर्बेट से आई ये तस्वीरें और कहानियां यह साबित करती हैं कि जंगलों में बाघों का भविष्य सिर्फ संरक्षण योजनाओं से नहीं, बल्कि बाघिनों की सुरक्षित और सफल मातृत्व यात्रा से तय होता है। यही वजह है कि आज कॉर्बेट दुनिया के सबसे सफल टाइगर रिजर्व में शुमार है।
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जोबट में तेंदुए के आतंक के बीच पिंजरे लगाए गए

Jobat, Madhya Pradesh:आलीराजपुर के जोबट में तेंदुए का आतंक, जंगली जानवरों को बना रहा है निशान, फॉरेस्ट विभाग ने जगह-जगह लगाए पिंजरे आलीराजपुर जिला के जोबट में तेंदुए ने आतंक फैला रखा है. यहां बीती 24 अप्रैल से तेंदुआ जंगली जानवर को अपना शिकार बना रहा है जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है. अब ग्रामीण क्षेत्र में लोग घर से निकलने में डर रहे हैं रमाकांत पारीक ने बताया कि ग्राम कंदा में 24 अप्रैल से तेंदुए का मूवमेंट देखा जा रहा है उसके बाद लगातार आसपास के क्षेत्र से भी तेंदुए के मूवमेंट की शिकायते फॉरेस्ट विभाग सहित प्रशासन को आ रही है अब तक कई जानवरों को तेंदुआ अपना शिकार बन चुका है शिकायतो के बाद फॉरेस्ट विभाग की टीम हरकत में आई और जगह-जगह पिंजरे लगाए गया लेकिन अब तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है तेंदुए की दहशत के चलते लोग काफी डरे हुए शाम होते घर में छुप जाते हैं, कोई फॉरेस्ट विभाग का कहना है कि जल्द ही इस तेंदुए को पकड़ लिया जाएगा इसके लिए फॉरेस्ट विभाग ने तेंदुए की सर्चिंग के लिए जगह-जगह पिंजरा लगाए है
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