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Rahul SaxenaRahul SaxenaFollow25 Dec 2024, 04:54 pm
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सहारनपुर में ग्राम प्रहरी का मानदेय 3500 रुपये, परिवार को 5 लाख कैशलेस इलाज

NJNEENA JAINJust now
Saharanpur, Uttar Pradesh:सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ग्राम प्रहरियों के मानदेय में वृद्धि और उनके सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम के तहत सहारनपुर पुलिस लाइन में ग्राम प्रहरी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों ग्राम प्रहरियों ने वर्चुअल माध्यम से मुख्यमंत्री का संबोधन सुना। इस अवसर पर पीडब्ल्यूडी मंत्री कुंवर बृजेश सिंह सहित मंडलायुक्त, डीआईजी, एसएसपी और जनप्रतिनिधि एवं विधायक मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान ग्राम प्रहरियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली से वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के ग्राम प्रहरियों को संबोधित किया। सरकार ने ग्राम प्रहरियों का मानदेय 2500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की है। इसके साथ ही ग्राम प्रहरियों के परिवारों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई है। कार्यक्रम के दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री कुंवर बृजेश सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के 68 हजार ग्राम प्रहरियों के मानदेय में वृद्धि और उनके सम्मान के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया है। वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के सभी 75 जनपदों के लोग इस कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने कहा कि सहारनपुर जनपद में भी लगभग 1047 ग्राम प्रहरी हैं, जिन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा। सभी ग्राम प्रहरियों को बधाई देते हुए मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली बार ग्राम प्रहरियों के मानदेय में वृद्धि की गई थी और अब दूसरी बार भी उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए मानदेय बढ़ाया गया है। मंत्री कुंवर बृजेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि ईश्वर न करे कि किसी परिवार को असामयिक संकट या गंभीर बीमारी का सामना करना पड़े, लेकिन ऐसी स्थिति आने पर यह सुविधा उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की भी चिंता कर रही है। ग्राम प्रहरियों के परिवारों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर उठाया गया यह कदम सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। मंत्री ने ग्राम प्रहरियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ग्राम प्रहरी गांवों की सुरक्षा व्यवस्था का मुख्य स्तंभ हैं। गांव में होने वाली घटनाओं की जानकारी समय रहते पुलिस तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उनकी सूचनाओं के आधार पर पुलिस संभावित अपराधों को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सफल होती है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरियों की सक्रियता से कई बड़े अपराधों को रोकने में मदद मिलती है। ऐसे में उनके मानदेय में वृद्धि और परिवारों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय उनके मनोबल को बढ़ाएगा। मंत्री ने कहा कि शारदीय नवरात्र के अवसर पर ग्राम प्रहरियों को यह सौगात मिलना खुशी की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार के इस फैसले से ग्राम प्रहरियों और उनके परिवारों को आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा मिलेगी तथा गांवों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी.
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मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में प्रमोद की हत्या, पुलिस ने शुरू की गहन जांच

Moradabad, Uttar Pradesh:मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में आज सुबह अज्ञात बदमाशों ने धारदार हथियार से हमला कर घर में सोए व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया। थाना पुलिस और एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह भी घटना स्थल पर पहुँच गए और हत्या की हर एंगल से जांच शुरू कर दी। घटना ठाकुरद्वारा की फरीदनगर रोड स्थित गैस गोदाम के पास रहने वाले प्रमोद के घर में शव मिलने से सामने आई। प्रमोद के सिर और शरीर पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। सूचना पर थाना पुलिस के साथ साथ एसपी देहात मौके पर पहुँचे और एफएसएल टीम बुला कर बारीकी से जांच शुरू कर दी गई। मृतक प्रमोद मूलरूप से मुंडापाण्डे क्षेत्र का रहने वाला था और कुछ समय पूर्व ठाकुरद्वारा में मकान बनाकर रहने लगा था। पुलिस ने बॉडी कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दी और हत्या की हर एंगल से जांच शुरू कर दी है।
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15 करोड़ के वरदहा पुल की स्वीकृति पर विधायक और पूर्व विधायक के श्रेय युद्ध

Chakala Sitapur, Madhya Pradesh:चमरौहां के वर्धाहा नदी पुल पर श्रेय की जंग, आमने-सामने आए वर्तमान विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी और पूर्व विधायक आनंद शुक्ला लोकप्रिय- चित्रकूट 15 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद तेज हुई सियासी बयानबाजी, दोनों ने अपने-अपने प्रयासों को बताया अहम; बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को होती रही है भारी परेशानी चित्रकूट। मानिकपुर थाना क्षेत्र के चमरौहां गांव के पास वरदहा नदी पर बनने वाले बहुप्रतीक्षित पुल की स्वीकृति के बाद अब क्षेत्र में राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस पुल को लेकर वर्तमान विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी और पूर्व विधायक आनंद शुक्ला के बीच बयानबाजी सामने आई है। एक ओर वर्तमान विधायक ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए पुल की स्वीकृति को अपने प्रयासों से जोड़कर पेश किया है, तो दूसरी ओर पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने उन पर श्रेय लेने का आरोप लगाते हुए पुल की स्वीकृति में अपनी भूमिका का दावा किया है। ऐसे में वर्षों से पुल निर्माण की आस लगाए बैठे ग्रामीणों की समस्या अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है。 15 करोड़ के पुल को मंजूरी, दो नेताओं के बीच श्रेय की जंग चमरौहां गांव के पास वर्धाहा नदी पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है। यह इलाका उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के समीप स्थित है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है। खासकर बरसात और बाढ़ के समय नदी पार करना मुश्किल हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। करीब 15 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रस्तावित पुल की स्वीकृति की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में जहां लोगों को राहत की उम्मीद जगी है, वहीं इस परियोजना को स्वीकृति दिलाने का श्रेय लेने को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। वर्तमान विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए पुल निर्माण की स्वीकृति को अपनी पैरवी का परिणाम बताया है। वहीं पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने वर्तमान विधायक के दावे पर सवाल उठाते हुए पुल की स्वीकृति का श्रेय खुद को दिया है। दोनों नेताओं के दावों के बीच अब यह मुद्दा केवल विकास कार्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक उपलब्धि और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है。 वर्तमान विधायक ने मुख्यमंत्री का जताया आभार मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी ने चमरौहां गांव के पास वर्धाहा नदी पर पुल की स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया है। उन्होंने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी स्वीकृति को अपनी कोशिशों से जोड़कर प्रस्तुत किया है。 विधायक की ओर से इस संबंध में सामने आए दावे के बाद पुल निर्माण को लेकर उनकी भूमिका चर्चा में है। उनका पक्ष यह है कि क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा कराने की दिशा में प्रयास किए गए, जिसके बाद पुल की स्वीकृति का रास्ता साफ हुआ। हालांकि, स्वीकृति की आधिकारिक प्रक्रिया, प्रस्ताव तैयार होने के समय और संबंधित विभागीय अभिलेखों की जानकारी के बिना यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि परियोजना को मंजूरी दिलाने में किसकी कितनी भूमिका रही। पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने उठाए सवाल दूसरी ओर, पूर्व विधायक आनंद शुक्ला ने वर्तमान विधायक पर पुल निर्माण की स्वीकृति का श्रेय लेने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस проекта को स्वीकृत कराने में अपनी भूमिका का दावा किया है। उनके रुख से स्पष्ट है कि वह वर्तमान विधायक के दावे से सहमत नहीं हैं। पूर्व विधायक के आरोपों के बाद चमरौहां के वरदहा नदी पुल को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से मीडिया और सोशल मीडिया पर बयानबाजी किए जाने से यह मामला क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल दोनों नेताओं के दावों के बीच पुल की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज, विभागीय पत्राचार और शासन स्तर पर हुई कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर परियोजना की प्रक्रिया और विभिन्न जनप्रतिनिधियों के योगदान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है。 बाढ़ के समय ग्रामीणों की बढ़ जाती है मुश्किल चमरौहां के पास वर्धाहा नदी पर पुल निर्माण की मांग के पीछे स्थानीय लोगों की आवागमन संबंधी परेशानी एक प्रमुख वजह रही है। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ की स्थिति बनने पर ग्रामीणों के लिए नदी पार करना कठिन हो जाता है। ऐसे में लोगों को अपने दैनिक कार्यों, जरूरी यात्राओं और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के समीप स्थित इस क्षेत्र में पुल का निर्माण होने से संपर्क व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। इससे आसपास के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ पुल के निर्माण, संपर्क मार्गों की उपलब्धता और परियोजना पूरी होने के बाद की व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा। ग्रामीणों के लिए सबसे अहम बात यह है कि वर्षों से उठाई जा रही मांग अब निर्माण के स्तर तक पहुंचे। स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य कब शुरू होगा, कितने समय में पूरा किया जाएगा और बरसात के दौरान आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान कब मिलेगा, इन सवालों के जवाब का इंतजार रहेगा। श्रेय की राजनीति के बीच निर्माण शुरू होने की प्रतीक्षा करीब 15 करोड़ रुपये के प्रस्तावित पुल को स्वीकृति मिलने की खबर से चमरौहां और आसपास के ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। लेकिन इस उपलब्धि को लेकर वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक के बीच शुरू हुई बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल भी गर्म कर दिया है。 एक तरफ वर्तमान विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए पुल की स्वीकृति को अपनी कोशिशों से जोड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व विधायक आनंद शुक्ला इस दावे को चुनौती देते हुए अपनी भूमिका का दावा कर रहे हैं। ऐसे में पुल निर्माण का श्रेय किसे मिलना चाहिए, इस पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं। हालांकि, विकास परियोजनाओं की स्वीकृति आम तौर पर प्रस्ताव, विभागीय परीक्षण, प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी जैसी प्रक्रियाओं से गुजरती है। इसलिए किसी एक व्यक्ति के दावे के आधार पर पूरी परियोजना का श्रेय तय करने के बजाय आधिकारिक अभिलेखों और संबंधित विभाग की जानकारी को आधार बनाना अधिक उचित होगा。 ग्रामीणों को श्रेय नहीं, धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार चमरौहां के वरदहा नदी पुल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के बीच स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि स्वीकृत परियोजना का निर्माण जल्द शुरू हो और वर्षों पुरानी परेशानी से उन्हें स्थायी राहत मिले। बाढ़ के दौरान नदी पार करने की मुश्किलों से जूझने वाले ग्रामीणों के लिए पुल किसी राजनीतिक दावे से अधिक बुनियादी जरूरत है。 अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि करीब 15 करोड़ रुपये की इस परियोजना की निर्माण प्रक्रिया कब आगे बढ़ती है और पुल कब तक तैयार हो पाता है। वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक के बीच श्रेय को लेकर चल रही बहस के बीच आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर दोनों के दावों की पड़ताल भी जरूरी होगी। फिलहाल चमरौहां के वरदहा नदी पुल की स्वीकृति ने क्षेत्र में विकास की उम्मीद के साथ राजनीतिक श्रेय की बहस को भी हवा दे दी है। अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि वर्षों पुरानी मांग का समाधान कागजों से निकलकर धरातल पर कब दिखाई देता है।
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ढिंडसा परिवार को बड़ा राजनीतिक झटका: लगभग 100 परिवार आम आदमी पार्टी में शामिल

Lehragaga, Punjab:ਢੀਂਡਸਾ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਵੱਡਾ ਸਿਆਸੀ ਝਟਕਾ! 100 ਦੇ ਕਰੀਬ ਪਰਿਵਾਰ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹਲਕਾ ਲਹਿਰਾ ਦੇ ਪਿੰਡ ਸਲੇਮਗੜ੍ਹ ਦੇ ਸਾਬਕਾ ਸਰਪੰਚ ਸੱਤਪਾਲ ਸਿੰਘ ਨੇ ਸਾਥੀਆਂ ਸਮੇਤ ਛੱਡਿਆ ਢੀਂਡਸਾ ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਸਾਥ。 ਲਹਿਰਾਗਾਗਾ: ਹਲਕਾ ਲਹਿਰਾ ਵਿੱਚ ਢੀਂਡਸਾ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਉਸ ਸਮੇਂ ਵੱਡਾ ਸਿਆਸੀ ਝਟਕਾ ਲੱਗਿਆ, ਜਦੋਂ ਪਿੰਡ ਸਲੇਮਗੜ੍ਹ ਦੇ ਸਾਬਕਾ ਸਰਪੰਚ ਸੱਤਪਾਲ ਸਿੰਘ ਨੇ ਆਪਣੇ सਾਥੀਆਂ ਸਮੇਤ ਢੀਂਡਸਾ ਪਰਿਵਾਰ ਦਾ ਸਾਥ ਛੱਡ ਕੇ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦਾ ਪੱਲਾ ਫੜ ਲਿਆ। ਪ੍ਰਾਪਤ ਜਾਣਕਾਰੀ ਅਨੁਸਾਰ ਸਾਬਕਾ ਸਰਪੰਚ ਸੱਤਪਾਲ ਸਿੰਘ ਦੇ ਨਾਲ ਰਾਮਫਲ ਸਿੰਘ, ਮੇਲਾਂ ਸਿੰਘ, ਜੇਠੂ ਸਿੰਘ, ਗੋਬਿੰਦ ਸਿੰਘ, ਗੁਲਾਬ ਸਿੰਘ ਅਤੇ ਬਲਕਾਰ ਸਿੰਘ ਸਮੇਤ ਕਰੀਬ 100 ਪਰਿਵਾਰ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਏ。 ਇਸ ਮੌਕੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਐਡਵੋਕੇਟ ਬਰਿੰਦਰ ਕੁਮਾਰ ਗੋਇਲ ਨੇ ਪਾਰਟੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਏ ਆਗੂਆਂ ਅਤੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੇ ਸਿਰੋਪੇ ਪਾ ਕੇ ਜੀ ਆਇਆਂ ਆਖਿਆ。 ਕੈਬਨਿਟ ਮੰਤਰੀ ਬਰਿੰਦਰ ਗੋਇਲ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਾਰਟੀ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਸਾਰੇ ਸਾਥੀਆਂ ਨੂੰ ਬਣਦਾ ਮਾਣ-ਸਨਮਾਨ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ。
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