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HKHare Krishana GoyalFollow14 Jan 2025, 12:03 pm
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भगवानगड के नए महंत कृष्णा महाराज शास्त्री की नियुक्ति अमृत महोत्सवी वर्ष में

Ahilyanagar, Maharashtra:अहिल्यानगर च्या श्री क्षेत्र भगवानगडाच्या अमृत महोत्सवी वर्षात दसऱ्याच्या शुभमुहूर्तावर ह.भ.प. न्यायाचार्य डॉ. श्री. नामदेव महाराज शास्त्री बाबांच्या हस्ते कृष्णा महाराज शास्त्री यांची भगवानगडाच्या चतुर्थ महंतपदी विधिवत नियुक्ती करण्यात आली. गडाच्या स्थापनेला ७५ वर्षे पूर्ण होत असतानाच नवीन महंतांची नियुक्ती झाल्याने या सोहळ्याला विशेष महत्त्व प्राप्त झाले. संत भगवानबाबांनी १९५१ मध्ये दसऱ्याच्या दिवशी श्री क्षेत्र भगवानगडाची स्थापना केली होती. यंदा गडाचे अमृत महोत्सवी वर्ष साजरे होत आहे. या ऐतिहासिक वर्षात कृष्णा महाराज शास्त्री यांना गादीवर विराजमान करण्याचा निर्णय विद्यमान मठाधिपती डॉ. नामदेव महाराज शास्त्री आणि श्री क्षेत्र भगवानगड ट्रस्टने घेतला होता. मात्र, दुष्काळी परिस्थिती लक्षात घेऊन नियोजित भव्य सोहळ्याऐवजी कार्यक्रम साधेपणाने पार पडला. तरीही या ऐतिहासिक क्षणाचे साक्षीदार होण्यासाठी हजारो भाविक गडावर उपस्थित होते. कृष्णा महाराज शास्त्री हे मूळचे तेलंगणातील असून, १७ वर्षांपूर्वी ते भगवानगडावर आले. त्यांनी गडावरील ज्ञानेश्वरी विद्यापीठात सलग १२ वर्षे राहून डॉ. नामदेव महाराज शास्त्रीच्या मार्गदर्शनाखाली ज्ञानेश्वरी आणि अन्य धार्मिक ग्रंथांचे अध्ययन केले. एम.ए.पर्यंत शिक्षण घेतलेल्या कृष्णा महाराजांनी विद्या पारंगत झाल्यानंतर एकनाथवाडी येथील निरंजन संस्थानचे महंत म्हणून सुमारे तीन वर्षे कार्य केले. डॉ. नामदेव महाराज शास्त्रीनी सुमारे दोन वर्षांपूर्वी कृष्णा महाराजांना आपला उत्तराधिकारी घोषित केले होते. त्यावेळी एकनाथवाडी येथील ग्रामस्थांनी त्यांना रथातून, ढोल-ताशांच्या गजरात, टाळ-मृदंगाच्या निनादात आणि हरिनामाच्या जयघোষात भगवानगडावर आणले होते. त्यांना निरोप देताना ग्रामस्थ भावूक झाले होते. त्यानंतर दसऱ्याच्या शुभमुहूर्तावर त्यांच्या नियुक्तीचा सोहळा संपन्न झाला. कृष्णा महाराज शास्त्री यांना गादीवर विराजमान केल्यानंतर डॉ. नामदेव महाराज शास्त्री बाबांनी सामाजिक जीवनातून पूर्णपणे निवृत्ती घेतली आहे. यापुढील आयुष्य ज्ञानेश्वरीचा भावानुवाद लिहिण्यासाठी समर्पित करण्याचा त्यांचा संकल्प आहे. संत भगवानबाबांनी आयुष्यभर ज्ञानेश्वरीचे वाचन केले, तर नामदेव महाराज शास्त्री तिचा भावानुवाद लिहिण्याचे कार्य करीत आहेत. महाराष्ट्राच्या आध्यात्मिक आणि साहित्यिक क्षेत्रासाठी ही अभिमानाची बाब मानली जात आहे. यापुढेही त्यांचे ग्रंथलेखन आणि साहित्यनिर्मिती सुरू राहणार आहे.दरम्यान, श्री क्षेत्र भगवानगडाच्या भक्तांनी यापुढे मठाधिपती म्हणून कृष्णा महाराज शास्त्री यांच्याशी संपर्क साधावा, असे आवाहन करण्यात आले आहे. अमृत महोत्सवी वर्षात झालेली ही नियुक्ती भगवानगडाच्या धार्मिक परंपरेतील महत्त्वाचा टप्पा ठरली आहे.
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खैरथल तिजारा के किशनगढ़बास में खाद्य सुरक्षा टीम ने 220 किग्रा खाद्य पदार्थ नष्ट, देसी घी जब्त

Bagheri Kalan, Rajasthan:खैरथल तिजारा जिले के किशनगढ़बास में खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला स्पेशल टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। जहां बेड़ा का बास क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान करीब 120 किलो बदबूदार कलाकंद और 100 किलो मिश्रित दूध को मौके पर नष्ट करवाया गया, जबकि 120 किलो देसी घी को भी जब्त किया गया है। विभाग ने अलग अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट के अनुसार की माने तो त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला स्पेशल टीम पुलिस ने बेड़ा का बास किशनगढ़बास में मैसर्स कमरुद्दीन और मैसर्स सुमरदिन के यहां संयुक्त कार्रवाई की, कार्रवाई के दौरान मैसर्स कमरुद्दीन के यहां से दूध, कलाकंद और मिल्क पाउडर के सैंपल लिए गए, जिसे मौके पर करीब 120 किलो बदबूदार कलाकंद और 100 किलो बदबूदार मिश्रित दूध को नष्ट करवाया गया। वहीं मैसर्स सुमरदिन के यहां से दूध, कलाकंद और पोद्दार ब्रांड के देसी घी के सैंपल लिए गए, इसके साथ ही करीब 120 किलो देसी घी जब्त किया गया।
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झुंझुनूं के sुलताना में विजयादशमी पर 251 साल पुरानी तोपों की अद्भुत पूजा

Jhunjhunu, Rajasthan:सुलताना, झुंझुनूं सुलताना में विजयादशमी पर ऐतिहासिक तोपों का पूजन सुलताना में विजयादशमी पर 251 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन मांडण युद्ध में जीत के बाद लाई गईं दोनों ऐतिहासिक तोपों की पूजा वर्ष 1775 में रेवाड़ी के मांडण में हुआ था ऐतिहासिक युद्ध सुलताना बसाने वाले हाथी सिंह अपने पुत्रों के साथ युद्ध में हुए थे शामिल पंडित मधुसूदन शर्मा के सानिध्य में विधि-विधान से हुआ शस्त्र पूजन विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए झुंझुनूं जिले के सुलताना कस्बे में मंगलवार को ऐतिहासिक तोपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। ग्रामीणों के अनुसार, ये दोनों तोपें वर्ष 1775 में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के मांडण में हुए ऐतिहासिक युद्ध में विजय के बाद सुलताना लाई गई थीं। पंडित मधुसूदन शर्मा के सानिध्य में आयोजित पूजा में ग्रामीणों ने भाग लेकर अपनी ऐतिहासिक विरासत और परंपरा को याद किया।ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1775 में हरियाणा के रेवाड़ी जिले के मांडण में ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। इस युद्ध में झुंझुनूं क्षेत्र के विभिन्न शेखावत वंशों के पूर्वजों ने जयपुर और भरतपुर की सेनाओं के साथ मिलकर दिल्ली की शाही सेना का मुकाबला किया था। बताया जाता है कि इस युद्ध में सुलताना को बसाने वाले हाथी सिंह भी अपने पुत्रों के साथ शामिल हुए थे। युद्ध में विजय के बाद हाथी सिंह दोनों तोपों को अपने साथ सुलताना ले आए थे।तभी से इन तोपों को कस्बे की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संजोया जाता रहा है। ग्रामीण हर वर्ष विजयादशमी के अवसर पर इनकी पूजा-अर्चना करते हैं। यह परंपरा क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास, वीरता और पूर्वजों के शौर्य की याद दिलाती है।पूजा स्थल पर शेखावाटी के संस्थापक महाराव शेखाजी की 589वीं जयंती भी मनाई गई। इस अवसर पर उनके चित्र के सम्मुख पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। ग्रामीणों ने महाराव शेखाजी के जीवन, शौर्य और नारी स्वाभिमान के प्रति उनके योगदान को याद किया।ग्रामीण गजेंद्र सिंह टिकाई ने बताया कि महाराव शेखाजी का जीवन स्वाभिमान, साहस और त्याग का प्रतीक रहा है। उनके वंशजों और क्षेत्र के लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और पूर्वजों के योगदान से जोड़ने का माध्यम हैं।सुलताना में विजयादशमी पर होने वाला यह आयोजन केवल शस्त्र पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का प्रतीक भी है। हर वर्ष होने वाली पूजा के माध्यम से ग्रामीण अपनी विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। बाइट : गजेंद्र सिंह टिकाई
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विजयदशमी पर सीताराम मंदिर में शस्त्र पूजन, वीरता और धर्म की मिसाल

Dholpur, Rajasthan:विजयदशमी पर सीताराम मंदिर में विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की ओर से विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार शस्त्र पूजन कर संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने शस्त्र पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह वीरता, साहस, धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। विजयदशमी का पर्व सत्य की जीत और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है। शस्त्र पूजन की परंपरा समाज में साहस, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कार्यक्रम में विहिप के प्रखंड अध्यक्ष देवेंद्र गर्ग, प्रखंड मंत्री शिवम खेमरिया सहित विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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तिरुपति बालाजी मंदिर में प्राकट्योत्सव के साथ डांडिया-फूलों की होली महोत्सव; विजेताओं को पुरस्कार

Churu, Rajasthan:चूरू。 सुजानगढ़。 श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी) में मना भगवान का प्राकट्योत्सव, फूलों की होली संग सजी डांडिया रास की महफिल विजेताओं को किया गया पुरस्कृत सुजानगढ़。 श्री वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी) परिसर में नवरात्र के उपलक्ष्य में सोमवार रात डांडिया नृत्य एवं गरबा महोत्सव का आयोजन धूमधाम से किया गया। इस दिन विशेष बात यह रही कि भगवान का जन्म दिवस (प्राकट्योत्सव) भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया , जिसके तहत श्रद्धालु भगवान के साथ फूलों की होली खेली। श्री वेंकटेश्वर फाउंडेशन की चेयरपर्सन एवं मुख्य ट्रस्टी मंजू देवी जाजोदिया ने जानकारी देते हुए बताया कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को संजोए रखने तथा उत्सव की उमंग के साथ मंदिर प्रांगण में डांडिया रास एवं फूलों की होली का भव्य आयोजन किया गया है। जिसमे भाग लेने वाली सभी बहनों को मंदिर प्रबंधन की ओर से डांडिया उपलब्ध कराया गया। गरबा महोत्सव में पारंपरिक डांडिया पोशाक में भाग लेकर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों में से प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान हासिल करने वाली बहनों को श्री वेंकटेश्वर भगवान के आशीर्वाद व कृपा प्रसाद के रूप में विशेष उपहार एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया । इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालु भगवान के संग फूलों की होली खेलकर भक्ति के रंग में सराबोर हुए । महोत्सव के समापन पर भगवन वेंकटेश की महाआरती की गई, इसके बाद भोग सवामणि प्रसाद एवं पुरस्कार वितरण किया गया । बाइट मंजू देवी जाजोदिया, मुख्य ट्रस्टी, श्री वेंकटेश्वर फाउंडेशन
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डोंबिवली रेलवे पुलिस ने 28 साल बाद बिहार से फरार आरोपी को गिरफ्तार किया

Kalyan, Maharashtra:डोंबिवली रेल्वे पोलिसांनी हप्त्याच्या गुन्ह्यात फरार असलेल्या एका आरोपीला तब्बल 28 वर्षांंतर बिहार येथून बेड्या ठोकल्या आहेत. संदीप कृष्णन असे अटक आरोपीचे नाव असून त्याचे प्रमोद यादव, विनेश कृष्णन हे दोन साथीदार अद्यापही पकडण्यात पोलिसांना यश आलेलं नाही. 1998 म्हणजेच तब्बल 28 वर्षांपूर्वी कोपर डोंबिवली रेल्वे स्थानकादरम्यान शैलेश मोरे नावाच्या इसमाचा मृतदेह छिन्न विच्छिन अवस्थेत आढळला होता. रेल्वे पोलिसांना माहिती मिळताच पोलिसांनी तत्काळ घटनास्थळी धाव घेत मृतदेह ताब्यात घेतला प्रथमदर्शनी रेल्वे अपघात असल्याचे वाटत असले तरी पोलिसांना संशयाला त्यांनी या प्रकरणी तपास सुरू केला. तपासांती या इसमाची हत्या करून त्याचा मृतदेह रेल्वे रुळावर फेकण्यात आला होता असे निष्पन्न झाले. पोलिसांनी शैलेश मोरे यांचा ठावठिकाणा तसेच त्याच्या साथीदारांचा शोध सुरू केला. याच दरम्यान पोलिसांनी संदीप कृष्णन, प्रमोद यादव विनेश कृष्णन या तिघांना चौकशीसाठी बोलावले. पोलिसांना या तिघांवर संशय होता मात्र जबाब घेऊन त्यांना सोडून देण्यात आले होते. त्यानंतर हे तिघेही पसार झाले. पोलीस तपासात या तिघांनी शैलेश मोरे यांचे हत्या केल्याचे निष्पन्न झाले. शैलेश मोरे हा संदीप कृष्णन यांच्या बहिणीचा पती होता परंतु काही महिन्यांपूर्वी त्यांचा काडीमोड झाला होता. बहिणीशी शैलेश मोरे याने काडीमोड घेतल्याचा राग संदीप कृष्णन याला होता; या रागातून संदीप कृष्णन याने त्याचे साथीदार विनेश कृष्णन आणि प्रमोद यादव यांना बोलावलं. शैलेश मोरे याला दारू पाजून त्याची दगडाने ठेचून हत्या केली. त्यानंतर शैलेश याचा मृतदेह कोपर डोंबिवली रेल्वे स्थानकादरम्यान रुळावर फेकून पळ काढला. त्यांनी रेल्वे अपघाताचा बनाव केला होता. मात्र रेल्वे पोलिसांच्या तपासात त्यांच्या या बनावाचा पर्दाफाश झाला. रेल्वे पोलीस तब्बल 28 वर्षांपासून या तिघांच्या मागावर होते. यामधील संदीप कृष्णन हा बिहारला असल्याची माहिती पोलिसांना मिळाली. पोलिसांनी तत्काळ तांत्रिक तपास तसेच बातमीदारांच्या आधारे संदीप कृष्णाचा ठावठिकाणा मिळवत सापळा रचला. संदीप कृष्णाला बिहार येथून ताब्यात घेतले; त्याचे दोन साथीदार अद्याप पसार असून पोलिस त्याचा शोध घेत आहेत.
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नागपुर में श्रद्धा दुबे समेत तीन की गिरफ्तारी से परिवार को न्याय की उम्मीद

Noida, Uttar Pradesh:Lucknow (Uttar Pradesh): Ranjana Sharma (Mother Of Deceased Shiva Sharma) On Arrest Of Shraddha Dubey, Her Sister Rashmi Dubey And Their Driver Tanveer Alias Danish In Nagpur Speaker 2: मैम आज जिस तरीके से श्रद्धा दुबे उसकी बहन लक्ष्मी दुबे और उसके ड्राइवर की जो गिरफ्तारी हुई है नागपुर से क्योंकि लखनऊ से लगातार नागपुर तक जाना जर्नी लंबी है तो आज की गिरफ्तारी से कितना संतोष हैं आप? Speaker 1: मैं मीडिया का, प्रेस का, पुलिस का, एसटीएफ का, प्रशासन का, योगी आदित्यनाथ जी का सबका बहुत शुक्रिया अदा करूंगी कि आज विजयदशमी का दिन है और शिवा को न्याय की दिशा में आज पहली जर्नी है। Speaker 2: अह मैम बात की जाए जिस तरीके से लगातार 12 दिन हो गए कई वीडियो उसमें डाले जिसमें प्रताड़ित करने की भी बात सामने आ रही थी और एक वीडियो आया जिसमें धमकी भी देने की बात सामने आ रही थी तो अब इस गिरफ्तारी के बाद क्या कुछ मांग करते हैं? Speaker 1: इस गिरफ्तारी के बाद जो भी न्याय की प्रक्रिया होगी उसी के तहत उनकी चीजें चलेंगी। Speaker 2: अब मैम प्रताड़ित करने की जो बातें आ रही हैं। Speaker 1: प्रतारित करने की दिशा में अभी तो बहुत सारे वीडियोस लोगों के पास हैं, इस तरह के कई वीडियोस और भी सामने आ सकते हैं। Speaker 2: लगता है अब न्याय मिलने की ज्यादा पूरी उम्मीद है। Speaker 1: बिल्कुल, मुझे न्याय की पूरी उम्मीद है।
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बालोतरा में शस्त्र पूजा और अखाड़ा व्यायामशाला का उद्घाटन: बजरंग दल का आयोजन

Balotra, Rajasthan:बालोतरा में बजरंग दल ने किया शस्त्र पूजन, अखाड़ा व्यायामशाला का शुभारंभ महंत जनकपुरी जी बोले—हर सनातनी को वर्ष में एक बार अवश्य करनी चाहिए शस्त्र पूजा बालोतरा। अधर्म पर धर्म की विजय के पर्व विजयदशमी के अवसर पर बजरंग दल जिला बालोतरा की ओर से शहर के क्षत्रियों का मोर्चा स्थित गायत्री मंदिर में भव्य शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान श्री बजरंग दल अखाड़ा व्यायामशाला का शुभारंभ भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता होटलू महंत जनकपुरी जी महाराज ने कहा कि वर्ष में एक बार शस्त्रों की पूजा विजयदशमी के दिन की जाती है। प्रत्येक सनातनी को अपने घर में वर्ष में एक बार शस्त्र पूजन अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर महंत जनकपुरी जी ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शस्त्रों का पूजन किया। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी एवं मातृशक्ति सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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श्री आनंदपुर साहिब में 253 शिक्षकों का मोर्चा: NIELT Answer Key त्रुटि से 4161 मास्टर भर्ती प्रभावित

Anandpur Sahib, Punjab:ਸ਼੍ਰੀ ਅਨੰਦਪੁਰ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਨੇੜਲੇ ਪਿੰਡ ਗੰਭੀਰਪੁਰ ਵਿਖੇ 4161 ਮਾਸਟਰ ਕਾਡਰ ਭਰਤੀ ਨਾਲ ਸਬੰਧਤ 253 ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਵੋਲੋਂ ਪੱਕਾ ਮੋਰਚਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਮੁਤਾਬਕ ਉਹ ਪਿਛਲੇ ਕਈ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਸ਼ੋਕਾਜ਼ ਨੋਟਿਸਾਂ ਦੇ ਵਿਰੋਧ ਵਿੱਚ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ, ਪਰ ਇਸ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਸਿੱਖਿਆ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਮਸਲੇ ਦਾ ਕੋਈ sarthak ਹੱਲ ਨਹੀਂ ਕੱਢਿਆ ਗਿਆ . ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਨੇ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵੱਲੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਮੰਗ ਪੱਤਰ ਭੇਜਿਆ ਗਿਆ ਅਤੇ 4 ਜੁਲਾਈ ਨੂੰ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਜ਼ਿਲ੍ਹਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸ਼ੋਕਾਜ਼ ਨੋਟਿਸ ਸਾੜ ਕੇ ਰੋਸ ਪ੍ਰਗਟਾਇਆ ਗਿਆ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 6 ਜੁਲਾਈ ਨੂੰ ਸਿੱਖਿਆ ਮੰਤਰੀ ਹਰਜੋਤ ਸਿੰਘ ਬੈਂਸ ਨਾਲ ਪੈਨਲ ਮੀਟਿੰਗ ਵੀ ਹੋਈ, ਪਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਵੀ ਕੋਈ ਠੋਸ ਹੱਲ ਨਹੀਂ ਨਿਕਲਿਆ। ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਸਰਕਾਰੀ ਪ੍ਰੀਖਿਆ ਪਾਸ ਕਰਕੇ ਮੈਰਿਟ ਦੇ ਆਧਾਰ ’ਤੇ ਨੌਕਰੀ ਹਾਸਲ ਕੀਤੀ ਸੀ ਅਤੇ ਉਹ ਪਿਛਲੇ ਤਿੰਨ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਸੇਵਾਵਾਂ ਨਿਭਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਦੋਸ਼ ਹੈ ਕਿ NIELT ਏਜੰਸੀ ਦੀ Answer Key ਵਿੱਚ ਹੋਈ ਕਥਿਤ ਗਲਤੀ ਕਾਰਨ 253 ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਅਤੇ ਉਨਾਂ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਦਾ ਭਵਿੱਖ ਦਾਅ ’ਤੇ ਲੱਗ ਗਿਆ ਹੈ . ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਮੁਤਾਬਕ ਸਿੱਖਿਆ ਵਿਭਾਗ ਵੱਲੋਂ 11 ਮਈ 2026 ਦੇ ਹੁਕਮ ਨੰਬਰ 1390953 ਅਤੇ 6 ਮਈ 2026 ਦੇ ਸ਼ੋਕਾਜ਼ ਨੋਟਿਸਾਂ ਰਾਹੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਸੇਵਾਵਾਂ, ਪਰਖ ਕਾਲ, ਬਦਲੀਆਂ ਅਤੇ ਭੱਤਿਆਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ। ਇਸ ਦੇ ਵਿਰੋਧ ਵਿੱਚ ਹੁਣ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਸਿੱਖਿਆ ਮੰਤਰੀ ਦੇ ਪਿੰਡ ਗੰਭੀਰਪੁਰ ਵਿਖੇ ਪੱਕਾ ਮੋਰਚਾ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਕੀਤਾ ਹੈ।
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जहानाबाद में विजयादशमी पर सिंदूर खेला: सुहागिनों ने एक साथ जताया अखंड सौभाग्य

Jehanabad, Bihar:व विजयादशमी के अवसर पर जहानाबाद में पहली बार एक अनोखी और भव्य तस्वीर देखने को मिली। शहर के पंचमहला मोहल्ला स्थित मां दुर्गा पूजा पंडाल में पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाज के अनुसार सिंदूर खेला का आयोजन किया गया। जहां बड़ी संख्या में जुटी सुहागिन महिलाओं ने पहले मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-शांति की मंगलकामना की। इस आयोजन को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह और उमंग देखा गया। परंपरा, श्रद्धा और सामाजिक सौहार्द के इस सुंदर संगम ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींचा। मान्यताओं के मुताबिक, विजयादशमी के दिन मां दुर्गा अपने मायके से ससुराल लौटती हैं। इसी विदाई की घड़ी में सुहागिन महिलाएं सिंदूर खेला के जरिए मां को भावभीनी विदाई देती हैं। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर पर्व का उल्लास साझा किया। पूरा माहौल ढोल-ढाक की गूंज और मां के जयकारों से भक्तिमय बना रहा। वही इस आयोजन में शामिल महिलाओं ने बताया कि सिंदूर खेला हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम सभी मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं कि वे हर महिला को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दें और सभी के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि बनाए रखें।
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