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कांग्रेस पर तीखा हमला: शर्मा बोले, आरोपों की राजनीति से नहीं जीत मिलती

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल बीजेपी प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस लगातार चुनावी हार का सामना कर रही है, लेकिन अपनी राजनीतिक रणनीति में सुधार करने के बजाय चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रही है। गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जनता का विश्वास हासिल करने के लिए आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने से जनता का विश्वास और चुनावी जीत हासिल नहीं की जा सकती। श्रीकांत शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना और आरोप लगाना हर राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण देना भी जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार गंभीर आरोप लगाते हैं, लेकिन प्रमाण मांगे जाने पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते। उन्होंने कहा कि केवल आरोप दोहराने से वे सच साबित नहीं हो जाते। भाजपा प्रदेश प्रभारी ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने उस समय ‘चौकीदार चोर है’ का नारा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ अभियान चलाया था, लेकिन चुनाव परिणामों में जनता ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उस समय भी सकारात्मक राजनीतिक विकल्प देने के बजाय आरोपों की राजनीति को प्राथमिकता दी थी। शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी आज भी उसी रणनीति को दोहरा रहे हैं और चुनावी हार के कारणों की समीक्षा करने के बजाय दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी चुनौतियों के बावजूद कांग्रेस के संगठन और राजनीतिक रणनीति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। श्रीकांत शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस बार-बार राहुल गांधी की राजनीतिक री-लॉन्चिंग का प्रयास करती है, लेकिन हर चुनावी चुनौती के बाद पार्टी को अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ता है। उन्होंने राहुल गांधी से आत्ममंथन करने और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जरूरी सुधारों पर ध्यान देने की अपील की। श्रीकांत शर्मा ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर आपत्ति जताने के लिए संवैधानिक और कानूनी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। यदि राहुल गांधी या कांग्रेस के पास मतदाता सूची में अनियमितताओं के प्रमाण हैं, तो उन्हें संबंधित चुनाव अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर प्रदर्शन करना राजनीतिक अधिकार है, लेकिन आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी पहुंचाने और पर्याप्त प्रमाण के बिना चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने से बचना चाहिए। भाजपा प्रदेश प्रभारी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और सत्यापन प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करना और अपात्र या त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों की नियमानुसार जांच करना है। उन्होंने दावा किया कि सत्यापन के दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें संबंधित व्यक्तियों के नाम या पते की पुष्टि नहीं हो सकी। श्रीकांत शर्मा ने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम निर्धारित प्रक्रिया और उचित अवसर दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। शर्मा ने राहुल गांधी से सवाल किया कि वे मतदाता सूची की प्रक्रिया से जुड़े किन विशिष्ट मामलों पर आपत्ति जता रहे हैं और उनके समर्थन में कौन-से दस्तावेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसके समाधान के लिए कानूनी उपाय उपलब्ध हैं और ऐसे मामलों का तथ्यात्मक आधार पर समाधान किया जाना चाहिए। भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कहा कि कांग्रेस को चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच जाकर अपनी नीतियों, कार्यक्रमों और संगठनात्मक कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला मतदाता करते हैं और सभी राजनीतिक दलों को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। श्रीकांत शर्मा ने राहुल गांधी से आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर ठोस तथ्यों, सकारात्मक कार्यक्रमों और जनता से सीधे संवाद पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा के पक्ष में है।
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हेलीकॉप्टर के दुरुपयोग पर सुक्खू सरकार पर सवाल, रिकॉर्ड मांगें

Shimla, Himachal Pradesh:सरकारी हेलीकॉप्टर का राजनीतिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल क्यों? सुक्खू सरकार से राजिंदर राणा ने मांगा हिसाब दिल्ली की हाई-टी पर 11 लाख रुपये खर्च होने का दावा, हेलीकॉप्टर की लॉगबुक और उड़ानों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग हिमाचल भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और पूर्व विधायक राजिंदर राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सरकारी हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सरकारी हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल साइकिल की तरह कर रहे हैं। राणा ने सवाल उठाया कि हेलीकॉप्टर का उपयोग प्रदेश के प्रशासनिक और विकास कार्यों के लिए हो रहा है या कांग्रेस के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए。 राजिंदर राणा ने कहा कि 8 से 14 अक्टूबर के बीच मुख्यमंत्री की बार-बार दिल्ली यात्राओं और सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार इन यात्राओं का उद्देश्य, उड़ानों की संख्या, यात्रियों का विवरण और सरकारी खजाने पर हुए खर्च की जानकारी सार्वजनिक करे。 भाजपा नेता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री एक दिन रात करीब साढ़े नौ बजे दिल्ली से शिमला लौटे, ओकओवर स्थित सरकारी आवास में ठहरे और अगले दिन दोपहर से पहले फिर दिल्ली पहुंच गए। उनके अनुसार, यह यात्रा दिल्ली में आयोजित एक हाई-टी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए की गई थी। राणा ने दावा किया कि इस यात्रा पर करीब 11 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि यदि यह आंकड़ा सही है, तो सरकार को बताना चाहिए कि सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल का आधार क्या था。 राणा ने कहा कि सरकारी हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल प्रशासनिक बैठकों, आपात परिस्थितियों, विकास कार्यों और हिमाचल के हित में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के लिए करना उचित है। लेकिन यदि इसका इस्तेमाल कांग्रेस की रैलियों, आंदोलनों और राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए किया गया है, तो सरकार को इसका औचित्य स्पष्ट करना चाहिए。 राणा ने चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शनों में मुख्यमंत्री की भागीदारी पर भी सवाल उठाए। राणा ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों से असहमति जताना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री के सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए。 भाजपा प्रवक्ता ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर सरकार आर्थिक संकट और संसाधनों की कमी का हवाला देती है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री की यात्राओं और सरकारी सुविधाओं पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके तीमारदारों को टांके लगाने का सामान, ग्लूकोज की बोतलें और ग्लव्स जैसी जरूरी चीजें भी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। राणा ने कहा कि सरकार को सबसे पहले स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। राजिंदर राणा ने कर्मचारियों और पेंशनरों की आर्थिक मांगों तथा लंबित देनदारियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को अपने सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) से पैसा निकालने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दीपावली नजदीक है और कर्मचारी अपनी बचत का इस्तेमाल पारिवारिक जरूरतों, घर के निर्माण, मरम्मत और अन्य जरूरी कामों के लिए करते हैं। ऐसे में यदि जीपीएफ निकासी पर प्रतिबंध या प्रशासनिक बाधाएं हैं, तो सरकार को स्थिति स्पष्ट कर कर्मचारियों को राहत देनी चाहिए。 भाजपा नेता ने प्रदेश की कई सड़कों की खराब स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि जनता सड़क मरम्मत, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी सेवाओं को लेकर सवाल उठा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के नवीनीकरण, सजावट और अन्य सुविधाओं पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्राओं के दौरान ठहरने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। राणा ने आरोप लगाया कि पहले सरकारी अतिथि गृहों के बजाय महंगे होटलों में ठहरने को लेकर विवाद सामने आए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की यात्राओं, आवास तथा संबंधित खर्चों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। राजिंदर राणा ने कहा कि सरकारी हेलीकॉप्टर, आवास, वाहन और अन्य सुविधाएं जनता के पैसे से संचालित होती हैं। इनका इस्तेमाल नियमों के अनुसार और सार्वजनिक हित में होना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि 8 से 14 अक्टूबर तक मुख्यमंत्री की सभी हेलीकॉप्टर यात्राओं की लॉगबुक, उड़ानों का उद्देश्य, प्रत्येक यात्रा का वास्तविक खर्च, यात्रियों की सूची और संबंधित स्वीकृतियों का विवरण सार्वजनिक किया जाए। राणा ने यह भी पूछा कि राजनीतिक कार्यक्रमों से जुड़ी यात्राओं का खर्च किस मद से वहन किया गया और क्या संबंधित राजनीतिक दल ने किसी खर्च की प्रतिपूर्ति की है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का जवाब दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर देना चाहिए। भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उसके टैक्स का पैसा कहां और किस उद्देश्य से खर्च किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सरकारी खर्चों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवाओं, कर्मचारी हितों तथा सड़क अधोसंरचना को प्राथमिकता देने की मांग की। राणा ने कहा कि भाजपा सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सरकार से जवाब मांगती रहेगी और जरूरत पड़ने पर यात्राओं तथा खर्चों का आधिकारिक रिकॉर्ड भी मांगेगी。
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लखीसराय में मिट्टी खोदाई से दुर्लभ अष्टकोणीय शिवलिंग मिला

Lakhisarai, Bihar:लखीसराय में अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले ऐतिहासिक बौद्ध स्थल लाली पहाड़ी के समीप मिट्टी की खोदाई के दौरान नौवीं-दसवीं शताब्दी का एक दुर्लभ अष्टकोणीय शिवलिंग मिला है। काले पत्थर से निर्मित करीब तीन फीट लंबे इस प्राचीन शिवलिंग को पुलिस के सहयोग से लखीसराय संग्रहालय में सुरक्षित रखवा दिया गया है। शहर के वार्ड संख्या 33 स्थित राजकीय स्मारक लाली पहाड़ी से सटे जयनगर पूर्वी मुसहरी टोला में कारू मांझी का पुत्र घर के पास मिट्टी खोद रहा था। इसी दौरान जमीन के नीचे काले पत्थर की आकृति दिखाई दी। आगे खोदाई करने पर लगभग तीन फीट लंबा और 2.7 फीट व्यास का अष्टकोणीय शिवलिंग निकला। इसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीण इसे किऊल नदी तट पर पीपल पेड़ के नीचे स्थापित करने की तैयारी करने लगे। सूचना मिलते ही कबैया थाना पुलिस ने शिवलिंग को कब्जे में लेकर लखीसराय संग्रहालय पहुंचाया।
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एनएचएम संविदा कर्मचारियों और आशाओंने नियमितीकरण और समान कार्य समान वेतन की उठाई मांग

Subhas ChandraSubhas ChandraFollow1m ago
Paniyara, Uttar Pradesh:पनियरा, महराजगंज। जनपद के पनियरा पीएचसी के सामने बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एनएचएम के संविदा कर्मचारियों और आशाओं ने नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन सहित विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजकर समस्याओं के समाधान की मांग की। संघ का कहना है कि प्रदेश में एक लाख से अधिक संविदा कर्मचारी 14 से 18 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और सेवा सुरक्षा नहीं मिल रही है। कर्मचारियों ने नियमितीकरण, सम्मानजनक वेतन वृद्धि, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, महंगाई भत्ता, ईपीएफ, एचआरए, ग्रेच्युटी और स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की। साथ ही रिक्त पदों के सृजन और अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था करने पर जोर दिया। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
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अलवर में गोवंश फेंक फरार: पिकअप से गोवंश ले जा रहे तस्कर गिरफ्तार नहीं, जांच जारी

Laxmangarh, Rajasthan:अलवर में गोवंशों को पिकअप से सड़क पर फेंककर फरार हुए तस्कर, पांच गोवंशों को लेकर जा रहे थे आरोपी अलवर। जिले में देर रात गोवंश को पिकअप में भरकर ले जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, लक्ष्मणगढ़ से एक पिकअप में पांच गोवंशों को भरकर बड़ौदा मेव की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान गोवंशों को ले जाने की सूचना गौ पुत्र सेना के गोरक्षकों को मिली, जिसके बाद उन्होंने पिकअप का पीछा करना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि गोरक्षकों को पीछे आता देख पिकअप चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ा दी। पीछा करने के दौरान घटनाक्रम ने उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब पिकअप सवार लोगों ने एक-एक कर पांचों गोवंशों को सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद आरोपी पिकअप सहित मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। पिकअप में गोवंश को ले जाने वाले लोगों की पहचान करने और उनकी गिरफ्तारी के लिए जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी。
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मालदा के दो बच्चे दुर्गा पूजा के लिए खुद प्रतिमा बनाकर मण्डप सजाते

Malda, West Bengal:বড়দের দেখে স্বপ্ন দেখেছিল তারাও একদিন তৈরি করবে দুর্গাপুজোর মণ্ডপ, নিজের হাতে গড়বে দেবী দুর্গার প্রতিমা। সেই স্বপ্নকে বাস্তবের রূপ দিতে এবারও উদ্যোগী হয়েছে মালদার দুই খুদে বন্ধু। নিজেদের জমানো টাকা আর এলাকার মানুষের কাছ থেকে চাঁদা সংগ্রহ করে প্রতিমা তৈরি থেকে মণ্ডপসজ্জা—সবটাই নিজেদের হাতে করে তাক লাগিয়ে দিয়েছে তারা। অরিত্র মণ্ডলের বয়স ১০ বছর। সে মালঞ্চ পল্লী হাই স্কুলের চতুর্থ শ্রেণির ছাত্র। অন্যদিকে, ১১ সালের অরূপ সিংহ মালদা টাউন স্কুলের পঞ্চম শ্রেণিতে পড়ে। বয়সে কাছাকাছি এই দুই বন্ধু ছোট থেকেই একসঙ্গে দুর্গাপুজোর মণ্ডপ ও প্রতিমা দেখতে ভালোবাসে। বিভিন্ন পুজো মণ্ডপের সাজসজ্জা এবং প্রতিমা দেখেই তাদের মনে নিজেরা পুজো করার স্বপ্ন জাগে। সেই স্বপ্ন পূরণে গত বছরের মতো এ বছরও কোমর বেঁধে নেমে পড়েছে তারা। বাজার থেকে রং ও প্রতিমা তৈরির आवश्यक সামগ্রী কিনে নিজেদের হাতে তৈরি করেছে দুর্গাপ্রতিমা। পাশাপাশি ডেকোরেটরের কাছ থেকে বাঁশসহ অন্যান্য সামগ্রী এনে সাজিয়ে তুলেছে নিজেদের পুজোর মণ্ডপ। টিফিনের টাকা বাঁচিয়ে জমানো অর্থের পাশাপাশি চাঁদা সংগ্রহ করেই এই উদ্যোগ তাদের। খুদে দুই বন্ধুর ইচ্ছা, বড় হয়ে আরও দক্ষ শিল্পী হওয়ার পাশাপাশি প্রতি বছরই এভাবেই দুর্গাপুজোর আয়োজন করবে তারা। ছোট্ট বয়সেই তাদের এই উদ্যোগ প্রমাণ করছে, স্বপ্ন পূরণে বয়স নয়, প্রয়োজন শুধু ইচ্ছাশক্তি আর উদ্যোগের।
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हांसी मंडी में पीआर धान की खरीदी धीमी, किसानों को नुकसान

Hansi, Haryana:हांसी मंडी में पीआर धान की खरीद शुरू, मिलर ने खरीदे 850 क्विंटल. अब तक 31 हजार क्विंटल धान की आवक, 600 गेट पास कटे; 1509 धान के भाव 3900 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल. पीआर धान की सरकारी खरीद का निर्धारित भाव 2461 रुपये प्रति क्विंटल. मंडी में निजी मिलर 2100 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर धान खरीद, भारी कटौती, किसानों ने प्रदर्शन. हांसी अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद धीमी होने से किसानों को परेशानी हो रही है. 1509 किस्म के धान के भाव 3900 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रहे हैं. किसान चाहते हैं कि धान की खरीद निर्धारित सरकारी भाव पर हो ताकि उन्हें उचित मूल्य मिले. सर्व व्यापार मंडल के प्रधान बजरंग बंसल ने कहा कि मंडी में खरीद की धीमी गति से किसान परेशान हैं और खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है.
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मेरठ : 'ब्लू ड्रम हत्याकांड' पर आज हो रहा सजा का फैसला, वीडियो कांफ्रेसिंग से जुड़े साहिल और मुस्कान

SShyamFollow8m ago
Meerut, Uttar Pradesh:

मेरठ: जिला जेल से साहिल और मुस्कान की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू हो गई है। आरोपी साहिल ने कुछ भी कहने से इनकार कर द‍िया है।

 

जज ने पूछा क्या कभी पहले कोई अपराध किया है। साहिल ने किसी भी अपराध से इनकार किया।

 

कोर्ट ने साहिल और मुस्कान के जेल आचरण की रिपोर्ट मंगवाई है। जेल में मुस्कान ने कभी भी बेटी और परिवार से मिलने की इक्छा जाहिर नहीं की थी।


कोर्ट ने साहिल से पूछा था कि तुम कितने पढ़े-लिखे हो। साहिल ने बताया कि उसने बीकॉम किया है और सीए की पढ़ाई करना चाहता है। मुस्कान से जज ने पूछा कि तुम्हें कुछ कहना है। मुस्कान ने कोई जवाब नहीं दिया । जज ने कहा कि अब सजा सुनाते वक्त कनेक्ट क्या जाएगा।

 

बंद कोर्ट रूम में दोनों पक्षों की बहस शुरू हो चुकी है। सभी वकीलों को कोर्ट रूम से बाहर निकाला गया। साहिल और मुस्कान भी वीडियो कांफ्रेसिंग से जुड़े हैं। सजा पर दोनों पक्ष के वकील अपना अपना तर्क रख रहे है। कोर्ट रूम से सभी को बाहर निकाला गया। सजा कितनी हो, इस पर बहस हो रही है।

 

बचाव पक्ष ने 2 बच्चियों का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की मांग की। मुस्कान को बच्चियों का लालन-पालन करना है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि जेल में रहते हुवे मुस्कान ने कभी भी बेटी से मिलने की इक्छा नहीं जाहिर की। लालन-पालन की पहले चिंता क्यों नहीं थी।

 

दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई । तकरीबन 40 मिनट्स तक बहस हुई।

 

वहीं, सौरभ राजपूत की मां ने इस बारे में बात करते हुए भावुक भी हो गई थी। आरोपी मुस्कान और साहिल के लिए लगातार फांसी की मांग कर रहे हैं। सौरभ की मां का कहना है कि नवरात्रि का व्रत है और लगातार माता रानी से आरोपियों के लिए फांसी की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही सौरभ की मां ने कहा कि वह छोटी बेटी को अपने साथ नहीं रखेगी लेकिन सौरभ की बेटी पीहू जो उनके नाना-नानी के साथ है उसको अपने साथ रखना चाहती हैं।

 

 

(जी न्‍यूज ब्‍यूरो)

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अलवर के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला, वेतन-आरोग्य सुविधाओं की मांग

Alwar, Rajasthan:अलवर में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, लंबित मांगों को लेकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन अलवर। कर्मचारियों की लंबित मांगों और सुविधाओं में कथित अनदेखी को लेकर अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की है। प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर महासंघ की ओर से मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कर्मचारियों की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई। ज्ञापन में पीएल (प्रीमियम लीव) सरेंडर के भुगतान में देरी, राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में चिकित्सा सुविधाओं की कमी, आठवें वेतन आयोग के गठन की दिशा में पहल तथा वनकर्मियों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। महासंघ के जिला महामंत्री केसरी सिंह गुर्जर ने बताया कि कर्मचारियों की ओर से पीएल सरेंडर के भुगतान के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन जमा कराए जा चुके हैं, लेकिन चार से छह महीने बीतने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार ज्ञापन देने और बैठकों में मुद्दा उठाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महासंघ ने लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। महासंघ ने आरजीएचएस योजना के तहत चिकित्सा सुविधाओं में आ रही परेशानियों पर भी नाराजगी जताई। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन से हर महीने योजना के लिए अंशदान काटा जाता है, लेकिन अस्पतालों में जांच और उपचार संबंधी सुविधाओं का लाभ लेने में कई तरह की परेशानियां सामने आती हैं। महासंघ ने योजना की व्यवस्थाओं में सुधार कर कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की ज्ञापन में आठवें वेतन आयोग को लेकर भी सरकार से जल्द पहल करने की मांग की गई। महासंघ का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन और भविष्य के आर्थिक लाभों को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। संगठन ने इस दिशा में स्पष्ट पहल करते हुए कमेटी गठित करने की मांग रखी। महासंघ ने जंगलों की सुरक्षा में तैनात वनकर्मियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। संगठन के अनुसार, वनकर्मियों को ड्यूटी के दौरान जोखिम का सामना करना पड़ता है, लेकिन उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाते। महासंघ ने वनकर्मियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने, ड्यूटी के दौरान शहीद हुए कर्मचारियों को शहीद का दर्जा देने और उनके परिवारों को तीन करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की। महासंघ ने सरकार से सभी लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर कर्मचारियों को राहत देने की अपील की।
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चंबल में इनामी डकैत कल्ली गुर्जर का आतंक, पुलिस क्यों नहीं पकड़ पाती?

Morena, Madhya Pradesh:चंबल में फिर लौट रही है डकैतों की दहशत! 60 हजार रुपये का इनामी डकैत कल्ली गुर्जर... आखिर पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों? कहीं जेलर को धमकी, कहीं ट्रांसपोर्टर को धमकी... तो कहीं ग्रामीणों को खुलेआम चैलेंज! सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के दावे, मंदिर परिसर में पहुंचकर धमकी देने और गोलियां चलाने की खबरें... लेकिन सवाल है कि कानून को चुनौती दे रहे इस इनामी डकैत तक पुलिस के हाथ आखिर क्यों नहीं पहुंच पा रहे? चंबल की धरती... जहां कभी डकैतों का खौफ हुआ करता था, वहां एक बार फिर दहशत की चर्चा तेज है। इस बार नाम है 60 हजार रुपये के इनामी डकैत कल्ली गुर्जर का! दावा किया जा रहा है कि कल्ली गुर्जर लगातार मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा है। धमकी भरे वीडियो सामने आ रहे हैं और सोशल मीडिया पर उसकी मौजूदगी की चर्चा है। कभी जेलर को धमकी देने की बात, तो कभी ट्रांसपोर्टर और ग्रामीणों को खुलेआम चुनौती देने के आरोप! सबसे बड़ा सवाल मुरैना पुलिस की कार्रवाई पर है। हाल ही में सिहोनिया थाना क्षेत्र के महेश्वर मंदिर परिसर से जुड़ा एक वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कल्ली गुर्जर ने एक ग्रामीण को चुनौती देने के बाद वहां पहुंचकर धमकी दी और खुलेआम गोलियां चलाईं। अगर ये दावे सही हैं, तो सवाल बेहद गंभीर हैं—क्या इनामी डकैत को पुलिस का जरा भी खौफ नहीं? क्या सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की जांच की जा रही है? क्या पुलिस को उसकी लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी मिल रही है? आखिर 60 हजार का इनामी डकैत पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है? मोबाइल और सोशल मीडिया पर उसकी कथित सक्रियता के बावजूद पुलिस उस तक क्यों नहीं पहुंच पा रही? क्या ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं? चंबल में कानून का इकबाल कायम रहेगा या इनामी डकैत की दहशत यूं ही जारी रहेगी? अब निगाहें मुरैना पुलिस पर हैं। जरूरत है ठोस कार्रवाई की, ताकि आम लोगों के मन से डर खत्म हो और कानून को चुनौती देने वालों तक पुलिस पहुंचे。
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