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65 साल बाद मिठ्नी अपने मायके पहुंची, बेटी ने मिलन कराया
ADASHISH DWIVEDI
Feb 15, 2026 04:36:06
Hardoi, Uttar Pradesh
“65 साल बाद लौटी अपने मायके वो बिटिया जिसका डकैतों के गिरोह ने डाका डालकर 15 साल की उम्र में अपहरण , 80 साल की उम्र पर अगवा बेटी का मायके से हुआ मिलन Anchor हरदोई जिले में एक ऐसी कहानी सामने आई है जो आज की नहीं अपितु छह दशक पहले से शुरू हुई लेकिन आज उम्र के आखरी पड़ाव पर अपनों के मिलने की उम्मीद की आस पर पूरी हुई उस बेटी की और उस अटूट रिश्ते की जो 65 साल बाद भी अपने मायके की मिट्टी को पहचान लेती है । आपको भले ही यह कहानी रंगमच की नाटकीय लगे लेकिन यह कहानी असली है हां उस कहानी की मुख्य किरदार अब अपने उम्र के आखरी पड़ाव पर है और जो सपना उन्होंने कई सालो से देख रखा था उसे पूरा होने में 65 साल जरूर लग गए। Vo 1 इस कहानी की शुरुआत हरदोई के बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र में साल 1961-62 से शुरू होती है। इस थाने के टोलवा आट गांव के रहने वाले बलदेव गांव के बाहर पुरवा में रहते थे, गांव के बाहर तीन चार ही मकान थे उन्ही को गांव के लोग पुरवा कहते थे।उसी पुरवा में वर्ष 1961 -62 में डकैतों के गिरोह ने भीषण डकैती डाली। इस डकैती में डकैतों को बलदेव के पास ऐसा कुछ माल असवाब नहीं मिला तो डकैत बलदेव और उनके बेटे शिवलाल को धारदार हथियार से घायल करके उनकी 15 साल की एक लड़की ‘मिठनी’ को अपने साथ अगवा कर ले गए थे। डकैती की घटना से कुछ दिन पहले मिठनी का विवाह 15 साल की उम्र में सुरसा थाने के पुनुआवर गांव में हुआ था और उसका घटना के अगले महीने गौना होना था। डकैती के दौरान गिरोह के सरदार की नजर मिठनी पर पड़ी डकैतों ने उन्हें परिवार वालो से छीनकर अगवा कर लिया शादी और उसके बाद गौना हो उससे पहले ही मिठनी की जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। डकैतों का गिरोह मिठनी को कई दिनों तक अपने साथ जंगल मे लेकर घूमता रहा डकैतों ने उसकी कई बार पिटाई भी की और उसके बाद अलीगढ़ में अगवा मिठनी को किसी के पास सौप दिया . डकैतों के कब्जे में किसी लड़कीं की अलीगढ इलाके में होने की खबर उसी इलाके के थाना दादों क्षेत्र के समेघा गांव के सोहनलाल यादव को खबर मिली। सोहनलाल यादव पहलवानी करते थे और उनके कई पहलवान मित्र थे और इलाके में उनका दबदबा था जब उन्हें जानकारी हुई तो उन्होंने अपने साथियों के साथ पकड़ रखने वाली जगह पर धावा बोला और मिठनी को छुड़ा लिया। मिठनी देखने मे सुंदर थी लेकिन अपहरण के बाद अपनी सुध बुध खो बैठी थी तो सोहनलाल यादव ने मिठनी से विवाह कर लिया। उनसे उनके आठ बच्चे पांच बेटियां और तीन बेटे हुए और मिठनी ने सोहनलाल के साथ समेघा में नई जिंदगी बसा ली लेकिन उनके मन से मायके की याद कभी नहीं भूली। Vo-2-- मिठनी अब डकैतों से आजाद होकर सोहनलाल के साथ अपना जीवन गुजार रही थी लेकिन अक्सर वो अपने घर में और अपने बच्चों को डकैतों के अपहरण की कहानी बताती थीं और यह चिंता भी जताती थी।डकैती में कोई उनके घर मे बचा है या नही क्योंकि उन्होंने डकैतों को अपने पिता और भाई को मारते हुए देखा था। घर में वो जो बाते उनके जेहन में थी वो बताकर कहती थी कि वो हरदोई जिले की रहने वाली है और उनके घर के पास सकाहा गांव है जहां बड़ा शिव मंदिर है उसके पास में उनका गांव है और मंदिर में साल में दो बार मेला लगता था जिसमे वो जाती थी।उन्हें अपने पिता और भाइयों शिवलाल और सूबेदार के नाम भी याद थे। मिठनी की सबसे छोटी बेटी सीमा यादव जो नोएडा में रहती थी उससे माँ का लगाव बहुत था। करीब अस्सी वर्ष की माँ मिठनी देवी जब उससे अपने मायके के बारे में बता कर याद करती तो उनकी छोटी बेटी ने ठान लिया कि माँ को जितना पता है उसके हिसाब से वो उस मंदिर और बगल के गांव में ले जाकर अपनी माँ को उनके मायके जरूर पहुंचाएगी” जिसके बाद सीमा शुक्रवार को अपनी अस्सी साल की मां मिठनी को लेकर अलीगढ़ से हरदोई पहुंची। हरदोई पहुंचकर उन्होंने सकाहा के शिव मंदिर जाने का रास्ता पूछा और उसके बाद ऑटो से सकाहा शिव मंदिर पहुँच गयी। मंदिर देखते ही मिठनी को पुरानी बातें याद आ गई कि यह उनके मायके वाला ही शिव मंदिर है। उसके बाद खोजबीन करते हुए मिठनी मंदिर से कुछ दूर अपने गांव के पास पहुंची तो उन्हें जगह की कुछ पहचान हुई तो उनकी पुत्री ने मिठनी के भाई शिवलाल और सूबेदार के नाम पूछे तो गांव के लोगों ने बताया की वो दोनों तो नहीं रहे लेकिन उनके परिवार के लोग गांव में रहते थे। जिसके बाद मिठनी और उनकी पुत्री सीमा शिवलाल के मकान में पहुंचे जहां शिवलाल की बहू से उनका सामना हुआ। शिवलाल के घर में भी डकैती और उसमे बहन के अगवा होने की जानकारी पहले से थी। जब मिठनी ने बताया की वो वही है जिसे 65 साल पहले अगवा किया गया था। तो बहू ने अपनी सास छोटी बिटिया को जानकारी दी जिसके बाद मिठनी की भाभी छोटी बिटिया अपनी ननद को घर के अंदर ले गयी और कुछ ही देर में उनके घर रिश्तेदारों का मजमा लग गया और 65 साल का इंतज़ार आंसुओं में बह निकला। फिलहाल मिठनी की बेटी सीमा को इस बात की ख़ुशी है उम्र के आखरी पड़ाव में उसकी माँ अपने मायके पहुँ गयी और जो रिश्तेदार है उनसे मिल ली और उन्हें देख लिया है। अब मिठनी रविवार को वापस अपने घर लौट जायेगी हालांकि मिठनी के परिवार में उसके दोनों भाइयों की कुछ समय पहले मृत्यु हो चुकी है एक भाभी है जिनको इस कहानी के बारे में उनके पति शिवलाल ने बताया था उनके मुताबिक उनकी भाभी को इस बात से सकून मिल गया की डकैती की घटना में उनके पिता और भाई घायल हुए थे जबकि मिठनी की एक छोटी बहन भी उनसे मिलने पहुंची थी फिलहाल घर के लोग 65 साल बाद मिठ्नी को मायके में पाकर खुश है क्योकि किसी को आस नहीं थी की डकैती से जीवित मिलेगी। 65 साल एक जिंदगी का सफर अपहरण से पुनर्जन्म तक की कहानी का किरदार मिठनी अब 80 साल की हैं लेकिन उनके दिल में बसी मायके की तस्वीर कभी धुंदली नहीं हुई। जिसने उनको 65 साल बाद उसी गांव और अपनों के बीच पहुंचा दिया जहां से उन्हें अगवा किया गया था। बाइट -- मिठनी बाइट -- सीमा बेटी बाइट -- मुन्नी भाभी
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