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गोरखपुर की इशिता शर्मा IAS बनीं, चौथे प्रयास में 26वीं रैंक—युवाओं को संदेश
NTNagendra Tripathi
Mar 08, 2026 16:30:18
Gorakhpur, Uttar Pradesh
गोरखपुर की इशिता शर्मा बनीं IAS: चौथे प्रयास में हासिल की 26वीं रैंक, युवाओं को दिया सोशल मीडिया से दूर रहने का संदेश।
लगातार चार साल की मेहनत और असफलताओं के बाद इशिता ने यूपीएससी परीक्षा में देशभर में 26वीं रैंक हासिल कर गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल का नाम रोशन किया है। 6 मार्च को जैसे ही यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ, इशिता के घर और पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। इशिता अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व बड़े भाई को देती हैं।
नागेन्द्र मणि त्रिपाठी ने इशिता शर्मा से उनकी सफलता संघर्ष और युवाओं के लिए संदेश पर खास बातचीत की।
इशिता शर्मा: ये मेरा यूपीएससी में चौथा प्रयास था। पिछले साल मैं इंटरव्यू तक पहुंच गई थी, लेकिन करीब 14 अंकों से मेरा चयन रुक गया था। उससे पहले के दो प्रयासों में मैं प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं कर पाई थी। 2020 से लगातार तैयारी कर रही थी और अब जाकर यह सफलता मिली है, इसलिए काफी अच्छा महसूस हो रहा है।
इशिता शर्मा: मुझे हमेशा से ऐसा क्षेत्र चुनना था जिसमें चुनौतियां हों और समाज के लिए काम करने का अवसर मिले। इसी वजह से मैंने सिविल सर्विस को चुना। इसमें अलग-अलग विभागों में काम करने और नई चीजें सीखने का मौका मिलता है।
इशिता शर्मा: ऑप्शनल विषय चुनना थोड़ा मुश्किल होता है। अगर किसी विषय में आपकी पकड़ मजबूत है तो वही विषय लेना बेहतर रहता है, क्योंकि ऑप्शनल में ही अच्छे नंबर तय करते हैं कि आपका चयन होगा या नहीं।
इशिता शर्मा: मेरी ज्यादातर तैयारी सेल्फ स्टडी से हुई है। सिर्फ ऑप्शनल विषय के लिए ऑनलाइन कोचिंग ली थी। बाकी मैंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और तैयारी को बेहतर बनाया।
इशिता शर्मा: कोचिंग से गाइडेंस मिलती है, लेकिन कई बार दिल्ली के राजेंद्र नगर और करोल बाग जैसे माहौल में रहना छात्रों के लिए काफी तनावपूर्ण हो जाता है। आजकल ऑनलाइन कोचिंग के जरिए भी अच्छी गाइडेंस मिल जाती है।
इशिता शर्मा: मेरे पास खुद का मोबाइल भी नहीं है। पढ़ाई के लिए मैं सिर्फ टैबलेट का इस्तेमाल करती हूं। मेरा मानना है कि सोशल मीडिया पर ज्यादा समय देना पढ़ाई के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
इशिता शर्मा: मेरे मम्मी-पापा और बड़े भाई ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। सिविल सर्विस की तैयारी में कई बार अकेलापन महसूस होता है, लेकिन मेरे परिवार ने मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया।
इशिता शर्मा: सबसे ज्यादा श्रेय मैं अपने बड़े भाई को देना चाहती हूं। उन्होंने हमेशा मुझे गाइड किया और मुश्किल समय में मेरा मनोबल बढ़ाया।
इशिता शर्मा: सोशल मीडिया पर कम समय बिताएं और अपना ध्यान प्रोडक्टिव चीजों में लगाएं। अगर बार-बार असफलता मिल रही हो तो अपनी कमजोरियों को पहचानकर उस पर काम करें। सिर्फ प्रयास करने से नहीं, बल्कि सही रणनीति से सफलता मिलती है।
गोरखपुर की बेटी इशिता शर्मा की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो लगातार संघर्ष के बावजूद अपने सपनों को छोड़ते नहीं और एक दिन मेहनत के दम पर मंज़िल हासिल करते हैं।
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