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SPShyam Prakash TiwariFollow19 Nov 2024, 10:46 am

चार वर्ष पूर्व करोड़ो की लागत से बनी सड़क टूटी लोगों को आवागमन में हो रही असुविधा।

Bangawan, Uttar Pradesh:

गोंडा-मुख्यालय से पैतालीस कि.मी पर स्थित कटुवानाला वासियों को गोंडा पहुंचने के लिए लाइफ लाइन मानी जाने वाली रामापुर मार्ग पर चलना अब आसान नही रहा चार साल पूर्व करोड़ों रुपए की लागत से बनी आठ कि.मी दुबहा से कटुआनाला की सड़क पर सिर्फ गिट्टियां  ही बचे है। पूरी सड़क टूट कर ध्वस्त हो चुकी है। इन टूटे हुए गैप में से निकलने वाले बाइक सवार से लेकर साइकिल सवार कई बार फिसलकर चोट खा चुके है।प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत इस सड़क का निर्माण ग्रामीण अभियंत्रण विभाग द्वारा चार साल पूर्व लगभग तीन करोड़ इक्यासी लाख की लागत से कराया गया था।

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विजय शर्मा ने 2026 ग्लासगो के लिए पदक का लक्ष्य जताया

Noida, Uttar Pradesh:GLASGOW (SCOTLAND): VIJAY SHARMA (HEAD COACH, WEIGHTLIFTING) ON WEIGHTLIFTING PREPARATIONS/ TEAM PERFORMANCE स्कॉटलैंड - 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स - भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम के मुख्य राष्ट्रीय कोच विजय शर्मा कहते हैं, "हमें अपनी वेटलिफ्टिंग में सुधार करने की बहुत ज़रूरत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने के लिए हमें और कड़ी मेहनत करनी होगी। युवा एथलीटों का प्रदर्शन हमें कुछ हद तक संतुष्टि देता है। ज्ञानेश्वरी यादव ने आज अपने कुल स्कोर में छह किलोग्राम का सुधार किया... हमें उम्मीद है कि हम एशियाई खेलों में पच्चीस साल से चले आ रहे मेडल के सूखे को खत्म करेंगे और इस बार निश्चित रूप से मेडल जीतकर लाएंगे...."
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जोधपुर वक्फ रिकॉर्ड में सरकारी बंगले और मंदिरों मामला हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। जोधपुर में दो न्यायाधीशों के सरकारी बंगले, गीता भवन, स्कूल-कॉलेज, चार मंदिरों और अन्य सरकारी भूमि को वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी व जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने मामले को सार्वजनिक महत्व का बताते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, वक्फ मंत्रालय, राजस्व विभाग, जिला कलेक्टर, नगर निगम तथा अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि सार्वजनिक उपयोग की भूमि, सरकारी आवास, धार्मिक स्थल अथवा शैक्षणिक संस्थानों की भूमि के रिकॉर्ड में किसी प्रकार का परिवर्तन हुआ है तो उसकी पूरी वैधानिक प्रक्रिया और तथ्य न्यायालय के समक्ष रखे जाने आवश्यक हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों और उनके संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। मामले में राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पवार उपस्थित हुए। न्यायालय ने सभी संबंधित विभागों को विस्तृत जवाब के साथ मूल रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी पहलुओं पर कोर्ट की सहायता के लिए अधिवक्ता मोती सिंह राजपुरोहित को न्याय मित्र नियुक्त किया गया है। मामले में सामने आए तथ्यों के अनुसार शहर की कई महत्वपूर्ण संपत्तियां, जिनमें दो न्यायाधीशों के सरकारी बंगले, गीता भवन, स्कूल-कॉलेज, चार मंदिर तथा अन्य सरकारी भूमि शामिल हैं, वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज होने का मामला सामने आया है। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड और नगर निगम के रिकॉर्ड में भी अंतर होने की बात सामने आई है, जिससे इन प्रविष्टियों की वैधता पर सवाल खड़े हुए हैं। हाईकोर्ट ने माना कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या सार्वजनिक संपत्तियों का गलत तरीके से दर्जीकरण किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। कोर्ट यह भी जानना चाहती है कि संबंधित प्रविष्टियां किस आधार पर दर्ज की गईं, क्या निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और यदि किसी स्तर पर त्रुटि हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। खंडपीठ ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें सरकार, प्रशासन, वक्फ बोर्ड तथा अन्य संबंधित पक्षों के जवाब और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की सुनवाई की जाएगी。
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NH-168 सिरोही बाईपास: विकल्प-5 अधिक उचित, विकल्प-4 पर हाईकोर्ट नोटिस

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने एनएच-168 सिरोही बाईपास मामले में चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट में सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से अधिवक्ता राजेश शाह द्वारा जनहित याचिका पेश की गई थी। जिसमें बताया गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एनएच-168 के सिरोही बाईपास के लिए जिस एलाइनमेंट विकल्प 4 को मंजूरी दी गई है, वह जनहित के अनुरूप नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत सिरोही मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित विकल्प-5 तकनीकी रूप से अधिक उपयुक्त, सुरक्षित तथा कम लागत वाला है। इसके अलावा यह शहर के नियोजित विकास के अनुरूप होने के साथ-साथ आमजन के लिए अधिक सुविधाजनक भी है। याचिका में बताया गया है कि वर्तमान में स्वीकृत विकल्प-4 घनी आबादी, आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ेगी तथा शहर के नियोजित शहरी विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही शहर के आर्थिक एवं सामाजिक ढांचे पर भी नकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई गई है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि विकल्प-5 न केवल कम लागत वाला है बल्कि इससे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या भी कम है। इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी और आमजन को अधिक सुविधाजनक बाईपास उपलब्ध हो सकेगा। याचिका के अनुसार इस संबंध में विभागीय अधिकारियों एवं केंद्रीय मंत्री को भी वास्तविक तथ्यों से अवगत कराया गया था। अधिकारियों द्वारा तैयार तुलनात्मक रिपोर्ट में भी विकल्प-5 को बेहतर बताया गया, लेकिन इसके बावजूद मंत्रालय ने विकल्प-4 पर कार्य प्रारंभ कर दिया, जो सुशासन के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। याचिका में लागत का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार विकल्प-4 में केवल बाईपास निर्माण पर लगभग 158 करोड़ खर्च होने का अनुमान है, जबकि विकल्प-5 में यह लागत करीब 83 करोड़ है। वहीं पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत विकल्प-4 में 303 करोड़ तथा विकल्प-5 में 249 करोड़ बताई गई है। जनहित याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी, राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव (पीडब्ल्यूडी), जिला कलक्टर सिरोही, प्रोजेक्ट डायरेक्टर नेशनल हाईवे, अधिशासी अभियंता (नेशनल हाईवे डिवीजन) पीडब्ल्यूडी पाली, उपखंड अधिकारी सिरोही तथा उपखंड अधिकारी रेवदर को पक्षकार बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 06 अगस्त को होगी。
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राजस्थान हाईकोर्ट ने 10 वर्षीय अपहरण-दुष्कर्म-हत्या मामले में फांसी सजा आजीवन कारावास में बदली

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने 10 वर्षीय बालिका के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के चर्चित मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी की फांसी की सजा को शेष प्राकृतिक जीवन तक के कठोर कारावास में बदल दिया। हालांकि कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई दोषसिद्धि को पूरी तरह बरकरार रखा और माना कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि आरोपी ने नाबालिग बालिका का अपहरण कर उसके साथ जघन्य अपराध किया और हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। कोर्ट ने इसे अत्यंत गंभीर अपराध माना, लेकिन सजा तय करते समय आरोपी की आयु, सुधार की संभावना तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" सिद्धांत पर भी विचार किया। इसी आधार पर मृत्युदंड को आजीवन कारावास की ऐसी सजा में परिवर्तित किया गया, जिसमें दोषी को शेष प्राकृतिक जीवन तक जेल में रहना होगा। यह मामला वर्ष 2022 में पाली जिले के तखतगढ़ थाना क्षेत्र के गांव का है। विशेष पॉक्सो न्यायालय ने 15 अक्टूबर 2022 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दायर अपील और मर्डर रेफरेंस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि बरकारर रखते हुए केवल सजा में संशोधन किया तथा अन्य सजाओं और जुर्माने को यथावत रखा।
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मंडी डिवीजन में फर्जी चेकिंग मामला: इंस्पेक्टर पर विभागीय कार्रवाई की मांग

Sundar Nagar, Himachal Pradesh:हिमाचल पथ परिवहन निगम के मंडी डिवीजन में फर्जी चेकिंग का एक और मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में आरोप लगाया गया है कि एक इंस्पेक्टर ने धर्मशाला-कुल्लू रूट पर तैनात परिचालक से ड्यूटी के दौरान नहीं बल्कि घर पर बैठकर ही फर्जी चेकिंग भरवाई। वायरल वीडियो के अनुसार संबंधित इंस्पेक्टर ने फोन के माध्यम से परिचालक से वास्तविक चेकिंग किए बिना ही बजौरा स्टेशन के नाम लिखवाकर चेकिंग रिपोर्ट भरवाई।इसके बाद वीडियो में इंस्पेक्टर अगले दिन वे-बिल पर हस्ताक्षर करवाने की बात कह रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित इंस्पेक्टर जिला कुल्लू से है और मामला धर्मशाला-कुल्लू एचआरटीसी रूट का है। वहीं इस बारे में एचआरटीसी डीएम मंडी उत्तम सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो की जांच की जाएगी और यदि संबंधित इंस्पेक्टर दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लायी जाएगी। बता दें कि अभी हाल ही में सुंदरनगर में भी इसी तरह फर्जी चेकिंग भरवाने के मामले में एक इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया था। इस तरह के मामले सामने आने के बाद जहां एचआरटीसी की छवि धूमिल हो रही है, वहीं अपने आप में निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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जोधपुर-पाली-बालोतरा-जसोल की नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए सरकार की कड़ी योजना

Jaipur, Rajasthan:जोधपुर, पाली, बालोतरा और जसोल के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को जोजरी समेत अन्य नदियों में जाने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने संबंधित उद्योग संघों, सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) संचालन समितियों और जिला कलक्टरों को तत्काल प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर सरकार को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि नदियों को प्रदूषण मुक्त रखना सरकार, उद्योगों और स्थानीय प्रशासन सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योगों का संचालन निर्बाध रूप से होना चाहिए, लेकिन पर्यावरण संरक्षण से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उद्योगों का प्रदूषित पानी किसी भी स्थिति में नदियों में नहीं जाना चाहिए। उन्होंने सीईटीपी संयंत्रों का पूरी क्षमता से संचालन सुनिश्चित करने और उनके रखरखाव को मजबूत बनाने के निर्देश दिए, ताकि कहीं भी प्रदूषित पानी का रिसाव न हो। बैठक में जोधपुर, पाली और बालोतरा के उद्योग संघों के प्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल माध्यम से संबंधित जिलों के कलक्टर भी जुड़े। बैठक में राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा ने कहा कि जोजरी सहित क्षेत्र की नदियों में प्रदूषण के मामले को सर्वोच्च न्यायालय भी गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने कहा कि रासायनिक अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं होने पर न केवल नदियां प्रदूषित होती हैं, बल्कि उद्योगों को बंद करने जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। उन्होंने आईआईटी जैसी तकनीकी संस्थाओं की सहभागिता से अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक निस्तारण की आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव कपिल चंद्रावल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से वर्तमान स्थिति और संभावित समाधान की जानकारी दी। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन अभय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग एवं रीको अध्यक्ष शिखर अग्रवाल, प्रमुख सचिव स्वायत्त शासन रवि जैन, रीको प्रबंध निदेशक सुरेश ओला, जोधपुर कलक्टर आलोक रंजन सहित पाली और बालोतरा के कलक्टर, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी, उद्योग संघों और सीईटीपी संचालन समितियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे。
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जयपुर में BRICS बैठक की तैयारियों कीमुख Secretary ने समीक्षा (ब्रिडिंग)

Noida, Uttar Pradesh:deepak जयपुर。 BRICS बैठक की तैयारियों की मुख्य सचिव ने की समीक्षा。 12-13 अगस्त को जयपुर में होगी बैठक。 BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक。 मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने तैयारियों की समीक्षा की。 सभी विभागों को समयबद्ध और समन्वित तैयारियां पूरी करने के निर्देश。 सुरक्षा, ट्रैफिक और प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं पर विशेष फोकस。 विदेशी प्रतिनिधियों के आवागमन और आवास की तैयारियों की समीक्षा。 मीडिया समन्वय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कार्ययोजना पर चर्चा。 राजस्थान की संस्कृति और पारंपरिक आतिथ्य का श्रेष्ठ अनुभव देने के निर्देश。 स्वागत और आतिथ्य की सभी व्यवस्थाएं उच्च गुणवत्ता की हों。 आयोजन के हर पहलू पर नियमित मॉनिटरिंग और त्वरित समाधान के निर्देश。 सभी विभागों को जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने के निर्देश。
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मधुबनी जेजेबी कार्यालय का शुभारंभ प्रधान जिला जज पवन कुमार पांडेय और डीएम आनंद शर्मा ने किया।

Madhubani, Bihar:JUVENILE JUSTICE BOARD,MADHUBANI,BINDU BHUSHAN. मधुबनी किशोर न्याय परिषद के कार्यालय का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार पांडेय और डीएम आनंद शर्मा ने फीता काटकर किया। नवीनीकृत कार्यालय पूर्व के कार्यालय के ऊपर ही फर्स्ट फ्लोर पर शिफ्ट किया गया है।डीएम ने कहा जेजेबी कार्यालय में सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है अब कार्यालय में काफी स्पेश भी है और स्वच्छ वातावरण में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड काम करेगा साथ ही केस का डिस्पोजल भी बढ़ेगा । किशोरों के त्वरित न्याय के लिए जिला प्रशासन कटिबद्ध है और इसके लिए आगे भी जो भी संसाधन की आवश्यकता होगी शीघ्र पूरी की जाएगी।किशोर न्याय बोर्ड में 18 वर्ष तक के विधि विरुद्ध बालकों के मामलों को देखा जाता है।विधि विरुद्ध बालकों के लिए प्रत्येक जिला में तीन सदस्यीय बोर्ड कार्यरत्त है।इस अवसर पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रमोद कुमार महथा, जेजेबी प्रधान दंडाधिकारी अंकित आनंद,सदस्य बिन्दु भूषण ठाकुर,पिंकी मिश्रा,कोर्ट मैनेजर सरफराज आलम सहायक निदेशक नितेश पाठक ,सीपीओ अजय कुमार ,अर्जुन प्रसाद,रविंद्र कुमार, प्रमोद कुमार अनुज कुमार, राजेश कुमार,ऋषि झा सहित कई अधिकारी और कर्मी मौजूद थे। विदित हो कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड मधुबनी को माननीय न्यायालय और जिला प्रशासन द्वारा आपसी समन्वय के तहत बेहतर अवसंरचना उपलब्ध कराया गया है। नये कार्यालय उपलब्ध कराये जाने पर किशोर न्याय परिषद द्वारा प्रसन्नता व्यक्त किया गया।
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