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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जोजरी नदी प्रदूषण पर सरकार ने कदम उठाए
RKRakesh Kumar Bhardwaj
Mar 18, 2026 18:47:08
Jodhpur, Rajasthan
जोधपुर। जोधपुर, पाली और बालोतरा जिलों में बहने वाली जोजरी, बांडी और लूनी नदियों में बढ़ते प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने तेजी से कदम उठाए हैं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करते हुए हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसাইট कमेटी को मजबूत करने के लिए किए गए प्रशासनिक बदलावों और नियुक्तियों की जानकारी दी। कोर्ट ने इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खण्डपीठ के समक्ष हुई। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट को अवगत कराया कि समिति की पूर्व रिपोर्ट में जिन कमियों और संसाधनों की कमी का उल्लेख किया गया था, उन्हें अब दूर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि समिति के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक स्टाफ और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। सरकार ने बताया कि आरएएस अधिकारी मनोज सोलंकी को कमेटी का रजिस्ट्रार-कम-नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है। उनके साथ एक वरिष्ठ विधिक शोधकर्ता और स्टेनोग्राफर की भी नियुक्ति की गई है, ताकि समिति का काम बिना रुकावट आगे बढ़ सके। उल्लेखनीय है कि मनोज सोलंकी इससे पहले जोधपुर उत्तर नगर निगम में उपायुक्त के पद पर कार्यरत थे और उन्हें तत्काल प्रभाव से इस नई जिम्मेदारी पर लगाया गया है। दरअसल, 17 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा समय पर हलफनामा पेश नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई थी और 18 मार्च तक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने त्वरित निर्णय लेते हुए प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए और आवश्यक नियुक्तियां पूरी कीं। इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 16 सितंबर 2025 को हुई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी में बढ़ते प्रदूषण और बिना उपचार के छोड़े जा रहे सीवरेज के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे अन्य संबंधित मामलों के साथ जोड़ा गया, जिनमें औद्योगिक प्रदूषण भी शामिल है। इसके बाद 21 नवंबर 2025 को कोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया था। इस समिति को नदियों की सफाई, प्रदूषण नियंत्रण और पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना तैयार करने का दायित्व सौंपा गया। 10 मार्च 2026 को प्रस्तुत अंतरिम रिपोर्ट में सामने आया कि प्रदूषण के कारण क्षेत्र में फसलों को भारी नुकसान हुआ है और बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ा है। साथ ही, समिति ने संसाधनों की कमी की बात भी रखी थी, जिस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अब सरकार द्वारा उठाए गए इन कदमों के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है, जो इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा। जोजरी सहित इन नदियों में प्रदूषण की वजह से लाखों लोगों सहित पशु पक्षियों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर गंभीरता दिखाई है।
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