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गौ माता ही भारतीय क्रांति और आज़ादी की सूत्रपात: ऋतेश्वर महाराज का दावा
AKAtul Kumar Yadav
Jan 08, 2026 15:37:37
Gonda, Uttar Pradesh
खबर गोंडा से है। जहां राष्ट्र कथा महोत्सव के आज अंतिम दिन सद्गुरु ऋतेश्वरजी महाराज ने गाय पर बोलते हुए कहा कि भारतीय क्रांति की सबसे बड़ी सूत्रपात्र गौ माता ही है और गौ माता ही भारत की आजादी की देन हैं। उन्होंने कहा कि कारतूस में लगी गाय माता की चर्बी ने ही अंग्रेजों को भारत से बाहर निकाल दिया। 1857 की क्रांति का जिक्र करते हुए कहा कि एक मंगल पांडे ने चर्बी का विरोध किया तो हजारों मंगल पांडे खड़े हो गए। अंग्रेजों ने एक मंगल पांडे को फांसी दिया था और विरोध हजारों ने किया। गौ माता को लेकर विस्तार से कथा कही उन्होंने इस दौरान भारत में गौ माता का स्थान क्या है और क्या था इस पर श्रोताओं को गहनता से बताया। सद्गुरु ऋतेश्वरजी महाराज ने कहा कि गौ माता ही भारतीय क्रांति की सबसे बड़ी सूत्रपात थी और अगर देखा जाए तो भारत की आजादी भी गौ माता की ही देन है। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति में कारतूस में मिलाई गई गौ माता की उस चर्बी का विद्रोह ही भारत की आजादी का सूत्रपात्र था। 10 वर्ष के भीतर ही भारत के अधिकतर रियासत अंग्रेजों से मुक्त हो चुके थे। उस समय एक ही मंगल पांडे नहीं था, गांव - गांव में मंगल पांडे हो चुके थे। केवल गौ माता की कृपा थी कि उनकी चर्बी का विरोध उस दौरान अंग्रेजों के ऊपर यह सबसे बड़ा हमला था। ऋतेश्वर महाराज ने भगत सिंह का नाम लेते हुए कहा कि आजादी के दौरान गौ माता की रक्षा के लिए एक बहुत बड़ा संगठन बनाया गया था जिसके सबसे श्रेष्ठ और सक्रिय सदस्य भगत सिंह थे। उन्होंने कहा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि अगर मैं कहीं निकलता हूं और गौ माता मुझे कहीं कटती हुई दिखाई दे जाती है तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं, मुझे घिन्न आती है, अगर शासन सत्ता आयी तो पहला काम मैं यही करूंगा। सद्गुरु ऋतेश्वरजी महाराज ने मंच से कहा कि आखिरी वायसरॉय ने महात्मा गांधी से पूछा था कि अगर आपको स्वराज मिल जाता है तो आप पहला काम क्या करोगे, इस पर गांधी जी ने जवाब दिया था कि भारत में गोवध को प्रतिबद्ध करूंगा, गौ माता यहां पर सुरक्षित रहेगी और यह प्रमाण में है, इतिहास में दर्ज है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की भी यही परिकल्पना थी। उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत में उतनी गाएं थी जितनी भारत की आबादी थी और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारी आबादी की संख्या 140 से 150 करोड़ है और गोवंशों की संख्या नगण्य हो गई है। आजादी के समय एक व्यक्ति पर एक वो वंश थी।
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