गाजीपुर के नवीन स्टेडियम में स्थानीय खिलाड़ियों को प्रवेश पर रोक, खिलाड़ियों में आक्रोश
Ghazipur, Uttar Pradesh:गाजीपुर के नवीन स्टेडियम को लेकर एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है। यहां के निर्माण कार्य के बावजूद अब तक स्टेडियम खेल विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है, और अब स्थानीय खिलाड़ियों को स्टेडियम में प्रवेश करने से रोका जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर खिलाड़ियों में काफी गुस्सा है, क्योंकि खेल विभाग द्वारा नियुक्त कोच कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों को अंदर लेकर उनकी प्रैक्टिस करा रहे हैं।
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देहरादून की सड़कों पर गड्ढे, 15 अक्टूबर तक गड्ढा मुक्त का दावा खोखला
Dehradun, Uttarakhand:स्पेशल एंकर उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए 15 अक्टूबर का समय दिया है। लेकिन प्रदेश के अन्य जनपद तो छोड़िए राजधानी में भी सड़कों के हाल बेहाल हैं। जबकि जिलाधिकारी देहरादून हवा हवाई दावे कर रहे हैं। वीओ मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि 15 अक्टूबर तक प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त किया जाए। लेकिन राजधानी देहरादून में अधिकारियों को शायद मुख्यमंत्री का आदेश अभी तक नहीं मिला है। देहरादून की सड़कों में गड्ढे तो छोड़िए कई जगह सड़कें ऐसी हैं जो कई बार अलग-अलग विभागों द्वारा खोदी गई गई हैं। सड़कों को लेकर लोगों के हाल बेहाल हैं। लोग इतने परेशान है कि उनका कहना है कि बार-बार विभागों से शिकायत कर चुके हैं लेकिन फिर भी कोई उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। देहरादून के मॉडल कॉलोनी के रहने वाले तिलक राज लखानी सड़कों में गड्ढों की वजह से गंभीर रूप से घायल हो गए। तिलक राज लखानी का कहना है की एक्सीडेंट में उनका पांव पूरी तरीके से फैक्चर हो गया है। एक ही सड़क को कई बार खोदा जा रहा है। यही नाराजगी राजधानी के अन्य लोगों की भी है। बाइट तिलक राज लखानी स्थानीय निवासी बाइट राजेंद्र प्रसाद गैरोला स्थानीय निवासी। वीओ देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान का कहना है कि 26 सितंबर से पहले सभी विभागों को कहा गया था कि जिन भी सड़कों में सीवर लाइन या बिजली के अंडरलाइन का काम होना है वह पूरा कर लें । 26 सितंबर के बाद सड़क को खोदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे लोगों के खिलाफ जिलाधिकारी कार्रवाई करने की बात कर रहे हैं। लेकिन जिलाधिकारी के दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। जिलाधिकारी दावा कर रहे हैं कि 15 अक्टूबर से पहले सभी सड़कों के गड्ढे भी भर जाएंगे। लेकिन 9 अक्टूबर को हालत क्या है इन तस्वीरों में आप देख रहे हैं। बाइट आशीष चौहान DM देहरादून वीओ देहरादून में सड़कों के क्या हाल हैं । इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं। एक सड़क में एक एजेंसी काम पूरा करती है उसके बाद सड़क बनती है। फिर दूसरी एजेंसी उसकी खुदाई कर देती है और अपनी योजना का काम शुरू कर देती है। जो सबसे बड़ी चिंता का कारण बन रहा है। राजधानी के सीनियर सिटीजन कहते हैं। की अलग अलग विभाग के अधिकारियों को बार-बार कह चुके हैं। कई बार धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं। लेकिन सुनने को कोई तैयार नहीं है खराब सड़कों की वजह से आए दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं। टिक टैक स्थानीय लोगों के साथ वॉक थ्रू खराब सड़क दिखाते हुएबीजेपी उपाध्यक्ष बोले: मध्यप्रदेश में OBC के अधिकारों की रक्षा होगी
Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल ओबीसी आरक्षण को लेकर बीजेपी उपाध्यक्ष का बयान बीजेपी उपाध्यक्ष ने कहा - ओबीसी की अधिकारों की रक्षा के लिए मध्यप्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है... पहले की सरकार ने आधी अधूरी तैयारी की थी ,इसलिए ऐसा फैसला आया है कांग्रेस ने मंडल कमीशन को सालों तक लटका कर रखा था हम इसकी समीक्षा करेंगे हम OBC वर्ग के अधिकारों की रक्षा करेंगे बाइट- सुरेंद्र शर्मा , प्रदेश उपाध्यक्ष बीजेपी100 करोड़ रिकवरी के नाम पर गौशालाओं के संचालकों में उबाल, राजस्थान में हुंकार
Jaipur, Rajasthan:काशीराम जयपुर। पिंजरापोल गौशाला में गौ अधिकार हुंकार रैली। अनुदान से जुड़ी समस्याओं को लेकर हो रही हुंकार रैली। राजस्थान गौ सेवा समिति से जुड़े संतों और गौपालकों ने कहा, ऑडिट के नाम पर 100 करोड़ रुपए की रिकवरी निकाली गई। इससे गौशाला संचालकों को परेशानी उठानी पड़ रही। गौशालाओं को अनुदान का कैलेंडर निर्धारित करने, आवश्यकता अनुसार भूमि आवंटित करने, गौशालाओं में पानी की आवश्यकता पूर्ति करने सहित आधा दर्जन मांगों को लेकर हो रही सभा। सभा में गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत भी पहुंचे।एमपी में मौसम दो हिस्सों में: धूप बनाम बारिश के आसार
Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल एमपी में दो तरीके का मौसम कहीं धूप तो कहीं बारिश के आसारएक मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट
New Delhi, Delhi:नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर शुक्रवार को सुनवाई दोबारा शुरू हुई। वकील ने मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी। CJI ने कहा कि हम मेट्रो स्टेशन बन्द होने की बात से चिंतित है। हमारी चिंता दिल्ली एनसीआर से आने वाले उन लोगों के लिए है जो हर रोज़ रोजगार के लिए दिल्ली आते हैं। एक बार को वकील की बात समझ आती है कि वो कार से आ सकते है लेकिन जो लोग मेट्रो से आते है, उनकी दिक्कत को भी देखना होगा। हमारी चिंता उन लोगों को लेकर है, जो रोजाना मेट्रो से इस शहर में आते हैं। वकीलों ने बताया कि मेट्रो ही नहीं, दिल्ली आने वाली ट्रेन को भी रद्द कर दिया गया है।
CJI ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को नियम बनाने पूरा अधिकार है। इसमें कोई संदेह नहीं है। अगर आप उपद्रवी भीड़ की आवाजाही को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो ऐसा कर सकते हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आप सब कुछ ठप कर दें और लोगों को आने-जाने के लिए कोई साधन ही न छोड़ें।
CJI ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए एक मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल किया जाए। जितनी ज़रूरत हो, ऑथोरिटी उतनी ही सख्ती बरते, ज़्यादा नहीं।
आज की सुनवाई की बड़ी बातें-
-SC ने सरकार से कहा कि मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगानी चाहिए।
-सरकार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेट्रो/ ट्रेन के संचालन पर वाजिब नियंत्रण लगा सकती है, लेकिन आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
-कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा के लिए उतने ही प्रतिबंध लगाए जाएं, जितने ज़रूरी हों।
-SC ने कहा कि सरकार जो भी एहतियाती कदम उठा रही है, उसके लिए व्यापक प्रचार करना होगा। इसके लिए अखबारों में सरकारी वेबसाइटों पर जानकारी दी जानी चाहिए ताकि लोगो को दिक्कत न हो।
SG तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि इस बारे में अधिकारियों से बात करेंगे कि ट्रेनों और मेट्रो को पूरी तरह बंद करने के फैसले पर फिर से विचार किया जाए।
(नई दिल्ली से जी न्यूज रिपोर्टर अरविंद सिंह की रिपोर्ट)
जंतर-मंतर पर बिना जरूरी मंजूरी के प्रदर्शन करना गैरकानूनी -सुप्रीम कोर्ट
New Delhi, Delhi:नई दिल्ली: दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले दिल्ली आने वाली ट्रेन और मेट्रो पर रोक लगाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को रखा।
सिब्बल ने कहा 10 अक्टूबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो के लगभग 57 स्टेशन बंद किए जा रहे है। दिल्ली आने वाली ट्रेनें को रद्द किया जा रहा हैं। ऐसे में लोग कहीं आ-जा नहीं सकते। मेरे देश में यह क्या हो रहा है? यह तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन है।
वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुरक्षा के लिए CAPF की 221 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। 10 detention सेन्टर तैयार किए जा रहे हैं। OYO होटलों से कहा गया है कि वे नई बुकिंग न लें। YouTubers के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मीडिया से कहा गया है कि वे अपना आई कार्ड साथ रखें। दिल्ली पुलिस लोगों को प्रदर्शन में शामिल न होने की सलाह दे रही है।
इस पर सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
इस बात पर याचिका लगाने वाले वकीलों ने जवाब दिया कि सरकार को समझना होगा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन गैरकानूनी नहीं होता। वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि सरकार प्रदर्शनकारियों को संभाल नहीं पा रही हैं, वे पूरे शहर को बंद नहीं कर सकते। वकील ने बताया कि इंडियन यूथ कांग्रेस ने इजाजत मांगी थी, उन्हें नहीं मिली। इसलिये वो हाई कोर्ट गए।
इस मामले को सुनते हुए जस्टिस बागची ने कहा कि लोगों को संगठन बनाने और उससे जुड़ने का मौलिक अधिकार है, लेकिन कानून के अनुसार इस अधिकार को नियंत्रित भी किया जा सकता है। अगर अधिकारी प्रदर्शन की अनुमति देने में देरी करते हैं या नहीं करते हैं, तो आप कोर्ट आ सकते हैं। लेकिन बिना ज़रूरी मंजूरी के प्रदर्शन करना गैरकानूनी होगा। अगर हमें पता चल जाए कि प्रदर्शन का आयोजन कौन कर रहा है और उसमें कितने लोगों के आने की उम्मीद है, तो हम उसी हिसाब से व्यवस्था का आदेश दे सकते है। अगर हमें यह जानकारी मिल जाए तो हम सरकार से भी कह सकते हैं कि वह उसी के अनुसार कदम उठाए, न कि पूरे शहर पर बड़े पैमाने पर बैन लगा दें।
इस पर सिब्बल ने कहा कि हम याचिकाकर्ताओं से पूरी जानकारी लेकर कोर्ट आएंगे। दो बजे कोर्ट को पूरी जानकारी देंगे।
(दिल्ली से जी न्यूज रिपोर्टर अरविंद सिंह की रिपोर्ट)
