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Shashank RathoreShashank RathoreFollow3 Feb 2025, 02:19 pm
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करौली के स्वामी विवेकानंद पार्क की बदहाली पर नागरिकों की चिंता

Karauli, Rajasthan:स्पेशल रिपोर्ट स्वामी विवेकानंद पार्क करौली स्वामी विवेकानंद पार्क बदहाल... जिम्मेदार कौन? जिला करौली करौली शहर का इकलौता बड़ा सार्वजनिक पार्क... जहां सुबह-शाम सैर करने, व्यायाम करने और बच्चों के साथ समय बिताने पहुंचते हैं। लेकिन आज यही पार्क बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। नगर परिषद कार्यालय से सटा होने के बावजूद स्वामी विवेकानंद पार्क मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। टूटी पगडंडियां, अंधेरा, गंदगी, खराब फाउंटेन, गायब झूले और सुरक्षा के अभाव ने इस पार्क की तस्वीर बदल दी है। हमारी इस विशेष रिपोर्ट में देखिए करौली के स्वामी विवेकानंद पार्क की जमीनी हकीकत。 करीब डेढ़ दशक पहले करौली शहरवासियों को एक सुंदर पार्क की सौगात मिली थी। नगर परिषद के अधीन विकसित किया गया स्वामी विवेकानंद पार्क शहर के लोगों के लिए मनोरंजन, स्वास्थ्य और सैर का प्रमुख केंद्र बना। लेकिन समय के साथ इस पार्क की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आज यह पार्क अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाता नजर आ रहा है。 पार्क में प्रवेश करते ही अव्यवस्थाओं की तस्वीर सामने आने लगती है। लोगों के चलने के लिए बनाया गया रैंप वॉक और पैदल मार्ग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। टूटी हुई टाइल्स और उखड़ा हुआ रास्ता न केवल पार्क की सुंदरता को बिगाड़ रहा है बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ा रहा है। सुबह और शाम सैर करने आने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगो का कहना है कि पार्क में चलने का रास्ता कई जगह से टूट चुका है। कई बार लोग ठोकर खाकर गिर चुके हैं। नगर परिषद को इस ओर ध्यान देना चाहिए。 शहर के बीचों-बीच स्थित इस पार्क में बिजली व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई हुई है। पर्याप्त प्रकाश नहीं होने के कारण शाम ढलते ही पार्क में अंधेरा छा जाता है। अंधेरे के कारण जहां लोगों की आवाजाही कम हो जाती है, वहीं सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ जाती हैं। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और अधिक परेशानी खड़ी करती है。 पार्क की साफ-सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। पार्क के कई हिस्सों में गंदगी के ढेर नजर आते हैं। नियमित सफाई नहीं होने के कारण पार्क की सुंदरता लगातार प्रभावित हो रही है। एक समय हरियाली और स्वच्छ वातावरण के लिए पहचाना जाने वाला यह पार्क अब उपेक्षा का शिकार दिखाई देता है。 पार्क में बैठने के लिए लगाई गई कई बेंच भी टूट चुकी हैं। कहीं सीटें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं पूरी बेंच ही उपयोग के लायक नहीं बची। ऐसे में पार्क में आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं。 युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को ध्यान में रखकर पार्क में ओपन जिम की स्थापना की गई थी। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि ओपन जिम के कई उपकरण गायब हैं और जो मौजूद हैं उनमें से भी कुछ खराब पड़े हुए हैं। परिणामस्वरूप लोगों को उस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा जिसके लिए लाखों रुपये खर्च किए गए थे。 बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूलों की स्थिति भी बेहद खराब है। पार्क में लगाए गए तीन झूले अब केवल पोल के रूप में ही नजर आते हैं जिन पर झूले नहीं है । पोल पर झूले की जंजीर और पट्टी गायब है ऐसे में भला बच्चा झूले तो झूले कैसे और किस पर सुरक्षा व्यवस्था की बात करें तो पार्क में कोई स्थायी गार्ड तैनात नहीं है। निगरानी के अभाव में पार्क की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है और कई उपकरण समय के साथ गायब हो गए। स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण पार्क का रखरखाव भी प्रभावित हो रहा है。 सबसे हैरानी की बात यह है कि यह पार्क नगर परिषद कार्यालय की दीवार से सटा हुआ है। यानी जिम्मेदार अधिकारियों की नजर रोज इस पार्क पर पड़ती है। इसके बावजूद पार्क की बदहाली दूर करने के लिए कोई प्रभावी कदम नजर नहीं आता। शहरवासियों का कहना है कि जब नगर परिषद कार्यालय के सामने स्थित पार्क की यह स्थिति है तो अन्य स्थानों की हालत का सहज अनुमान लगाया जा सकता है。 बारिश के मौसम में पार्क की समस्या और बढ़ जाती है। नगर परिषद कार्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए पानी निकासी का रास्ता पार्क की ओर कर दिया गया। परिणाम यह हुआ कि सड़क पर भरने वाला गंदा पानी सीधे पार्क के भीतर पहुंचने लगा। बरसात के दिनों में पार्क के कई हिस्से जलमग्न हो जाते हैं और वातावरण दूषित हो जाता है。 पार्क में लगे पेड़ों और झाड़ियों की लंबे समय से कटाई-छंटाई नहीं हुई है। कई स्थानों पर झाड़ियाँ इतनी बढ़ गई हैं कि रास्ते संकरे हो गए हैं। अव्यवस्थित हरियाली पार्क की सुंदरता को प्रभावित करने के साथ-साथ अन्य परेशानियों को बढ़ा रही है । पार्क में लगाई गई दूब कई स्थानों पर तो है ही नहीं और कई स्थानों पर इतनी बड़ी है केi लोगों को चलने में जंगली कीड़े मकोड़े के कारण डर लगता है। पार्क के मध्य स्थापित फाउंटेन कभी इसकी सबसे बड़ी पहचान हुआ करती था। रंग-बिरंगी रोशनी और पानी की फुहारें लोगों को आकर्षित करती थीं। लेकिन अब यह फाउंटेन केवल शोपीस बनकर रह गया है। पिछले कई महीनों से फाउंटेन बंद पड़ा है और उसकी कोई सुध लेने वाला नजर नहीं आता。 पार्क में सुलभ सुविधाओं की भी कमी है । महिलाओं व पुरुषों के लिए सुविधा घर तो बनाया गया लेकिन सुविधा घर की स्थिति देखते ही बयां होती है। सुविधा घर में गंदगी के साथ-साथ पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है जिसके चलते इसमें कोई जाना ही नहीं चाहता और यह केवल शोपीस बनकर रह गया है स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर परिषद प्रशासन को पार्क की समस्याओं سے अवगत कराया। मौखिक शिकायतों से लेकर विभिन्न माध्यमों से मांग भी उठाई गई, लेकिन हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया。 लोगों का मानना है कि यदि नियमित रखरखाव और निगरानी की व्यवस्था हो तो पार्क की तस्वीर बदली जा सकती है。 हाल ही में निकाय चुनाव संपन्न हुए हैं और नगर परिषद में शहर की नई सरकार आई है। ऐसे में शहरवासियों की उम्मीदें भी नई हैं। लोग चाहते हैं कि नए सभापति और नगर परिषद प्रशासन स्वामी विवेकानंद पार्क की बदहाली को प्राथमिकता से दूर करें, ताकि यह पार्क फिर से शहरवासियों के लिए आकर्षण और स्वास्थ्य का केंद्र बन सके。 करौली नगर परिषद सभापति सुनील सैनी ने बताया कि उन्होंने park का निरीक्षण किया है हालांकि city government को बने ज्यादा समय नहीं हुआ है और पूरे करौली में सफाई और रोशनी की व्यवस्थाएं की जा रही है उन्होंने पार्क का भी निरीक्षण किया है और निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है जल्द ही इन अवस्थाओं को सुधारा जाएगा वहीं दूसरी ओर करौली नगर परिषद आयुक्त कालूराम ने बताया कि पिछले दिनों निकाय चुनाव के चलते पार्क पर ध्यान नहीं दिया गया लेकिन अब नगर परिषद द्वारा पार्क की स्थिति को सुधारा जाएगा । वहीं जो अव्यवस्थाएं हैं उनको सुधार कर लोगों को विभिन्न सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। एंकर आउट्रो करौली शहर का इकलौता प्रमुख सार्वजनिक पार्क आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। सवाल यह है कि नगर परिषद कार्यालय के बिल्कुल सामने स्थित इस पार्क की समस्याओं का समाधान आखिर कब होगा? क्या नगर परिषद और नया नेतृत्व शहरवासियों की उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा? फिलहाल करौली के लोग इसी इंतजार में हैं कि स्वामी विवेकानंद पार्क एक बार फिर अपनी पुरानी पहचान और रौनक हासिल कर सके।
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चाय की दुकान पर बदमाशों के हमले में भाइयों में से एक गंभीर घायल

Dungarpur, Rajasthan:मामले के अनुसार, यह पूरी वारदात कोतवाली थाना क्षेत्र में शास्त्री कॉलोनी स्थित ओटा में हुई। करावाड़ा निवासी सुनील रोत अपने दो भाइयों, मेहुल और दिनेश के साथ बीती रात अपनी चचेरी बहन मानसी को लेने के लिए डूंगरपुर आए हुए थे। इसी दौरान वे ओटा में एक चाय की दुकान पर चाय पीने के लिए रुके थे। चाय पीते समय ही अचानक कुछ अज्ञात बदमाशों ने उन पर साइकिल की चेन और लट्ठ से हमला बोल दिया। इस अचानक हुए हमले में सुनील रोत गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं, बीच-बचाव में उसके भाई मेहुल और दिनेश को भी मामूली चोटें आई हैं। वारदात के बाद आनन-फानन में घायल सुनील को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उसका उपचार जारी है। फिलहाल कोतवाली थाना पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और फरार अज्ञात बदमाशों की तलाश में जुट गई है。
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Noida, Uttar Pradesh:
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कुरुक्षेत्र में 15–20 दिन की नवजात जंगल में लावारिस, माता-पिता की तलाश शुरू

Kurukshetra, Haryana:कुरुक्षेत्र के शाहबाद में शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 15 से 20 दिन की एक नवजात बच्ची जंगलात क्षेत्र में लावारिस हालत में मिली। क्या इसकी मां का दिल नहीं प्रसिजा इसको जंगलों में छोड़ते। बच्ची के चेहरे पर चोट के निशान भी बताए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। तस्वीरें कुरुक्षेत्र के शाहबाद की हैं, जहां जंगलात क्षेत्र में करीब 15 से 20 दिन की मासूम बच्ची मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। बताया जा रहा है कि महिला प्रवीन बेगम की सबसे पहले बच्ची पर नजर पड़ी। उन्होंने बच्ची को गोद में उठाया और आसपास के लोगों की मदद से उसे संभाला। बच्ची के चेहरे पर चोट के निशान दिखाई दिए, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शाहबाद प्रभारी सुरेंद्र सिद्धूद ने बच्ची को देखा और एंबुलेंस के जरिए उसे सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां बच्ची का उपचार और जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक बच्ची की उम्र करीब 15 से 20 दिन बताई जा रही है। फिलहाल बच्ची को जंगल में छोड़ने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है और मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मासूम बच्ची के इस तरह जंगल में मिलने से आसपास के लोगों में भी चर्चा है। सवाल ये है कि आखिर इतनी छोटी बच्ची को जंगल में कौन छोड़कर गया और इसके पीछे क्या वजह रही। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्ची के माता-पिता या परिजनों तक पहुंचने की है। जांच के बाद ही पूरे मामले کی सच्चाई सामने आ पाएगी।
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नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा को अपूरणीय क्षति

Noida, Uttar Pradesh:दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है। बहुत कम अभिनेताओं में उनके जैसी असाधारण बहुमुखी प्रतिभा और तीव्रता थी। वे अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हँसा सकते थे, फिर भी 'अंकुश', 'प्रहार' और 'क्रांतिवीर' जैसी फिल्मों में उन्होंने एक ऐसा कच्चापन और गंभीरता दिखाई जिसने हर किरदार को यादगार बना दिया। उनकी आवाज़, उपस्थिति और बिल्कुल अलग-अलग दुनियाओं में ढल जाने की क्षमता ने उन्हें सचमुच अद्वितीय बना दिया। नाना पाटेकर केवल एक अभिनेता नहीं थे; वे अपने आप में एक संस्था थे। भारतीय सिनेमा में उनका उल्लेखनीय योगदान पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। उनके परिवार, दोस्तों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। उनकी आत्मा को शांति मिले। ओम शांति!
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नालंदा के देवीसराय चौक पर गोदाम में भीषण आग, दो CNC मशीनें जलकर राख

Pariaunna, Bihar:गुरुवार की सुबह देवीसराय चौक के पास स्थित स्टील लेजर कटिंग मशीन के गोदाम में भीषण आग लग गई। आग लगने की वजह शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। आग के गुब्बार ने देखते ही देखते गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में करीब एक करोड़ रुपये कीमत की दो सीएनसी लेजर कटिंग मशीनें पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। इसके अलावा गोदाम में रखा अन्य सामान भी जल गया। संचालक के अनुसार कुल नुकसान दो करोड़ रुपये से अधिक का अनुमान है। सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। समय रहते आग बुझा लेने से आसपास के अन्य प्रतिष्ठानों को जलने से बचा लिया गया। संचालक सौबेंद्र कुमार ने बताया कि सुबह में स्थानीय लोगों ने आग के गुब्बार को देखकर इसकी सूचना दी। इसके बाद आगलगी की घटना की जानकारी मिली। फायर पुलिस के अनुसार अभी संचालक की ओर से आवेदन नहीं मिला है। आवेदन मिलने के बाद नुकसान का सही आकलन किया जाएगा।
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पटना के 1500 पंडालों में अग्निशमन सुरक्षा के कड़े मानक लागू, पूजा समितियाँ सचेत

Patna, Bihar:एंकर--दुर्गा पूजा को लेकर बिहार अग्निशमन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार पूरे राज्य में करीब 20 हजार पूजा पंडाल बनाए गए हैं। इनमें लगभग 1500 बड़े पंडाल शामिल हैं। सभी पूजा समितियों के लिए अग्निशमन विभाग की ओर से सुरक्षा संबंधी गाइडलाइन जारी की गई है। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों शुक्रवार से पूजा पंडालों का निरीक्षण शुरू करेंगे। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पंडाल का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। फायर डीआईजी मनोज कुमार नट ने बताया कि पटना में करीब 1500 पंडालों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इनमें लगभग 100 बड़े स्तर के पंडाल हैं। इन पंडालों में अग्निशमन विभाग के सभी मानकों का पालन अनिवार्य है। पटना को सुरक्षा व्यवस्था के लिए चार जोन में बांटा गया है और रणनीतिक स्थानों पर दमकल की गाड़ियों की तैनाती की जा रही है। इस बार एक अलग रेस्क्यू टीम भी बनाई गई है, जो आपात स्थिति में केवल रेस्क्यू का काम करेगी। साथ ही जिले के अधिकारियों से लगातार वर्चुअल मीटिंग कर तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल रूम के साथ अस्थायी कंट्रोल रूम भी बनाए जा रहे हैं। पंडालों के लिए प्रमुख सुरक्षा मानक पंडाल की ऊंचाई कम से कम 3 मीटर होनी चाहिए। प्रवेश और निकास के लिए दो गेट होने चाहिए। गेट की ऊंचाई कम से कम 5 फीट होनी चाहिए। प्रशिक्षित वॉलेंटियर्स की व्यवस्था जरूरी है। पंडाल में आपात स्थिति के लिए दो ड्रम पानी, मग आदि रखने होंगे। बिजली के लटकते तारों से पंडाल की पर्याप्त दूरी होनी चाहिए। शॉर्ट सर्किट से बचाव के लिए बिजली की व्यवस्था सुरक्षित होनी चाहिए। पंडाल के अंदर या आसपास आग से संबंधित दुकानें नहीं लगाई जानी चाहिए। अग्निशमन विभाग ने श्रद्धालुओं से पंडाल के अंदर आग जलाने से बचने और हवन-पूजन व दीप जलाने का काम पंडाल के बाहर सुरक्षित स्थान पर करने की अपील की है。 बाइट--मनोज कुमार नट DIG फायर
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