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वोट के चक्कर में प्रधानी का खेल
Rudrapur, Uttar Pradesh
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चिरैयाकोट (मऊ):- मऊ जनपद के चिरैयाकोट थाना क्षेत्र का अल्देमऊ गांव जहां दूसरे की चकाउट जमीन को वहां के ग्राम प्रधान ने नवीन परती बताकर एक दूसरे व्यक्ति को स्थानीय पुलिस की मदद से रूपये के बल पर कब्जा कराने का किया काम।
जानकारी के अनुसार अल्देमऊ गांव में मुख्य सड़क के किनारे सामान्य वर्ग के लोगों का जमीन है, जिसमें गाटा संख्या 1075 जिसका रकबा 51 एयर है जो कि रणजीत आदि के नाम चकआउट दर्ज है, उसी के पास 24 एयर का रकबा सुधाकर, दिवाकर, राम विजय आदि का है। गाटा संख्या 1076 नवीन परती जो मात्र 1 एयर है।
चकआउट खाताधारक रणजीत के परिवार के अनुसार उक्त जमीन पर बांसफोर जाति के लोगों को बसाया गया था जो मड़ई /छप्पर डालकर रहते थे।
ग्राम प्रधान द्वारा गांव के ही श्रीपत राम को मिला कर उक्त जमीन पर कब्ज़ा करने का कुचक्र रच डाला और बांसफोरों का छप्पर गिरा पक्का निर्माण कराने लगा जिसका विरोध बांसफोरों ने किया, पुलिस को सूचना भी दिया, लेकिन स्थानीय पुलिस से न्याय मिलना तो दूर पुलिस ने कमला, रजेन्द्र पुत्रगण साधू बांसफोर को थाने ले जाकर खातिरदारी करने के बाद एक सुलहनामा लिखाकर कि उक्त जमीन से हम दोनों का कोई वास्ता नहीं है और शांति भंग में चालान कर दिया, और श्रीपत राम को उक्त जमीन पर निर्माण करने का अधिकार दे दिया।
इतना ही नहीं राजेन्द्र के लड़के ओमप्रकाश को सरसेना पुलिस चौकी ले जाकर उसे भी प्रताड़ित किया तथा फोन कराकर उसकी माँ से पूछा गया कि वोट किसे दोगी?
साथ ही इस खेल में ग्राम प्रधान और पुलिस की संलिप्तता भी नजर आ रही है।
क्योंकि ग्राम प्रधान द्वारा थाने में बताया गया कि नवीन परती की जमीन सन्1965 से श्रीपत राम के नाम से दर्ज है।
जब कि उक्त जमीन का रकबा मात्र एक एयर है,
वहीं जब उक्त जमीन के मूल खातेदार द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ जब थाने में तहरीर दिया गया तो उसे जबाब मिला कि तुम बाद में आए हो मैं कुछ नहीं कर सकता।
अर्थात थाने में पहले आवो, पहले पाओ...
उक्त प्रकरण में गांव के कुछ प्रबुद्ध वर्ग ने ग्राम प्रधान एवं थाना प्रभारी के मिलीभगत पर सवाल भी उठाना शुरू कर दिया है कि...
क्या मात्र एक एयर की जमीन पर कोई निर्माण हो सकता है ?
किसी और की जमीन पर अवैध निर्माण शुरू कर पुलिस से मिल कर उक्त जमीन का मालिकाना हक मिल सकता है क्या?
जब उक्त चकआउट की जमीन रणजीत आदि के नाम है तो बांसफोरों से जमीन के बाबत सुलहनामा क्यों लिखवाया गया?
क्या गांव में सड़क किनारे किसी की भी जमीन को किसी दूसरे को कब्जा कराया जा सकता है जो पहले थाने पर पहुंच जाय?
ऐसे बहुतेरे सवाल लोगों के जेहन में आ रहे हैं जो स्थानीय पुलिस और ग्राम प्रधान के कुकृत्य शर्मनाक मानकर प्रदेश सरकार की छवि को धूमिल करने का घिनौना खेल मान रहे हैं।
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