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खैरथल तिजारा पंचायत चुनाव: तीसरे चरण के लिए मतदान शुरू, सुरक्षा इंतजाम

Bagheri Kalan, Rajasthan:खैरथल तिजारा जिले में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण को लेकर आज लोकतंत्र का महापर्व मनाया जा रहा है। तिजारा और किशनगढ़बास पंचायत समिति की 40 सीटों के साथ जिला परिषद की 9 सीटों पर मतदान चल रहा है। इस चुनाव में करीब 1 लाख 85 हजार मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। तिजारा क्षेत्र में 93 हजार 350 और किशनगढ़बास में 91 हजार 681 मतदाता चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला तय करेंगे। चुनाव को लेकर प्रशासन की ओर से दोनों पंचायत समितियों में कुल 237 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें तिजारा में 110 और किशनगढ़बास में 127 मतदान केंद्र शामिल हैं। तिजारा के मेवात बेल्ट में पोलिंग बूथ होने पर पुलिस ने कई बूथों पर अतिरिक्त पुलिस जप्ता लगाया हुआ है।
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योगी बोले: राम मंदिर के अद्भुत साकार, सनातन पर विपक्ष के दुष्प्रचार का जवाब

Pilibhit, Uttar Pradesh:एंकर-पीलीभीत के नूरानपुर स्थित श्री शंकर मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के समापन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ पहुचे। सीएम योगी के गुरु भाई महाराज ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ जी महाराज की पुण्य स्मृति में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने न केवल संतों को नमन किया, बल्कि मंच से अयोध्या राम मंदिर, सनातन संस्कृति और विपक्ष के दोहरे चरित्र को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "जो कहते थे परिंदा भी पर नहीं मार सकता, आज वहां भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हैं" कथा व्यासपीठ को प्रणाम करने के बाद मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर उन ताकतों को निशाने पर लिया जिन्होंने दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए और मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाए। योगी आदित्यनाथ ने तीखे लहजे में कहा, "एक दौर वह भी था जब रामभक्तों पर गोलियां चलवाई जाती थीं, अयोध्या में कर्फ्यू लगाया जाता था और सत्ता के घमंड में चूर लोग दंभ भरते थे कि वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। आज वही अयोध्या 500 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा और लाखों बलिदानों के बाद दिव्य और भव्य रूप में दुनिया के सामने जगमगा रही है। आज भक्तों पर पुष्प वर्षा होती है। प्रभु श्रीराम अपने भव्य महल में विराजमान हो चुके हैं, लेकिन सनातन विरोधियों और तुष्टिकरण के सौदागरों की छाती पर आज भी सांप लोट रहा है।"
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आशा कर्मियों की मांगों को लेकर ऐक्टू का धरना, मजदूर नेताओं पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग

Mohmmad SiddiqueMohmmad SiddiqueFollow5m ago
Siswa Babu, Uttar Pradesh:महराजगंज। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) ने आशा कर्मियों की लंबित मांगों को पूरा करने और मजदूर नेताओं पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल के माध्यम से उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में 24 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के आलमबाग थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0156 को निरस्त करने और आशा कर्मियों का उत्पीड़न बंद करने की मांग की गई है। यूनियन के मुताबिक, 7 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री की मध्यस्थता में आशा कर्मियों की 13 सूत्रीय मांगों पर सहमति बनी थी। इसके बाद हड़ताल समाप्त कर दी गई थी। इन सहमतियों को लागू कराने की मांग को लेकर 23 अक्टूबर को लखनऊ के इको गार्डन में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। संगठन का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधिमंडल की मिशन निदेशक और अन्य अधिकारियों से वार्ता हुई, जिसके बाद कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया। इसके बावजूद यूनियन का आरोप है कि 24 अक्टूबर की रात 2:17 बजे ऐक्टू प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही, देवानंद, राजेश सिंह, कमला गौतम और आइसा प्रदेश अध्यक्ष अनीष बुजार समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। संगठन ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इको गार्डन के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। ज्ञापन में आशा कर्मियों के बकाया प्रोत्साहन भुगतान, लंबित पीएलआई और अन्य मदों की धनराशि दीपावली से पहले जारी करने की मांग भी उठाई गई। इसके साथ ही राज्य वित्त से मिलने वाले अंशदान में 4,500 रुपये की बढ़ोतरी, प्रोत्साहन राशि में 50 प्रतिशत वृद्धि, मातृत्व अवकाश, साप्ताहिक और त्योहारी छुट्टियां देने की मांग की गई। यूनियन ने सभी ब्लॉकों में आशा संगिनी और एएनएम के लिए अलग कक्ष या पंचायत भवन में वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी मांग रखी। इस मौके पर अध्यक्ष संगीता, कुसमाती, पूनम सिंह, मीरा देवी, मनोरमा देवी, कुमारी उषा देवी, शकुंतला, लक्ष्मी मद्धेशिया, माधुरी देवी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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पुलिस वाहन को लेकर भागा पगला,,सुरक्षा अब किसके भरोसे,,

Avinash Babu PatelAvinash Babu PatelFollow5m ago
Dabhara, Chhattisgarh:सक्ती पुलिस की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। सक्ती के पुलिस जनसंवाद केंद्र के सामने साइबर थाने की खड़ी सरकारी गाड़ी को एक मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति स्टार्ट कर लेकर भाग गया। इससे पुलिस महकमे में हड़कंप है। सूत्रों के मुताबिक, साइबर थाना की सरकारी गाड़ी के चालक की लापरवाही ऐसी की गाड़ी के अंदर चाबी छोड़ दिया था, बस इसी का फायदा उठाकर विक्षिप्त व्यक्ति गाड़ी लेकर फर्राटा भरने लगा। गाड़ी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही घण्टों में कोरबा जिला पहुंच गई। सवाल यह है कि आखिर इतनी लापरवाही क्यों कि गई, इसे लोगों की जान जा सकती थी। क्या साइबर थाने के जवान इतने लापरवाह हो गए हैं कि सरकारी हथियार और गाड़ी तक सुरक्षित नहीं? अगर गाड़ी में कोई गोपनीय फाइल या हथियार होता तो कौन जिम्मेदार होता,,, पुलिस अधिकारी ने कहा कि अखराभाठा का एक विक्षिप्त व्यक्ति पहले गाड़ी चलाने का काम करता था, कुछ समय बाद उसकी दिमाकी संतुलन बिगड़ है और अब आस पास घूमता रहता है। आज उसी ने सरकारी गाड़ी को स्टार्ट कर लिया और लेकर भाग निकला था, हालांकि गाड़ी को पुलिस ने पकड़ लिया है और बड़ी घटना रोक लिया गया है। नियम क्या कहता है? शासकीय वाहन अधिनियम और पुलिस मैन्युअल के तहत – 1. सरकारी गाड़ी को कभी भी चाबी लगाकर लावारिस नहीं छोड़ा जा सकता। 2. वाहन में हमेशा ड्राइवर या संतरी का होना अनिवार्य है। 3. लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी पर पुलिस रेगुलेशन 771 के तहत विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है।
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बिहार में राजपूत नेताओं की उपेक्षा पर NDA के भीतर उभरे प्रश्न

Chapra, Bihar:बिहार की राजनीति में राजपूत समाज की हिस्सेदारी और राजनीतिक हैसियत को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। एनडीए के भीतर राजपूत नेताओं की भूमिका और उनके प्रभाव को लेकर दिए गए सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी के एक बयान ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। बयान में साफ तौर पर राजपूत समाज की कथित राजनीतिक उपेक्षा और नेताओं की घटती स्वीकार्यता का सवाल उठाया गया है。 रूढ़ी ने कहा कि हम सभी एनडीए का हिस्सा हैं और गठबंधन के प्रत्याशी को जिताने के लिए पूरी मेहनत की गई थी। दुख है कि जदयू के प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सके। उन्होंने प्रत्याशी को एक सुलझा हुआ व्यक्ति बताते हुए कहा कि उनकी हार दुखद है。 राजपूत समाज के किसी प्रत्याशी को संरक्षण देने और चुनाव में मदद करने के आरोपों पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को बार-बार ठाकुर या राजपूत समाज का बताकर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यदि राजीव प्रताप रूडी चाहते तो प्रत्याशी को बैठा सकते थे, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी नहीं हैं。 उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "आज बिहार में किसी भी राजपूत को किसी नेता पर कोई भरोसा नहीं है। आपको क्या लगता है कि भाजपा किसी राजपूत को इतना महत्व दे रही है कि उसके कहने पर कोई दूसरा अपनी उम्मीदवारी छोड़ देगा?" उन्होंने आगे कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी को तय करना होगा कि किसी प्रत्याशी को बैठाने के मामले में किस नेता की बात को कितनी अहमियत दी जाती है। बिहार में किसी राजपूत नेता के कहने मात्र से दूसरा राजपूत प्रत्याशी अपना चुनावी दावा छोड़ देगा, ऐसी स्थिति फिलहाल नहीं है। इस बयान के जरिए राजपूत समाज की राजनीतिक उपेक्षा, नेतृत्व के प्रभाव और गठबंधन के भीतर समाज की वास्तविक भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। खास बात यह है कि यह सवाल विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर से उठाया गया है。
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डुमरिया में सड़क- पुल निर्माण के लिए ग्रामीणों का बड़ा प्रदर्शन

Ghatshila, Jharkhand:झारखंड में विकास के दावों के बीच पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड से एक तस्वीर सामने आई है जो ग्रामीण विकास की हकीकत बयां कर रही है। आजादी के दशकों बाद भी यहां के कई गांव सड़क और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बरसात में नदियां और नाले ग्रामीणों के रास्ते रोक देते हैं। इसी बदहाल व्यवस्था के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आज सड़कों पर दिखाई दिया। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की बेटी और समाजसेवी दुखनी सोरेन के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने रैली निकालकर डुमरिया प्रखंड मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार को चेतावनी देते हुए आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। तस्वीरें पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड मुख्यालय की हैं जहां सड़क और पुल-पुलिया निर्माण की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट हुए। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की बेटी और समाजसेवी दुखनी सोरेन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने रैली निकाली और प्रखंड कार्यालय पहुंचकर प्रशासन तथा राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि डुमरिया की कई पंचायतों में आज भी बुनियादी सड़क और पुल-पुलिया की सुविधा उपलब्ध नहीं है। विकास के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी परेशानी नदी और नालों पर पुल नहीं होना है। हरेबेड़ा से नरसिंहबहाल को जोड़ने वाली नदी पर पुलिया नहीं होने के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानी होती है। वहीं जय नदी और शंख नदी पर भी समुचित पुल की व्यवस्था नहीं होने से आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित होता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। नदी-नाले उफान पर होते हैं और कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से कट जाता है। इसका खामियाजा स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और मजदूरों को भुगतना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों ने केवल पुल-पुलिया ही नहीं बल्कि जर्जर ग्रामीण सड़कों के निर्माण और पूर्व में सड़क निर्माण के दौरान अधिग्रहित की गई रैयती जमीन का उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई। प्रदर्शन के दौरान उस समय ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया जब वे अपनी समस्याएं रखने प्रखंड कार्यालय पहुंचे तो वहां बीडीओ और सीओ मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में प्रखंड कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं दुखनी सोरेन ने राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण विकास के नाम पर जनता को ठग रही है। अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्याओं और उनके दुख-दर्द से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल डुमरिया प्रखंड में भ्रष्टाचार, दलाली और कमीशनखोरी चरम पर है। अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और न ही गांवों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझने की कोशिश करते हैं। उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था में सुधार और ग्रामीणों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। वहीं प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पुल और मुआवजे जैसी बुनियादी समस्याओं को लेकर वे कई बार स्थानीय प्रशासन, सांसद और विधायक तक अपनी फरियाद पहुंचा चुके हैं लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए। जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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रामपाल के अनुयायियों ने यू-ट्यूबर के खिलाफ मोर्चा खुला; धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप

Damoh, Madhya Pradesh:संत रामपाल के अनुयायियों में भड़का आक्रोश, यू ट्यूबर के खिलाफ लामबद्ध.. एंकर/ एमपी के दमोह में संत बाबा रामपाल को लेकर मामला गहराता जा रहा है। बीते हफ्ते दमोह एसपी के पास पहुंचे बाबा रामपाल के अनुयायियों ने एक दूसरे धार्मिक संत शक्ति पुत्र महराज के अनुयायियों द्वारा रामपाल के खिलाफ अनर्गल बातचीत और ए आई के जरिए आपत्तिजनक फोटो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप लगाया था तो अब एक और नया मामला सामने आया है जब रामपाल के अनुयायी एक यू ट्यूबर के खिलाफ लामबद्ध हुए है। एसपी ऑफिस पहुंचे भक्तों ने एक यू ट्यूबर राघवेंद्र राठौर के खिलाफ शिकायत की है कि एआई जनरेटेड फोटो और वीडियो बनाकर ये यू ट्यूबर सोशल मीडिया पर संत रामपाल की छवि को धूमिल कर रहा है जिससे वो आहत है, अनुयायियों के मुताबिक यू ट्यूबर ने फेसबुक पर संत रामपाल के भक्तों को जहां भी मिले मारने के लिए लोगों को उकसाया है और इससे माहौल खराब हो रहा है। लोगों की शिकायत पर पुलिस अधिकारियों ने कोतवाली पुलिस को निर्देशित किया है कि यू ट्यूबर के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए। सीएसपी के मुताबिक मामला दर्ज किया जा रहा है जांच होगी और जो जो इसमें दोषी होंगे उन पर कठोर कार्यवाही की जायेगी। बाइट/ संत रामपाल के अनुयायी गण बाइट/ एच आर पांडे ( सीएसपी दमोह)
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मेरठ में फाइनेंस कंपनी के भीतर गैंबलिंग का काला धंधा: 22 गिरफ्तार

मेरठ में फाइनेंस कंपनी की आड़ में गैंबलिंग का काला धंधा चलता पकड़ा गया।थाना कोतवाली पुलिस और एसपी सिटी और स्वाट टीम ने संयुक्त रूप से एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए बुढ़ाना गेट पुलिस चौकी के पास स्थित जेडी फाइनेंस कंपनी पर छापा मारा है। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 22 लोगों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में नकदी बरामद की है, जिसकी कुल कीमत 4,98,302 रुपए है। इसके अलावा मौके से 22 मोबाइल फोन, 4 कार और 18 मोटरसाइकिल तथा स्कूटी भी बरामद की गई हैं। जांच में सामने आया है कि जेडी फाइनेंस कंपनी के भीतर अवैध रूप से जुआ खेला जा रहा था और क्रिकेट मैचों की बुकियां चलाई जा रही थीं। पुलिस की इस कार्रवाई में शहर के कई नामचीन लोग भी गिरफ्तार किए गए हैं। गिरफ्तारी के समय सभी आरोपी नशे की हालत में पाए गए ।पुलिस इस पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है。
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तेज़ रफ्तार वैगनआर ने मिठास महल रेस्टोरेंट के रैंप से टकराकर नुकसान किया; चालक के खिलाफ मामला दर्ज

Jhajjar, Haryana:बहादुरगढ़ के बालौर चुंगी चौक पर तेज रफ्तार अनियंत्रित वैगनआर कार मिठास महल रेस्टोरेंट के रैंप से जा टकराई। रेस्टोरेंट का रैंप क्षतिग्रस्त हो गया और इन-लाइन काउंटर पर रखा सामान बिखर गया। हादसा के कारण कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि जनहानि नहीं हुई। घटना की CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। कार तेज रफ्तार में बालौर चुंगी चौक से गुजर रही थी; चालक नियंत्रण खो बैठा और कार रेस्टोरेंट से टकराई। मौके पर अफरातफरी मच गई। रेस्टोरेंट को नुकसान हुआ। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई। SHO राकेश कुमार ने कहा कि चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज किया गया है।
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बिहार-केन्द्र MoU: गाद निकालकर नदियाँ साफ, सड़कों के लिए इस्तेमाल

Patna, Bihar:बिहार में अब नदियों के गाद से सड़के बनेंगी। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। दोनों सरकार का उपदेश है नदियों की गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ेगी तथा निकाली गई गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में किया जाएगा। बस इसको लेकर बिहार में राजनीति भी शुरू हो गई RJD के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा 2010 के करीब में उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी थे। इसी तरह की योजना बिहार में लागू करने के लिए एमओयू साइन किया गया था और केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर के नदियों के गाद निकालने और नदियों को जोड़ने की बात सामने आई थी। लेकिन सारे योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। क्योंकि इस तरह के कार्य धरातल पर दिखते नहीं है और खासतौर से जो बिहार में डबल इंजन की सरकार है, यह भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाली, भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाली सरकार है और बिहार में सड़क की हालात जितनी जर्जर हो गई है, उसके संबंध में लोगों का ध्यान भटकाना ही चाहते हैं और जो पुल-पुलिया धंस रहे हैं, जो आपको भागलपुर से लेकर के और अन्य जिलों में जो पुल धंसे हैं, उसके संबंध में बातें नहीं हो, इसलिए यह गाद के मामले को और गाद के माध्यम से सड़कों के निर्माण की बातें कर रहे हैं। यह कहीं ना कहीं सरकार के स्तर से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक नया फार्मूला बाइट एजाज अहमद प्रवक्ता आरजेडी वही जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन इस ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एक विजनरी लीडर के तौर पर नीतीश कुमार जी का गाद प्रबंधन को लेकर अनेक अवसरों पर दिया गया बयान आप देख लें। उन्होंने राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की भी बात की थी। और राज्य सरकार ने भी इस दिशा में काफी महत्वपूर्ण पहल किए हैं, नीतिगत तौर पर सहमति भी बनी है और अब यह अगली छलांग है। गाद प्रबंधन के जरिए जो भी नदियों के अंदर का गाद है, वो बाहर निकाला जाए और उसे केंद्रीय सड़क निर्माण मंत्रालय की ओर से, सड़क मंत्रालय की ओर से जो स्वीकृत परियोजनाओं में, अगर उस गाद का इस्तेमाल किया जाए तो सड़कों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी और नदियों के प्रबंधन की दिशा में भी ये एक सराहनीय पहल है। इसीलिए कुल मिलाकर के यह ऐतिहासिक निर्णय है। वहीं विपक्ष पर निशाना साधा और कहा की लेकिन यह भी हमें स्मरण करना चाहिए कि 2010 उन्होंने कहा था, लेकिन विपक्ष का मतलब यूपीए की सरकार थी और यूपीए की सरकार की मदद नहीं मिल पाई। इस बात को भी विपक्ष को स्वीकार कर लेना चाहिए और प्रायश्चित करना चाहिए।आज अच्छा कार्य जब हो रहा है, तो इसकी सराहना करें। नहीं तो उनके जख्मों पर नमक छिड़कना हम भी जानते हैं। बाइट राजीव रंजन राष्ट्रीय प्रवक्ता जेडीयू बीजेपी के पूर्व विधायक और प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी दिल्ली गए थे और दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी जी से उनकी मुलाकात हुई। उनके साथ एक समझौता कह सकते हैं, एमओयू हुआ है, जिसके तहत जैसे नदियों के अंदर में जो गाद भरता है, जिसके कारण जैसे बहुत सारी परेशानियां उत्पन्न होती है, फसल जलस्तर में कमी और बाढ़ के प्रकोप से निजात पाने जैसी बाबतें बताई गईं। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अजय पासवान ने कहा बिहार सरकार और भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राज्य मार्ग के बीच नदियों के गाद को लेकर जो समझौता हुआ है, क्या इस समझौते में वैज्ञानिक सर्वे हुआ है? गंगा, गंडक एवं बागमती जैसी संवेदनशील नदियों के तलहटी से जो गाद निकाला जाएगा, उससे कटाव किस तरफ होगा? बाढ़ का सर्वेक्षण बाद में कैसे होगा? तो इन सारे प्रबंधन के बगैर अगर एमओयू साइन होता है, तो इसका नुकसान बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में और ज्यादा होगा。
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