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Vineet Kumar AgarwalVineet Kumar AgarwalFollow8 Feb 2025, 06:15 pm

अमरोहाः दिल्ली में भाजपा की जीत पर नगर पालिका अध्यक्ष शशि जैन ने बांटी मिठाइयाँ

Amroha, Uttar Pradesh:

दिल्ली चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत से अमरोहा में भी जश्न का माहौल देखने को मिला। नगर पालिका अध्यक्ष शशि जैन के निवास पर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एकत्र होकर जीत की खुशी में मिठाइयाँ बांटी और जमकर जश्न मनाया। इस मौके पर शशि जैन ने कहा, "दिल्ली की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गारंटी पर भरोसा जताया है। उनकी नीतियों और विकास कार्यों के चलते यह ऐतिहासिक जीत मिली है। भाजपा की इस प्रचंड जीत के लिए दिल्ली के सम्मानित मतदाताओं का हार्दिक आभार।" भाजपा कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ अबीर-गुलाल उड़ाकर जीत की खुशी का इजहार किया। 

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छबड़ा नगरपालिका चुनाव: बड़ा उलटफेर, जमानत जब्त कई वार्डों में कांग्रेस-भाजपा

RMRam MehtaJust now
Baran, Rajasthan:छबड़ा नगरपालिका चुनाव में बड़ा उलटफेर, 7 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस की जमानत जब्त\n\nबारां के छबड़ा नगरपालिका चुनाव में टिकट वितरण के दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष का टिकट कटने के बाद अब परिणामों में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पूर्व पालिकाध्यक्ष सहित कई पूर्व पार्षद चुनाव हार गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई।\n\nछबड़ा नगरपालिका के घोषित परिणामों पर नजर डालें तो चार वार्डों में कांग्रेस और तीन वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है। नियमानुसार डाले गए कुल वैध मतों का 16 प्रतिशत से कम मत प्राप्त करने पर जमानत जब्त मानी जाती है।\n\nमतगणना के बाद आये आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस की जमानत जब्त वाले वार्डो में वार्ड नंबर 6, वार्ड नंबर 10, वार्ड नंबर 12 और वार्ड नंबर 17\nभाजपा की जमानत जब्त वाले वार्डو में वार्ड नंबर 27, वार्ड नंबर 30 और वार्ड नंबर 34\n\nकई वार्डों में जनता ने दोनों ही राष्ट्रीय दलों को नकारते हुए निर्दलीय प्रत्याशी पर भरोसा जताया। स्थिति यह रही कि कई वार्डों में मुकाबला निर्दलीय बनाम निर्दलीय हो गया, जबकि कांग्रेस और भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी तीसरे और चौथे स्थान के लिए संघर्ष करते नजर आए।\n\nइस चुनाव परिणाम ने साफ कर दिया है कि छबड़ा की जनता ने इस बार पार्टी से ऊपर उठकर प्रत्याशी के व्यक्तिगत जनाधार को महत्व दिया है।
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यूपी कन्या सुमंगला योजना: लखनऊ के मुस्लिम परिवारों को मिला ₹25,000 लाभ

Lucknow, Uttar Pradesh:लखनऊ में यूपी सरकार की कन्या सुमंगला योजना का मुस्लिम लोगों को मिला उत्तर प्रदेश में सरकार की कन्या सुमंगला योजना के तहत कई बच्चियों को मुफ्त शिक्षा का लाभ मिल रहा है जिसमे कई मुस्लिम लोगो को भी इसका लाभ मिला है जिसमें लखनऊ के दो मुस्लिम व्यक्तियों ने बताया कि उनकी बच्चियों स्कूल में पढ़ रही है उन्होंने जन सेवा केंद्र से जाकर पता किया की कन्या सुमंगला योजना तहत कैसे फॉर्म भरा और कितना लाभ मिलेगा ₹25000 का लाभ उनको मिला है अगर यह पैसा किस्तों में आता है जैसे-जैसे बच्चों की पढ़ाई होती है बता दे कि इस योजना के लिये बालिकाओं के जन्म से लेकर स्नातक तक कुल ₹25,000 की आर्थिक सहायता 6 चरणों में दी 6 चरणों में मिलने वाली वित्तीय सहायता प्रथम चरण: बालिका के जन्म पर ₹5,000 (एकमुश्त) द्वितीय चरण: एक वर्ष के भीतर टीकाकरण पूरा होने पर ₹2,000 तृतीय चरण: कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹2,000 चौथ्ठा चरण: कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹2,000 पंचम चरण: कक्षा 9 में प्रवेश पर ₹3,000 षष्ठ चरण: स्नातक या डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश पर ₹7,000 मुख्य पात्रता का लाभ मिलता है इस योजना को पाने के लिए और परिवार में कमाने वाले की वार्षिक आय ₹3 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए संतान सीमा: परिवार की अधिकतम दो बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिलता है जुड़वां बच्चों के मामले में नियम अलग हैं सैयद कंबर अब्बास ने बताया कि मेरी दो बच्चियों पढ़ती है उनका इस योजना का लाभ मिला है, वही सैयद मीनल अब्बास कैदी ने बताया कि मेरी परिवार में भी इसका लाभ मिला है
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देहरादून में दो गुटों के बीच झड़प, वायरल वीडियो के साथ FIR दर्ज

Noida, Uttar Pradesh:इस बाइट के साथ वायरल वीडियो भी अटैच है उत्तराखंड | देहरादून के SP प्रमोद कुमार ने कहा, "रविवार रात करीब 11 बजे अस्पताल में दो गुटों के बीच झगड़ा हुआ... लड़ाई का एक वीडियो भी वायरल हुआ। हमने तुरंत मामले का संज्ञान लिया। पुलिस ने तुरंत कानूनी कार्रवाई की और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। सबूतों, गवाहों के बयानों और वायरल वीडियो की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी... अगर देहरादून में कोई भी लड़ाई-झगड़ा करता है, अशांति फैलाता है या किसी गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल होता है, तो पुलिस उन्हें बख्शेगी नहीं। जब भी ऐसी कोई घटना हमारे संज्ञान में आती है, जिसमें वायरल वीडियो भी शामिल हैं, तो तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाती है। मामले को कानूनी प्रक्रिया के जरिए भी सुलझाया जाएगा..."
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बगहा में सिंचाई विवाद से किसान की हत्या, पुलिस ने दो गिरफ्तार

Bagaha, Bihar:पश्चिम चंपारण जिला के बगहा के जूड़ा पकड़ी गांव में मंगलवार को धान के खेत की सिंचाई को लेकर हुआ झगड़ा जानलेवा साबित हुआ। पटवन विवाद में पहले मारपीट फिर फरसा से हमला किया गया लिहाजा खून से लहूलुहान शख्स की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान किसान मैनेजर मांझी के तौर पर हुई है। पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में दो लोगों को फ़ौरन गिरफ्तार किया है जबकि अन्य आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है। दरअसल खेती-बाड़ी के दौरान रामनगर के जूड़ा में चल रहे पटवन कार्य में विवाद ने हिंसक रूप धारण कर लिया लिहाजा पहले तू तू मैं मैं फिर मारपीट और दूसरी बार फरसा से काटकर हत्या हो गई। हमले में मैनेजर गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। बता दें कि मैनेजर परशुराम मांझी के भतीजे थे। इस तरह सिंचाई का पानी रोकने को लेकर शुरू हुई बहस पहले परशुराम पर कथित हमले में बदली और बाद में उनके भतीजे पर जानलेवा हमले के साथ खत्म हुई। रामनगर SDPO सत्येंद्र राम ने कहा है कि मुख्य आरोपी भगेलू चौधरी और उनके बेटे पिंटू चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना में शामिल अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है। रामनगर पुलिस ने सरेआम हुई इस हत्या की घटना की जांच शुरू कर दी है और बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। बाइट - सत्येंद्र राम, SDPO रामनगर
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जगाधरी के बैंक सामने किसान यूनियन ने एनओसी के लिए धरना दिया

Yamuna Nagar, Haryana:जगाधरी के सेक्टर-17 स्थित चोला मंडलम बैंक के सामने भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ने किसान की कथित बैंकिंग समस्या को लेकर धरना शुरू कर दिया है। गांव गग्नहेड़ी निवासी किसान जरनैल सिंह का आरोप है कि करीब 20 लाख रुपये का होम लोन लेने के बाद वह लगातार 17 महीने तक 30 हजार रुपये की किस्त जमा करवाता रहा। इसके बाद बैंक द्वारा बताई गई अतिरिक्त राशि जमा करवाने के बावजूद अब एनओसी देने से इनकार किया जा रहा है। किसान ने बैंक से न्याय की मांग की है। गांव गग्नहेड़ी निवासी किसान जरनैल सिंह के मुताबिक, उसने जनवरी 2025 में चोला मंडलम बैंक से करीब 20 लाख रुपये का होम लोन लिया था। किसान का कहना है कि उसने लगातार 17 महीने तक करीब 30 हजार रुपये प्रतिमाह की किस्त बैंक में जमा करवाई। किसान के अनुसार, इसके बाद बैंक कर्मचारियों ने लोन अकाउंट बंद करने के लिए करीब 14 लाख रुपये और जमा करवाने की बात कही। किसान ने जून 2026 में बैंक में 14 लाख रुपये जमा करवा दिए। इसके अलावा करीब 2 लाख रुपये इंश्योरेंस की किस्त के रूप में भी बैंक द्वारा लिए जाने की बात किसान ने कही। किसान का आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने 14 लाख रुपये जमा होने के बाद 15 दिन में एनओसी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी एनओसी नहीं दी गई। अब किसान से कथित तौर पर 6 लाख रुपये और जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है। इसी को लेकर किसान संगठन ने बैंक के सामने धरना शुरू कर दिया। मौके पर जिला प्रधान संजू गुंदियाना, अंबाला जिला प्रधान मलकीत सिंह, डायरेक्टर मंदीप रोड छप्पर, सुखविंदर, बलजिंदर, पप्पल गुंदियाना और रविंद्र खुब्बड़ सहित किसान संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। बाइट — संजू गुदियाना, जिलाध्यक्ष BKU “ बैंक के कहने पर 14 लाख रुपये जमा करवा दिए और एनओसी देने की बात कही गई थी। अब करीब तीन महीने बाद छह लाख रुपये और मांगे जा रहे हैं। हमारी मांग है कि बैंक पूरे मामले की जांच करे और हमें एनओसी दी जाए।”
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आया नगर में जिम ट्रेनर हत्या: मेहरौली रोड पर चक्का जाम

आया नगर में 15 से 20 राउंड फायरिंग के बाद युवक की हत्या. पीड़ित परिवार ने गुड़गांव महरौली रोड पर बैठकर धरना प्रदर्शन दिया और दिल्ली पुलिस के 'हाय हाय' के नारे लगाए. लोकेशन: आया नगर, गुड़गांव, मेहरौली रोड. मौके पर महिलाओं की भीड़ जमा थी. घटना को लेकर सामने आया कि जिम ट्रेनर की 15 से 20 राउंड गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय नहीं मिला. आज सुबह गुड़गांव में मेहरौली रोड पर जाम लग गया, भारी संख्या में महिलाएं और लोग मौजूद थे और दिल्ली पुलिस के नारे भी लगाए गए. इलाके में डर और सनसनी का माहौल है. तस्वीरों में मेहरौली-गुड़गांव रोड पर रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही दिखी, जिससे लोगों को दिक्कतें आईं. पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है; उन्होंने घरों से निकलकर गुड़गांव महरौली रोड पर चक्का जाम कर दिया.
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राजनांदगांव में जर्जर भवनों का सर्वे शुरू, बड़ी हादसे की चेतावनी

Rajnandgaon, Chhattisgarh:राजनांदगांव शहर में कई ऐसे जर्जर भवन और इमारतें मौजूद हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। इन भवनों की हालत इतनी खराब है कि इनके भरभराकर गिरने का खतरा बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के पास फिलहाल ऐसे जर्जर भवनों की कोई स्पष्ट जानकारी ही नहीं है। हालांकि अब निगम ने इन भवनों का सर्वे कराने की बात कही है। राजनांदगांव शहर लगातार फैल रहा है, आबादी बढ़ रही है और शहर में नई-नई इमारतें खड़ी हो रही हैं। लेकिन इसी शहर में कई ऐसी पुरानी और जर्जर इमारतें भी हैं, जो लंबे समय से बदहाल हालत में खड़ी हैं। इन भवनों की दीवारों में दरारें हैं, कहीं छत कमजोर हो चुकी है तो कहीं भवन का ढांचा ही खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। बारिश और खराब मौसम के दौरान ऐसे भवनों से खतरा और बढ़ जाता है। अगर समय रहते इनकी पहचान कर कार्रवाई नहीं की गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर में मौजूद इन जर्जर भवनों की जानकारी नगर निगम के पास कितनी है? निगम अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल ऐसे भवनों की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब नगर निगम ने शहर में जर्जर भवनों का सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है। नगर निगम आयुक्त के मुताबिक सर्वे के दौरान यह जानकारी जुटाई जाएगी कि शहर में कितने शासकीय और कितने निजी भवन जर्जर हालत में हैं। भवनों की स्थिति का आकलन करने के बाद बेहद खतरनाक भवनों को चिन्हित किया जाएगा। इसके बाद संबंधित भवन मालिकों को नोटिस जारी कर भवन को स्वयं गिराने के निर्देश दिए जाएंगे। यदि भवन मालिक निगम के निर्देशों के बावजूद जर्जर भवन को नहीं गिराते हैं, तो नगर निगम नियमानुसार अपने स्तर पर उसे गिराने की कार्रवाई करेगा। फिलहाल शहरवासियों को इस सर्वे का इंतजार है, क्योंकि जर्जर भवन सिर्फ एक संपत्ति नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम का यह सर्वे कितनी जल्दी पूरा होता है और सर्वे के बाद कितने खतरनाक भवन सामने आते हैं। साथ ही, ऐसे भवनों के खिलाफ कार्रवाई कब शुरू होती है। बाइट।
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अलवर नगर निगम: निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका से तय होगा बहुमत, भाजपा आगे

Alwar, Rajasthan:अलवर में बहुमत से दूर भाजपा-कांग्रेस, निर्दलीय बने किंगमेकर; भाजपा बोर्ड बनाने की दौड़ में आगे अलवर। नगर निगम चुनाव के नतीजों ने अलवर में बोर्ड गठन का गणित बेहद दिलचस्प बना दिया है। 65 वार्डों वाले नगर निगम में भाजपा ने 28, कांग्रेस ने 23, बसपा ने एक और निर्दलीय प्रत्याशियों ने 13 वार्डों में जीत दर्ज की है। बोर्ड बनाने के लिए 33 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में भाजपा बहुमत के आंकड़े से महज 5 कदम दूर है, जबकि कांग्रेस को बहुमत के लिए 10 पार्ष्षदों के समर्थन की जरूरत है। स्पष्ट बहुमत किसी भी दल को नहीं मिलने से अब सत्ता की चाबी 13 निर्दलीय पार्षदों के हाथ में आ गई है। निर्दलीय पार्षदों की बढ़ी राजनीतिक अहमियत के बीच भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार भाजपा करीब 7 से 8 निर्दलीय पार्षदों को अपने खेमे में लाने में कामयाब हो चुकी है। कांग्रेस भी निर्दलीय पार्षदों से संपर्क साधकर अपना गठजोड़ मजबूत करने की कोशिश में है। हालांकि मौजूदा समीकरणों को देखते हुए अलवर नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनने की संभावना फिलहाल ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। यदि वर्ष 2019 के निकाय चुनाव परिणामों से तुलना करें तो भाजपा को इस बार महज एक वार्ड का फायदा हुआ है। 2019 में भाजपा ने 27 वार्ड जीते थे, जबकि इस बार उसके खाते में 28 वार्ड आए हैं। वहीं कांग्रेस ने पिछले चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। 2019 में कांग्रेस ने 19 वार्डों में जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस इस बार 23 वार्डों तक पहुंची है, यानी पार्टी को चार वार्डों का फायदा हुआ है। बसपा ने इस बार एक वार्ड में जीत दर्ज की है, जबकि निर्दलीय और अन्य दलों का प्रदर्शन पिछले चुनाव की तुलना में कमजोर रहा है। 2019 में निर्दलीय व अन्य के खाते में 19 वार्ड थे, जो इस बार घटकर 14 रह गए हैं। हालांकि निर्दलीयों की संख्या कम हुई है, लेकिन इस बार उनकी भूमिका कहीं ज्यादा निर्णायक हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर हैं और ऐसे में 13 निर्दलीय पार्षद ही बोर्ड गठन की दिशा तय करेंगे। जिस दल को पर्याप्त निर्दलीयों का समर्थन हासिल होगा, महापौर पद भी उसी के खाते में जाने की संभावना होगी और नगर निगम बोर्ड पर भी उसी दल का कब्जा होगा。 मेयर पद के नामांकन की अंतिम तारीख 16 सितंबर है, जबकि 18 सितंबर को नाम वापसी के बाद 21 सितंबर को मतदान होगा। भाजपा इस बार अपने पक्ष में पर्याप्त संख्याबल जुटाने के साथ-साथ संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका को भी खत्म करना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी अतिरिक्त निर्दलीय पार्षदों को भी अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर काम कर रही है。 दरअसल, वर्ष 2019 का अनुभव भाजपा के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। उस चुनाव में भाजपा के पास कांग्रेस से ज्यादा पार्षद होने के बावजूद पार्टी बोर्ड बनाने में सफल नहीं हो सकी تھی। भाजपा के ही कुछ पार्षदों की क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस बोर्ड बनाने में कामयाब रही थी। ऐसे में इस बार भाजपा के सामने सिर्फ निर्दलीयों को साधने की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने पार्षदों को भी एकजुट रखने की बड़ी जिम्मेदारी है。 अलवर में फिलहाल निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका में हैं। भाजपा बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच चुकी है और यदि पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट रखते हुए जरूरी निर्दलीयों का समर्थन पुख्ता कर लेती है, तो नगर निगम की सत्ता उसके हाथ में आ सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए चुनौती बड़ी है, लेकिन बोर्ड गठन की दौड़ अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में 21 सितंबर तक अलवर की सियासत में जोड़-तोड़, संपर्क और समर्थन का दौर जारी रहने की पूरी संभावना है।
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