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अलकधाम कॉलोनी में आग से पांच लोग सुरक्षित बाहर निकाले गए, पुलिस ने रेस्क्यू सुरक्षित किया

Ujjain, Madhya Pradesh:नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचे, रहवासियों की मदद से चलाया रेस्क्यू उज्जैन। अलकधाम कॉलोनी में सोमवार देर रात एक मकान में अचानक आग लग गई। आग के दौरान मकान की पहली और दूसरी मंजिल पर पांच लोग फंस गए। सूचना मिलते ही नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे。 घटना रात करीब 1:35 बजे की है। पुलिस को सूचना मिली थी कि अलकधाम कॉलोनी में मोघिया परिवार के मकान में आग लगी है और अंदर लोग फंसे हुए हैं। पुलिस ने तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी और स्थानीय रहवासियों की मदद से रेस्क्यू शुरू किया。 पुलिस जवानों और रहवासियों ने साहस दिखाते हुए मकान में फंसे पांचों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद दमकल की मदद से आग पर काबू पाया गया。 समय पर पुलिस के पहुंचने और स्थानीय लोगों की मदद से किए गए रेस्क्यू के चलते आग में फंसे सभी पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका۔
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स्विगी इंस्टामार्ट को नोटिस: तराना डेयरीज से नमूनों की लैब जांच के लिए भेजे गए; मिलावट पर होगी कार्रवाई

Ujjain, Madhya Pradesh:स्विगी इंस्टामार्ट को नोटिस, तराना की डेयरियों से लिए खाद्य पदार्थों के सैंपल मावा, घी, पनीर, मिठाई और चायपत्ती के नमूने जांच के लिए भोपाल भेजे गए उज्जैन। लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिल सके, इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम लगातार खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को उज्जैन शहर और तराना क्षेत्र में कार्रवाई की गई। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने आगर रोड स्थित स्विगी इंस्टामार्ट का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कुछ कमियां मिलने पर प्रतिष्ठान को नोटिस जारी किया गया है। वहीं, तराना में टीम ने अलग-अलग डेयरी और खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की। इस दौरान श्री सांई राम दूध डेयरी से बूंदी के लड्डू और घी, गोपाल डेयरी से मावा, घी और चायपत्ती तथा श्रीनाथ जी डेयरी से पनीर और चॉकलेट बर्फी के नमूने लिए गए। सभी नमूनों को जांच के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी खाद्य पदार्थ में कमी या मिलावट पाई जाती है, तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खाद्य सुरक्षा विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खाद्य सामग्री खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और पैकिंग आदि की जांच करें। किसी संदिग्ध या खराब खाद्य सामग्री की जानकारी मिलने पर विभाग को सूचना दें। बाइट - बसंत दत्त शर्मा खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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IIT मुंबई के प्रोफेसरों ने सिंहस्थ 2028 के निर्माण स्थल सुरक्षा ट्रेनिंग दी

Ujjain, Madhya Pradesh:IIT मुंबई के प्रोफेसरों ने इंजीनियरों को सिखाए निर्माण स्थल की सुरक्षा के तरीके सिंहस्थ 2028 के निर्माण कार्यों में श्रमिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर दिया जोर, साइट पर कराई गई प्रैक्टिकल ट्रेनिंग उज्जैन। सिंहस्थ 2028 के लिए शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के बीच सुरक्षा को लेकर इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। मंगलवार को मेला कार्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में IIT मुंबई के प्रोफेसर अल्बर्ट थॉमस और प्रोफेसर वरुण कुमार रेजा ने सिंहस्थ से जुड़े इंजीनियरों को निर्माण स्थल पर सुरक्षा के तरीके बताए। प्रशिक्षण में बताया गया कि निर्माण कार्य के दौरान श्रमिकों और कर्मचारियों को किस तरह सुरक्षित रखा जाए। साथ ही निर्माण स्थल पर संभावित खतरों की पहचान करने और हादसों से बचने के उपायों की जानकारी दी गई। इस दौरान इंजीनियरों को केवल कक्षा में प्रशिक्षण देने के बजाय मौके पर ले जाकर भी जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को अलग-अलग समूहों में बांटकर निर्माण स्थल पर मौजूद खतरों की पहचान कराई गई। इसके बाद भैरवगढ़ थाना परिसर में पुलिस हाउसिंग के तहत बन रहे क्वार्टर्स के निर्माण स्थल का निरीक्षण कराया गया। प्रशिक्षण में हेलमेट समेत अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (PPE) के सही इस्तेमाल, सेफ्टी बेल्ट, सुरक्षा संकेतक और श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देने जैसे विषयों पर भी समझाया गया। सिंहस्थ मेला अधिकारी एवं संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की पहल पर आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 के निर्माण कार्यों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। प्रशिक्षण में शामिल इंजीनियरों ने साइट पर जाकर वास्तविक परिस्थितियों को समझने को उपयोगी बताया। सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बड़ी संख्या में निर्माण और अधोसंरचना से जुड़े काम चल रहे हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा के साथ गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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आयुक्त का औचक निरीक्षण: गैरहाजिर कर्मचारियों पर वेतन कटौती की तैयारी

Ujjain, Madhya Pradesh:नगर निगम मुख्यालय में आयुक्त का औचक निरीक्षण, गैरहाजिर कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश विधवा पेंशन की समस्या लेकर पहुंची बुजुर्ग महिला की तुरंत मदद, आधार अपडेट कराया उज्जैन। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय के अलग-अलग विभागों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति और नागरिकों से जुड़े कामों की जानकारी ली। आयुक्त ने समग्र सेल, जन्म-मृत्यु विभाग सहित अन्य शाखाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने की जानकारी सामने आई। आयुक्त ने निर्देश दिए कि बिना अनुमति या उचित कारण के कार्यालय से गैरहाजिर रहने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए। ऐसे کارکنों का वेतन काटने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए। आयुक्त ने कहा कि नगर निगम का कार्यालयीन समय सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक है। इस दौरान सभी अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति जरूरी है, ताकि अपनी समस्या लेकर निगम कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को परेशान न होना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को नागरिकों के काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। विधवा पेंशन की समस्या लेकर पहुंची बुजुर्ग महिला निरीक्षण के दौरान एक बुजुर्ग महिला अपनी विधवा पेंशन की समस्या लेकर आयुक्त के पास पहुंची। महिला ने बताया कि पेंशन की राशि नहीं मिल रही है। आयुक्त ने तुरंत संबंधित अधिकारियों से मामले की जानकारी ली。 जांच में पता चला कि महिला का आधार अपडेट नहीं होने के कारण पेंशन की प्रक्रिया अटकी हुई थी। इसके बाद आयुक्त ने अधिकारियों को महिला का आधार बायोमैट्रिक अपडेट कराने के निर्देश दिए। महिला को आधार केंद्र ले जाकर उसका अपडेट कराया गया। आयुक्त ने अधिकारियों से कहा कि नगर निगम में अपनी समस्या लेकर आने वाले हर व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी जाए और पात्र लोगों के मामलों का नियमानुसार जल्द से जल्द निराकरण किया जाए।
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चिता आंदोलन के 11 दिन: विस्थापितों को मुआवजे की गारंटी को लेकर प्रशासन पर सवाल

Panna, Madhya Pradesh:चिता आंदोलन के 11 दिन पूरे , डूबने लगे घर , लेकिन पीड़ा सुनने कोई नहीं आया , आंदोलन की गति और तेज़ , दिन में चिता , फांसी और मिट्टी आंदोलन , रात में मशाल आंदोलन जारी आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन पर दवाब , पुलिस का भय , नोटिस से डरवाने के आरोप लगाये , पानी बिजली काट दी , गड्ढे का पानी पीने को मजबूर , जल जंगल जमीन सब छीना जा रहा है。 पन्ना कलेक्टर ने कहा 10 अक्टूबर तक बढ़ी हुई पैकेज राशि के भुगतान की तैयारी चल रही है प्रदर्शन स्थल पर संक्रमण फैलने का खतरा एंकर बुंदेलखंड के पन्ना जिले के कुंवरपुर गांव में केन बेतवा लिंक परियोजना , रूंज बांध परियोजना और मझगाए बांध परियोजना केAffected और विस्थापित लोगों का चिता आंदोलन लगातार जारी है। इन 11 दिनों में प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार तीनों परियोजनाओं में 2 हजार से अधिक पात्र परिवारों को विस्थापित किया गया है । और इनको 5 लाख प्रति परिवार पैकेज की राशि का भुगतान किया गया है । लेकिन अभी भी अनेक ग्रामीण इस आंदोलन में शामिल है जिनका दावा है कि उनको पैकेज की राशि , उनके घर और जमीन का सही मुआवजा नहीं मिला है । सिंचित भूमि को असिंचित दिखाकर कम राशि देने के भी आरोप है । आरोप यह भी है कि मुआवजा वितरण में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है और लोगों के हितों की अनदेखी की गई है । ग्राम पंचायत स्तर से लेकर बड़े अधिकारियों ने जमकर लूट खसोट की है । बांध परियोजना में मुआवजा वितरण और बांध निर्माण दोनों में भ्रष्टाचार किया गया है । बाइट --- आंदोलन में शामिल 3 महिलाओं की बाइट (मौके से WT शामिल है सर) वाइस ओवर --- पानी अब गांव में और बसाहट में घुसने लगा है ।प्रभावित लोगों के घर डूबने लगे हैं जिसके चलते लोगों ने अपने घरों का सामान बाहर निकलना शुरू कर दिया है । जिस घर को तिनका तिनका करके जोड़कर बनाया था आज उसी को अपने ही हाथों से एक-एक करके उजाड़ने में लगे हैं। उनके मन में पीड़ा यह है कि उनके घरों का उचित मुआवजा उनको नहीं मिला और अनेकों लोगों को कृषि भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है। इसके बावजूद भी भराव शुरू हो गया है और उन्हें यह जगह छोड़कर मजबूरन जाना पड़ रहा है । (मौके से विजुअल और PTC शामिल है सर) वाइस ओवर --- पन्ना जिले के इस मझगाए बांध परियोजना के मुआवजा वितरण में जो लोग प्रभावित हुए हैं और उन्हें उनका मुआवजा या पैकेज राशि नहीं मिल पाई है। वह खासे परेशान ।है उन्हें इस बात का डर है कि उनका नाम यदि सर्वे में नहीं जुड़ता है तो उनके जीवन में बहुत बड़ी कठिनाई आ जाएगी । वाइस ओवर --- वही इस पूरे आंदोलन के बीच पन्ना कलेक्टर उषा परमार का कहना है कि जमीनी स्तर के अधिकारियों ने गांव में घर-घर जाकर सहमति पत्र लेने का कार्य शुरू कर दिया है। 27 लोगों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि ( 7 लाख 50 हजार प्रति परिवार ) उनके खातों में दे दी गई है । 10 अक्टूबर 2026 तक सभी पात्र हितग्राहियों को साढ़े सात लाख की राशि का भुगतान करने की समय सीमा निर्धारित की गई है । बाइट --- ऊषा परमार जिला कलेक्टर
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गंगा घाट पर मूर्ति विसर्जन के दौरान छह डूबे, दो की तलाश जारी

Barh, Bihar:बाढ़ अनुमंडल के बख्तियारपुर प्रखंड में मूर्ति विसर्जन के दौरान छह लोग गंगा नदी में डूब गए, जिनमें से तीन को बाहर निकाल लिया गया, दो की तलाश जारी है, जबकि एक की डेडबॉडी नदी से बाहर निकाल ली गई है। सभी लोग मूर्ति विसर्जन के लिए बख्तियारपुर के गंगा घाट पर पहुंचे थे। तभी गंगा नदी में मूर्ति विसर्जन के लिए आगे ले जाने के दौरान कुछ लोग नदी की तेज धारा में चले गए। गंगा की तेज धारा में 6 लोग अचानक डूबने लगे। घाट पर मौजूद स्थानीय लोगों ने किसी तरह तीन युवकों को गंगा नदी की तेज धारा से बाहर निकाल लिया। जबकि लोगों की आंखों के सामने दो लोग तेज धारा में बहते हुए दूर निकल गए। स्थानीय गोताखोरों के प्रयास से एक डेड बॉडी को गंगा नदी से बाहर निकाल लिया गया है, जबकि दो की तलाश जारी है। ददौर निवासी साहिल कुमार की डूबने से मौत हो गई, जबकि बलबीर और गोलू की तलाश में स्थानीय गोताखोर लगातार प्रयास में जुटे हैं।
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ग्रेटर नोएडा में फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट शुरू, कचरे से खाद और RDF बनेगा

Greater Noida, Uttar Pradesh:ग्रेटर नोएडा की स्वच्छता की दिशा में प्राधिकरण ने एक बड़ा कदम उठाया है। रोजाना निकलने वाले कूड़े को प्रोसेस करने के लिए लखनावली फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट मंगलवार से शुरू हो गया। दादरी विधायक तेजपाल नागर ने एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस व एसीईओ सुमित यादव और ओएसडी गिरीश कुमार झा की मौजूदगी में इसका शुभारंभ किया। कूड़े के निस्तारण के लिए प्राधिकरण के प्रयासों की सराहना करते हुए दादरी विधायक ने कहा कि ग्रेटर नोएडा को स्वच्छ और सुंदर शहर बनाने के लिए जनमानस का सहयोग बहुत जरूरी है। दरअसल, ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों व गांवों से लगभग 800 टन कूड़ा रोज निकलता है। यह कूड़ा फिलहाल लखनावली में एकत्रित होता है। इस कूड़े का रोजाना प्रोसेस करना जरूरी है। अन्यथा कूड़े का ढेर लग सकता है। ซีईओ एनजी रवि कुमार के निर्देष पर लखनावली में प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण कराया गया। मंगलवार को दादरी विधायक तेजपाल नागर ने इसी फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट का शुभारंभ किया। इस प्लांट पर गीला और सूखा कूड़ा दोनों ही प्रोसेस हो सकेगा। गीले कूड़े से खाद बनेगी और सूखे कूड़े से बने आरडीएफ को सीमेंट कारखानों को दे दिया जाएगा। आरडीएफ का उपयोग सीमेंट बनाने के कार्य में किया जाएगा। बता दें कि लखनावली में लिगेसी वेस्ट को प्रोसेस करने का कार्य पहले से ही चल रहा है। रोजाना निकलने वाले वेस्ट के लिए फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट भी अब शुरू हो गया है। इससे कूड़े को प्रोसेस की समस्या अब खत्म हो जाएगी। इस दौरान वरिष्ठ प्रबंधक सन्नी यादव और प्रबंधक दिव्या चौधरी व अन्य मौजूद रहे।
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ब्राज़ील के Yanomami समुदाय के शाबोनो घर जंगल के खतरे में बची परंपरा

Noida, Uttar Pradesh:A traditional Yanomami communal dwelling in Brazil, possibly belonging to a community living in voluntary isolation. The Yanomami are one of South America's best-known Indigenous peoples. They live in the Amazon rainforest, along the border between northern Brazil and southern Venezuela. Their lives and traditions are closely connected to the forest, its rivers, and the land they have inhabited for generations. One of the most interesting things about their culture is the shabono, a traditional communal dwelling. It is a large circular or polygonal structure with a roof around an open central plaza. Several families live under the same roof, each with their own hearth and hammock area. The open space in the middle is where people gather for ceremonies, dances, feasts, and other community activities. The shabono is built from local wood, vines, and palm leaves. It may be rebuilt or relocated as the materials wear out, gardens change, or resources become harder to find. Traditionally, the Yanomami grow crops such as cassava, bananas, and plantains. They also hunt, fish, and gather food from the forest. Their knowledge of rainforest plants helps them find food, make tools, build homes, and prepare traditional medicines. Although the Yanomami have a long history of contact with outsiders, not all communities have the same relationship with the outside world. Some remain isolated or have very limited contact, often choosing to avoid outsiders because of the risks of disease and violence. Today, the Yanomami face serious challenges, including illegal gold mining, deforestation, mercury pollution, and threats to their ancestral lands. Despite these pressures, their culture and traditional knowledge continue to survive. The Yanomami remind us that the Amazon is more than a vast rainforest. It is also home to Indigenous communities whose knowledge, traditions, and relationship with nature have been passed down through generations.
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MP पुलिस की नई गाइडलाइन: वर्दी में रील, संसाधन पर निजी प्रचार और कमाई पर रोक

Bhopal, Madhya Pradesh:वर्दी में रील बनाई तो होगी कार्रवाई, सोशल मीडिया की कमाई का भी देना होगा हिसाब MP पुलिस में सोशल मीडिया को लेकर सख्ती, DGP कैलाश मकवाणा ने जारी की 24 बिंदुओं की गाइडलाइन मध्य प्रदेश पुलिस में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त गाइडलाइन जारी की है। डीजीपी कैलाश मकवाणा के निर्देश पर जारी 24 बिंदुओं की इस गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों के फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब सहित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। अब वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, सरकारी संसाधनों का निजी प्रचार के लिए इस्तेमाल करना और संवेदनशील सरकारी जानकारी को सोशल मीडिया या AI टूल्स पर साझा करना अनुशासनात्मक कार्रवाई का कारण बन सकता है। वर्दी में रील और फोटो डालना पड़ेगा भारी नई गाइडलाइन के मुताबिक पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद वर्दी अथवा अशोभनीय वेशभूषा में रील, फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। वर्दी का इस्तेमाल व्यक्तिगत छवि बनाने या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए करने पर कार्रवाई हो सकती है। PHQ ने पुलिसकर्मियों को सरकारी वाहन, कार्यालय, आवास, वर्दी और अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए नहीं करने के निर्देश दिए हैं। पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी पुलिसकर्मियों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया से कमाई पर भी नियम गाइडलाइन में सोशल मीडिया से होने वाली कमाई को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। बिना शासन की अनुमति के policeकर्मी सोशल मीडिया के जरिए आय अर्जित नहीं कर सकेंगे। पेड प्रमोशन, स्पॉन्सरशिप या किसी कंपनी, प्रोडक्ट, सर्विस अथवा कारोबार का पैसे लेकर प्रचार करने पर भी रोक रहेगी। जिन पुलिसकर्मियों ने पहले सोशल मीडिया के जरिए आय अर्जित की है, उन्हें निर्धारित अवधि में अपनी कमाई की जानकारी विभाग को देनी होगी। रिपोर्टों के मुताबिक इसके लिए 30 दिन की समयसीमा तय की गई है। परिवार के किसी सदस्य के सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी आय होने की स्थिति में भी इसकी जानकारी विभाग को देने का प्रावधान बताया गया है। सोशल मीडिया के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के इस्तेमाल को लेकर भी पुलिस मुख्यालय ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है। इसी तरह सरकारी गोपनीय जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करने पर भी रोक रहेगी। पुलिस से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के लीक होने की आशंका को देखते हुए यह प्रावधान खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकेशन और संवेदनशील ड्यूटी की जानकारी भी नहीं होगी सार्वजनिक पुलिसकर्मी संवेदनशील ड्यूटी के दौरान अपनी लोकेशन, तैनाती स्थल और ड्यूटी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकेंगे। VIP-VVIP सुरक्षा, महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों या संवेदनशील स्थानों पर तैनाती के दौरान फोटो या सेल्फी पोस्ट करने पर भी रोक रहेगी। हथियारों की ट्रेनिंग, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और पुलिस की अन्य संवेदनशील कार्रवाई से जुड़े फोटो-वीडियो या लाइव प्रसारण को भी सोशल मीडिया पर डालने से मना किया गया है। पीड़ित, आरोपी और गवाह की पहचान उजागर करने पर रोक पुलिस जांच और जनसुनवाई से जुड़े मामलों में पीड़ित, गवाह, शिकायतकर्ता और आरोपी की पहचान सार्वजनिक करने को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। किसी मामले से संबंधित फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर जारी करने से पहले आवश्यक अनुमति लेने और पहचान छिपाने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर महिला और बाल पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाली कोई भी जानकारी साझा नहीं की जा सकेगी। जांच के दौरान ऐसी जानकारी भी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की जा सकेगी, जिससे जांच प्रभावित होने या न्यायालय में चल रहे मामले पर असर पड़ने की आशंका हो। संदिग्ध और आपराधिक छवि वाले लोगों से सोशल मीडिया दूरी गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों को संदिग्ध, असामाजिक छवि या आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के साथ सोशल मीडिया पर संपर्क रखने को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। ऐसे लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, उन्हें फॉलो करने या उनके साथ सोशल मीडिया पर सहयोगात्मक सामग्री साझा करने पर रोक रहेगी। पुलिस की छवि और निष्पक्षता प्रभावित न हो, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों पर सोशल मीडिया टिप्पणी भी नहीं नई गाइडलाइन के तहत पुलिस कर्मी सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों, फैसलों या योजनाओं के खिलाफ टिप्पणी नहीं कर सकेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों या साथी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपमानजनक या गरिमा के विपरीत टिप्पणी करने से भी बचना होगा। सेवा से संबंधित शिकायत या असहमति को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने के बजाय विभागीय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने रखने के निर्देश दिए गए हैं। बिना पुष्टि की जानकारी पर प्रतिक्रिया देने से भी पुलिसकर्मियों को बचने को कहा गया है। निजी अकाउंट के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नहीं पुलिसकर्मी अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट चलाने के लिए सरकारी CUG सिम, इंटरनेट, वाई-फाई, IP एड्रेस या सरकारी ई-मेल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा निजी मोबाइल फोन में विभाग के सरकारी सोशल मीडिया अकाउंट को लॉगिन करने को लेकर भी प्रतिबंध तय किए गए हैं। मकसद सरकारी डिजिटल संसाधनों और निजी सोशल मीडिया गतिविधियों को अलग रखना है। उल्लंघन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई PHQ की गाइडलाइन में साफ किया गया है कि सोशल मीडिया से जुड़े निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। मामले की गंभीरता के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार कार्रवाई में कारण बताओ नोटिस से लेकर निलंबन तक की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। कुल मिलाकर नई गाइडलाइन के बाद मध्य प्रदेश पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया अब सिर्फ निजी मनोरंजन या लोकप्रियता का माध्यम नहीं रहेगा। वर्दी, सरकारी संसाधन, पुलिस की कार्रवाई, संवेदनशील जानकारी और सोशल मीडिया से होने वाली कमाई—इन सभी को लेकर विभाग ने नियम स्पष्ट कर दिए हैं.
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जमुई में नाबालिग घटना के बाद पुलिस-प्रशासन पर उबाल, विधायक ने SP हटाने की मांग

Jamui, Bihar:जमुई: नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद जमुई में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मंगलवार को परिसदन में प्रेसवार्ता के दौरान सहसा विधायक एवं इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आइपी गुप्ता ने पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए एसपी विश्वजीत दयाल को हटाने की मांग की। आइपी गुप्ता ने कहा कि जिले में पुलिस का इकबाल खत्म हो गया है और अपराधियों का मनोबल चरम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और पुलिस अपराध पर अंकुश लगाने में विफल साबित हो रही है। एसपी पर निशाना साधते हुए आइपी गुप्ता ने कहा, 'यहां के एसपी को बांसुरी बजाने से फुर्सत नहीं है.' उन्होंने मुख्यमंत्री से एसपी को वापस बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ हुई घटना ने पुलिस व्यवस्था की पोल खोल दी है। लिहाजा, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी है。
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