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राजस्थान में सड़क हादसों की मौतें रिकॉर्ड ऊँचें पर, तेज़ रफ्तार बड़ी वजह
ASAshutosh Sharma1
Feb 07, 2026 04:16:21
Jaipur, Rajasthan
Jaipur
तकनीक, ई-चालान और निगरानी के बाद भी नहीं थमी सड़क मौतें
राजस्थान में हादसे घटे, लेकिन मौतों का आंकड़ा डराने वाला
राजस्थान सड़क हादसों में मौतों के मामले में देश में छठे स्थान पर
राजस्थान में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार तकनीकी कदम उठाए जा रहे हैं। ई-चालान सिस्टम, हाईवे मॉनिटरिंग, स्पीड कैमरे और ट्रैफिक नियमों की सख्ती के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या पर लगाम नहीं लग पा रही है। वर्ष 2025 में जहां हादसों की संख्या में गिरावट दर्ज हुई, वहीं मौतों का आंकड़ा और बढ़ गया, जो प्रशासन के लिए बड़ी चेतावनी है।आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में प्रदेश में 1,018 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं, लेकिन इसके बावजूद 307 अधिक लोगों की मौत हो गई।यही वजह है कि राजस्थान सड़क हादसों में मौतों के मामले में देश में छठे स्थान पर पहुंच गया है।
राजस्थान में वर्ष 2024 में कुल 24,838 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 11,762 लोगों की मौत दर्ज की गई। वहीं वर्ष 2025 में दुर्घटनाएं घटकर 23,820 रह गईं, लेकिन मृतकों की संख्या बढ़कर 12,069 हो गई।यानी साफ है कि हादसे कम हुए, पर टक्कर की गंभीरता और जान जाने का खतरा पहले से ज्यादा बढ़ गया।
सामने आया है कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवरस्पीडिंग है।वर्ष 2025 में हुई कुल दुर्घटनाओं में से 15,647 हादसे सिर्फ तेज गति के कारण हुए, जिनमें करीब 7,600 लोगों की मौत हो गई।यानि कुल हादसों का लगभग 63 फीसदी हिस्सा तेज रफ्तार से जुड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाई-स्पीड टक्कर में बचने की संभावना बेहद कम हो जाती है।ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चालान की कार्रवाई में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।वर्ष 2025 में प्रदेशभर में 4.5 करोड़ से ज्यादा चालान काटे गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में रिकॉर्ड है। इसके बावजूद सड़क मौतों में कमी नहीं आना, सख्त कानून के साथ व्यवहार में बदलाव की जरूरत को दर्शाता है।
सड़क सुरक्षा की कमजोर कड़ी ट्रैफिक पुलिस में भारी स्टाफ कमी भी है।प्रदेश में ट्रैफिक पुलिस के 7,961 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 3,985 कार्मिक कार्यरत हैं, जबकि 4,035 पद खाली पड़े हैं। सबसे ज्यादा कमी कांस्टेबल स्तर पर है।जबकि ट्रैफिक पुलिस न केवल चालान करती है, बल्कि हादसों का डेटा जुटाकर उसका विश्लेषण कर सरकार को नीतिगत सुझाव भी देती है।
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