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चतरा के तिलकुट से रोजगार बना रहा नया मौक़ा: पलायन रोकने की मिसाल
DPDharmendra Pathak
Jan 03, 2026 04:42:57
Chatra, Jharkhand
चतरा की सोंधी खुशबू: şehir में कदम रखते ही तिलकुट की महक कर रही स्वागत, मकर संक्रांति को लेकर बाजारों में छाई रौनक। उड़िसा और राउरकेला तक डिमांड: कभी बाहर से आता था तिलकुट, आज चतरा से दूसरे राज्यों में भेजी जा रही मिठास। पलायन पर 'तिलकुट' का प्रहार: रांची जाने वाले कारीगरों को अब अपने ही शहर में मिल रहा रोजगार; स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती। स्वाद और सेहत का संगम: ₹240 से ₹300 तक उपलब्ध है शुद्ध तिलकुट; गुड़ और चीनी की वैरायटी ने जीता ग्राहकों का दिल। झारखंड के चतरा जिले के बाजारों में इन दिनों एक अलग ही फिजा है— सोंधेपन की, परंपरा की और उस मिठास की जो सीधे आपके दिल तक पहुँचती है। मकर संक्रांति का पावन त्योहार नजदीक है, और चतरा की सड़कों पर कदम रखने पर तिल और गुड़ के मिलन की खुशबू स्वागत करती है। क्या आप जानते हैं कि जो चतरा कभी तिलकुट के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर था, आज वही चतरा उड़ीसा और राउरकेला जैसे बड़े शहरों का मुंह मीठा कर रहा है? आज की हमारी इस special रिपोर्ट में हम आपको दिखाएंगे कि कैसे चतरा का तिलकुट उद्योग न केवल त्यौहार की रौनक बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी पेश कर रहा है। चतरा शहर के बाजारों में इन दिनों तिलकुट की महक घुल जाती है, जो त्योहार की तैयारी पूरी होने का संदेश देती है। चतरा के स्टालों पर स्थानीय लोगों के साथ राहगीर भी इस मिठास का लुत्फ उठा रहे हैं।
वी/ओ: तिलकुट व्यवसायी सन्नी लाल बताते हैं कि चतरा के व्यापारिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव आया है। वे कहते हैं, पहले हम बाहर के शहरों से तिलकुट मंगाकर बेचते थे, लेकिन आज स्थिति उलट है: अब चतरा से तिलकुट बाहर के शहरों में भेजा जा रहा है। उनके अनुसार, उनके यहाँ बने तिलकुट की भारी डिमांड न केवल चतरा के हर प्रखंड में है, बल्कि झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ उड़ीसा, राउरकेला और हजारीबाग तक भी यहां से खेप भेजी जा रही है। यह चतरा के लिए गौरव की बात है कि यहाँ का स्वाद अब सरहदों के पार अपनी पहचान बना रहा है। इस उद्योग ने पलायन के जख्म पर मरहम लगाने का काम किया है—स्टेफन सहित कई कारीगर अब खुद अपने शहर में रोजगार पा रहे हैं। यह reverse migration चतरा की बदलती तस्वीर का सबसे सुखद पहलू है।
चतरा के बाजारों में तिलकुट की कई किस्में उपलब्ध हैं। मुख्य रूप से चीनी, गुड़ और खोया से तैयार ये तिलकुट शुद्धता की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं। कीमत 240 रुपये प्रति किलो से शुरू होकर 300 रुपये प्रति किलो तक है। इसके साथ तिल-गुड़ के लड्डू, गजक, सोंधी रेवड़ी और तिलवा की भी भारी मांग है। दुकानदार बताते हैं कि गुड़ से बने उत्पादों की मांग इस बार स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण अधिक देखी जा रही है। मकर संक्रांति एक दान और प्रसाद का पर्व है, परंपरा के अनुसार चूड़ा, दही और तिलकुट का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इन त्योहारों की तैयारी के साथ चतरा के बाजारों में रौनक बढ़ी है। तिलकुट की सोंधी खुशबू न केवल खाद्य पदार्थ की महक है, बल्कि यह चतरा की बढ़ती कदमों और समृद्ध होती परंपरा की गूँज है।
अगर आप इस मकर संक्रांति पर शुद्धता और स्वाद की तलाश में हैं, तो चतरा के बाजार आपका इंतजार कर रहे हैं। यहाँ का तिलकुट न केवल आपका मुंह मीठा करेगा, बल्कि उस मेहनत की कहानी भी सुनाएगा जो एक कारीगर ने अपने शहर में रहकर लिखी है। उम्मीद है कि चतरा की यह सोंधी खुशबू पूरे झारखंड और देश में इसी तरह फैलती रहेगी।
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