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भरोखां सरकारी स्कूल में शिक्षकों-ग्रामीणों के सहयोग से कायाकल्प, वैन और डिजिटल लाइब्रेरी
VKVIJAY KUMAR
Jan 27, 2026 02:17:03
Sirsa, Haryana
एंकर रीड सरकारी सुविधाएं न होने का रोना रोकर अपने कर्तव्यों से दूर भागने वाले शिक्षकों को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भरोखां के शिक्षाकर्मी आइना दिखा रहे है। भरोखा स्कूल के शिक्षा कर्मियों ने विभाग के फंड पर आश्रित न रहकर बच्चों की सुविधाओं पर अपनी सैलरी से पैसा लगाया। ग्रामीणों को अपनी सोच बताकर बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए शिक्षकों ने जन सहयोग मांगा। ग्रामीणों को प्रेरित कर उनका सहयोग लेकर यहां के अध्यापकों ने स्कूल की सूरत ही बदलकर रख दी है। यह सब क्रांतिकारी बदलाव आया है इसी गांव से, इसी विद्यालय में पढ़कर और अब यहाँ प्रधानाचार्य बनकर आए वेदप्रकाश रोज ने स्कूल की काया ही पलट दी है। वेद प्रकाश ने 1988 में इसी विद्यालय से दसवीं पास की थी। 3 दिसंबर 1997 को गांव भावदीन में वेद प्रकाश रोज ने गणित अध्यापक के रूप में ज्वाइन किया। 17 अगस्त 2005 को मॉडल संस्कृति स्कूल सरसा में नियुक्ति मिली। दो साल गांव पनिहारी स्कूल में भी सेवाएं दीं। 20 नवंबर 2024 को प्रधानाचार्य बनकर भरोखां स्कूल लौटे। उसी दिन गांव के मौजिज लोगों और स्कूल स्टाफ के साथ बैठक की, जिसमें स्कूल में डिजिटल लाइब्रेरी, ग्लोब, मिनी जल घर बनाने और शिक्षा के स्तर को सुधारने पर चर्चा हुई। जिसका परिणाम अब सबके सामने है। वेदप्रकाश रोज बताते है कि उनका सपना है कि उनका स्कूल जिले का सबसे अच्छा स्कूल बने।
प्रधानाचार्य वेदप्रकाश रोज बताते हैं कि सरकारी संस्थान से ही पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने बताया कि 1989 में भरोखां स्कूल सीनियर सेकेंडरी बना। 20 नवंबर 2024 को वे इस विद्यालय में प्रधानाचार्य बनकर आए है। वे लगातार जन सहयोग से स्कूल के आधारभूत ढांचे में सुधार के लिए कार्य कर रहे है। वेदप्रकाश रोज का दावा है कि उनके विद्यालय में बनने वाला मिड-डे-मील की पूरे प्रदेश में मिसाल दी जाती है। यहां विद्यार्थियों को मिड-डे-मील खाने के लिए डाइनिंग टेबल की सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में अब तक पिछले साल के मुकाबले 100 विद्यार्थियों ने अधिक दाखिला लिया है।
11 लाख रुपये जुटाकर सीसीटीवी से लैस लाइब्रेरी, भौगोलिक पार्क और मिनी जल घर का निर्माण करवा रहे हैं।
स्कूल के विकास के लिए 20 से अधिक स्टाफ और ग्रामीणों ने 11 लाख रुपये चंदा एकत्र किया। स्कूल में डिजिटल लाइब्रेरी, सोलर सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, चार अत्याधुनिक शौचालय और शुद्ध पेयजल के लिए जल मंदिर बनाया गया है। लाइब्रेरी में डबल इंटरनेट कनेक्शन दिया गया है। 60 छात्रों के बैठने की क्षमता वाली यह एसी लाइब्रेरी हाई स्पीड इंटरनेट, आरामदायक फर्नीचर, इन्वर्टर बैकअप और सुरक्षा के लिए डिजिटल कैमरों से लैस है। जिसमें स्कूल के अलावा कॉलेज की छात्राएं भी अध्ययन कर सकेंगी। इसके अलावा विद्यालय परिसर में भौगोलिक पार्क भी बनाया जा रहा है, जिसमें हैदराबाद से घास मंगवाकर लगाया है। अब पार्क में बड़ा ग्लोब लगाया जाएगा, जिसे लुधियाना से मंगवाया जाएगा। इससे विद्यार्थी संसार के मानचित्र को देख पाएंगे। स्कूल का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा, ताकि अभिभावक खुद बच्चों का दाखिला करवाने आएं। गांव वालों ने अपनी मेहनत की कमाई से स्कूल को 7.5 लाख रुपये दिए। कुल 11 लाख रुपये जुटाए गए। स्कूल के प्रिंसिपल का सपना है कि इसे बेहतरीन बनाया जाए। वे खुद दो से तीन क्लास में गणित पढ़ाते हैं।
प्रधानाचार्य वेदप्रकाश रोज बताते है उनके विद्यालय में आस-पास के गांव बरवाली, मुसाहिब वाला, दड़बी व पनिहारी तक बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते है। लेकिन स्कूल में बच्चों को आने-जाने में काफी परेशानी आ रही थी। इसलिए मौजूदा शैक्षणिक सत्र से स्कूल स्टाफ की ओर से अपनी सैलरी से पैसा एकत्रित कर एक स्कूल वैन खरीदी गई और वैन में तेल इत्यादि भी स्कूल स्टाफ द्वारा डलवाया जा रहा है। यह स्कूल वैन बच्चों को निशुल्क उपलब्ध कराई गई है।
वोल सिरसा के गांव बरुवाली सहित 15 ढाणियों की करीब 40 बेटियां स्कूल की पढ़ाई जारी रख सकेंगी। भरोखां गांव के स्कूल स्टाफ और पंचायत ने मिलकर बेटियों के लिए वैन सेवा शुरू की है। इसका मकसद बेटियों को घर से स्कूल तक सुरक्षित लाना और ले जाना है। कई पेरेंट्स पढ़ाई का खर्च उठाने को तैयार थे। लेकिन स्कूल की दूरी बेटियों की पढ़ाई में बाधा बन रही थी। कुछ पेरेंट्स बेटियों की पढ़ाई छुड़वाने की सोचने लगे थे। यह देख स्कूल स्टाफ ने चंदा इकट्ठा कर एक वैन खरीदी। ग्राम पंचायत ने वैन के डीजल का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली। बेटियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ सकें, इसलिए स्कूल के प्रिंसिपल वेद प्रकाश रोज ने खुद वैन चलाने का फैसला किया। अब पेरेंट्स को बेटियों की स्कूल आवाजाही और सुरक्षा की चिंता नहीं रहेगी।
वोल प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में पढ़ने आए बच्चों ने बताया कि प्राइवेट स्कूल में मोटी फीस भरने को उनके माता पिता मजबूर थे पढ़ाई ज्यादा नहीं होती थी लेकिन गांव भरोखां के सरकारी स्कूल में अच्छी पढ़ाई होती है यहाँ स्कूल का महोला काफी अच्छा है।
बाइट स्कूली बच्चे।
वोल वही स्कूल स्टाफ का भी मानना है कि उनके ज्वाइन करने से पहले स्कूल की दिशा अच्छी नहीं थी और उन्होंने स्कूल के आने के बाद प्रिंसिपल के सहयोग से स्कूल में काफी काम करवाए जिसकी बदौलत अब स्कूल की दिशा अच्छी हुई है।
बाइट स्कूल स्टाफ।
महिला टीचर सुमन बाला भी प्राइवेट संस्थान को छोड़कर अब सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए आई है। प्राइवेट संस्थान की बजाए सरकारी स्कूलों में काफी अच्छी सुविधाएं देखने को मिल रही है। उनके गांव के स्कूल में काफी अच्छा माहौल है जिसके चलते बच्चे भी काफी उत्साहित होकर पढ़ाई करते रहते है।
बाइट सुमन बाला , टीचर।
बाइट सरोज बाला , टीचर।
बाइट अंकु रानी , टीचर।
बाइट जितेंद्र गिरी , टीचर।
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ADAbhijeet Dave
FollowJan 27, 2026 03:33:310
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RCRAJVEER CHAUDHARY
FollowJan 27, 2026 03:33:090
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KKKRISNDEV KUMAR
FollowJan 27, 2026 03:32:59Noida, Uttar Pradesh:मुसलमानों की एंट्री बैन कर दी गई है
ये बहुत अफ़सोस नाक है
भारत में एक अजीब सोच के लोग पैदा हो गए है
भारत के शांत माहौल को अशांत करते है
मौलाना शाहबूदीन बरेलवी
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MTMadesh Tiwari
FollowJan 27, 2026 03:32:410
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SKSunny Kumar
FollowJan 27, 2026 03:32:240
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PPPrakash Pandey
FollowJan 27, 2026 03:30:210
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VSVISHAL SINGH
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SPSanjay Prakash
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SKSantosh Kumar
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ASAkhilesh Sharma
FollowJan 27, 2026 03:20:420
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RMRam Mehta
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ASAkhilesh Sharma
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ASAkhilesh Sharma
FollowJan 27, 2026 03:19:550
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