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करौंदामुड़ा: दो जिलों के बीच फंसा गांव, जनगणना रोक बनी कहानी

OTOP TIWARIJust now
Surajpur, Chhattisgarh:कहते हैं कि इंसान की पहचान उसके दस्तावेजों से होती है, लेकिन सूरजपुर जिले का करौंदामुड़ा एक ऐसा गांव है, जिसकी पहचान ही फाइलों के खेल में गुम हो गई है, आजादी के बाद 1948 में बसा यह गांव आज एक अजीबोगरीब प्रशासनिक युद्ध का सामना कर रहा है, यहां के 20 परिवार के लगभग 100 ग्रामीणों के पास राशन कार्ड और आधार कार्ड तो सूरजपुर जिले का है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में यह गांव पड़ोसी जिले कोरिया का हिस्सा दिखाई देता है, आलम यह है कि दो जिलों की सीमा विवाद और कागजी उलझनों के कारण चार पीढ़ियों से रह रहे इन ग्रामीणों की जनगणना तक नहीं हो पा रही है, सूरजपुर जिला प्रशासन कहता है कि यह गांव कोरिया का है, और कोरिया प्रशासन कहता है कि प्रशासन सूरजपुर का है,, इस बीच ग्रामीणों का अस्तित्व अधर में लटका है। आखिर क्या है यह पूरा मामला, देखिए हमारी इस विशेष रिपोर्ट में,,,, इस समस्या की गूंज अब ग्राम पंचायत के गलियारों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक सुनाई दे रही है, गांव के सचिव और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस विसंगति को स्वीकार कर रहे हैं,उनका मानना है कि प्रशासनिक चूक की वजह से गांव का विकास ठप पड़ा है, सचिव के अनुसार जब भी जनगणना या किसी सरकारी योजना का लाभ देने की बात आती है, तो पोर्टल और कागजात आड़े आ जाते हैं, चूंकि राजस्व रिकॉर्ड में गांव का स्थान अलग है, इसलिए सरकारी तंत्र चाहकर भी उन्हें मुख्यधारा से नहीं जोड़ पा रहा है, जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने कई बार जिला प्रशासन को इस संबंध में अवगत कराया, लेकिन फाइलों के इस मकड़जाल से निकलने का रास्ता अब तक नहीं मिल पाया है,, यह मामला सिर्फ दो जिलों के बीच सीमा विवाद का नहीं है, बल्कि यह उस सरकारी सुस्ती का उदाहरण है जो 100 लोगों के बुनियादी अधिकारों को निगल रही है,बिना जनगणना के इन ग्रामीणों को न तो सही अनुपात में सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा और न ही भविष्य की विकास योजनाओं में इनकी गिनती होगी,1948 से लेकर अब तक, यानी करीब 78 सालों में प्रशासन इस एक गलती को सुधारने में नाकाम रहा है, आज जब डिजिटल इंडिया और स्मार्ट गवर्नेंस की बातें हो रही हैं, तब एक पूरे गांव का अपनी पहचान के लिए तरसना सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े करता है, अब देखना होगा कि क्या राज्य सरकार इस प्रशासनिक गांठ को खोल पाती है, या करौंदामुड़ा के ग्रामीण यूं ही दो जिलों के बीच बिना पते के रहने को मजबूर रहेंगे,,,
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Mathura में डिप्टी CM के दर्शन और ब्राह्मण समाज में संवेदना-प्रार्थना का दौर

Noida, Uttar Pradesh:Mathura (UP) : Deputy CM Keshav Prasad Maurya Arrives In Mathura For Bihari Ji Darshan And Poojan / Condolences On Prateek Yadav's Death / Stalin's Statement On Sanatan Dharma / Comments On SP Spokesperson's Disrespectful Remarks About Brahmins, Calls It Wrong / Visuals / Keshav Prasad Maurya (Deputy CM) s/b दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया गया है, शोक संतप्त परिवार और समर्थकों के लिए संवेदना और शक्ति की प्रार्थना की गई है। इसमें एक ब्राह्मण, जो समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता हैं, के उस बयान की आलोचना की गई है जिसमें उन्होंने अनुचित रूप से अपशब्द कहे और सनातन धर्म का अपमान करने वालों का विरोध करते हुए कहा कि गलत हमेशा गलत होता है। इस अंश में एक बैठक का आह्वान और किसी से शीघ्र आने का अनुरोध भी शामिल है, हालांकि इन अनुरोधों का संदर्भ स्पष्ट नहीं है।
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करंजिया में सड़क निर्माण के मनमानेपन को लेकर चक्काजाम, नेशनल हाईवे बंद

Dindori, Madhya Pradesh:डिंडोरी जिले के करंजिया जनपद इलाके में सड़क निर्माण में मनमानी को लेकर स्थानीय लोगों ने चक्काजाम कर दिया है। चिलचिलाती धूप में स्थानीय लोगों ने नेशनल हाईवे पर बाइकों को कतार से खड़ा कर दिया है जिससे जबलपुर अमरकंटक नेशनल हाईवे पर आवागमन बंद हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जबलपुर अमरकंटक नेशनल हाईवे और बायपास के निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से निर्माण कार्य कराया जा रहा है जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना यह भी है की उनके द्वारा सड़क निर्माण में मनमानी को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत भी कराया गया लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया लिहाजा आज उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने हाईवे पर जाम लगा दिया है। चकाजाम की खबर के बाद प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस मौके पहुंचकर लोंगो को समझाइश दी तब कहीं एक घण्टे बाद जाम खुलवाया गया
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SC पहुंचा NEET पेपर लीक मामला; नई संस्था बनाने की मांग तेज

Noida, Uttar Pradesh:NEET पेपर लीक का मामला SC पहुंचा, NTA को खत्म कर नई संस्था बनाने की मांग NEET-UG 2026 की परीक्षा लीक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में नए सिरे से परीक्षा के लिए हाई पावर कमेटी के गठन की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि NEET UG की परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी की निगरानी में कराई जाए। इस कमेटी में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट,और फॉरेंसिक साइंटिस्ट शामिल हो ।यह कमेटी दोबारा होने वाली परीक्षा की सुरक्षा भी जांच करे ताकि फिर से कोई धांधली न हो NTA पर सवाल फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका में इस परीक्षा को आयोजित कराने वाली National Testing Agency (NTA) पर सवाल खड़ा किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट भारत सरकार को निर्देश दे कि NTA को बदला जाए या पूरी तरह नया और ज्यादा सुरक्षित सिस्टम बनाया जाए।नई संस्था ऐसी हो जो तकनीकी रूप से मजबूत, ज्यादा सुरक्षित और स्वतंत्र तरीके से काम करने वाली हो। याचिका में National Examination Integrity Commission (NEIC) नाम की नई संस्था बनाने की भी मांग की है, जो भविष्य में इस तरह की बड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तक यह कमीशन नहीं बनता तब तक यह कमेटी ही परीक्षा की निगरानी करें। परीक्षा में तकनीकी सुधारों की मांग फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने अपनी याचिका में परीक्षा को लेकर कुछ तकनीकी सुधार किए जाने की मांग भी की है। याचिका में कहा गया है मि प्रश्न पत्र को डिजिटल लॉकिंग सिस्टम सिस्टम से सुरक्षित किया जाए ताकि पेपर लीक न हो।भविष्य में परीक्षा ऑनलाइन यानी Computer-Based Test (CBT) मोड में कराई जाए, ताकि पेपर को छापने और ले जाने में होने वाले रिस्क खत्म हों।NEET परीक्षा के रिजल्ट केंद्रवार सार्वजनिक किए जाएँ, ताकि अगर कहीं असामान्य रिजल्ट हों तो उन्हें आसानी से पकड़ा जाए CBI से जांच को लेकर रिपोर्ट तलब करें SC याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट CBI को निर्देश दे कि वो पेपर लीक को लेकर अपनी जांच के बारे में चार हफ्ते में रिपोर्ट दे। CBI अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दे कि जांच कहाँ तक पहुँची,कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई और आरोपियों पर क्या कार्रवाई हुई।
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प्रतीक यादव का पोस्टमार्टम हुआ पूरा, करीब एक घंटे तक KGMU में चला पोस्टमार्टम

Nitya DubeyNitya DubeyFollow8m ago
Lucknow, Uttar Pradesh:

समाजवादी पार्टी संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का पोस्टमार्टम पूरा हो गया है। जानकारी के मुताबिक, लखनऊ के KGMU में करीब एक घंटे तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चली। सूत्रों के अनुसार, प्रतीक यादव को पहले से लीवर और लंग्स से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं थीं। हालांकि, मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी। प्रतीिक यादव के निधन के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर है। परिवार और समर्थकों की निगाहें अब मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

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दिन निकलते ही दो लाशें मिलने से फैली सनसनी, एक की हुई शिनाख्त जबकि दूसरे की प्रयास जारी।

SSSaurabh SharmaFollow11m ago
Bulandshahr, Uttar Pradesh:बुलंदशहर - जिले में दिन निकलते ही दो लाश मिलने से फैली सनसनी, संदिग्ध परिस्थितियों मिले शव, खानपुर के काँचरोठ में युवक का अज्ञात शव जबकि ,खुर्जा नगर कोतवाली क्षेत्र के जंक्शन रोड पर मिला 40 वर्षीय संजय का शव। ​मृतक संजय पिछले 7 साल से ई.जू. मौजपुर में किराए पर रहकर मजदूरी करता था। पत्नी की मौत के बाद अपनी भाभी और 8 वर्षीय बेटी ईसू के साथ किराये पर रहता था युवक। ​पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जांच शुरू। खुर्जा नगर कोतवाली क्षेत्र के जंक्शन रोड का मामला।
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कोरबा मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन चूक: रॉड में स्क्रू गायब, मरीज की सुरक्षा सवाल

Korba, Chhattisgarh:कोरबा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बार फिर बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। सड़क हादसे में घायल महिला के पैर का ऑपरेशन तो कर दिया गया, लेकिन डॉक्टर रॉड लगाने के बाद जरूरी स्क्रू लगाना ही भूल गए। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर चूक का खुलासा ऑपरेशन के दो दिन बाद हुआ, जब महिला की स्थिति जानने एक्सरे कराया गया। एक्सरे में सामने आया कि रॉड के ऊपरी हिस्से में स्क्रू लगाया गया है, लेकिन नीचे का स्क्रू गायब है। जानकारी के मुताबिक छुरी निवासी भूरी मरकाम सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थी, जिससे उसके पैर की हड्डी टूट गई थी। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन किया, लेकिन अब ऑपरेशन में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि महिला का दोबारा ऑपरेशन कर स्क्रू लगाया जाएगा। वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमएस डॉ. गोपाल कंवर इस पूरे मामले को लापरवाही मानने से इंकार करते नजर आए। घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
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NEET पेपर लीक मामला SC पहुंचा, सुरक्षा के लिए नई संस्था बनाने की मांग

Noida, Uttar Pradesh:NEET पेपर लीक का मामला SC पहुंचा, NTA को खत्म कर नई संस्था बनाने की मांग NEET-UG 2026 की परीक्षा लीक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में नए सिरे से परीक्षा के लिए हाई पावर कमेटी के गठन की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि NEET UG की परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी की निगरानी में कराई जाए। इस कमेटी में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट,और फॉरेंसिक साइंटिस्ट शामिल हो ।यह कमेटी दोबारा होने वाली परीक्षा की सुरक्षा भी जांच करे ताकि फिर से कोई धांधली न हो NTA पर सवाल फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका में इस परीक्षा को आयोजित कराने वाली National Testing Agency (NTA) पर सवाल खड़ा किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट भारत सरकार को निर्देश दे कि NTA को बदला जाए या पूरी तरह नया और ज्यादा सुरक्षित सिस्टम बनाया जाए।नई संस्था ऐसी हो जो तकनीकी रूप से मजबूत, ज्यादा सुरक्षित और स्वतंत्र तरीके से काम करने वाली हो। याचिका में National Examination Integrity Commission (NEIC) नाम की नई संस्था बनाने की भी मांग की है, जो भविष्य में इस तरह की बड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तक यह कमीशन नहीं बनता तब तक यह कमेटी ही परीक्षा की निगरानी करें। परीक्षा में तकनीकी सुधारों की मांग फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने अपनी याचिका में परीक्षा को लेकर कुछ तकनीकी सुधार किए जाने की मांग भी की है। याचिका में कहा गया है मि प्रश्न पत्र को डिजिटल लॉकिंग सिस्टम सिस्टम से सुरक्षित किया जाए ताकि पेपर लीक न हो।भविष्य में परीक्षा ऑनलाइन यानी Computer-Based Test (CBT) मोड में कराई जाए, ताकि पेपर को छापने और ले जाने में होने वाले रिस्क खत्म हों।NEET परीक्षा के रिजल्ट केंद्रवार सार्वजनिक किए जाएँ, ताकि अगर कहीं असामान्य रिजल्ट हों तो उन्हें आसानी से पकड़ा जा सके CBI से जांच को लेकर रिपोर्ट तलब करें SC याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट CBI को निर्देश दे कि वो पेपर लीक को लेकर अपनी जांच के बारे में चार हफ्ते में रिपोर्ट दे। CBI अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दे कि जांच कहाँ तक पहुँची,कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई और आरोपियों पर क्या कार्रवाई हुई।
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NEET पेपर लीक: आतिशी बोलीं, 20 लाख छात्रों के सपने चकनाचूर

Noida, Uttar Pradesh:NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने पर, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा, "एक बार फिर, NEET परीक्षा का पेपर लीक हो गया है। जब NEET का पेपर लीक होता है, तो 20 लाख छात्रों के सपने एक ही दिन में चकनाचूर हो जाते हैं; 20 लाख परिवारों के सपने टूट जाते हैं। NEET की तैयारी के लिए, एक छात्र अपने जीवन के दो से तीन साल समर्पित कर देता है... अपने बच्चों को NEET कोचिंग दिलाने के लिए, माता-पिता अपनी पूरी ज़िंदगी की गाढ़ी कमाई, वह पैसा जिसे उन्होंने बड़ी मेहनत से जमा किया होता है, कोचिंग फीस पर लाखों रुपये खर्च करके लगा देते हैं... लेकिन जब NEET का पेपर लीक होता है, तो इन 20 लाख परिवारों के सारे सपने पल भर में टूट जाते हैं..."
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SC पहुँचा NEET पेपर लीक मामला: नया स्वतंत्र सिस्टम और NEIC की मांग

Noida, Uttar Pradesh:NEET पेपर लीक का मामला SC पहुंचा, NTA को खत्म कर नई संस्था बनाने की मांग NEET-UG 2026 की परीक्षा lEEK का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में नए सिरे से परीक्षा के लिए हाई पावर कमेटी के गठन की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि NEET UG की परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी की निगरानी में कराई जाए। इस कमेटी में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, और फॉरेंसिक साइंटिस्ट शामिल हो ।यह कमेटी दोबारा होने वाली परीक्षा की सुरक्षा भी जांच करे ताकि फिर से कोई धांधली न हो NTA पर सवाल फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका में इस परीक्षा को आयोजित कराने वाली National Testing Agency (NTA) पर सवाल खड़ा किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट भारत सरकार को निर्देश दे कि NTA को बदला जाए या पूरी तरह नया और ज्यादा सुरक्षित सिस्टम बनाया जाए।नई संस्था ऐसी हो जो तकनीकी रूप से मजबूत, ज्यादा सुरक्षित और स्वतंत्र तरीके से काम करने वाली हो। याचिका में National Examination Integrity Commission (NEIC) नाम की नई संस्था बनाने की भी मांग की है, जो भविष्य में इस तरह की बड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तक यह कमीशन नहीं बनता तब तक यह कमेटी ही परीक्षा की निगराणी करें। परीक्षा में तकनीकी सुधारों की मांग फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने अपनी याचिका में परीक्षा को लेकर कुछ तकनीकी सुधार किए जाने की मांग भी की है। याचिका में कहा गया है मि प्रश्न पत्र को डिजिटल लॉकिंग सिस्टम सिस्टम से सुरक्षित किया जाए ताकि पेपर लीक न हो।भविष्य में परीक्षा ऑनलाइन यानी Computer-Based Test (CBT) मोड में कराई जाए, ताकि पेपर को छापने और ले जाने में होने वाले रिस्क खत्म हों।NEET परीक्षा के रिजल्ट केंद्रवार सार्वजनिक किए जाएँ, ताकि अगर कहीं असामान्य रिजल्ट हों तो उन्हें आसानी से पकड़ा जा सके CBI से जांच को लेकर रिपोर्ट तलब करें SC याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट CBI को निर्देश दे कि वो पेपर लीक को लेकर अपनी जांच के बारे में चार हफ्ते में रिपोर्ट दे। CBI अपनी रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दे कि जांच कहाँ तक पहुँची,कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई और आरोपियों पर क्या कार्रवाई हुई।
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राजस्थान के गोदाम: कमीशन घटाने से लागत कम, देश का मॉडल बना

Jaipur, Rajasthan:कमीशन का अतिरिक्त भार कम हुआ,इसलिए गोदाम निर्माण में राजस्थान नंबर वन-डॉ.समित शर्मा आशीष चौहान, जयपुर-गोदाम निर्माण अन्न भंडारण योजना में राजस्थान पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है.अब दूसरे राज्य राजस्थान के अन्न भंडारण को अपनाने के लिए योजना का अध्ययन कर रहे है.राजस्थान में गोदामों की निर्माण की लागत बहुत कम हो गई,जिस कारण राज्य के अन्न भंडारण देश में नंबर वन बन गए. कमीशन का अतिरिक्त भार समाप्त हुआ- राजस्थान गोदामों के निर्माण में नंबर वन राज्य बन गया है.क्योंकि प्रदेश में गोदामों का निर्माण संबंधित सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जा रहा है,जिससे एजेंसियों के कमीशन का अतिरिक्त भार समाप्त होने के कारण निर्माण लागत में कमी आई है. राज्य में गोदाम 4000 से 5500 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से निर्मित किए जा रहे हैं,जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है. साथ ही विभागीय स्तर पर नियमित निगरानी और मॉनिटरिंग के माध्यम से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा रही है.सहकार से समृद्धि अभियान के अंतर्गत संचालित सहकारिता क्षेत्र में अन्न भण्डारण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते राजस्थान अब अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन गया है.योजना के क्रियान्वयन में राज्य देश में पहले स्थान पर है. गोदाम निर्माण के राजस्थान मॉडल का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का एक दल प्रदेश दौरे पर है. किराए पर उपलब्ध करवाने के लिए एसओपी जारी- राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक गोदाम के लिए 25 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की जा रही है और गोदाम निर्माण के लिए शत-प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराने वाला राजस्थान देश का एकमात्र राज्य है. गोदामों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्हें किराए पर उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा एसओपी भी जारी की गई है. सचिव डॉ.समित शर्मा ने कहा कि राज्य में 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले कुल 250 गोदामों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके अलावा साल 2024-25 में 100 2025-26 में 100,2026-27 में 50 गोदामों का निर्माण होगा. इससे राज्य में 1.25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भण्डारण क्षमता बढी. इन्हीं इन्होंने किया गोदामों का अध्ययन- यूपी से आए प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण और श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड के मुख्य अभियंता परीक्षित त्रिपाठी,अधिशासी अभियंता सतेन्द्र सिकरवार और एफसीआई के सहायक महाप्रबंधक प्रतीक के. शर्मा ने राजस्थान के गोदामों का निरीक्षण कर अध्ययन किया.
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राजस्थान के गोदाम निर्माण से लागत घटी, देश में नंबर 1 मॉडल बना

Jaipur, Rajasthan:कमीशन का अतिरिक्त भार कम हुआ,इसलिए गोदाम निर्माण में राजस्थान नंबर वन आशीष चौहान, जयपुर-गोदाम निर्माण अन्न भण्डारण योजना में राजस्थान पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है.अब दूसरे राज्य राजस्थान के अन्न भण्डारण को अपनाने के लिए योजना का अध्ययन कर रहे है.राजस्थान में गोदामों की निर्माण की लागत बहुत कम हो गई,जिस कारण राज्य के अन्न भण्डारण देश में नंबर वन बन गए. कमीशन का अतिरिक्त भार समाप्त हुआ- राजस्थान गोदामों के निर्माण में नंबर वन राज्य बन गया है.क्योंकि प्रदेश में गोदामों का निर्माण संबंधित सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जा रहा है,जिससे एजेंसियों के कमीशन का अतिरिक्त भार समाप्त होने के कारण निर्माण लागत में कमी आई है. राज्य में गोदाम 4000 से 5500 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से निर्मित किए जा रहे हैं,जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है. साथ ही विभागीय स्तर पर नियमित निगरानी और मॉनिटरिंग के माध्‍यम से निर्माण कार्यों की गुणवत्तa सुनिश्चित की जा रही है.सहकार से समृद्धि अभियान के अंतर्गत संचालित सहकारिता क्षेत्र में अन्न भण्डारण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते राजस्थान अब अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन गया है.योजना के क्रियान्वयन में राज्य देश में पहले स्थान पर है. गोदाम निर्माण के राजस्थान मॉडल का अध्ययन करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का एक दल प्रदेश दौरे पर है. किराये पर उपलब्ध करवाने के लिए एसओपी जारी- राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक गोदाम के लिए 25 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की जा रही है और गोदाम निर्माण के लिए शत-प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराने वाला राजस्थान देश का एकमात्र राज्य है. गोदामों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्हें किराये पर उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा एसओपी भी जारी की गई है.सचिव डॉ.समित शर्मा ने कहा कि राज्य में 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले कुल 250 गोदामों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके अलावा साल 2024-25 में 100 2025-26 में 100,2026-27 में 50 गोदामों का निर्माण होगा. इससे राज्य में 1.25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भण्डारण क्षमता बढी. ये गोदामों का अध्ययन- यूपी से आए प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण और श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड के मुख्य अभियंता परीक्षित त्रिपाठी,अधिशासी अभियंता सतेन्द्र सिकरवार और एफसीआई के सहायक महाप्रबंधक प्रतीक के. शर्मा ने राजस्थान के गोदामों का निरीक्षण कर अध्ययन किया. नोट-इस खबर की फीड 2 सी में अटैच है।
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