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MAMD AKHTRUL ISLAMFollow27 Jul 2024, 03:38 pm
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घर बैठे पेलिएटिव केयर से बुजुर्गों व गंभीर रोगियों को राहत

Jaipur, Rajasthan:बुजुर्गों और गंभीर रोगियों की देखभाल अब घर की चौखट पर’ ’मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशील पहल से पेलिएटिव केयर को मिला विस्तार’ ’सवा साल में तीन लाख से अधिक रोगियों को मिली बड़ी राहत’ एंकर राजस्थान सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सेवा ही संकल्प’ के विजन को धरातल पर साकार कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है, बल्कि मानवीय एवं संवेदनशील पहल के तहत गंभीर एवं असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों को घर बैठे उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है। गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों, बेड-रिडन बुजुर्गों और ऐसे रोगियों, जिनके लिए अस्पताल तक पहुंचना कठिन है, उनके लिए होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। इस पहल से करीब सवा साल के समय में ही तीन लाख से अधिक रोगियों को लाभान्वित किया गया है। वीओ गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए भजनलाल सरकार मददगार बनकर सामने आई है सीएम भजनलाल शर्मा की पहल पर गंभीर बीमार मरीजों को घर पर ही उपचार और देखभाल की सुविधा सरकार की ओर से शुरू की गई है इससे केवल उपचार ही नहीं, बल्कि दर्द से राहत, मानसिक सहयोग, सम्मानजनक देखभाल और बेहतर जीवन-गुणवत्ता भी मिलेगी । सरकार की स्वास्थ्य नीति का फोकस केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार का प्रयास है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिवार को कठिन परिस्थितियों में अधिकतम सहारा मिले। इसी सोच के तहत कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट, अल्जाइमर सहित अन्य असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को आवश्यक पेलिएटिव केयर सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ’2.51 लाख मरीजों को ओपीडी एवं 41 हजार को आईपीडी में सेवाएं’ राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बार-बार अस्पताल जाने की परेशानी न उठानी पड़े। जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवा मरीज के घर तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को व्यापक रूप दिया जा रहा है। पेलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत राज्य में 98 जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों एवं सेटेलाइट चिकित्सालयों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक स्थापित किए जा चुके हैं। बड़ी संख्या में रोगियों को इनका लाभ मिल रहा है। अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक पेलिएटिव केयर ओपीडी में करीब 2 लाख 51 हजार मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसी अवधि में 41 हजार से अधिक मरीजों को आईपीडी में भर्ती कर उपचार एवं देखभाल प्रदान की गई। विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श को मरीजों तक पहुंचाने के लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे गंभीर रोगियों को आवश्यक विशेषज्ञ सलाह प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। ’4 माह में 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर’ राज्य सरकार बुजुर्गों को परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर मानते हुए उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दे रही है। इसी भावना के अनुरूप जुलाई 2025 से प्रदेश में होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के माध्यम से बेड-रिडन मरीजों और बुजुर्गों को उनके घर पर ही आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। घर पर उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं में नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, आवश्यक दवाइयां तथा मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक परामर्श शामिल हैं। इससे मरीजों को अस्पताल आने-जाने की कठिनाई से राहत मिल रही है और परिवार के सदस्यों को भी अपने प्रियजनों की देखभाल में आवश्यक चिकित्सकीय सहयोग प्राप्त हो रहा है। होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त माह तक करीब 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। इनमें करीब 20 हजार बुजुर्ग मरीज शामिल हैं। ’मरीजों के द्वार ‘राहत की किरण’’ मुख्यमंत्री की पहल पर स्वास्थ्य सेवा को मरीज के करीब ले जाने के लिए ‘राहत की किरण’ वाहन के माध्यम से होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को और प्रभावी बनाया है। इस वाहन में आवश्यक दवाइयों के साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के घर पहुंचते हैं। टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित क्षेत्र की एएनएम या आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं। टीम द्वारा घर पर ही मरीज को आवश्यक पेलिएटिव केयर प्रदान की जाती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से टेली-परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। ’57 हजार केयर गिवर्स प्रशिक्षित, एएनएम, आशा एवं सीएचओ को भी प्रशिक्षण’ सरकार ने केवल सेवा का विस्तार ही नहीं किया है, बल्कि इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया है। अब तक लगभग 57 हजार केयर गिवर्स को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अलावा 10 हजार एएनएम, 21 हजार से ज्यादा आशा कार्यकर्ताओं और करीब 10 हजार सीएचओ को भी होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। चरणबद्ध रूप से सभी आशा, एएनएम और सीएचओ को प्रशिक्षित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इस संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुंचाया जा सके। ’बड़े अस्पतालों से गांव के स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार’ राज्य सरकार का लक्ष्य पेलिएटिव केयर सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना है। सरकार का संकल्प है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को उसकी स्थिति के अनुरूप समय पर उपचार, राहत और देखभाल मिले तथा उसे गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो।
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झारखंड कोयले पर वैट अधिकार GST से अलग करने की मांग तेज

Ranchi, Jharkhand:झारखंड के वित्त मंत्री ने जीएसटी काउंसिल की बैठक में कोयले पर से जीएसटी के बजाए राज्यों को वैट लगाने के अधिकार देने की मांग किया, झारखंड के लंबित बकाए और राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का आग्रह किया तो चर्चाओं का बाजार तेज हो गया। झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, झारखंड के वित्त मंत्री ने बहुत ही प्रासंगिक सवाल उठाया है। मजबूती से राज्य का पक्ष रखा, जो सवाल उठाए और मांग किया उससे अन्य कोयला उत्पादक राज्यों को भी फायदा होगा, पर दुर्भाग्य से उन राज्यों में बीजेपी का शासन है, वहां की सरकार चुप रहती है। ये मांग जायज है संघीय ढांचे में मानना चाहिए केंद्र को। कोयला को वैट के अंदर लाया जाए, राज्यो के नुकसान की भरपाई हो। बाइट ... मनोज पांडेय, झामुमो प्रवक्ता कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता कमल ठाकुर ने कहा, राज्य के वित्त मंत्री के जीएसटी काउंसिल में कोयले पर वैट लगाने के अधिकार देने की मांग किया तो उसका एक मात्र उद्देश्य है, राज्य का विकास कैसे होगा। केंद्र सेस का अधिकार देना नहीं चाहता, जीएसटी देना नहीं चाहता तो राज्य को वैट का अधिकार मिले ताकि उससे राज्य का विकास कार्य हो। पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स का स्पष्ट मानना है राज्य के विकास के लिए राज्य सरकार को पैसा चाहिए और देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए और अन्य विकास कार्यों के लिए केंद्र को भी राशि चाहिए। झारखंड देश का नम्बर वन खनिज संपदा वाला राज्य है पर पिछड़ा राज्य है और राज्य के कोयले के राजस्व का लाभ यहां से कोयला खरीदने वाले राज्यों को मिल रहा है। खनन का दंश झारखंड खेल रहा है, राज्य को राजस्व चाहिए ताकि यहां का विकास हो पाए। इसके लिए बीच का रास्ता निकालना होगा,इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में भी तन आपस में मिल बैठ कर समाधान निकाला जा सकता है। विकसित भारत 2047 की बात करते हैं तो बिना झारखंड को विकसित किए 2047 तक भारत का विकास कैसे कर सकते हैं। इसको लेकर जो अनिश्चितता फैली है उसका समाधान निकाला होगा。 झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स का भी स्पष्ट कहना है प्राकृतिक संसाधन वाले राज्य हैं और जीएसटी को लेकर जो नया रुल है सिस्टम अच्छा हुआ है लेकिन इससे झारखंड को बहुत नुकसान हो रहा है। केंद्र से अनुरोध होगा कि कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो जिससे राज्य को जो राजस्व का नुकसान हो रहा है वो न हो। हम वैट को वापस लाने की बात तो नहीं कहेंगे पर केंद्र सरलत को कुछ न कुछ करना चाहिए कि देश का विकास हो पर खनन वाले राज्यों का भी विकास हो उन राज्यों को राजस्व नहीं आएगा तो उसका विकास कैसे होगा। नए जीएसटी से झारखंड के राजस्व की जो कटौती हुई है तुरंत केंद्र सरकार को कुछ करना चाहिए ।
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त्योहारों के मद्देनजर सरमथुरा नगरपालिका में सफाई अभियान तेज

Dholpur, Rajasthan:त्योहारों के मद्देनजर सरमथुरा नगरपालिका क्षेत्र में सफाई अभियान तेज, नालियों की कराई जा रही सफाई\n\nसरमथुरा (धौलपुर)\n\nआगामी त्योहारों को देखते हुए सरमथुरा नगरपालिका क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान तेज कर दिया गया है। नगरपालिका चेयरमैन रामकला गुर्जर के निर्देशन में कस्बे के विभिन्न गली-मोहल्लों में सफाई कार्य कराया जा रहा है। अभियान के तहत जेसीबी सहित अन्य उपकरणों की सहायता से नालियों की सफाई कर कचरा हटाया जा रहा है, ताकि कस्बे में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर हो सके। नगरपालिका क्षेत्र में लंबे समय से गली-मोहल्लों की सफाई का मुद्दा उठाया जा रहा था। हाल ही में आयोजित नगरपालिका बोर्ड की बैठक में भी पार्षदों ने सफाई व्यवस्था को लेकर मुद्दा उठाया था।इसके बाद आगामी त्योहारों के मद्देनजर विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य कस्बे की साफ-सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना और आमजन को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है।
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हनुमान बेनीवाल के दौरे से घड़साना किसान आंदोलन में नई दिशा

Sri Ganganagar, Rajasthan:एंकर_श्रीगंगानगर जिले के नई मंडी घड़साना में सिंचाई पानी की मांग को लेकर घड़साना में किसानों का आंदोलन 30वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में 10 अक्टूबर को आरएलपी सुप्रीमो एवं सांसद हनुमान बेनीवाल घड़साना पहुंचेंगे। इस दौरान धान मंडी में विशाल किसान सभा आयोजित की जाएगी। हनुमान बेनीवाल के आगमन को लेकर किसान तैयारियों में जुटे हुए हैं। किसान नेताओं ने सभा में करीब 50 हजार किसानों के पहुंचने की उम्मीद जताई है। आंदोलन स्थल पर किसानों का धरना लगातार जारी है। वहीं, बड़ी सभा को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क है। किसानों को उम्मीद है कि बेनीवाल के दौरे से सिंचाई पानी की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को समर्थन मिलेगा और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुलेगा。
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सरदारशहर के सरकारी स्कूल में कथित मारपीट, अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी

Churu, Rajasthan:चूरू विधानसभा- सरदारशहर लोकेशन-सरदारशहर सरदारशहर में ZEE राजस्थान न्यूज की खबर का हुआ बड़ा असर, राजकीय विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ शिक्षक द्वारा कथित मारपीट करने का मामला, खबर चलने के बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सुभाष सोनगरा पहुंचे विद्यालय में, पीड़ित विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय स्टाफ के लिए बयान, कथित मारपीट करने वाले शिक्षक गौरीशंकर को हटाकर लगाया गया अन्य स्थान पर, मामले की जांच के बाद रिपोर्ट भेजी जाएगी उच्च अधिकारियों को, रिपोर्ट के आधार पर उच्च अधिकारी करेंगे शिक्षक पर कार्रवाई, कल ZEE राजस्थान न्यूज़ ने शिक्षक द्वारा विद्यार्थियों के साथ कथित मारपीट की प्रमुखता से चलाई थी खबर
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भैंसाख गांवों में जल-संकट और पानी-सीवर समस्या चुनाव से पहले गहरी

Dholpur, Rajasthan:धौलपुर: भैंसाख ग्राम पंचायत में समस्याओं का अंबार, चुनाव से उम्मीद धौलपुर। पंचायत चुनाव के ऐलान के बाद भैंसाख पंचायत के भैंसाख और समोला गांव में समस्याएं चर्चा में हैं। करीब 4 हजार आबादी वाले इन गांवों में सीवर के पानी से 200-300 बीघा खेत दो साल से डूबे हैं, फसल नहीं हो रही。 जल जीवन मिशन की पानी की टंकी अधूरी है, पेयजल संकट बना है। सड़क-नाली बदहाल हैं, जलभराव से आवाजाही मुश्किल है। सरकारी स्कूल में बारिश में पानी भर जाता है। बनखंडी हनुमान मंदिर मार्ग भी खराब है। ग्रामीण नई ग्राम सरकार से समाधान की उम्मीद लगाए हैं।
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पटना के कुम्हरार रेलवे ट्रैक पर प्रेमी-प्रेमिका की मौत, हत्या की आशंका

Patna, Bihar:एंकर--राजधानी पटना के कुम्हरार रेलवे ट्रैक पर युवक और युवती का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृत युवती की पहचान शैली रानी के रूप में हुई है। वह टीपीएस कॉलेज के पास की रहने वाली थी और कॉलेज में ग्रेजुएशन की छात्रा थी। शैली 5 अक्टूबर से लापता थी। इस मामले में कंकड़बाग थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। वहीं, रेलवे ट्रैक पर मिले युवक की पहचान अब तक नहीं हो सकी है। पुलिस प्रेम प्रसंग समेत अन्य पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। परिजनों ने जताई हत्या की आशंका मृतका के चाचा विनय कुमार ने बताया कि शैली 5 अक्टूबर को कॉलेज में क्लास करने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। शुक्रवार सुबह रेलवे ट्रैक पर शव मिलने की जानकारी मिली, जिसके बाद परिवार में मातम छा गया। मृतका के चचेरे भाई मनोज कुमार के अनुसार, शैली फॉर्म भरने के सिलसिले में एनआईटी गई थी। इसके बाद वह लापता हो गई। दोस्तों और परिचितों से पूछताछ करने पर भी कोई जानकारी नहीं मिली। परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि लापता होने के बाद तीन दिनों तक शैली कहां थी, इसका पता क्यों नहीं लगाया जा सका? दुबई से आया था फोन, लोन के नाम पर मांगे गए पैसे परिजनों ने बताया कि शैली के लापता होने के बाद दुबई से एक फोन कॉल आया था। फोन करने वाले ने खुद को दुबई से बोलने वाला बताया और कहा कि शैली ने 10 हजार रुपये का लोन लिया है। पैसे नहीं देने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। अब इस कॉल को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। पिता बोले- बेटी की हत्या कर शव ट्रैक पर फेंका गया शैली के पिता संजीव कुमार प्रजापति महावीर आरोग्य संस्थान में कर्मचारी हैं। उनका आरोप है कि बेटी की हत्या करने के बाद शव रेलवे ट्रैक पर फेंका गया है। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है। तीन बच्चों में शैली सबसे बड़ी थी। फिलहाल, राजेंद्रनगर टर्मिनल जीआरपी दोनों शवों से जुड़े मामले की जांच में जुटी है। युवक की पहचान, युवती की मौत के कारण और घटना के पीछे की वास्तविक वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा。 बाइट--दीपनारायण यादव GRP SHO बाइट--पिता बाइट--चाचा बाइट--भाई
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जालंधर में स्मार्ट सिटी घोटाला: विपक्ष का धरना, सरकार पर सवाल

Jalandhar, Punjab:ਅੱਜ ਭਾਰਤੀ ਜਨਤਾ ਪਾਰਟੀ ਜਲੰਧਰ ਦੇ ਕੌਂਸਲਰਾਂ ਅਤੇ ਨੇਤਾ ਵਿਰੋਧੀ ਧਿਰ ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਟੀਟੂ ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਹੇਠ ਜਲੰਧਰ ਭਾਜਪਾ ਦੇ ਕੌਂਸਲਰ ਵੱਲੋਂ ਧਰਨਾ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਧਰਨੇ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿਲ੍ਹਾ ਸ਼ਹਿਰੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਅਸ਼ੋਕ ਸਰੀਨ ਹਿਕੀ, ਦਿਹਾਟੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਜਗਬੀਰ ਬਰਾੜ ਸਾਰੇ ਕੌਂਸਲਰ ਸਾਥੀ ਅਤੇ ਭਾਜਪਾ ਦੇ ਹੋਰ ਆਗੂ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੋਏ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਮੀਡੀਆ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਦੇਆਂ ਅਸ਼ੋਕ ਸਰੀਨ ਹਿੱਕੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਇਹ ਧਰਨਾ ਸਮਾਰਟ ਸਿਟੀ ਘੁਟਾਲੇ ਦੇ ਖਿਲਾਫ਼ ਹੈ। ਕਿਉਂਕਿ ਪਿਛਲੇ ਸਾਢੇ ਚਾਰ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਮਜੂਦਾ आम ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੀ ਗੂੰਗੀ-ਬੋਲੀ ਅਤੇ ਭ੍ਰਿਸ਼ਟ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਸਮਾਰਟ ਸਿਟੀ ਘੁਟਾਲਿਆਂ ਦੀ ਦੁਹਾਈ ਦਿੱਤੀ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ 1000 ਕਰੋੜ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦਾ ਘੁਟਾਲਾ ਹੈ, C.A.G. ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਆ ਚੁੱਕੀ ਹੈ, ਉਹਨੂੰ ਇਨਕੁਆਇਰੀ ਦੇ ਨਾਮ 'ਤੇ ਦੱਬਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਉਹ ਫ਼ਾਈਲਾਂ ਨੂੰ ਦਬਾ ਕੇ ਜਿਹੜੇ ਦੋਸ਼ੀ ਸੀ, ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਸਾਂਠ-ਗਾਂਠ ਹੈ, ਉਹਨਾਂ ਦੋਸ਼ੀਆਂ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਇਹ ਆਮ ਆਦਮੀ ਪਾਰਟੀ ਦੀ ਸਰਕਾਰ, ਜਲੰਧਰ ਦੇ ਮੇਅਰ ਸਾਹਿਬ, ਹੋਰ ਸਾਰੇ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਨੇਤਾ ਕਰ ਰਹੇ ਨੇ। ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਜਲੰਧਰ ਦੇ ਵਿੱਚ ਅੱਜ ਹਰ ਪਾਸੇ ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਹੀ ਭ੍ਰਿਸ਼ਟਾਚਾਰ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਜੈਟਿੰਗ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੇ ਨਾਮ 'ਤੇ ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਏ ਦਾ ਖ਼ਰਚਾ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ, ਸੀਵਰੇਜ ਵਿਵਸਥਾ ਚਰਮਰਾਈ ਹੋਈ ਹੈ। ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਇਆ ਸਫ਼ਾਈ ਵਿਵਸਥਾ 'ਤੇ ਖ਼ਰਚ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ, ਕੂੜਾ ਡੰਪ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅੱਜ ਸੜਕਾਂ ਟੁੱਟੀਆਂ ਨੇ, ਪਾਰਕ ਖ਼ਰਾਬ ਨੇ, ਸਟ੍ਰੀਟ ਲਾਈਟਾਂ ਬੰਦ ਨੇ, ਗੰਦਾ ਪਾਣੀ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਘਰਾਂ ਤੱਕ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਉਹਨਾ ਕਿਹਾ ਕਿ ਅੱਜ ਅਸੀਂ ਇਸ ਲਈ ਧਰਨਾ ਲਾਇਆ ਕਿ ਉਹ ਸਾਢੇ ਚਾਰ ਸਾਲ ਦੀਆਂ ਫਾਈਲਾਂ ਜਾਂ ਤਾਂ ਵਿਜੀਲੈਂਸ ਡਿਪਾਰਟਮੈਂਟ ਜਿਹੜਾ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਇਸ਼ਾਰੇ 'ਤੇ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਉਹ ਸਮਾਰਟ ਸਿਟੀ ਘੁਟਾਲੇ ਨੂੰ ਇਹ ਸਾਬਤ ਕਰੇ ਕਿ ਘੁਟਾਲਾ ਹੋਇਆ ਨਹੀਂ, ਜਾਂ ਇਹ ਦੱਸੇ ਕਿ ਇਹ ਘੁਟਾਲਾ ਹੋਇਆ ਤੇ ਦੋਸ਼ੀ ਕੌਣ ਹੈ? ਹਿੱਕੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ C.A.G. ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਨੇ ਸਾਫ਼-ਸਾਫ਼ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਹੋਇਆ, ਉਹ ਵੀ ਅਸੀਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਦੋ ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ, ਡੇਢ ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਦਿੱਤੀ ਸੀ, כי ਕਿੱਥੇ-ਕਿੱਥੇ, ਕਿੱਦਾਂ-ਕਿੱਦਾਂ ਆਰਗੇਨਾਈਜ਼ਡ ਕ੍ਰਪਸ਼ਨ ਹੋਈ ਹੈ।
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1100 दिन से धरने पर दृष्टिहीन, सरकार से जहर की मांग पर पुनर्विचार का दबाव

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अपनी मांगों को लेकर करीब 1100 दिनों से आंदोलन कर रहे दृष्टिहीनों ने सरकार से जहर देने की मांग की है। दृष्टिहीन संघ से जुड़े सदस्यों का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं कर सकती, तो उन्हें जहर दे दिया जाए। दृष्टिहीन संघ के पदाधिकारी कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात के बाद वापस शिमला लौटे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात के बाद उन्हें अपनी मांगें पूरी होने की उम्मीद बंधी है। दृष्टिहीन पिछले करीब 1100 दिनों से शिमला के कालीबाड़ी स्थित रैन शेल्टर में धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि कई बार चक्का जाम करने और सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करने के बावजूद सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है। दृष्टिहीन संघ की प्रमुख मांग बैकलॉग के आधार पर एकमुश्त भर्ती करने की है। संघ के अनुसार, आंदोलन के दौरान अब तक चार दृष्टिहीनों की जान जा चुकी है। लंबे समय से जारी इस आंदोलन के बीच दृष्टिहीनों ने एक बार फिर सरकार से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
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