Back
बिहार ने पिछले दस साल में बदला रंग: विकास का नया इतिहास लिखा गया
SKSunny Kumar
Mar 21, 2026 10:46:01
Patna, Bihar
बिहार के इतिहास और पिछले 10 वर्षों में बिहार के बदलाव के साथ बिहार के खान-पान और व्यंजन देश दुनिया तक कैसे पहुंचे... पिछले 10 वर्षों में बिहार में हर क्षेत्र में बदलाव हुआ है कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसमें बदलाव दिखता नहीं है बिजली बिहीन बिहार...सड़क बिहिनी बिहार पर ख़राब कानून व्यवस्था इस तरह की इमेज थी राज्य के बाहर से लोग आने में डरते थे वह छवि थी... बहुत परिश्रामपूर्वक बदला है आज हर क्षेत्र में नया चीज दिख रहा है... पटना में पुराने लोग निकालते हैं तो सड़क भूल जाते हैं पफ्लाई ओवर बने नई सड़के बनी.. इतने स्कूल खुले स्कूल भवन का निर्माण हुआ..अस्पताल स्कूल यूनिवर्सिटी खुला बड़े बिल्डिंग बन गए यह सभी चीज हैं जो बिहार को एक नया स्वरूप देती है जो बीमारू स्टेट था उस बिहार को विकासशील प्रदेश के रूप में सामने आया है.... वहीं इतिहास की जानकारी डॉक्टर संजय ने बताया कि. बिहार को विहार के नाम से जाना जाता था जिस बिहार ने तीन-तीन धर्म को जन्म दिया ज्ञान की भूमि.. महावीर का जन्म हुआ और कर्मभूमि है बिहार...सिख धर्म के अंतिम गुरु गोविंद सिंह की भूमि..मां जानकी का जन्म भूमि रहा है...धार्मिक तौर पर अगर आप देखेंगे तो तीन धर्म मां जानकी को जोड़ेंगे तो 4 धर्म की यह जननी है.. बिहार जहां पर उसकी ऐतिहासिकता में आप जाएंगे इसने सामाजिक राजनीतिक आर्थिक और प्रशासनिक दक्षता से साबित किया...यहाँ अलग-अलग जनपद हुआ करते थे उन 16 महाजनपद में जो सबसे मजबूत महाजनपद थे वह बिहार में थे इसी बिहार के लिक्षवि में गणतंत्र की किरण किरण फूटी थी... जहां से पूरे विश्व को संदेश दिया लोकतंत्र सबसे अच्छी व्यवस्था है यही बिहार रहा है जहां पर चाणक्य हुए...जिसने चाणक्य नीति और कौटिल्य का अर्थशास्त्र दिया चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसा सम्राट हुए... राजगीर से लेकर पाटलिपुत्र की धरती से पूरे विश्व को देखा.. इसकी सीमा ईरान से मिलती थी अफगानिस्तान तक मगध साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था.... एक से एक ज्ञानी की धरती रही है... मंडल मिश्र के यहां शंकराचार्य आए थे जो पराजित होकर गए थे एक से एक विदुषी बिहार में रहे है जिसने अपने ज्ञान से लोगों को संदेश दिया... आर्यभट्ट इसी बिहार के रहे हैं जिन्होंने खगोल शास्त्र का वह ज्ञान दिया जिससे पूरा विश्व अचंभित है शून्य का आविष्कारक हुआ... वैज्ञानिकता धार्मिकता सामाजिकता और ऐतिहासिकता को खांगलेंगे तो बिहार ने पूरे विश्व को एक दिशा देने का काम किया.... पहली बार कैसे युद्ध में लोहे का प्रयोग किया जाता है इसी बिहार के सैनिकों ने उसका प्रयोग किया और विश्व को बताया कि कैसे हम इन हथियारों का प्रयोग करते हैं वहां से बढ़ते हुए यह बिहार संस्कृतिक चेतना का केंद्र बना जिसने विश्व के लोगों को संस्कृत जागरण में बड़ी भूमिका अदा की.... बिहार सरस्वती की धरती रही है ज्ञान का केंद्र रहा है नालंदा जो पूरे विश्व का प्राचीनतम विश्वविद्यालय था पूरे विश्व के छात्र यहां पर आकर पढ़ते थे.... कल्पना कीजिए जब कुमार गुप्त ने नालंदा विश्वविद्यालय को बनवाया होगा तो किस तरह का समय रहा होगा... बिहार में स्वर्ण युग था.... पटना में मौर्य साम्राज्य की राजधानी के अवशेष आज भी मिलते हैं सम्राट अशोक जिन्होंने धर्म महामात्राओं की नियुक्ति की अलग-अलग स्तंभों पर अपने प्रशासनिक कार्य को खुदवाया जो ब्राह्मी लिपि पढ़ी जा रही है... राजा की नीति कैसी थी और लोग कैसे उसका पालन करने लगे थे यह बिहार ने बताया करुणा दया ज्ञान और मोक्ष की भूमि बिहार रही है.... ऐतिहासिक गया में भगवान विष्णु के पद हैं.. पूर्वजों का पिंडदान करते हैं तो मोक्ष प्राप्त करते हैं...भगवान राम ने वही दशरथ का पिंडदान किया था यह उसकी भूमि यह ज्ञान की भूमि है जहां बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ करुणा और दया की भूमि रही है... यह बिहार उसकी भूमि है जहां सम्राट ने भिक्षुक बनना स्वीकार किया लोगों के बीच करुणा और दया बाँट परस्पर सौहार्द के वातावरण के लिए उनको उद्धारित किया उनको कहीं ना कहीं से उतप्रेरित किया... जिस चश्मा से जिस एंगल से बिहार को देखेंगे इस बिहार में आपको सब कुछ मिलेगा.... इसी बिहार में रामधारी सिंह दिनकर पैदा हुए इन्होंने लोकतंत्र को ललकारा इसी बिहार से जयप्रकाश नारायण जैसे लोकनायक पैदा हुए इसी बिहार में कर्पूरी ठाकुर जैसे जननायक पैदा हुए... संस्कृति और तीन-तीन धर्म का उद्गम स्थल बिहार रहा है बिहार में बहने वाली नदियां ने बताया सभ्यता कैसे नदियों के किनारे विकसित है... वही बिहार के खानपान और व्यंजन पर लेख लिखने वाले रविशंकर उपाध्याय ने बताया कि... भगवान राम की बारात आती है तो उनको गणित व्यंजन पड़ोसी जाते हैं.. दही चुरा का उपहार महाराजा जनक देते हैं... इतिहास के सभी दौड़ में हमारे खानपान का महत्व दिखता है.. विदेशी यात्री फाह्यान जब हाजीपुर के इलाके से गुजरते हैं तो उस समय भी वह केले का जिक्र करते हैं.. हमारे खानपान को लेकर कितना प्रयोग किया हुआ है तिल को लेकर हम लोगों ने कितने प्रयोग किए हैं... हम लोगों ने जै के आटे का अलग-अलग तरीके से प्रयोग किया और बाद में जब मैदा आया उसका भी काफी प्रयोग किया.. खाजा एक विशिष्ट मिठाई है जिसका मोहक वर्णन कई लेखकों ने किया है.. बिहार के कई इलाकों की लाई जो काफी प्रसिद्ध है.. भोजपुरी के इलाके में चले जाइए वहां पर आपको खुरमा मिलेगा.. हमारे खानपान को GI टैग भी मिला है चाहे वह कतरनी और मारीच चावल की बात करें.. मुजफ्फरपुर के लीची है सिलाव का खाजा है.. मगही पान हमारा ये सभी चीज.. हमारा खानपान का इतिहास काफी समृद्ध रहा है और आने वाले दिनों में भी नए-नए व्यंजन देश दुनिया में लोग पसंद कर रहे हैं...
0
Report
हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|
Advertisement
VSVIPIN SHARMA
FollowMar 21, 2026 11:52:020
Report
KKKRISNDEV KUMAR
FollowMar 21, 2026 11:51:460
Report
RKRupesh Kumar
FollowMar 21, 2026 11:51:020
Report
KBKulbir Beera
FollowMar 21, 2026 11:50:220
Report
1
Report
SKSandeep Kumar
FollowMar 21, 2026 11:49:100
Report
ASAvtar Singh
FollowMar 21, 2026 11:48:34Gurdaspur, Punjab:ਕਲਾਨੌਰ ਵਿਖੇ ਸ਼੍ਰੋਮਣੀ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਦੀ ਪੰਜਾਬ ਬਚਾਓ ਰੈਲੀ ਵਿੱਚ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲਿਆ ਭਾਰੀ ਇਕੱਠ ਸੁਖਬੀਰ ਬਾਦਲ ਨੇ ਡੀਐਮ ਗਗਨਦੀਪ ਸਿੰਘ ਦੀ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਤੇ ਸਾਧੇ ਨਿਸ਼ਾਨੇ
0
Report
UMUJJWAL MISHRA
FollowMar 21, 2026 11:47:540
Report
KKKRISNDEV KUMAR
FollowMar 21, 2026 11:47:370
Report
RKRaj Kishore
FollowMar 21, 2026 11:46:510
Report
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लोकार्पण की तैयारी पर उच्चस्तरीय समीक्षा, मुख्यमंत्री आज निरीक्षण करेंगे
BPBHUPESH PRATAP
FollowMar 21, 2026 11:46:370
Report
JSJitendra Soni
FollowMar 21, 2026 11:46:140
Report
ASAshutosh Sharma1
FollowMar 21, 2026 11:45:420
Report
PTPreeti Tanwar
FollowMar 21, 2026 11:45:250
Report
RRRakesh Ranjan
FollowMar 21, 2026 11:34:12Noida, Uttar Pradesh:फरसा बाबा की मौत पर 'बवाल' (मथुरा)
748
Report