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PKPrashant KumarFollow18 Jul 2024, 11:10 am
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नालंदा सहयोग शिविर में 82 मामलों का मौके पर निष्पादन, सरकारी सेवाओं का सरल पहुंच

Pariaunna, Bihar:नालंदा जिले के पन्चायत पपरनौसा और तियारी में सहयोग शिविर आयोजित किए गए ताकि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचे। शिविर में भूमि विवाद, विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और राजस्व से जुड़े आवेदन प्रमुख थे। तियारी पंचायत में 83 मामलों में से 82 मौके पर निष्पादन कर दिया गया, जबकि पपरनौसा पंचायत में 81 आवेदनों का निष्पादन किया गया। तियारी पंचायत सरकार भवन में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर कार्यक्रम का आकर्षण रही। प्रशासन ने कहा कि ऐसे शिविरों का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं पहुंचाना और समस्याओं का पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है।
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आदिवासियों को वनवासी कहे जाने पर आक्रोश, जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

Dungarpur, Rajasthan:जिला डूंगरपुर विधानसभा डूंगरपुर अखिलेश शर्मा लोकेशन डूंगरपुर देश के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों को वनवासी कहे जाने पर आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश है। इस बयान के विरोध सहित आदिवासी समाज की अन्य मांगो को लेकर आदिवासी कांग्रेस की ओर से कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया गया। वही केंद्रीय मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की वही कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष देव शंकर ननोमा के नेतृत्व में आदिवासी कांग्रेस के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पर एकत्रित हुए। इस मौके पर आदिवासी कांग्रेस ने देश के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासियों को वनवासी कहे जाने पर विरोध जताया वही जनगणना में अलग से आदिवासी धर्म कोड, जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष देव Shankar Nnoma ने कहा, हम आदिवासी हैं, वनवासी नहीं है। हम इस देश के मूल मालिक हैं। हम जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने वाले प्रकृति पूजक हैं। हमारा कल्चर, रहन-सहन और खान-पान अन्य सभी जातियों और धर्मों से बिल्कुल अलग है। इसलिए हमें आदिवासी ही रहने दिया जाए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से देश और प्रदेश की आदिवासी जनता से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर गृह मंत्री ने माफी नहीं मांगी, तो आदिवासी समाज सड़कों पर उतरकर जेल भरो आंदोलन करेगा। इस दौरान होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वर्ष 1871 से 1950 तक आदिवासियों का एक अलग धर्म कोड था, जिसे धीरे-धीरे खत्म कर दिया गया। उन्होंने आगामी 2026-27 की जनगणना में आदिवासियों के लिए फिर से एक अलग धर्म कोड की व्यवस्था करने की मांग की है। इसके साथ ही आदिवासी समाज ने अपनी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की मांग की है। इधर अपनी मांगों को लेकर आदिवासी कांग्रेस ने कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा है।
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राजस्थान में आबकारी विभाग का ढांचा बदला, 53 कार्यालयों के साथ नया एजेंसी सिस्टम

Jaipur, Rajasthan:राजस्थान में शराब के विभाग का पूरा ढांचा बदला, जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक के पद खत्म\n\n- राजस्थान में आबकारी विभाग के ढांचे में आमूलचूल बदलाव, ''आबकारी प्रवर्तन एवं निरोधक बल'' होगा नया नाम \n- राज्य में आबकारी के 53 जिले, 286 सर्किल होंगे, अकेले जयपुर में 4 आबकारी जिले बनेंगे\n- 10 अन्य बड़े जिलों को 2-2 जिलों में बदला, एक कनिष्ठ आबकारी कार्यालय में औसतन 27 दुकानें होंगी\n\nजयपुर।\n\nआबकारी विभाग के ढांचे में आमूलचूल बदलाव हुआ है। वर्ष 2024-25 की बजट घोषणा के अंतर्गत एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने ''एकीकृत आबकारी प्रवर्तन एवं निरोधक बल'' का गठन किया है। इस नए बदलाव के तहत दशकों से चले आ रहे पुराने प्रशासनिक पदों और कार्यालयों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। क्या हुए हैं महत्वपूर्ण बदलाव, कितने होंगे आबकारी जिले, कैसे कार्य करेगा पूरा विभाग, जी मीडिया की यह रिपोर्ट पढ़िए। \n\nदरअसल वित्त विभाग ने आबकारी विभाग के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। नए आदेशों के अनुसार वर्तमान जिला आबकारी अधिकारी (DEO), वृत्त निरीक्षक कार्यालयों, निवारक शाखा के उपायुक्त, आबकारी अधिकारी, सहायक आबकारी अधिकारी और पारंपरिक आबकारी थानों को अब समाप्त कर दिया गया है। नई प्रशासनिक व्यवस्था के तहत अब पूरे प्रदेश में नए पदनाम और कार्यालय सृजित किए जाएंगे। जिनमें अतिरिक्त आयुक्त जोन, उपायुक्त/आबकारी अधिकारी और कनिष्ठ आबकारी अधिकारी कार्यालय शामिल हैं। नए ढांचे के अंतर्गत अब प्रदेश में ''जिला आबकारी अधिकारी'' का पदनाम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और वे अब अपनी वरिष्ठता के आधार पर उपायुक्त या आबकारी अधिकारी के नाम से जाने जाएंगे। वरिष्ठ वेतनमान के अधिकारियों के दफ्तर को ''उपायुक्त कार्यालय'' और सामान्य या कनिष्ठ वेतनमान के अधिकारियों के दफ्तर को ''आबकारी अधिकारी कार्यालय'' कहा जाएगा। इनके कार्यालयों में सहयोग के लिए 1-1 सहायक आबकारी अधिकारी (AEO) और 1-1 कनिष्ठ आबकारी अधिकारी तैनात होंगे। राज्य में संभाग स्तर पर 8 ''अतिरिक्त आयुक्त जोन कार्यालय'' गठित होंगे, जिनमें से 6 पदों पर आरएएस (RAS) अधिकारी और 2 पदों पर सामान्य शाखा के अतिरिक्त आयुक्त या EPF के संयुक्त आयुक्त लगाए जा सकेंगे।\n\nइस तरह होगा आबकारी विभाग का ढांचा\n- अवैध मदिरा गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए 2 प्रवर्तन कार्यालय खुलेंगे\n- जयपुर और जोधपुर में 2 ''उपायुक्त विधि कार्यालय'' बनाए जाएंगे\n- पूरे राज्य में उपायुक्त/आबकारी अधिकारी के कुल 53 कार्यालय होंगे\n- 8 कार्यालयों में RAS, 45 में आबकारी विभाग के अधिकारी लगाए जाएंगे\n- सामान्य शाखा के उपायुक्त या जिला आबकारी अधिकारी लगाए जा सकेंगे\n- निरोधक दल के उपायुक्त/आबकारी अधिकारी भी लगाए जा सकेंगे\n- आबकारी निरीक्षक नहीं, अब कनिष्ठ आबकारी अधिकारी होगा नया पदनाम\n- कनिष्ठ आबकारी अधिकारी के 286 कार्यालय होंगे, 111 ग्रेड-1, 175 ग्रेड-2 कार्यालय\n- ग्रेड- 1 के कार्यालयों में ग्रेड-1 के आबकारी निरीक्षक लगेंगे\n- ग्रेजुएट ग्रेड-1 PO लग सकेंगे, 3 वर्ष का अनुभव होना जरूरी\n- ग्रेड-1 के 10-12वीं उत्तीर्ण PO भी चयन परीक्षा उत्तीर्ण कर लग सकेंगे\n- ग्रेड-2 के कार्यालयों में सामान्य शाखा के निरीक्षण ग्रेड-2 लगेंगे\n- निरोधक दल के स्नातक उत्तीर्ण, 3 वर्ष अनुभव वाले PO ग्रेड-2 लग सकेंगे\n- 10वीं-12वीं उत्तीर्ण PO को 3 वर्ष के अनुभव के साथ चयन परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी\n- मौजूदा जमादार ग्रेड-1 के कार्मिक उप निरीक्षक लगाए जाएंगे\n\nनए जिलों में खुलेंगे जिला स्तरीय आबकारी कार्यालय\nइस पुनर्गठन में आबकारी विभाग ने राज्य सरकार के नए राजस्व जिलों में भी कार्यालय खोलने का प्रारूप तय कर दिया है। दरअसल अब तक विभाग का कामकाज पुराने 33 जिलों के पैटर्न पर ही संचालित हो रहा था। लेकिन अब पुनर्गठन में 7 नए जिलों में जिला स्तरीय कार्यालय खोले जाएंगे। नए जिलों बालोतरा, फलौदी, सलूम्बर, ब्यावर, डीडवाना-कुचामन, खैरथल-तिजारा और डीग में नए जिला स्तरीय कार्यालय खोले जाएंगे। जबकि कोटपूतली-बहरोड़ में यह कार्यालय पहले से ही संचालित है। वहीं कुछ बड़े जिलों में कार्यालयों की संख्या बढ़ाई जाएगी। जयपुर जिले में अब 2 से बढ़ाकर कुल 4 जिला स्तरीय कार्यालय संचालित होंगे। वित्त विभाग के प्रमख सचिव वैभव गालरिया ने कहा कि बजट घोषणा की अनुपालना में यह नई कवायद की गई है। इससे सामान्य शाखा और निरोध दल मिलकर एक साथ बेहतर कार्यवाही कर सकेंगे। साथ ही राज्य सरकार के राजस्व में भी अपेक्षित वृद्धि हो सकेगी। \n\nजयपुर जिले में अब 4 आबकारी जिले\n- 10 जिलों में 2-2 जिला कार्यालय खुलेंगे, इनके नाम प्रथम और द्वितीय होंगे\n- अजमेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर,\n- झुंझुनूं, जोधपुर और कोटा में 2-2 जिला स्तरीय कार्यालय होंगे\n- जयपुर में 4 जिला स्तरीय कार्यालय, प्रथम से चतुर्थ तक होंगे\n- इन सभी जिलों में राजस्व तहसील के हिसाब से क्षेत्र बांटे गए\n- जयपुर प्रथम में जयपुर तहसील का पूरा क्षेत्र शामिल होगा\n- जयपुर द्वितीय में सांगानेर तहसील का पूरा क्षेत्र शामिल होगा\n- जयपुर तृतीय में आमेर, शाहपुरा, जमवारामगढ़, बस्सी, चाकसू,\n- माधोराजपुरा, आंधी, तूंगा और कोटखावदा के क्षेत्र शामिल होंगे\n- जयपुर चतुर्थ में रामपुरा डाबडी, किशनगढ़ रेनवाल, जोबनेर, फागी,\n- मौजमाबाद, दूदू, सांभर, चौमूं, कालवाड़ और जालसू तहसील के क्षेत्र होंगे\n\nजयपुर संभाग में होंगे 2 जोन \nइसी तरह अतिरिक्त आयुक्त जोन कार्यालयों में जयपुर संभाग के लिए 2 जोन गठित किए गए हैं। एक जोन जिसे जयपुर शहर नाम दिया गया है, उसमें राजस्व जिला जयपुर के पूरे क्षेत्र को शामिल किया गया है। जबकि दूसरा जोन जयपुर ग्रामीण में अलवर, कोटपूतली-बहरोड, खैरथल-तिजारा, दौसा, सीकर और झुंझुनूं जिलों के क्षेत्र को शामिल किया गया है। जयपुर के अलावा अजमेर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर में एक-एक अतिरिक्त आयुक्त जोन कार्यालय संचालित होंगे। वहीं नई प्रशासनिक व्यवस्था में राज्य सेवा और अधीनस्थ सेवा के नए सेवा नियम बनाकर इनके अंतर्गत ही नई भर्तियां की जा सकेंगी।
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मनोरपुर हत्या के विरोध में ग्रामीण धरने पर, गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग

Jaipur, Rajasthan:शाहपुरा (जयपुर ग्रामीण) मनोहरपुर में गला काटकर निर्मम हत्या का मामला। मृतक के परिजन और ग्रामीण धरने पर बैठे हैं। मनोहरपुर पुलिस थाने में धरना जारी है। पुलिस अधिकारियों और धरनार्थियों के बीच वार्ता चल रही है; ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। शाहपुरा विधायक मनीष यादव भी धरना स्थल पर पहुंचे और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि ठोस कार्रवाई तक आंदोलन जारी रहेगा। पुलिस ने जल्द खुलासे और गिरफ्तारी के प्रयासों की जानकारी दी।
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उदयपुर के गंगू कुंड में मौत पर आरोपित हरि बंसल, निष्पक्ष जांच की मांग

Udaipur, Rajasthan:उदयपुर के गंगू कुंड में डूबने से हुई दुर्गाशंकर सालवी की मौत के मामले में अब एक नया विवाद सामने आया है। मृतक के परिवार और सालवी समाज के लोगों ने आज भूपालपुरा थाने के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने हरि बंसल नाम के व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि दुर्गाशंकर अपने बच्चे को तैरना सिखाने के लिए गंगू कुंड गया था, जहां हरिबंसल ने दुर्गा शंकर को दबाव डालकर पानी में उतारा और डूबने लगा तो भी बचाने का प्रयास नहीं किया। डूबने से उसकी मौत हो गई। समाज के लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
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3 जून की रात से हिमाचल में बारिश तेज हवाओं के साथ मौसम बदलेगा 6 जून तक

Shimla, Himachal Pradesh:हिमाचल में 3 जून की रात से बदलेगा मौसम 4-5 जून को बारिश और तेज हवाओं के आसार मई में सामान्य से 20 फीसदी कम बारिश कई जिलों में हीटवेव और ओलावृष्टि का असर हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बारिश और गरज-चमक के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल प्रदेश में मौसम सामान्य बना रहेगा, लेकिन 3 जून की रात से नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर 6 जून तक देखने को मिलेगा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने बताया कि बीते 24 घंटों के दौरान चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सोलन और सिरमौर जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। वहीं कांगड़ा, चंबा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में गरज-चमक की गतिविधियां भी दर्ज की गईं। बारिश के कारण प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में दिन के तापमान में कमी आई है। मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा, जो सामान्य से करीब 4 डिग्री कम है। मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान 22 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 2 डिग्री कम रहा। प्रदेश में अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार 2 जून और 3 जून की दोपहर तक मौसम अपेक्षाकृत साफ रहेगा, लेकिन 3 जून की शाम और रात से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो जाएगा। इसके प्रभाव से 4 और 5 जून को प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। साथ ही चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। शोभित कटियार ने बताया कि वर्तमान पश्चिमी विक्षोभ का असर 3 जून की रात से 6 जून की दोपहर तक रहेगा। इसके बाद 10 जून तक किसी नए मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के हिमाचल को प्रभावित करने की संभावना नहीं है। हालांकि ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम में हल्के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विभाग का कहना है कि 7 जून के बाद पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव समाप्त होने के साथ प्रदेश में तापमान फिर बढ़ने लगेगा और मैदानी इलाकों में गर्मी का असर बढ़ सकता है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 में हिमाचल प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। आमतौर पर मई में प्रदेश में करीब 63 मिलीमीटर वर्षा होती है, लेकिन इस बार केवल 50.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई, जो सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम है। जिला स्तर पर ऊना में सबसे अधिक 110 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि बिलासपुर में सामान्य से 45 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। दूसरी ओर लाहौल-स्पीति में 59 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई। किन्नौर और चंबा में भी 50 से 54 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज की गई। मई में हीटवेव और ओलावृष्टि दोनों का असर मई महीने के दौरान प्रदेश में ओलावृष्टि की कई घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा करीब सात दिनों तक हीटवेव जैसी परिस्थितियां भी बनी रहीं। मौसम विभाग के अनुसार मई गर्मी के मौसम का चरम महीना होता है, इसलिए हीटवेव, ओलावृष्टि और प्री-मानसून गतिविधियां इस दौरान सामान्य मानी जाती हैं। विभाग के मासिक पूर्वानुमान के मुताबिक जून में हिमाचल के अधिकांश निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि चंबा, लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और मंडी के कुछ हिस्सों में सामान्य वर्षा हो सकती है। फिलहाल मौसम विभाग ने 4 और 5 जून के दौरान संभावित बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बाइट — शोभित कटियार, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र शिमला
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भीषण गर्मी में पेयजल संकट पर स्पेशल अभियान से राहत: 3,077 हैंडपंप मरम्मत, 1,644 लीकेज दुरुस्त

Jaipur, Rajasthan:भीषण गर्मी में पेयजल प्रबंधन से गांवों को बड़ी राहत मिली है। 6 स्पेशल अभियान चलाकर हैंडपंप सुधरवाकर राहत दी गई। इसके साथ साथ पाइप लाइन लीकेज दुरुस्त, जलापूर्ति, अवैध कनेक्शन पर कार्रवाई की गई। सीएम के निर्देश का असर- प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सीएम बेहद गंभीर हैं। सीएम के निर्देश के बाद पीएचईडी में शुरू हुए स्पेशल अभियान का असर देखा जा रहा है। मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की मॉनिटरिंग में गांवों से लेकर शहर तक पेयजल प्रबंधन की राहत देने की कोशिश की जा रही है। अभियानों के दौरान 3,077 हैंडपंपों की मरम्मत, 1,644 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्त किए गए। 978 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान, 1,144 बाधित जलापूर्ति क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बहाल की गई। इसके अलावा 230 कम अवधि वाली जलआपूर्ति, 544 कम सप्लाई और 121 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी निस्तारण किया गया। विभाग ने 1,401 अवैध जल कनेक्शन हटाने के साथ 6,827 अन्य पेयजल सुधार कार्य किए। विशेष टीमों ने मौके पर किया समाधान- अभियानों के तहत गठित विशेष टीमों ने शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण कर समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया। छठे विशेष अभियान में 639 खराब हैंडपंपों को फिर चालू किया गया, 455 पाइपलाइन लीकेज ठीक किए गए, 220 प्रेशर संबंधी शिकायतों का समाधान किया गया। साथ ही 242 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल कर आमजन को राहत पहुंचाई गई। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई- जल संरक्षण और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल कनेक्शन के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। छठे अभियान के दौरान 336 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे, सरस डेयरी बूथ, कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे कनेक्शन शामिल थे। पीएचईडी की तकनीकी टीमों ने अभियान के दौरान प्राप्त लगभग 2,600 शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर आमजन को तत्काल राहत प्रदान की। अप्रैल से चल रहा अभियान- 5 अप्रैल से 23 मई तक संचालित पांच विशेष अभियानों के दौरान 2,438 हैंडपंपों की मरम्मत, 1,189 पाइपलाइन लीकेज की दुरुستی, 758 प्रेशर समस्याओं का समाधान, 902 जलापूर्ति बाधित मामलों का निस्तारण, 180 कम अवधि वाली जलआपूर्ति, 416 कम सप्लाई, 95 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का समाधान 6,277 अन्य सुधार कार्य किए गए। इसी अवधि में 1,065 अवैध जल कनेक्शन भी हटाए गए।
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25 साल से फरार बदमाश गिरफ्तार: ट्रैफिक चालान से लगा सुराग

Agra, Uttar Pradesh:आगरा की थाना नाई की मंडी पुलिस ने 25 साल से फरार चल रहे 50 हजार के इनामी बदमाश सैमुअल उर्फ सहदेव यादव उर्फ अमित मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि आरोपी तक पहुंचने का सुराग किसी मुखबिर से नहीं, बल्कि एक ट्रैफिक चालान से मिला। पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2002 में आरोपी लूटकांड और एक युवती को भगाने के मामले में वांछित था। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार नाम और धर्म बदले और अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलता रहा। हाल ही में दिल्ली में एक वाहन का ट्रैफिक चालान हुआ था। जांच के दौरान पुलिस को उस चालान से जुड़े दस्तावेजों और तकनीकी इनपुट्स पर शक हुआ। इसके बाद सर्विलांस और तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई। पुलिस ने दिल्ली के प्रेमनगर, नागलोई क्षेत्र में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि फरारी के दौरान आरोपी एक निजी स्कूल में शूटिंग रेंज टीचर के रूप में काम कर रहा था। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि फरारी के दौरान आरोपी किन-किन राज्यों में रहा और किन लोगों के संपर्क में था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रेम विवाह के लिए आरोपी ने लूट की वारदात को अंजाम दिया था। फिलहाल उससे गहन पूछताछ जारी है。
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भीषण गर्मी में 6 स्पेशल अभियानों से 3,077 हैंडपंप सुधरे, 1,644 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त

Jaipur, Rajasthan:भीषण गर्मी में पेयजल प्रबंधन से गांवों को बड़ी राहत मिली है. 6 स्पेशल अभियान चलाकर हैंडपंप सुधरवाकर राहत दी गई. इसके साथ साथ पाइप लाइन लीकेज दुरुस्त, जलापूर्ति, अवैध कनेक्शन पर कार्रवाई की. आखिरकार सीएम की पहल के बाद पेयजल प्रबंधन में कितना बदलाव हुआ. देखे इस रिपोर्ट में! सीएम के निर्देश का असर- प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच आमजन को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सीएम बेहद गंभीर है. सीएम के निर्देश के बाद पीएचईडी में शुरू हुए स्पेशल अभियान का असर देखा जा रहा है. मंत्री कन्हैयालाल चौधरी की मॉनिटरिंग में गांवों से लेकर शहर तक पेयजल प्रबंधन की से राहत देने की कोशिश की जा रही है. अभियानों के दौरान 3,077 हैंडपंपों की मरम्मत, 1,644 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्त किये. 978 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान, 1,144 बाधित जलापूर्ति क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बहाल की गई. इसके अलावा 230 कम अवधि वाली जलापूर्ति, 544 कम सप्लाई और 121 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी निस्तारण किया गया. विभाग ने 1,401 अवैध जल कनेक्शन हटाने के साथ 6,827 अन्य पेयजल सुधार कार्य किए. विशेष टीमों ने मौके पर किया समाधान- अभियान के तहत गठित विशेष टीमों ने शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण कर समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया. छठे विशेष अभियान में 639 खराब हैंडपंपों को फिर चालू किया गया, 455 पाइपलाइन लीकेज ठीक किए गए, 220 प्रेशर संबंधी शिकायतों का समाधान किया गया. साथ ही 242 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल कर आमजन को राहत पहुंचाई गई. अवैध जल कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई- जल संरक्षण और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल कनेक्शन के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया. छठे अभियान के दौरान 336 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे, सरस डेयरी बूथ, कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे कनेक्शन शामिल थे. पीएचईडी की तकनीकी टीमों ने अभियान के दौरान प्राप्त लगभग 2,600 शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर आमजन को तत्काल राहत प्रदान की. अप्रैल से चल रहा अभियान- 5 अप्रैल से 23 मई तक संचालित पांच विशेष अभियानों के दौरान 2,438 हैंडपंपों की मरम्मत, 1,189 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 758 प्रेशर समस्याओं का समाधान, 902 जलापूर्ति बाधित मामलों का निस्तारण, 180 कम अवधि वाली जलापूर्ति, 416 कम सप्लाई, 95 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का समाधान 6,277 अन्य सुधार कार्य किए गए. इसी अवधि में 1,065 अवैध जल कनेक्शन भी हटाए गए. नोट-इस खबर की फीड 2 सी में अटैच है।
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जालौन तूफान से किसानों को मुआवजा: भाकियू ने DM को ज्ञापन सौंपा

Jalaun, Uttar Pradesh:जालौन में हाल ही में आए भीषण आंधी-तूफान और बारिश से हुए नुकसान की भरपाई की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने डीएम राजेश कुमार पांडेय को ज्ञापन सौंपकर फसलों, मकानों, विद्युत व्यवस्था और गौशालाओं को हुए नुकसान का सर्वे कराकर राहत दिलाने की मांग उठाई। दिलाएं कि मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन के नेतृत्व में किसानों ने ज्ञापन सौंपकर विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि हाल ही में आए भीषण आंधी-तूफान और बारिश से मूंग की फसल को भारी नुकसान हुआ है। जिलाध्यक्ष द्विजेंद्र सिंह निरंजन ने कहा किसानों ने नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग के साथ ही मूंग खरीद केंद्र स्थापित कर पारदर्शी तरीके से सीधे किसानों से खरीद सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघठन ने बताया कि तूफान के कारण कई स्थानों पर विद्युत पोल और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और पेयजल संकट गहरा गया है। इसके अलावा अनेक गरीब मजदूरों और किसानों के मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। तथा सूखे तालाबों को नहरों व राजकीय नलकूपों के माध्यम से भरवाने की मांग की।
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तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगने वाले गैंग का सरगना मुठभेड़ में गिरफ्तार

Azamgarh, Uttar Pradesh:महिलाओं को तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगने वाले अंतरजनपदीय गैंग का सरगना मुठभेड़ में गिरफ्तार, जवाबी कार्रवाई में पैर में लगी गोली, लाखों की ठगी से जुड़े कई मामलों का खुलासा। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ बरेली, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और आजमगढ़ समेत कई जनपदों में आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। आजमगढ़ जिले के सरायमीर थाना क्षेत्र में राजापुर सिकरौर गांव निवासिनी चंदा देवी ने 9 मई 2026 को संबंधित थाने पर शिकायत दर्ज कराई थी कि ठठेरी बाजार के पास दो अज्ञात व्यक्तियों ने उसके पति पर भूत-प्रेत का साया होने की बात कहकर उसे डराया और समस्या दूर करने के नाम पर कान की बालियां, गले का लॉकेट, मोबाइल फोन तथा एक लाख रुपये नकद ठगकर फरार हो गए थे। मामले में थाना सरायमीर में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी। पुलिस को कल बीती देर रात सूचना मिली कि उस घटना में शामिल दो अपराधी मोटरसाइकिल से फूलपुर की ओर से खरेवा की तरफ आ रहे हैं। सूचना पर प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घेराबंदी की, जहां करछा मंदिर के पास पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगे और कच्चे रास्ते पर मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर गिर गई। इस दौरान एक आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया, जबकि दूसरे आरोपी ने पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मसमर्पण की चेतावनी दी, लेकिन आरोपी द्वारा लगातार फायरिंग किए जाने पर आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें उसके दाहिने पैर में गोली लग गई। घायल अवस्था में उसे गिरफ्तार कर उपचार के लिए सीएचसी खरेवा/फूलपुर भेजा गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान इम्तियाज खान निवासी मौलाना आजाद नगर, थाना क्वार्सी, जनपद अलीगढ़ तथा वर्तमान पता दुबग्गा, थाना ठाकुरगंज, लखनऊ के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने भाई के साथ मोटरसाइकिल से विभिन्न कस्बों और बाजारों में घूमकर अधेड़ उम्र की महिलाओं को निशाना बनाता था। दोनों पहले महिलाओं को परिवार पर संकट, भूत-प्रेत या तंत्र-मंत्र का भय दिखाकर अपने विश्वास में लेते थे। इसके बाद शुद्धिकरण या पूजा-पाठ की बात कहकर उनसे गहने, नकदी और कीमती सामान ले लेते थे तथा महिलाओं को बिना पीछे मुड़े 51 कदम चलने का निर्देश देकर मौके से फरार हो जाते थे। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 2 मोबाइल, 2 कान की बालियां, नाक की कील, लॉकेट, 11100 रुपये नकद, देशी तमंचा, दो जिंदा व खोखा कारतूस तथा बिना नंबर की मोटरसाइकिल बरामद की गई है। जांच में सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पहले से बरेली, बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर में भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। सरायमीर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध बीएनएस की विभिन्न धाराओं तथा आर्म्स एक्ट के तहत नया मुकदमा दर्जकर विधिक कार्रवाई में जुटी है। वहीं फरार आरोपी की तलाश जारी है।
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घोडावट में रोजगार के लिए मजदूरों का विरोध, सीमेंट फैक्ट्री नीति के खिलाफ

Jodhpur, Rajasthan:जिला रिपोर्टर राकेश भारद्वाज विधानसभा भोपालगढ़ इनफॉर्मर किशोर जाखड़ भोपालगढ़ रोजगार की मांग को लेकर घोडावट में मजदुरों का विरोध प्रदर्शन, सीमेंट फैक्ट्री घोडावट प्रबंधन की ओर से स्थानिय ग्रामीणों को रोजगार से वंचित करने की नीति के विरोध में प्रदर्शन, पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ की अगुवाई में ग्रामीण व ट्रक मालिक एक सप्ताह से धरने पर बैठे हुए, बड़ी संख्या में ट्रक मालिक व गांव के मजदूर धरने पर बैठे, प्रमिला चौधरी, राजेश जाखड़, मुन्नीदेवी गोदारा, शिवकरण सेनी, कुम्भाराम डुडी भी धरने में कर रहे सम्बोधित
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जोधपुर के उद्योगों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, 500+ इकाइयां बंद, रोजगार संकट गहरा

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। जोजरी, लूनी तथा क्षेत्र की अन्य नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और निर्देशों के बाद राज्य सरकार तथा प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जोधपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसी क्रम में प्रदूषण मानकों का पालन नहीं करने वाली 500 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को अगले आदेश तक बंद करवा दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद अब उद्योगपति और उनसे जुड़े श्रमिक सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कल बासनी क्षेत्र में प्रदर्शन के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रमिक और उद्योग प्रतिनिधि सर्किट हाउस पहुंचे, जहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गठित हाई लेवल मॉनिटरिंग कमेटी का अस्थायी कार्यालय संचालित हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित विभागों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि उद्योग बंद होने से हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उद्योग प्रतिनिधियों का तर्क है कि वे समय-समय पर अपने संयंत्रों का विस्तार करते रहे हैं और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े शुल्क तथा अन्य देनदारियां भी नियमित रूप से जमा करवाते रहे हैं। उनका कहना है कि कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की क्षमता बढ़ाना और आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित करना सरकार तथा संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी थी। यदि उपचार क्षमता पर्याप्त नहीं है और इसके कारण प्रदूषित पानी नदियों में पहुंच रहा है तो इसका पूरा दोष केवल उद्योगों पर नहीं डाला जा सकता। प्रदर्शन के दौरान कमेटी की ओर से तीन प्रतिनिधियों को बुलाकर उनकी समस्याएं और सुझाव भी सुने गए हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जोधपुर के वस्त्र उद्योग और उससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त करते हैं। उद्योगों के लंबे समय तक बंद रहने से श्रमिकों, परिवहन व्यवसाय, छोटे व्यापारियों तथा अन्य सहायक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। दूसरी ओर, यह भी उतना ही बड़ा तथ्य है कि जोजरी और लूनी नदी में प्रदूषण का मुद्दा वर्षों से उठता रहा है और अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रदूषित जल के कारण न केवल नदियों की पारिस्थितिकी प्रभावित हुई है बल्कि किसानों की जमीनों की उर्वरता, भूजल की गुणवत्ता और आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों में साफ कहा है कि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को तब तक संचालित नहीं किया जा सकता जब तक वे निर्धारित मानकों का पूर्ण पालन करने में सक्षम न हों। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति किसी भी इकाई को दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा। ऐसे में प्रशासन और निगरानी समितियां भी अदालत के आदेशों की पालना के लिए बाध्य हैं। वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के बीच संतुलन स्थापित करने की है। उद्योगों का संचालन प्रदेश की अर्थव्यवस्था और लाखों परिवारों की आजीविका के लिए आवश्यक है, वहीं नदियों, भूजल और कृषि भूमि को बचाना भी उतना ही जरूरी है। तकनीक के विकास के साथ अब जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से उद्योग प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान केवल विरोध-प्रदर्शन या आरोप-प्रत्यारोप से नहीं निकलेगा। उद्योग, सरकार, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सभी पक्षों को मिलकर व्यवहारिक समाधान तलाशना होगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश सर्वोपरि हैं और उनकी पालना अनिवार्य है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उद्योग पर्यावरणीय मानकों को अपनाने की दिशा में कितनी तेजी से कदम बढ़ाते हैं और सरकार आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाती है। तभी रोजगार और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
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