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Rupesh MansureRupesh MansureFollow2 Sept 2024, 11:50 am
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शादी के नाम पर ठगी: लुटेरी दुल्हन ने विनोद के घर लाखों लूटे

Hapur, Uttar Pradesh:शादी के नाम पर ठगी और 'लुटेरी दुल्हन' का सनसनीखेज मामला सामने आया है. हापुड़ जिले के सिंभावली थाना क्षेत्रांतर्गत ग्राम लिसड़ी (भगवतीपुर) निवासी विनोद कुमार के घर शहनाइयों की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि नई नवेली दुल्हन पूरे घर को लाखों की चपत लगाकर रात के अंधेरे में रफूचक्कर हो गई. ​पीड़ित विनोद कुमार के अनुसार, करीब तीन महीने पहले उसकी मुलाकात हल्द्वानी निवासी पंडित राकेश शास्त्री से हुई थी. पंडित ने एक गरीब परिवार की लड़की से शादी का झांसा दिया और 14 अगस्त को रामपुर के एक शिव मंदिर में सीमा नाम की महिला से शादी करवा दी. ​शादी के नाम पर पंडित के कहने पर लड़की की मां को एक लाख रुपए नकद दिलवाए गए. इसके अलावा विनोद ने अपनी नई नवेली पत्नी को सोने का मंगलसूत्र, चांदी का हार, पाजेब और सैम्पिल जैसे कीमती आभूषण भी दिए. ​शादी के बाद दुल्हन को लेकर विनोद अपने घर आ गया. लेकिन यह खुशी महज एक दिन की ही थी. शादी की दूसरी ही रात (15-16 अगस्त की दरमियानी रात करीब 2 बजे) जब पूरा परिवार गहरी नींद में था, दुल्हन सीमा घर का ताला खोलकर सारे जेवरात और नकदी समेटकर फरार हो गई. ​गली में लगे सीसीटीवी कैमरे में महिला काले सूट-सलवार और लाल चुनरी ओढ़े चुपचाप अंधेरे में भागती हुई साफ नजर आ रही है. बताया जा रहा है कि ​सुबह जब परिजनों की आंख खुली तो घर से दुल्हन और कीमती सामान दोनों गायब थे. काफी खोजबीन के बाद जब कोई सुराग नहीं लगा, तो पीड़ित विनोद कुमार ने सिंभावली थाने पहुंचकर नामजद तहरीर दी और पुलिस से न्याय की गुहार लगाई. इस घटना के बाद से ​घर में नई बहू के आने की खुशियां मना रहा परिवार अब खुद को पूरी तरह ठगा और बेबस महसूस कर रहा है. पाई-पाई जोड़कर शादी के लिए जुटाए गए पैसे और जीवनभर की जमा-पूंजी एक ही झटके में लुट जाने से पीड़ित परिवार लाचार खड़ा है. ​सिंभावली थाना पुलिस ने मामले में गुमशुदगी व ठगी की तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी है. पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ शादी कराने वाले कथित बिचौलिए और दुल्हन के नेटवर्क की तलाश में जुट गई है. ऐसे मे ​यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है. किसी अनजान बिचौलिए के मीठे झांसे में आकर जल्दबाजी में शादी का फैसला न लें. बाइट - विनोद, पीड़ित पति
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प्रतापगढ़ जिला प्रमुख की कुर्सी: परिवारों की दबदबा और लॉटरी-आरक्षण का असर

Pratapgarh, Rajasthan:प्रतापगढ़ जिला प्रमुख की कुर्सी सिर्फ जिला परिषद की राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ की ग्रामीण राजनीति में ताकत, संगठन और राजनीतिक प्रभाव का बड़ा केंद्र मानी जाती है। इस बार आरक्षण की लॉटरी में प्रतापगढ़ जिला प्रमुख का पद एसटी महिला के लिए आरक्षित होने के बाद सबसे ज्यादा दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दल आखिर किस चेहरे पर दांव लगाएंगे। आरक्षण ने संभावित दावेदारों का दायरा जरूर सीमित किया है, लेकिन प्रतापगढ़ की अब तक की राजनीतिक परंपरा को देखें तो इस बार भी दावेदारी सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता के बजाय किसी मजबूत राजनीतिक परिवार से सामने आने की संभावना ज्यादा दिखाई दे रही है। प्रतापगढ़ की जिला प्रमुख की राजनीति का पिछला इतिहास भी इसी ओर इशारा करता है। जिले के गठन के बाद से जिला प्रमुख की कुर्सी पर पहुंचने वाले प्रमुख चेहरों में राजनीतिक परिवारों का प्रभाव साफ दिखाई देता है। प्रतापगढ़ जिले प्रमुख के लिए रिकॉर्ड के आधार पर बद्रीलाल पाटीदार एक ऐसा अलग चेहरा रहे, जो किसी प्रमुख विधायक या मंत्री की पत्नी के रूप में इस राजनीतिक समीकरण में फिट नहीं बैठते। 2014 के रिकॉर्ड में वे प्रतापगढ़ के जिला प्रमुख के रूप में दर्ज हैं। इसके बाद जिला प्रमुख की राजनीति फिर से दो बड़े मीणा राजनीतिक परिवारों के बीच दिखाई लगाने लगी। एक तरफ भाजपा की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले पूर्व मंत्री, सात बार विधायक और एक बार सांसद रहे नंदलाल मीणा का परिवार, तो दूसरी तरफ कांग्रेस से जुड़े पूर्व विधायक रामलाल मीणा का परिवार। नंदलाल मीणा की पत्नी सुमित्रा मीणा चित्तौड़गढ़ की जिला प्रमुख रह चुकी थीं और बाद में उनकी पुत्रवधू सारिका मीणा प्रतापगढ़ की जिला प्रमुख बनीं। यानी जिला बनने से पहले चित्तौड़गढ़ की जिला प्रमुख की कुर्सी से शुरू हुआ राजनीतिक परिवार का यह प्रभाव, प्रतापगढ़ जिला बनने के बाद भी खत्म नहीं हुआ। प्रतापगढ़ 26 जनवरी 2008 को राजस्थान का 33वां जिला बना और इसके लिए चित्तौड़गढ़, उदयपुर और बांसवाड़ा के हिस्सों को मिलाया गया था। प्रतापगढ़ की जिला प्रमुख की सियासत में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा और रामलाल मीणा परिवारों की होती रही है। नंदलाल मीणा लंबे समय तक भाजपा की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे। उनके राजनीतिक जीवन में सात बार विधायक, एक बार सांसद और मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं रही हैं। उनकी पत्नी सुमित्रा मीणा चित्तौड़गढ़ की जिला प्रमुख रहीं और बाद में परिवार की अगली पीढ़ी की बहू सारिका मीणा प्रतापगढ़ की जिला प्रमुख बनीं। सारिका मीणा 2015 के जिला प्रमुख चुनाव में भाजपा की ओर से प्रतापगढ़ जिला प्रमुख चुनी गई थीं। उस समय जारी चुनाव परिणामों में प्रतापगढ़ के लिए सारिका मीणा का नाम भाजपा की जिला प्रमुख के रूप में दर्ज है। दूसरी तरफ कांग्रेस की राजनीति में रामलाल मीणा का परिवार जिला प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचा। 2020 के चुनाव के बाद इंदिरा देवी मीणा जिला प्रमुख बनीं और कई वर्षों तक इस पद पर रहीं। बाद के वर्षों के समाचारों में भी उन्हें प्रतापगढ़ जिला प्रमुख के रूप में दर्ज किया गया है। यही वजह है कि प्रतापगढ़ में जिला प्रमुख की राजनीति को केवल जिला परिषद के सदस्यों की संख्या और पार्टी के बहुमत के गणित से नहीं देखा जाता। यहां उम्मीदवार के पीछे खड़ा राजनीतिक परिवार, विधानसभा चुनाव की ताकत, संगठन में पकड़ और जिला परिषद सदस्यों के साथ संबंध भी बड़ा फैक्टर बनता है। पिछले जिला प्रमुख चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मुकाबला भी एक तरह से दो राजनीतिक परिवारों के बीच दिखाई दिया। कांग्रेस की ओर से इंदिरा देवी मीणा और भाजपा खेमे से सारिका मीणा का नाम सामने आया। इंदिरा देवी, पूर्व विधायक रामलाल मीणा की पत्नी हैं, जबकि सारिका मीणा भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे नंदलाल मीणा की पुत्रवधू और वर्तमान राजस्व मंत्री हेमंत मीणा की पत्नी हैं। हेमंत मीणा 2023 में भाजपा के प्रत्याशी रहे और उनके चुनावी हलफनामे में सारिका मीणा और संगीता मीणा दोनों का पत्नी के रूप में उल्लेख दर्ज है। इंदिरा देवी मीणा के पक्ष में जिला परिषद के कुल 17 सदनों में से 10 वोट पड़े थे, जबकि कांग्रेस के पास आठ सदस्य होने के बावजूद उन्हें अतिरिक्त समर्थन मिला। यही वह चुनाव था, जिसने प्रतापगढ़ की जिला प्रमुख की राजनीति में क्रॉस वोटिंग और व्यक्तिगत राजनीतिक प्रभाव को भी बड़ा मुद्दा बना दिया। अब 2026 की लॉटरी ने इस राजनीतिक कहानी को फिर से रोचक मोड़ दे दिया है। प्रतापगढ़ जिला प्रमुख का पद एसटी महिला के लिए आरक्षित होने के बाद पुरुष नेताओं के बजाय उनके परिवार की महिला सदस्यों की ओर राजनीतिक नजरें जाना स्वाभाविक है। इससे उन परिवारों को फायदा हो सकता है जिनके पास पहले से संगठन, पंचायत स्तर की राजनीति और जिला परिषद के सदस्यों के साथ मजबूत राजनीतिक संपर्क हैं। वहीं कांग्रेस खेमे में पूर्व विधायक रामलाल मीणा की पत्नी इंदिरा देवी मीणा का नाम एक बार फिर चर्चा में बताया जा रहा है। इंदिरा देवी पहले जिला प्रमुख रह चुकी हैं और जिला परिषद की राजनीति का उन्हें प्रत्यक्ष अनुभव भी है। उनके कार्यकाल के दौरान भी रामलाल मीणा के साथ उनकी राजनीतिक सक्रियता लगातार दिखाई देती रही। हालांकि इन नामों को फिलहाल चर्चा और संभावित दावेदारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अंतिम उम्मीदवार का फैसला पार्टी नेतृत्व, जिला परिषद के सदस्यों के समीकरण और चुनाव से पहले बनने वाले राजनीतिक गठजोड़ पर निर्भर करेगा। पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा के दौर में भाजपा के उप जिला प्रमुख रहे रामलाल, फिर कांग्रेस से विधायक बने: प्रतापगढ़ की राजनीति में पूर्व विधायक रामलाल मीणा का राजनीतिक सफर भी जिला प्रमुख की मौजूदा राजनीति के समीकरणों को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार रामलाल मीणा 2009 से 2014 तक प्रतापगढ़ जिला परिषद के उप जिला प्रमुख रहे। उस समय वे भाजपा से जुड़े हुए थे और यह दौर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं तत्कालीन प्रभावशाली राजनेता नंदलाल मीणा के राजनीतिक प्रभाव का दौर था। राजस्थानलिंक के राजनीतिक प्रोफाइल में भी रामलाल मीणा का कार्यकाल 2009-2014 उप जिला प्रमुख, जिला परिषद प्रतापगढ़ दर्ज है। यानी जिस राजनीतिक दौर में नंदलाल मीणा भाजपा की प्रतापगढ़ की राजनीति में सबसे मजबूत चेहरों में शामिल थे, उसी दौर में रामलाल मीणा भाजपा के टिकट पर जिला परिषद की राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बाद में राजनीतिक मतभेदों के चलते रामलाल मीणा भाजपा से अलग हुए और किरोड़ी लाल मीणा के साथ जुड़ गए। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राजस्थान जन पार्टी (राजपा) के टिकट पर प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद जब किरोड़ी लाल मीणा फिर भाजपा में लौटे तो रामलाल मीणा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें प्रतापगढ़ विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में रामलाल मीणा ने भाजपा प्रत्याशी को 16,680 मतों के अंतर से हराकर पहली बार विधायक बनने में सफलता हासिल की। उपलब्ध राजनीतिक रिकॉर्ड के अनुसार 2018-23 के दौरान वे राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे। यही राजनीतिक सफर प्रतापगढ़ की राजनीति में एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखता है—जिस व्यक्ति ने नंदलाल मीणा के भाजपा के प्रभाव वाले दौर में भाजपा से जिला परिषद के उप जिला प्रमुख के रूप में राजनीति शुरू की, वही बाद में भाजपा छोड़कर अलग राजनीतिक रास्ते पर गया और अंततः कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचा। इसी वजह से आज जब जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए फिर से नंदलाल मीणा परिवार और रामलाल मीणा परिवार के नाम राजनीतिक चर्चाओं में हैं, तो दोनों परिवारों के बीच की यह पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि भी प्रतापगढ़ की सियासत को और दिलचस्प बना देती है।
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ओम बिरला कोटा-बूंदी दौरे में जनसुनवाई से जनता की समस्याओं के समाधान के निर्देश

Kota, Rajasthan:लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी के प्रवास पर हैं। बिरला शक्तिनगर स्थित कैंप कार्यालय पर जनसुनवाई कर रहे हैं और क्षेत्रवासियों की समस्याएं सुनकर उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दे रहे हैं। आज कोटा में बिरला विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। शाम 5 बजे छप्पनभोग परिसर में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ किया जाएगा। इस दौरान करीब 700 करोड़ रुपए की लागत वाले विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास प्रस्तावित है। जनसुनवाई के दौरान लोगों ने स्थानीय समस्याएं और विकास से जुड़े मुद्दे बिरला के सामने रखे, जिनके समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा रहे हैं।
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डुमरियागंज के मदरसे अरबिया जियाउल उलूम ध्वस्त, भारी पुलिस-प्रशासन मौजूद

Naugarh, Uttar Pradesh:सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिपरा रामलाल गांव में स्थित अरबिया जियाउल उलूम मदरसे पर मंगलवार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर भवन को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान सात जेसीबी मशीनों के साथ बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। मदरसा ध्वस्त किए जाने की सूचना मिलते ही समाजवादी पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और सपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस बल ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। बताया जा रहा है कि अरबिया जियाउल उलूम मदरसे का निर्माण वर्ष 1968 में हुआ था और तभी से यहां मदरसे का संचालन किया जा रहा था। मदरसे में करीब 350 बच्चे उर्दू की तालीम हासिल कर रहे थे। मदरसा प्रबंधन की ओर से इसके वक्फ बोर्ड में पंजीकृत होने की बात कही जा रही है, हालांकि सरकार से मदरसे को मान्यता नहीं मिल सकी थी। वहीं, मदरसे की जमीन को लेकर चकबंदी विभाग में मुकदमा चलने की भी बात सामने आई है। मदरसे की देखरेख कर रहे ग्राम प्रधान एवं मदरसा व्यवस्थापक इरशाद अहमद के मुताबिक, जमीन के अभिलेखों में मदरसा संचालक अब्दुल सलाम का नाम दर्ज है। इरशाद अहमद का कहना है कि मंडलायुक्त बस्ती मंडल की ओर से एसडीएम और चकबंदी विभाग को मामले की जांच के निर्देश दिए गए थे। उनका आरोप है कि मुकदमा लंबित होने और जांच के निर्देश के बावजूद प्रशासन ने मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे मदरसे को ध्वस्त कर दिया। मदरसा व्यवस्थापक का आरोप है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले प्रशासन की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि मदरसा संचालक अब्दुल सलाम फिलहाल मुंबई में हैं। वहीं, प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सपा नेताओं के मौके पर पहुंचने के बाद माहौल और गरमा गया और प्रशासनिक अधिकारियों तथा सपा नेताओं के बीच कार्रवाई को लेकर तीखी बहस हुई। बाइट-1- इरशाद अहमद, ग्राम प्रधान एवं मदरसा व्यवस्थापक वहीं इस बुलडोजर की कार्रवाई को लेकर अपर जिला अधिकारी गौरव श्रीवास्तव ने कहा कि डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिपरा रामलाल गांव के गाटा संख्या 1028,1029 जो की सरकारी भूमि थी उसे पर मदरसा और मस्जिद का निर्माण अवैध रूप से कराया गया था। इस मामले को लेकर तहसीलदार डुमरियागंज न्यायिक न्यायालय में दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद उक्त भूमि से अवैध कब्जा हटाने को लेकर आदेश पारित हुआ। इस आदेश के विरुद्ध जिलाधिकारी न्यायालय मेंअपील की गई। अपील खारिज होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई सुरक्षा व्यवस्था के बीच आज कराई गई है। उन्होंने कहा कि दोनों गाटा संख्याओं पर जो भी अवैध निर्माण थे उनको पूरी तरह से व्यस्त कर दिया गया है। बाइट,,2, गौरव श्रीवास्तव,,, अपर जिला अधिकारी
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मौलाना शहाबुद्दीन की चेतावनी: मुसलमानों से विरोध छोड़ो, सकारात्मक सोच से आगे बढ़ें

Bareilly, Uttar Pradesh:बरेली:- आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रेस को जारी किए गए बयान में कहा कि आज कल मुसलमानो की आदत बन गई है कि जहां बैठते हैं, वहां योगी और मोदी की नकारात्मक चर्चा शुरू कर देते हैं। मैं तमाम मुसलमानो से कहना चाहता हूं कि 2017 से लेकर अब तक भाजपा के विरोध की राजनीति करते रहे हैं, मगर अब विरोध की राजनीति खत्म करके सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। इस 10 साल के लम्बे अरसे में समाजवादी पार्टी और नाम नीहाद सैकूलर पार्टियों के कहने और उकसाने पर मुसलमान भाजपा के लिए लामबंद होता रहा है, जिसका सिधा फायदा समाजवादी पार्टी को मिलता रहा, और वही दूसरी तरफ मुसलमान हाशिए पर चला गया। और सारा नुकसान मुसलमानो को उठाना पड़ रहा है। इसलिए अब मुसलमानो को भी सोचना होगा और अपने नजरिए में बदलाव लाना होगा। मौलाना ने कहा कि नाम निहाद सैकुलर पार्टियां और खास तौर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भोले भाले और सीधे साधे मुसलमानो को उकसाया और भड़काया। अगर किसी मुसलमान ने अपने बेटे य बेटी की शादी में भाजपा के मंत्री या विधायक को बुला लिया, तो सपा के लोग तूफाने बत्तामीजी खड़ा कर देते हैं, और उसके बायकाट तक का ऐलान कर देते हैं। जबकि वहीं दूसरी तरफ मुलायम सिंह यादव ने कल्याण सिंह को मिलाकर सपा की हुकूमत बनाईं, भाजपा पार्टी के आधे लोगों को अपने मंत्री मंडल में शामिल किया, उसी में आजम खां भी मंत्री रहे और उन्होंने इस्तीफा तक नहीं दिया। मुलायम सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कई बार प्रधानमंत्री बनने की दुआं की और खुद अखिलेश यादव रात के अंधेरे में भाजपा के लोगों से मिलकर अपना एजेंडा तय करते हैं। इसलिए मुसलमानो सपा के दो चेहरों को पहचानों। मौलाना ने आगे कहा कि मैं मुसलमानो से गुजारिश करता हूं कि अब जगह जगह भाजपा का विरोध करना बंद कर दें, अपने दिल न दिमाग में सकारात्मक सोच पैदा करें। और अपने व अपने परिवार के भाविष्य के दिनों के लिए अच्छा सोचें, ताकि नई नस्ल के विकास के लिए कुछ बेहतर अंदाज में खाका खींचा जा सकें। इस 10 साल की नकारात्मक राजनीति ने मुसलमानो को बहुत पिछे ढाकेल दिया है। मुसलमानो की सिर्फ विरोध की राजनीति ने मुसलमानो के विकास के पहिए को जाम कर दिया। नाम निहाद सैकुलर पार्टियां और समाजवादी पार्टी ने मुसलमानो को भाजपा के खिलाफ उभ्र प्रदर्शनो के लिए मजबूर किया, मुसलमान सपा के बेहकावे में आ गया जिसके नतीजे में लाठियां मुसलमानो ने खाई , जेल मुसलमान गए। और सपा के सभी नेता आराम से अपनी सियासी रोटियां सेंकते रहें। और फायदे हासिल करते रहे। इसलिए मैं अपने भाईयों से अपील करता हूं कि सियासी लोगों की चालों को समझें और अपने भविष्य पर ध्यान दें।
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चरखी दादरी के सफाई कर्मचारियों का ताला-जड़ धरना, अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

Charkhi Dadri, Haryana:चरखी दादरी। लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों का गुस्सा अब आर-पार की लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है। मांगें पूरी नहीं होने से भड़के कर्मचारियों ने नगर परिषद कार्यालय पर ताला जड़ दिया और कार्यालय के सामने धरना देकर सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील कर दिया जाएगा। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से उनकी मांगें जल्द पूरी करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन लंबे समय बाद भी धरातल पर कोई समाधान नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों में भारी रोष है। ‘समय पर वेतन नहीं तो … धरना पर बैठे कर्मचारियों ने अपनी आर्थिक परेशानियां बताते हुए कहा कि समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारियों को उधार लेकर परिवार का गुजारा करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का सवाल है कि जब समय पर वेतन ही नहीं मिलेगा तो वे अपने बच्चों की पढ़ाई, भोजन और अन्य जरूरतों का खर्च कैसे उठाएंगे? सफाई कर्मचार ने ठेकाप्रथा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ठेके पर लगाए गए सफाई कर्मचारियों का कथित तौर पर शोषण किया जा रहा है और उन्हें समय पर वेतन तक नहीं दिया जाता। कर्मचारियों ने सरकार से ठेकाप्रथा खत्म कर कर्मचारियों के हित में ठोस व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं, जिससे दुर्गंध और बीमारी फैलने की आशंका के बीच आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई व्यवस्था बिगड़ने से लोगों में भी नाराजगी बढ़ रही है। हालांकि सफाई कर्मचारियों ने आमजन से अपनी मजबूरी समझने और आंदोलन में समर्थन देने की अपील की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे भी शहर को साफ रखना चाहते हैं, लेकिन अपने हक और सम्मान की लड़ाई लड़ना भी उनकी मजबूरी है। सरकार को खुली चेतावनी— सफाई कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि लंबे समय से मांगें लंबित हैं, बार-बार भरोसा दिया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में यदि जल्द उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र होगा तथा अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया जाएगा। अब बड़ा सवाल यह है कि शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था और कर्मचारियों के बढ़ते आक्रोश के बीच सरकार और नगर परिषद कब तक खामोश रहती है? कर्मचारियों के ताले और नारों ने प्रशासन के सामने साफ संदेश छोड़ दिया है—मांगें पूरी करो, वरना आंदोलन और बड़ा होगा।
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झज्जर के बादली में प्रवासी मजदूरों के विरुद्ध प्रभावशाली परिवार की लाठीचार्ज, जाँच शुरू

Jhajjar, Haryana:झज्जर बादली के मुंडा खेड़ा गांव में प्रभावशाली परिवार द्वारा प्रवासी मजदूरों को बनाया गया बंधक : बंद कमरे में की गई प्रवासी मजदूरों की लाठी डंडों से पिटाई, बाद में पुलिस के हवाले किया : प्रवासी मजदूरों पर लगाया गया चोरी करने का आरोप : बादली थाने के पुलिस कर्मचारी ने भी की प्रवासी मजदूरों के साथ बदसलूकी : पुलिस कर्मचारी और पूरा प्रभावशाली परिवार पर लगा जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर थूक चटवाने का आरोप : सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है पीड़ित के आरोपों का वीडियो : भीमसेना के अध्यक्ष नवाब सतपाल तवर ने दी झज्जर बंद की धमकी : वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस मैच में अफ़रा-तफ़री का माहौल : मामला गरमाने के बाद बहादुरगढ़ के डीसीपी मयंक मिश्रा और एसीपी प्रदीप खत्री पहुंचे बादली थाना, कर रहे हैं मामले की जांच
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जालंधर में व्यापारी के 50 लाख से अधिक कैश लूटकर 5 लुटेरे फरार

Jalandhar, Punjab:जालंधर टक्कर मारकर कारोबारी मित्तल से 50 लाख से ज्यादा कैश लूटकर 5 लुटेरे फरार जालंधर के सूर्या एनक्लेव एक्सटेंशन के पास 120 फीट रोड पर सोमवार रात करीब 7:50 बजे कार सवार 5 लुटेरों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया। लुटेरों ने लोहा व्यापारी ललित मित्तल (60) की कार को टक्कर मारकर रोका और जानलेवा हमला कर कैश से भरा बैग लूट लिया। लूट की रकम करीब 50 लाख रुपए है। लुटेरों से बचने के लिए व्यापारी ने दिलेरी से कार बैक करने की कोशिश की, लेकिन बदमाशों ने अपनी कार उनकी गाड़ी में दे मारी। लुटेरों ने कार के शीशे रॉड से तोड़ दिए। व्यापारी के माथे पर वार किया और बगल की सीट के नीचे रखा कैश से भरा बैग उठाकर कार में फरार हो गए। रात करीब 8 बजे पुलिस को सूचना मिली। डीसीपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों, एसीपी अमनबीर सिंह, एसएचओ जसपाल सिंह, सीआईए इंचार्ज सुरिंदर कुमार और स्पेशल सेल इंचार्ज मनजिंदर सिंह समेत भारी पुलिस बल क्राइम सीन पर पहुंच गए। ललित मित्तल ने बताया कि मैं हमेशा की तरह अपने टांडा रोड स्थित दफ्तर से करीब पौने घंटे की देरी से निकला था। मेरा घर सूर्या एनक्लेव में है, इसलिए किशनपुरा में दुग्गल बेकरी से होते हुए सीधे 120 फुटी रोड पर आ गया। रास्ते में ही मुझे एहसास हो गया था कि एक सफेद रंग की कार मेरा पीछा कर रही है। 120 फुटी रोड पर स्ट्रीट लाइटें बंद थीं। मैंने कार की रफ्तार तेज ही की थी कि पीछे आ रही कार अचानक आगे आ गई। उन्होंने कार रोकने का इशारा किया, लेकिन मैंने गाड़ी बैक कर दी। इस पर उन्होंने अपनी कार से मेरी कार में जोरदार टक्कर मार दी। मैं समझ गया था कि ये अपराधी हैं, मैंने कट मारकर गाड़ी भगाने की कोशिश की, लेकिन वे बेहद शातिर थे। उन्होंने थोड़ी दूरी पर ही मुझे घेर लिया। कार से तीन लुटेरे बाहर निकले। आते ही उन्होंने शीशों पर रॉड मारी और फिर मेरे माथे पर वार किया। मैं जब तक कुछ समझ पाता, उन्होंने मेरे सामने ही बगल की सीट के नीचे रखा बैग उठाया और फरार हो गए। उनका कहना है कि कार में लुटेरे 4 या 5 थे। ललित मित्तल सीजेएस स्कूल के मालिक और सूर्या एनक्लेव रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी के महासचिव हैं। आप नेता नितिन कोहली, सोसाइटी अध्यक्ष सुनील शर्मा मौके पर पहुंचे। डीसीपी ढिल्लों के मुताबिक व्यापा व्यापारी ने स्पष्ट नहीं किया है कि बैग में कितना कैश था। पुलिस की 7 टीमें जांच में जुटी थीं।
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कल्याणपुरी में हत्या के बाद मेट्रो वेस्ट कर्मचारियों का धरना और मुआवजे की मांग

New Delhi, Delhi:पूरी दिल्ली के कल्याणपुरी इलाके में रविवार सुबह अनिल की चार कुमार कर हत्या कर दी गई थी अनिल मेट्रो वेस्ट में सफाई कर्मचारी था और सुबह अपने काम पर पहुंचा था आज अनिल की हत्या को तीन दिन हो गए हैं हालांकि पुलिस ने हत्या के आरोपी निहाल को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन मेट्रो वेस्ट के सफाई कर्मचारी आज तीसरे दिन भी लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं कर्मचारियों की मांग है कि अनिल के परिवार को मुआवजे की राशि और घर के सदस्य को एक स्थाई सरकारी नौकरी जब तक नहीं दी जाएगी जब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा कर्मचारियों का कहना है कि तीन दिन बीत जाने के बाद भी मेट्रो वेस्ट कंपनी का कोई अधिकारी या दिल्ली सरकार का कोई भी रिमाइंडर तुमसे बात करने नहीं पहुंचा है जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी तब तक वह धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे
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नीतीश कुमार का बिहार राजनीति यात्रा: NDA-आशीर्वाद के साथ यात्रा पर Govt विरोधी दुष्प्रचार पर किया गया बयान

Patna, Bihar:बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बनने के बाद एक बार फिर बिहार की राजनीति में सक्रिय नजर आ रहे हैं। आज सुबह-सुबह JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा से मिलने उनके आवास पहुंचे। इस मुलाकात के दौरान पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें नीतीश कुमार के बिहार के सभी जिलों का दौरा करने का कार्यक्रम सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसको लेकर आज शाम में बैठक है। मुलाकात के दौरान नीतीश कुमार ने संजय झा से कहा कि पार्टी के जो भी नेता, कार्यकर्ता और पदाधिकारी उनसे मिलने आते हैं, उनसे मुलाकात की जाए। वही नीतीश कुमार और संजय झा बातचीत कर रहे थे, उसी दौरान समर्थकों की ओर से नारेबाजी भी की गई और नीतीश कुमार के समर्थन में सुपर सीएम के नारे लगाए गए। वही नीतीश कुमार की यात्रा को लेकर JDU केराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सजंय झा ने कहा कि पार्टी के सब नेता-कार्यकर्ता को मिलते रहते हैं, वह हम लोगों के सर्वमान्य नेता हैं और बिहार के युगपुरुष हैं। देश का मैं कहूँगा, बिहार में जो काम उन्होंने किया—मैं इसलिए चर्चा करता हूँ, अभी भी लोग उनको मिस करते हैं, कहीं भी जाते हैं याद करते हैं उनके कामों को, और वह कभी कोई भुला नहीं सकता है। उनका आशीर्वाद हम सबको है, पूरे बिहार के लोगों को है। पार्टी के कार्यकर्ताओं से कम से कम एक बार बैठकर वो करें। बरसात के बाद हम लोग आग्रह करेंगे और उन्हें बिल्कुल ये सब… जब फील्ड में जाना हो, वर्कर से मिलना हो, तो वो दो कदम आगे ही रहते हैं। वही राजद के विधायक रणविजय साहू ने कहा अब तो संजय झा जी यह बात बोल रहे हैं कि संजय झा जी हैं जो माननीय नीतीश कुमार जी को बिहार की सत्ता से दूर किए। षड्यंत्र करने वाले कौन लोग हैं? बिहार की जनता और देश की जनता जान रही है कि संजय झा… संजय झा जी कौन हैं और नीतीश कुमार जी को सत्ता से क्यों दूर किए। बिहार सरकार के मंत्री केदार गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, यात्रा पर निकल रहे हैं तो क्या दिक्कत है; NDA के नेता हैं और NDA के सारे सिफाई हैं। 2005 के बाद उनके द्वारा काफी बिहार में बदला हुआ है और अब उनके आशीर्वाद से और भाजपा के आशीर्वाद से सम्राट चौधरी जी मुख्यमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। NDA में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है। विपक्ष जो बोल रहा है वही सही नहीं है। कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रतима कुमारी ने कहा कि बिहार में भाजपा के बढ़ते हुए अत्याचार से और जदयू को जिस तरीके से समाप्त करने का प्रयास भाजपा द्वारा किया जा रहा है, इस डर से माननीय नीतीश कुमार जी बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं। उनको पता है कि हमारा अलायंस पार्टनर बीजेपी क्षेत्रीय पार्टियों को धीरे-धीरे समाप्त कर रहा है, आने वाले विधानसभा चुनाव तक ऐसा ना हो कि जदयू का अस्तित्व खत्म हो जाए। नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन की अब तक की 16 यात्राओं की सूची: - जुलाई 2005: न्याय के साथ विकास यात्रा - 2009 (जनवरी-फरवरी): विकास यात्रा - 2009 (नवम्बर-दिसम्बर): धन्यवाद यात्रा - 2010: प्रवास यात्रा - 2010: विश्वास यात्रा - 2011: सेवा यात्रा - 2012 (दिसम्बर): अधिकार यात्रा - 2014: सम्पर्क यात्रा - 2014: संकल्प यात्रा - 2016: निश्चय यात्रा - 2017: विकास समीक्षा यात्रा - 2019 (दिसम्बर): जल जीवन हरियाली यात्रा - 2021 (दिसम्बर): समाज सुधार यात्रा - 2023 (फरवरी): समाधान यात्रा - 2024: प्रगति यात्रा - 2026: समृद्धि यात्रा
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उमेटा ओवरब्रिज पर सुरक्षा जाली लगेगी: 10 दिनों में आत्महत्या रोकथाम की तैयारी

Anand, Gujarat:आणंद जिले में आંકला वाले उमेटा के पास मही नदी पर मौजूद ओवरब्रिज से बढ़ते आत्महत्या घटनाओं के बाद स्थानीय ग्रामजनोंनेBridge की दोनों तरफ सुरक्षा जाली लगवाने की मांग की। सांसद मीतेश पटेल ने ओवरब्रिज का दौरा कर मार्ग और मकान विभाग के vadodara और आणंद के अधिकारियों से बातचीत की और अगले दस दिनों में ओवरब्रिज पर सुरक्षा जाली लगाने की बात कही।另一方面 आणंद जिले को vadodara जिले से जोड़ते महीसागर नदी पर उमेटा ओवरब्रिज से पिछले दो मास से आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। आणंद और वडोदरा जिलों के कुछ लोग निराश होकर उमेटा ओवरब्रिज की पैरापिट की छोटी होने के कारण नदी में कूद कर आत्महत्या कर लेते हैं। आत्महत्या के मुद्दों को रोकने के लिए ब्रिज की दोनों तरफ सुरक्षा जाली लगाने की मांग उठी, जिसका निष्पादन तत्कालिन मंत्री नितिन गडकरी से बातचीत के बाद आणंद और वडोदरा मार्ग मकान विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर 10 दिनों में लोहे की जाली लगाने की योजना बताई गई। ताकि आत्महत्या रोकथाम संभव हो सके।
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जगदलपुर डोंगाघाट के बायोगैस प्लांट को पुनः शुरू कराने की मांग तेज

Jagdalpur, Chhattisgarh:जगदलपुर के डोंगाघाट में जनवरी 2023 में बायोगैस प्लांट का शुभारंभ किया गया था, तकरीबन 50 लाख रुपए की लागत से निर्मित इस बायोगैस प्लांट का संचालन नगर निगम को करना था लेकिन नगर निगम की उदासीनता के चलते गोबर से बिजली बनाने का यह प्लांट चालू ही नहीं हो पाया, बायोगैस प्लांट की स्थिति का जिम्मेदार महापौर संजय पांडे ने पूर्ववर्ती नगर निगम की सरकार को बताया उन्होंने कहा कांग्रेस बायोगैस प्लांट संचालन करने में विफल साबित हुई अब उनके द्वारा पुनः बायोगैस प्लांट संचालन की पहल की जाएगी बता दें कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में सिर्फ दो स्थानों पर ही बायोगैस प्लांट का निर्माण लाखों रुपए खर्च कर किया गया था, लेकिन जगदलपुर में केंद्र सरकार का यह पायलट प्रोजेक्ट विफल साबित हुआ, इस प्लांट को प्रतिदिन 500 किलोग्राम गोबर और 100 लीटर पानी की मदद से 10 किलोवाट बिजली बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था पहले गोबर की उपलब्धता नहीं होने की बात कह कर प्लांट का संचालन बंद कर दिया गया था लेकिन now तक प्लांट का संचालन दुबारा शुरू नहीं हो पाया।
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