icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
Become a News Creator

Your local stories, Your voice

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement
Back

हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|

Advertisement
Advertisement

खेलो राजस्थान महाअभियान का पहला चरण विवादों के बीच शुरू, पंजीयन में शिक्षकों पर दबाव

Jaipur, Rajasthan:जयपुर राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद और खेल विभाग की ओर से शुरू किए जा रहे ‘खेलो राजस्थान’ महाअभियान का पहला चरण शुरू होने से पहले ही विवादों में घिरता नजर आ रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर हर आयु वर्ग के खिलाड़ियों को जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे अभियान में पंजीयन का जिम्मा शिक्षकों और संस्था प्रधानों पर डालने से नाराजगी बढ़ रही है। अभियान के पहले चरण में वॉलीबाल, एथलेटिक्स, रस्साकशी और तीरंदازی के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख 16 नवंबर निर्धारित की गई है। वहीं शिक्षा विभाग के शिविरा पंचांग के अनुसार 4 से 15 नवंबर तक स्कूलों में अवकाश है। ऐसे में शिक्षकों का सवाल है कि छुट्टियों के दौरान घर-घर जाकर पंजीयन कैसे करवाया जाए। स्कूल खुलने के बाद भी पंजीयन के लिए महज एक दिन मिलने से लक्ष्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण हैं,,पंजीयन प्रक्रिया में जन आधार सहित अन्य विवरणों के सत्यापन के लिए मोबाइल पर ओटीपी भेजा जा रहा है। साइबर ठगी की घटनाओं के चलते अभिभावक शिक्षकों के साथ ओटीपी साझा करने से कतरा रहे हैं। इससे पंजीयन प्रक्रिया में तकनीकी परेशानी बढ़ रही है,,शिक्षकों का कहना है कि पर्याप्त पंजीयन नहीं होने पर संस्था प्रधानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। अवकाश के दौरान काम का दबाव और कार्रवाई की धमकियों से शिक्षक वर्ग में आक्रोश है।
0
0
Report

मैनपुरी-करहल बच्चों के हाथों में कूड़े की ठेली,वीडियो वायरल,नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल ।

Ajay KumarAjay KumarFollowJust now
Kanakpur, Uttar Pradesh:मैनपुरी/करहल एक तरफ सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए सर्व शिक्षा अभियान,मिड-डे मील,मुफ्त किताबें और तमाम योजनाएं चला रही है,मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक कहते हैं कि हर बच्चा स्कूल जाएगा। लेकिन करहल में जमीन पर हकीकत बिल्कुल उल्टी है, यहां बच्चों के कंधों पर शिक्षा और सपनों की जगह कूड़ा ढोने का बोझ लाद दिया गया है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में पेन,किताबें और स्कूल का बस्ता होना चाहिए,जिस उम्र में उन्हें स्कूल जाकर अपना भविष्य संवारना चाहिए । उसी उम्र में बच्चे नगर पंचायत करहल की कूड़ा उठाने वाली ठेली को धकेलते और उसमें कूड़ा डालते हुए नजर आ रहे हैं। यह दृश्य न सिर्फ चिंताजनक है,बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है,आखिर बच्चों से इस तरह का काम क्यों कराया जा रहा है ? क्या बच्चों का बचपन इसी तरह बीतेगा ? बच्चों के कंधों पर शिक्षा और सपनों की जिम्मेदारी होनी चाहिए,न कि कूड़ा ढोने का बोझ। सरकार जहां एक ओर बच्चों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए तमाम योजनाएं चला रही है,वहीं दूसरी ओर करहल में सामने आया यह दृश्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि नगर पंचायत प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करता है और बच्चों को इस तरह के कार्य से दूर रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं,पूरा मामला किशनी रोड का बताया जा रहा है।
0
0
Report
Advertisement

बारमेर की शरणार्थी बस्ती में पेयजल संकट और जमीन के अधिकारों पर बड़ा सवाल

Barmer, Rajasthan:बारमेर की शरणार्थी बस्ती में आज हालात ऐसे हैं कि पानी की सप्लाई आधी रात को होती है तो पूरी बस्ती के लोग नींद छोड़कर बर्तन लेकर पानी भरने पहुंच जाते हैं। यह सिर्फ पेयजल संकट नहीं है, बल्कि पुनर्वास, जमीन के अधिकार और सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर सवाल है। इस बस्ती में रहने वाले परिवारों का इतिहास 1971 के भारत-पाक युद्ध से जुड़ा है। युद्ध के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए थे। उन्होंने भूखंड खरीदकर अपना आशियाना बनाया। धीरे-धीरे परिवार बड़े और बस्ती आबाद होती चली गई। गृह मंत्रालय की 1984-85 की वार्षिक रिपोर्ट में पाकिस्तान से आए विस्थापितों के पुनर्वास का उल्लेख मिलता है। मार्च 1978 में इन परिवारों को भारतीय नागरिकता देने और स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया का निर्णय हुआ था, पर पुनर्वास की चुनौतियां समाप्त नहीं हुईं। बस्ती की बदहाली के पीछे स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन के खसरे में बाद में पुलिस फायरिंग रेंज का नाम दर्ज हो गया। इसके कारण बस्ती में सड़क, पानी और विकास कार्य मुश्किल पड़े। राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक स्वामित्व का सवाल अहम है। क्या भूखंड खरीदने वाले परिवारों के दस्तावेजों की जांच हुई? फायरिंग रेंज के लिए भूमि आवंटन कब हुआ? क्या पूरा हिस्सा खसरे में आता है या सिर्फ आसपास की जमीन विवादित है? प्रशासन को जवाब साफ़ करना चाहिए। पेयजल संकट की स्थिति को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों को पाइपलाइन में अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी। पानी की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन को पंक्चर करवाकर व्यवस्था चलानी पड़ी ताकि तत्काल राहत मिले। यह स्थायी समाधान नहीं है। 2018 में राजस्थान विधानसभा में पाक विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और जमीन से जुड़े मुद्दे उठे थे। सरकार ने पुनर्वास की प्रक्रिया और राहत का उल्लेख किया था। लोकतंत्र में इन परिवारों का वोट भी उतना ही महत्वपूर्ण है। चुनाव आते हैं तो जनप्रतिनिधि इनके दरवाजे तक पहुंचते हैं, पर पानी-सड़क जैसी सुविधाओं की बात आने पर आवाज़ दब जाती है। अब जिला प्रशासन, नगर परिषद, जलदाय विभाग और राजस्व विभाग को मिलकर इस मामले की पड़ताल करनी चाहिए। जमीन की स्थिति स्पष्ट हो और पेयजल की स्थायी व्यवस्था हो। 1971 में पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए इन परिवारों को अपने देश में सम्मानपूर्ण जीवन के लिए कब तक संघर्ष करना पड़ेगा?
0
0
Report

गढ़चिरौली में जंगल के टव्वे में छिपी विस्फोटक बरामद, माओवादी सामग्री निष्कर्ष

Pakhanjur, Chhattisgarh:पखांजूर --माओवाद के खात्मे के बाद भी जंगलों में छिपे विस्फोटक और माओवादी सामग्री को तलाशने में पुलिस जुटी हुई है। इसी कड़ी में 4 नवंबर को गढ़चिरौली पुलिस ने थाना ग्यारापत्ती क्षेत्र के टव्वे जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाकर जमीन में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की है। तलाशी के दौरान 11 कुकर, 3 किलो गन पाउडर, 4 डेटोनेटर, 3 बंडल कॉर्टेक्स वायर, 12 वोल्ट की बैटरी, 250 ग्राम पटाखा बारूद, 4 स्टील कंटेनर, 8 वायर बंडल और एक सोलर प्लेट समेत अन्य माओवादी सामग्री जब्त की गई। पुलिस के अनुसार माओवादी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के उद्देश्य से ऐसी सामग्री जंगलों में छिपाकर रखते थे। अब माओवादी गतिविधियों के खात्मे के बाद पुलिस जंगलों में छिपे ऐसे खतरों को खत्म करने में जुटी है।
0
0
Report
Advertisement

राममय हुआ ग्रामोदय विद्यालय का सभागार, बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

Rajeev DixitRajeev DixitFollow2m ago
Mauranipur, Uttar Pradesh:मऊरानीपुर।भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या आगमन की खुशी में द ग्रामोदय इंटरनेशनल स्कूल एवं जी किड्स प्ले स्कूल में दीपावली महोत्सव हर्षोल्लास और भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। विद्यालय के सभागार में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी के स्वरूप में शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। बच्चों ने रामायण के प्रसंगों, नृत्य, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की। कार्यक्रम में प्रनिका अग्रवाल ने श्रीराम, मानिका अग्रवाल ने लक्ष्मण, याती ने माता सीता और अनिरुद्ध गुप्ता ने हनुमान जी का स्वरूप धारण किया। वहीं अन्य विद्यार्थियों ने नृत्य एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय के प्रिंसिपल विष्णु पाराशर एवं प्रबंध निदेशक अरुण गुप्ता ने भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी के स्वरूपों का तिलक एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर विजय का संदेश दिया गया। साथ ही भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई। विद्यालय परिवार का उद्देश्य आधुनिक शिक्षा के साथ बच्चों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक संस्कारों से जोड़ना है।
0
0
Report

मैनपुरी-करहल बच्चों के हाथों में कूड़े की ठेली,वीडियो वायरल,नगर पंचायत कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।

Ajay KumarAjay KumarFollow6m ago
Kanakpur, Uttar Pradesh:करहल/मैनपुरी। एक तरफ सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए सर्व शिक्षा अभियान,मिड-डे मील,मुफ्त किताबें और तमाम योजनाएं चला रही है,मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक कहते हैं कि हर बच्चा स्कूल जाएगा। लेकिन करहल में जमीन पर हकीकत बिल्कुल उल्टी है, यहां बच्चों के कंधों पर शिक्षा और सपनों की जगह कूड़ा ढोने का बोझ लाद दिया गया है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में पेन,किताबें और स्कूल का बस्ता होना चाहिए,जिस उम्र में उन्हें स्कूल जाकर अपना भविष्य संवारना चाहिए । उसी उम्र में बच्चे नगर पंचायत करहल की कूड़ा उठाने वाली ठेली को धकेलते और उसमें कूड़ा डालते हुए नजर आ रहे हैं। यह दृश्य न सिर्फ चिंताजनक है,बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है,आखिर बच्चों से इस तरह का काम क्यों कराया जा रहा है ? क्या बच्चों का बचपन इसी तरह बीतेगा ? बच्चों के कंधों पर शिक्षा और सपनों की जिम्मेदारी होनी चाहिए,न कि कूड़ा ढोने का बोझ। सरकार जहां एक ओर बच्चों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए तमाम योजनाएं चला रही है,वहीं दूसरी ओर करहल में सामने आया यह दृश्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि नगर पंचायत प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करता है और बच्चों को इस तरह के कार्य से दूर रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं,पूरा मामला किशनी रोड का बताया जा रहा है।
0
0
Report

दो वोट से जीता सरपंच चुनाव, मतगणना के बाद हंगामे के बीच घोषित परिणाम

Karauli, Rajasthan:पंचायत चुनाव में जीत और हार के बीच महज दो वोट का अंतर होने से शेरपुर-सूरौठ पंचायत समिति की बझेड़ा ग्राम पंचायत में मतगणना के दौरान जमकर हंगामा हुआ। रिकाउंटिंग की मांग को लेकर प्रत्याशियों के समर्थक आमने-सामने आ गए। विवाद और कई बार पुनर्मतगणना के चलते परिणाम रातभर अटका रहा। आखिरकार प्रशासन की मौजूदगी में दोबारा मतगणना कराई गई और सुबह 7 बजे परिणाम घोषित हुआ। इसमें लक्ष्मी देवी ने प्रेमलता मीणा को महज दो वोटों से हराकर सरपंच पद पर जीत दर्ज की। जानकारी के अनुसार, बझेड़ा पंचायत मुख्यालय पर मतगणना के दौरान लक्ष्मी देवी और प्रेमलता मीणा के बीच वोटों का अंतर बेहद कम रहा। दूसरे प्रत्याशी की ओर से पुनर्मतगणना की मांग की गई, जबकि विजयी प्रत्याशी के समर्थकों ने इसका विरोध किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और विवाद की स्थिति बन गई। कमरों में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने का प्रयास किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अक्षय गोदारा के निर्देश पर रात करीब 3 बजे एडीएम जगदीश प्रसाद गौड़ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में दोबारा मतगणना कराई। सुबह घोषित परिणाम में लक्ष्मी देवी पत्नी खेम सिंह को 1799 वोट मिले, जबकि प्रेमलता पत्नी रामनिवास मीणा को 1797 वोट मिले। इस तरह लक्ष्मी देवी ने दो वोटों से जीत हासिल की। मतगणना के दौरान एएसपी रामकुमार कस्वां, एएसपी कमल मीणा, नादौती एसडीएम, एरिया मजिस्ट्रेट प्रीति चक सहित कई थानों का पुलिस जाब्ता मौके पर तैनात रहा। प्रशासनिक अधिकारी पूरी रात मतगणना स्थल पर मौजूद रहे।
0
0
Report
Advertisement
Advertisement
Back to top