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शाहपुर कंडी बांध से भारत को रावी पानी पर पूर्ण नियंत्रण, पाकिस्तान पानी से महरूम
RVRajat Vohra
Feb 18, 2026 05:04:54
Jammu,
आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान को भारत एक बड़ा झटका देने जा रहा है। रावी नदी पर बन रहा शाहपुर कंडी बांध अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और 31 मार्च 2026 तक इसके पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है। इस परियोजना के पूरा होते ही रावी नदी का वह पानी, जो अब तक पाकिस्तान की ओर बह जाता था, पूरी तरह भारत में ही इस्तेमाल किया जाएगा। सिंधु जल संधि के प्रावधानों के बावजूद भारत को अपने हिस्से के पानी के पूर्ण उपयोग का अधिकार है और इस परियोजना के जरिए भारत उसी अधिकार का इस्तेमाल करने जा रहा है। इसे भारत की बड़ी रणनीतिक और जल प्रबंधन उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
अब तक रावी नदी का लगभग 5 प्रतिशत पानी बिना इस्तेमाल के पाकिस्तान चला जाता था, जिससे वहां के लाहौर, सियालकोट और गुजरांवाला जैसे क्षेत्रों को कृषि और पेयजल के लिए भारी लाभ मिलता था। अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान को इससे करीब 8,000 करोड़ रुपये का फायदा होता था। लेकिन शाहपुर कंडी बांध के पूरा होने के बाद यह पानी पाकिस्तान नहीं जाएगा और इसका पूरा उपयोग भारत अपने राज्यों में करेगा। ऐसे में आने वाली गर्मियों में पाकिस्तान के इन इलाकों को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे वहां की खेती और पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इस परियोजना से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों में 32,173 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव होगी, जबकि पंजाब में भी लगभग 5,000 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन को पानी मिलेगा। इस तरह कुल मिलाकर 37,000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सीधा फायदा पहुंचेगा। इसके साथ ही परियोजना से बिजली उत्पादन भी किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को भी बल मिलेगा।
केंद्र सरकार ने इस परियोजना के सिंचाई हिस्से के लिए 485.38 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस बांध के बनने से पानी की वह बर्बादी भी रुकेगी, जो पहले माधोपुर हेडवर्क्स से होकर बिना इस्तेमाल के पाकिस्तान चला जाता था।
गौरतलब है कि सिंधु जल संधि के तहत भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी पर पूर्ण अधिकार है, लेकिन पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर न होने की वजह से अब तक भारत अपने हिस्से का पूरा पानी इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। लेकिन पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को पूरी तरह स्थगित कर दिया और संदेश साफ था कि खून और पानी एक साथ नहीं भागेंगे। जिसके बाद इस दम का काम युद्ध स्तर पर किया गया। शाहपुर कंडी बांध के बनने के बाद भारत अपने हिस्से के पानी का पूरा उपयोग कर सकेगा, जिससे पाकिस्तान को मिलने वाला अतिरिक्त पानी रुक जाएगा।
शाहपुर कंडी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2001 में हुई थी, लेकिन पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच विवाद के चलते इसका काम लंबे समय तक रुका रहा। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद दोनों राज्यों के बीच समझौता हुआ और इसके बाद परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ाया गया। अब इसे मिशन मोड में पूरा किया जा रहा है।
परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल जम्मू-कश्मीर और पंजाब के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के विकास, कृषि उत्पादन और जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी यह परियोजना एक मील का पत्थर साबित होगी, जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान को पहली बार रावी के पानी में उल्लेखनीय कमी का सामना करना पड़ सकता है。
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