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बरगी बांध लबालब, 17 गेट खुलने से निचले इलाकों में पानी का कहर

Narsinghpur, Madhya Pradesh:एंकर-जंगलों और ऊपरी इलाकों में हुई झमाझम बारिश के चलते बरगी बांध लबालब हो गया है। डैम का जलस्तर संतुलित रखने के लिए प्रबंधन को इसके 17 गेट खोलने पड़े। जैसे ही बांध से पानी का विशाल सैलाब छोड़ा गया, निचले इलाकों में हड़कंप मच गया। सबसे ज्यादा असर नरसिंहपुर जिले में देखने को मिल रहा है, जहां नर्मदा नदी का जलस्तर अचानक कई फीट बढ़ गया है। तस्वीरें गोटेगांव के झांसीघाट की हैं... जहां नर्मदा का रौद्र रूप साफ देखा जा सकता है। नदी का पानी झांसीघाट पुल के ऊपर से बह रहा है। पुल के डूबने से नरसिंहपुर और जबलपुर को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नरसिंहपुर जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। झांसीघाट पुल के दोनों तरफ पुलिस बल और होमगार्ड के जवानों को तैनात कर दिया गया है
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सलौना स्टेशन के पास चलती ट्रेन से गिरकर मजदूर की मौत

Begusarai, Bihar:एंकर बेगूसराय में चलती ट्रेन से नीचे गिरने के दौरान एक मजदूर की ट्रेन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया है। घटना बखरी थाना क्षेत्र के सलौना रेलवे स्टेशन के पास की है। मृतक की पहचान खगड़िया जिले के भड़ास गांव निवासी योगेंद्र प्रसाद सिंह के पुत्र रूपेश कुमार सिंह के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि रूपेश कुमार सलौना स्टेशन से ट्रेन पकड़कर समस्तीपुर मजदूरी करने के लिए जा रहा था। ट्रेन के स्टेशन से रवाना होने के बाद वह मोबाइल देखने लगा। इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह चलती ट्रेन से नीचे गिर गया। ट्रेन से नीचे गिरने के दौरान रूपेश कुमार ट्रेन की चपेट में आ गया, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही बखरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच और आगे की कार्रवाई में जुटी है
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रोहतक के स्ट्रीट लाइट स्कूल ने 100 प्रवासी मजदूर बच्चों का भविष्य बदला

Rohtak, Haryana:स्ट्रीट लाइट स्कूल ने मिटाया अशिक्षा का अंधकार 100 बच्चों का भविष्य संवार रहा ये शख्स यहां के स्टूडेंट्स इंजीनियरिंग से ले कर मेडिकल लाइन तक का सफर कर रहे है हाल ही मे तीन स्टूडेंट्स को पोस्ट आफिस में सरकारी नोकरी तक मिल चुकी रोहतक के सेक्टर-5 में स्थित ये स्कूल पिछले 15 साल से हर शाम स्ट्रीट लाईट के नीचे प्रवासी मजदूरों के बच्चे पढ़ते हैं और उनको पढ़ाने वाले शिक्षक का नाम है नरेश कुमार. दरअसल दूसरे प्रदेशों से आए प्रवासी मजदूर हरियाणा में मजदूरी करने के लिए आते हैं और यहां पर अपने बच्चों के साथ रहते हैं. ज्यादातर अनपढ़ होने के कारण इन्हें शिक्षा में रूचि कम होती है और अपने बच्चों को भी मजदूरी के काम में लगा लेते हैं पहले दिन स्कूल में आए थे सिर्फ 3 बच्चे वीओ-1-नरेश कुमार शिक्षक व समाजसेवी रोहतक वीओ -2 -नरेश कुमार पेशेवर शिक्षक नहीं हैं. सिर्फ समाजसेवा करते हैं. इस अंधकार को मिटाने की ठानी है. हर शाम 6 बजे वे अपनी साईकिल से यहां पहुंच जाते हैं. कोई नया मजदूर परिवार आता है तो सभी बच्चे जागरूकता रैली निकालते है. और उनके घर जाकर बच्चों को पढ़ने के लिए भेजने की गुजारिश करते हैं. हालांकि इनके इस स्ट्रीट स्कूल को भी कई बार बंद कराने का प्रयास किया गया आसपास के लोगों ने शोर होने के कारण दूसरी जगह शिफ्ट करने को बोला है. जिस कारण ये 21 साल में 8-10 बार जगह बदल चुके हैं. फिलहाल रोहतक में दो जगह इनकी कक्षाएं चलती हैं. नरेश कुमार का कहना है कि वे इस स्कूल को बंद नहीं करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें शहर के बाहर चैराहे पर कक्षा क्यों न लगानी पड़े. हालांकि उन्होंने माना कि ऐसे कुछ ही लोग हैं. इन्हें किताबें, कापियां और स्टेशनरी का सामान दे जाते है. बाईट -नरेश कुमार शिक्षक व समाज सेवी रोहतक बच्चे बोले- सर कभी नहीं लेते छुट्टी वीओ -3 -यहां पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि वे हर रोज शाम को खुले आसमान के नीचे आ जाते हैं और बेशक गर्मी-सर्दी या बारिश आ जाए, वे रोज आते हैं. नरेश सर कभी भी छुट्टी नहीं करते. कोई अपने बच्चों को भी इतना समय नहीं देता, जितना वे हमें देते हैं. यहाँ से पढ़ाई करने वाले कुछ बचचे इंजीनियरिंग ,मेडिकल साइंस ,व सरकारी नोकरी पर लग चुके है
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विश्व पर्यटन दिवस पर राजस्थान के संरक्षित स्मारक–संग्रहालय मुफ्त एंट्री, सैलानी उमड़े

Jaipur, Rajasthan:विश्व पर्यटन दिवस पर संग्रहालयों,किलो,स्मारकों में फ्री एंट्री,सुबह से ही सैलानियों का सैलाब जयपुर-रंग रंगोली राजस्थान,पधारो म्हारे देश। विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर राजस्थान में सैलानियों का सैलाब उमड़ रहा है. सुबह ही से पर्यटक ऐतिहासिक किले,स्मारकों और संग्रहालयों को निहारने पहुंच रहे है.मरुधरा का इतिहास,विरासत और धरोहर को नजदीक से जानने के लिए देशी विदेशी पर्यटक पर्यटन स्थलों पर पहुंच रहे है.पर्यटकों का माला और तिलक लगाकर स्वागत किया जा रहा है.सोशल मीडिया पर डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने वीडियो संदेश जारी कर शुभकामनाएं दी.इस इस मौके पर राजस्थान के सभी संरक्षित स्मारको और संग्रहालयों में पर्यटकों की फ्री एंट्री है...आखिरकार विश्व पर्यटन दिवस पर गुलाबी नगरी में कैसे पावणों का स्वागत सत्कार हो रहा है...
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नाशिक के आदिवासी छात्रों का मुंबई तक मार्च, 41 दिन से जारी आंदोलन

Nashik, Maharashtra:नाशिक - - नाशिकच्या ईदगह मैदानावर गेल्या 41 दिवसांपासून आदिवासी विद्यार्थ्यांचे आंदोलन सुरू - आदिवासी विद्यार्थ्यांचा नाशिक ते मुंबई उलगुलान मोर्चाचा इशारा - राज्यभरातील विविध ठिकाणावरून आदिवासी आंदोलन करते विद्यार्थी मुंबईच्या दिशेने जाणार - आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके यांच्या राजीनामा सह विविध मागण्यांसाठी आंदोलन सुरू - आदिवासी आश्रम शाळेची अवस्था , जपतपाय येथील आश्रम शाळेतील मृत्यू झालेल्या विद्यार्थ्यांना आर्थिक मदत या सह विविध मागणीसाठी आंदोलन सुरू - काल मुख्यमंत्र्यांसोबत जिल्हाधिकाऱ्यांच्या माध्यमातून झालेल्या चर्चेनंतरही मुंबईच्या दिशेने जाण्यावर ठाम - उद्या आदिवासी विध्यार्थी मुंबईच्या दिशेने होणार रवाना... आढावा घेतला आहे आमचे प्रतिनिधी सागर गायकवाड यांनी...
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CM विष्णुदेव साय कांकेर दौरे पर, विद्यार्थियों के साथ मन की बात सुनेंगे

Begun, Rajasthan:रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कांकेर दौरे पर हुए रवाना.., दौरे को लेकर CM विष्णुदेव साय ने कहा- कांकेर जिले के अंतर्गत का दौरा होगा.. मन की की बात का 138 वा एपिसोड है.. एकलव्य विद्यालय में मन की बात विद्यार्थियों के साथ सुनूंगा कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत का छत्तीसगढ़ दौरा आज.. कांग्रेस में होगी आज कई बड़ी बैठकें.. मामले में CM विष्णुदेव साय ने कहा- पिछले 2018 से लेकर 23 प्रदेश की जनता को जनादेश दिया था.. कांग्रेस ने जन घोषणा पत्र में कई वादे किए थे.. 5 वर्षों में कांग्रेस ने वादा पूरा नहीं किया.. पूरे प्रदेश को 5 वर्षों में कांग्रेस ने अपराधगढ़,भ्रष्टाचार का गढ़ बनाया.. कांग्रेस के अनेकों लोग जेल के अंदर में है.. कांग्रेस कुछ भी कर ले जनता का विश्वास अर्जित नहीं कर पाएंगे.. रायपुर के डूमरतराई में ट्रिपल मर्डर केस मामले में CM विष्णुदेव साय ने कहा- पति और पत्नी जीवन रूपी गाड़ी के दो पहिए.. दोनों में ही विश्वास होना चाहिए.. शक की वजह के तह में जाना चाहिए तब यह रुकेगा बाइट- विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री
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बारिश से ढहे कच्चे मकान में बुजुर्ग की मौत, पपरेंदा गांव में मातम

Banda, Uttar Pradesh:बांदा में दो दिनों से हो रहे लगातार बारिश के चलते एक कच्चा मकान ढह गया जिससे डूबकर एक 70 वर्षीय वृद्ध की मौत हो गई है। घटना चिल्ला थाना क्षेत्र के पपरेंदा गांव की है जहाँ लगातार हो रही बारिश के कारण शनिवार की रात एक कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। मलबे में दबकर घर में सो रहे 70 वर्षीय वृद्ध चुन्नी वर्मा की मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने मलबा हटाकर वृद्ध को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मृतक के बेटे ने बताया कि उनके पिता मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार में छह बेटे हैं, जो गांव में रहकर मजदूरी करते हैं। मृतक के नाम मात्र एक बीघा जमीन है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर बताई गई है। वृद्ध की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल है। परिजनों ने बताया कि घटना के संबंध में अभी तक थाने में कोई तहरीर नहीं दी गई है।
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बगहा-वाल्मीकिनगर में भारी बारिश से बाढ़, घरों में पानी घुसा

Bagaha, Bihar:बगहा से शुरू होने वाली खबर में लगातार बारिश के कारण गंडक और मसान सहित अन्य नदियाँ उफान पर हैं। नदियों के जलस्तर बढ़ने से वाल्मीकिनगर और बगहा समेत रामनगर के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे कई घरों में पानी प्रवेश कर गया है। पश्चिमी चंपारण की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है और गंडक के साथ मसान भी उफान पर है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के आसपास जलभराव के कारण बगहा-वाल्मीकिनगर स्टेट हाईवे पर पानी चढ़ गया है, जिससे आवाजाही प्रभावित हो रही है और वन्यजीवन भी परेशान है। बगहा और रामनगर क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी घरों तक पहुँच चुका है और लोग जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों में बाढ़ और जलस्तर बढ़ने को लेकर चिंता है। प्रशासन प्रभावित इलाकों पर नजर रखे हुए है। बाढ़ के कारण निर्माणाधीन पुल की सामग्री बह गई है और खेतों में धान तथा गन्ना की फसलें नुकसानग्रस्त हो रही हैं, जिससे ग्रामीण और किसान मदद की गुहार लगा रहे हैं। नेपाल में भारी वर्षा के कारण मसान नदी में भी उफान है, जिसके कारण पुराने मसान पुल से गुजरने वाले यात्री और अन्य लोग सहमे हुए हैं।
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सोनभद्र की चार विधानसभा सीटों के चुनावी गणित में नया दौर: युवा मतदाता प्रभावी

Noida, Uttar Pradesh:सोनभद्र की सियासत में चार विधानसभा सीटों का समीकरण, पुराने किले बचाने की चुनौती और नए मतदाताओं पर निगाहें। सोनभद्र सिर्फ अपनी खनिज संपदा और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अलग राजनीतिक मिजाज के लिए भी जाना जाता है। चार मार्च 1989 को मिर्जापुर से अलग होकर अस्तित्व में आया सोनभद्र अब 37 साल से ज्यादा का सफर तय कर चुका है। इन वर्षों में जिले की तस्वीर बदली, विकास के नए रास्ते खुले और सियासत के समीकरण भी कई बार बदले। कभी जिले में सिर्फ दो विधानसभा सीटें थीं, लेकिन आज सोनभद्र की राजनीति चार विधानसभा क्षेत्रों में बंटी हुई है। ऐसे में चुनावी चौसर पर जातीय समीकरण, पुराने राजनीतिक प्रभाव, नए मतदाता और स्थानीय मुद्दे किस तरह असर डालते हैं, आइए समझते हैं सोनभद्र की पूरी चुनावी तस्वीर। सोनभद्र एक उत्तर प्रदेश का जिला है जो चार विधानसभा सीटों पर आधारित है, और यह सीटें घोरावल, राबर्ट्सगंज, ओबरा और दुद्धी हैं। वर्ष 2012 से पहले सोनभद्र में महज दो विधानसभा सीटें थीं—राबर्ट्सगंज सदर और दुद्धी। परिसीमन के बाद घोरावल और ओबरा को अलग विधानसभा क्षेत्र बना गया और वर्ष 2012 में इन दोनों नई सीटों पर पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ। ओबरा में बसपा के सुनील यादव ने जीत दर्ज कर नई सीट के पहले विधायक बनने का गौरव हासिल किया, जबकि घोरावल से समाजवादी पार्टी के रमेश चंद्र दुबे ने चुनाव जीतकर इस सीट पर पहली बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। वहीं राबर्ट्सगंज से सपा के अविनाश कुशवाहा और दुद्धी से निर्दल प्रत्याशी रूबी प्रसाद ने जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2017 का चुनाव सोनभद्र की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया। जिले की चारों विधानसभा सीटों में भाजपा ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि दुद्धी में भाजपा की सहयोगी अपना दल एस के हरिराम चेरो ने जीत दर्ज की। यानी चारों सीटों पर भाजपा गठबंधन का कब्जा रहा। वर्ष 2022 में भाजपा ने इस प्रदर्शन को और आगे बढ़ाते हुए पहली बार सोनभद्र की चारों विधानसभा सीटों पर सीधे जीत का परचम लहराया। घोरावल, राबर्ट्सगंज, ओबरा और दुद्धी, चारों सीटों पर कमल खिला और दुद्धी में पहली बार भाजपा के चुनाव चिन्ह पर जीत दर्ज हुई। लेकिन दुद्धी की सियासत में इसके बाद एक बार फिर बड़ा मोड़ आया। दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्धि और सजा के बाद तत्कालीन भाजपा विधायक रामदुलारे गौड़ की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और दुद्धी सीट रिक्त हो गई। उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय सिंह गौड़ ने जीत दर्ज कर भाजपा से यह सीट छीन ली। विजय सिंह गौड़ के नाम दुद्धी विधानसभा से सबसे अधिक बार विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड रहा है। उनके निधन के बाद दुद्धी विधानसभा सीट फिलहाल रिक्त है। ऐसे में आने वाले चुनाव में इस सीट का मुकाबला पूरे जिले की सियासत के लिहाज से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब बात मौजूदा मतदाता आंकड़ों की करें तो निर्वाचन आयोग की ताजा जानकारी सोनभद्र की चुनावी तस्वीर को काफी स्पष्ट करती है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर-2026 के बाद जिले की चारों विधानसभा सीटों में कुल 11 लाख 97 हजार 527 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 6 लाख 42 हजार 849 पुरुष, 5 लाख 54 हजार 651 महिला और 27 अन्य जेंडर के मतदाता शामिल हैं। विधानसभा वार देखें तो घोरावल में सबसे ज्यादा 3 लाख 48 हजार 887 मतदाता हैं। इसके बाद राबर्ट्सगंज में 3 लाख 789, दुद्धी में 2 लाख 81 हजार 976 और ओबरा में 2 लाख 65 हजार 875 मतदाता दर्ज हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 44 हजार 413 नए मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया, जबकि 22 हजार 149 नाम हटाए गए। यानी मतदाता सूची में व्यापक स्तर पर बदलाव हुआ है। इस चुनावी तस्वीर का एक और अहम पहलू युवा मतदाता हैं। निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़ों में 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 12 हजार 873 मतदाता दर्ज हैं। वहीं महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी भी करीब 49 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऐसे में आने वाले चुनाव में पहली बार मतदान करने वाले युवा और महिला मतदाता राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सोनभद्र की सियासत में जहां पुराने जातीय समीकरण अपनी भूमिका निभाते हैं, वहीं बदलती मतदाता सूची नए समीकरणों की भी जमीन तैयार कर रही है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक सोनभद्र की आबादी 18 लाख 62 हजार 559 थी। मौजूदा समय में जिले की आबादी अनुमानित तौर पर 23 से 24 लाख के आसपास मानी जाती है। उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे सोनभद्र का मुख्यालय राबर्ट्सगंज है। इसी नाम से लोकसभा सीट भी है, जो अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली राजनीतिक लहर का असर राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट के चुनावी नतीजों में भी कई बार देखने को मिलता रहा है। विधानसभा चुनाव की बात करें तो सोनभद्र की चारों सीटों का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण अलग-अलग रंग दिखाता है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और सवर्ण मतदाताओं की भूमिका यहां बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ओबीसी वर्ग में मौर्य, पटेल और यादव जैसे सामाजिक समूहों के साथ ब्राह्मण और राजपूत जैसे सवर्ण वर्ग भी चुनावी गणित का अहम हिस्सा हैं। दुद्धी और ओबरा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में एसटी मतदाता चुनावी नतीजों पर निर्णायक प्रभाव रखते हैं, जबकि घोरावल और राबर्ट्सगंज में अलग-अलग सामाजिक समूहों का संतुलन चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बनाता है। सोनभद्र की चुनावी कहानी सिर्फ पार्टियों की जीत-हार तक सीमित नहीं है। चार विधानसभा सीटों के अलग-अलग सामाजिक समीकरण, बदलता मतदाता वर्ग, युवा वोटर, स्थानीय मुद्दे और दुद्धी में खाली पड़ी विधानसभा सीट, आने वाले चुनाव को खासा दिलचस्प बना रहे हैं।
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