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Devendra KumarDevendra KumarFollow31 Jan 2025, 01:20 pm

Unnao: बांगरमऊ में मुंशीप न्यायालय और सब रजिस्ट्रार कार्यालय की दूर स्थिति पर अधिवक्ताओं का विरोध

Bangarmau, Uttar Pradesh:

बांगरमऊ में मुंशीप न्यायालय के लिए तहसील से 5 किलोमीटर दूर जोगी कोट गांव के पास भूमि चिन्हित कर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही हरदोई मार्ग पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय को भी दूर स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है, जबकि तहसील में पहले से ही यह कार्यालय सुचारू रूप से कार्य कर रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालय और सब रजिस्ट्रार कार्यालय को इतनी दूर ले जाने से भ्रष्टाचार बढ़ेगा और आम जनता को असुविधा होगी, जबकि तहसील परिसर में ही पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। इसी मुद्दे पर अधिवक्ताओं ने सभी न्यायालयों का बहिष्कार किया और विरोध जताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन जारी रखेंगे।

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नीट पेपर लीक विरोध में NSUI का छिंदवाड़ा प्रदर्शन; पानी कैनन से धक्का-मुक्की

Chhindwara, Madhya Pradesh:वाटर कैनन की तेज धार से थाना प्रभारी गिरि छिंदवाड़ा NSUI नीट पेपर को लेकर कर रही थी प्रदर्शन छिंदवाड़ा में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस NSUI ने प्रदर्शन किया. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन करने की कोशिश के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की बौछार की लेकिन इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने भीग चुके पुतले के बचे हिस्से में आग लगा दी. पूरे घटनाक्रम के दौरान भारी पुलिस बल मौके पर तैनात रहा. स्थिति तनावपूर्ण होते देख पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. पानी की तेज बौछार के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और भीग चुके पुतले के बचे हिस्से में आग लगा दी. पानी की तेज धार से महिला थाना प्रभारी अरुणा वाहने संतुलन खो बैठी और लड़खड़ा गई. प्रदर्शन के दौरान NSUI के कई नेता सड़क पर बैठ गए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. NSUI की जिलाध्यक्ष अपेक्षा सूर्यवंशी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए.
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सागर की लाखा बंजारा झील में युवती ने छलांग लगाई, मौत

Sagar, Madhya Pradesh:सागर की लाखा बंजारा झील में कूदी अज्ञात युवती.. एंकर/ सागर से बड़ी खबर है यहाँ की प्रसिद्ध लाखा बन्जारा झील में एक युवती ने छलांग मार दी और पानी में उसकी मौत हो गई। सागर की लाखा बंजारा झील पर पाने कारीडोर में लोग सुकून पाने घूम रहे थे तो लोग मस्ती में थे इसी बीच अचानक लोगों ने देखा कि एक युवती ने झील के अंदर छलांग मार दी। लोग जब तक कुछ करते लड़की पानी में डूब गई थी। पुलिस को सूचना मिली तो मौके पर पहुंची पुलिस ने लड़की को रेस्क्यू किया लेकिन वो दम तोड़ चुकी थी लड़की की उम्र 22 से 25 साल लग रही है और अभी तक उसकी पहचान नहीं हुई है। पुलिस अलग अलग माध्यमों से उसके परिजनों की तलाश कर रही है और परिजनों के सामने आने के बाद ही सुसाइड की वजह साफ हो पाएगी。
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खैरागढ़ के चिचोला में पीएम आवास घोटाला: मृत नामों पर आवास स्वीकृत

Khairgarh, Uttar Pradesh:खैरागढ़ जिले के ग्राम पंचायत चिचोला में प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ियों की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। पहले एक हितग्राही को दो-दो आवास और चार बैंक खातों में राशि जारी होने का मामला सामने आया था। अब मृत हितग्राहियों के नाम पर आवास स्वीकृत कर दूसरे खातों में राशि भेजने के दो और मामले सामने आए हैं। शिकायत सरपंच जितेंद्र वर्मा ने की, जिसके बाद प्रशासन जांच में जुटा है। हालांकि जिम्मेदार अधिकारियों का एक ही जवाब है जांच जारी है। चिचोला में पीएम आवास योजना अब सवालों के घेरे में है। गांव में मृत लोगों के नाम पर आवास स्वीकृत हुए, लेकिन रकम दूसरे लोगों के खातों में पहुंच गई। एक मामले में 40 हजार रुपये की पहली किस्त मिलने के बाद नया मकान बनना भी शुरू हो गया। बाद में पता चला कि आवास तो मृत व्यक्ति के नाम से स्वीकृत था। दूसरे मामले में भी मृत महिला के नाम पर आवास स्वीकृत हुआ। पोस्ट ऑफिस का खाता बंद होने का हवाला देकर राशि परिजन के दूसरे खाते में भेजी गई और मकान निर्माण शुरू कर दिया गया। इस मामले में 95 हजार रुपये की राशि जारी होने की जानकारी सामने आई है। यही नहीं, गांव में पति और पत्नी दोनों के नाम पर अलग-अलग पीएम आवास स्वीकृत होने का मामला भी सामने आया है। इस मामले में अब प्रशासन ने रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लगातार खुलासों के बाद अधिकारी गांव पहुंचकर जांच कर रहे हैं, लेकिन हर सवाल पर एक ही जवाब मिल रहा है जांच की जा रही है।
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महाकाल मंदिर और सवारी मार्ग की तैयारियाँ पूरी, प्रशासन ने लिए सुरक्षा निर्देश

Ujjain, Madhya Pradesh:महाकाल मंदिर से लेकर सवारी मार्ग तक तैयारियों का लिया जायजा पार्किंग, बैरिकेडिंग, पेयजल, स्वच्छता और दर्शन व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश कलेक्टर बोले- सवारी शुरू होने से पहले सभी काम होंगे पूरे, श्रद्धालुओं को नहीं होगी परेशानी उज्जैन। श्रावण-भादौ मास में विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। संभागायुक्त, कलेक्टर, एडीजी, पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने महाकाल मंदिर परिसर और भगवान महाकाल की पारंपरिक सवारी के पूरे मार्ग का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कर्कराज पार्किंग, दत्त अखाड़ा क्षेत्र, चारधाम पार्किंग, झालरिया मठ, नृसिंह घाट और श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर का दौरा किया। यहां पार्किंग, बैरिकेडिंग, पेयजल, विश्राम स्थल, स्वच्छता, संकेतक बोर्ड और अन्य मूलभूत सुविधाओं की तैयारियों की समीक्षा की गई。 अधिकारियों ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं, ताकि श्रावण-भादौ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े。 इसके अलावा भगवान श्री महाकाल की प्रत्येक सोमवार को निकलने वाली पारंपरिक सवारी के पूरे मार्ग का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने सवारी मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए निर्देश दिए कि सवारी शुरू होने से पहले सभी कार्य पूरे कर मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए。 कलेक्टर एवं महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह ने कहा कि आगामी दिनों में सवारी मार्ग पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी होंगी। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी भगवान महाकाल की श्रावण-भादौ की पारंपरिक सवारी पूरी भव्यता, गरिमा और श्रद्धा के साथ निकाली जाएगी। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय पर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं。 निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, प्रशासक प्रथम कौशिक, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी अतेंद्र सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्रेयांश कुमट, उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे。
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टीकमगढ़ में नगर पालिका लापरवाही: पानी की टंकी से घरों तक दूषित पानी का संदेह

Tikamgarh, Madhya Pradesh:एंकर- टीकमगढ़ जिले में नगर पालिका की बड़ी लापरवाही उजागर, शहर के हनुमान चालीसा मंदिर के पास स्थित पानी की टंकी से लोगों के घरों तक सप्लाई हो रहे पानी में पक्षियों के पंख और गंदगी निकलना पाया गया, जबकि इसी टंकी से आसपास के हजारों घरों में पेयजल की सप्लाई की जा रही थी. वार्ड वासियो की शिकायत मिलने पर मौके पर पहुंची पार्षद पूनम जायसवाल ने ड्रोन से वीडियो बनवाकर पूरे मामले का खुलासा किया. यह तस्वीर टीकमगढ़ शहर की है, जहां से रोजाना हजारों लोगों के घरों तक पीने का पानी पहुंचता है, लेकिन ड्रोन निरीक्षण में टंकी के भीतर पक्षियों के पंख और गंदगी साफ दिखाई दे रही है. पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच आखिर किसकी जिम्मेदारी है, यह सवाल है. वार्ड पार्षद पूनम जायसवाल ने नगर पालिका की लापरवाही के चलते लंबे समय से दूषित पानी की सप्लाई का आरोप लगाया और ड्रोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो सार्वजनिक कर स्थिति सामने रखी, साथ ही तत्काल सफाई और पानी की गुणवत्ता की जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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जहानाबाद में नीट विरोध हिंसक, डीएम आवास पर पथराव और पुलिस फायरिंग

Jehanabad, Bihar:दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की गूँज अब बिहार के जहानाबाद में भी सुनाई दे रही है। गुरुवार को विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले जहानाबाद की सड़कों पर भारी उपद्रव देखने को मिला। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया, बल्कि डीएम आवास पर ज़ोरदार पथराव भी किया। हालात इस कदर बिगड़ गए कि पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए दर्जनों राउंड राउंड हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा। दरसअल नीट धांधली और दिल्ली में हुए लाठीचार्ज के विरोध में जहानाबाद में आक्रोश की आग भड़क उठी। विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े सैकड़ों युवा शहर के आंबेडकर चौक पर इकट्ठा हुए और सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। देखते ही देखते आंदोलन उग्र हो गया। प्रदर्शनकारी सबसे पहले पटना-गया रोड पर बने डिवाइडर को क्षतिग्रस्त करते हुए अरवल मोड़ और काको के रास्ते सीधे डीएम आवास पहुँच गए। यहाँ उग्र भीड़ ने डीएम आवास को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ पथराव शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले में एक दारोगा समेत छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही एसपी कोटा किरण कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। भीड़ को तितर-बितर करने और हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई राउंड हवाई फायरिंग की। फायरिंग होते ही उपद्रवी रेलवे ट्रैक की ओर भाग खड़े हुए और वहाँ से भी पुलिस टीम पर पथराव करने लगे। इस उपद्रव के कारण शहर के मुख्य मार्गों पर आवागमन ठप हो गया, जबकि पटना-गया रेल खंड पर ट्रेनों का परिचालन भी काफी देर तक प्रभावित रहा। इधर एसपी कोटा किरण कुमार ने बताया कि बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे थे, बाद में पथराव शुरू कर दिया। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने 20 से 30 राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी। पथराव की घटना में दो दारोगा समेत छह पुलिस कर्मी घायल हो गए है। फिलहाल शहर में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है। सुरक्षा के लिहाज़ से शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। पुलिस सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है。
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उपमुख्यमंत्री ने एक्शन लिया; कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज भ्रष्टाचार के आरोपी प्राचार्य निलंबित

Amauli Thakuran, Uttar Pradesh:हेडलाइन: भ्रष्टाचार के आरोपों पर बड़ा एक्शन, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कार्यवाहक प्राचार्य को किया निलंबित कानपुर देहात के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। सोशल मीडिया पर नोटों की गड्डियों के साथ viral फोटो और अनियमितताओं की खबरों का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। इससे पहले डॉ. हरप्रीत सिंह इन सभी आरोपों को साजिश बताते हुए खारिज कर चुके थे। कानपुर देहात का स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय पिछले कई दिनों से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट और नोटों की गड्डियों के साथ वायरल तस्वीरों ने पूरे मामले को तूल दे दिया था। पोस्ट में कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार, नियमों के उल्लंघन और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि पिछले करीब पांच महीनों के दौरान दवा खरीद, टेंडर प्रक्रिया, नर्सिंग स्टाफ की भर्ती, मेंटेनेंस कार्य, लॉन्ड्री टेंडर और अन्य खरीद प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। पोस्ट करने वाले ने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य होने का भी दावा किया था। मामले के तूल पकड़ने के बाद उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने वायरल फोटो और प्रकाशित खबरों का संज्ञान लिया। उन्होंने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई। ब्रजेश पाठक ने अपने बयान में कहा कि पारदर्शी व्यवस्था और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यप्रणाली सरकार की प्रतिबद्धता है। 정부 की छवि धूमिल करने तथा भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को किसी भी स्थिति में क्षमा नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में त्वरित और कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, निलंबन से पहले कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. हरप्रीत सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था। उनका कहना था कि मेडिकल कॉलेज में उन्होंने कई प्रभावशाली और कथित माफिया तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके चलते उन्हें बदनाम करने के लिए सुनियोजित साजिश रची जा रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि वायरल पोस्ट में लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और उनके पास प्रत्येक आरोप का दस्तावेजी जवाब मौजूद है। साथ ही उन्होंने किसी भी निष्पक्ष जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही थी।
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रुद्रपुर के कांवड़ मार्ग पर सावन में मांस-मछली दुकानें बंद

Bahara Boj, Uttarakhand:स्लग- सावन में कांवड़ रूट पर बंद रहेंगी मांस मछली की दुकान स्थान-उधम सिंह नगर एंकर- रुद्रपुर में श्रावण मास की कांवड़ यात्रा को लेकर नगर निगम ने एक बड़ा फैसला लिया है। मेयर विकास शर्मा के निर्देश पर नगर निगम क्षेत्र में कांवड़ यात्रा मार्ग पर पूरे सावन माह के दौरान मांस, मछली और अंडे की दुकानें बंद रहेंगी। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रतिनिधिमंडल ने महापौर से मुलाकात कर कांवड़ यात्रियों की धार्मिक भावनाओं के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि यात्रा मार्ग पर मांस और मछली की दुकानें खुले रहने से श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसके साथ ही यात्रा मार्गों और प्रमुख शिव मंदिरों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। नगर निगम अधिकारियों को नियमित सफाई, कूड़ा निस्तारण और साफ-सुथरा वातावरण बनाए रखने के लिए कहा गया है। महापौर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रियों के लिए पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। महापौर विकास शर्मा ने कहा कि श्रावण मास करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का पर्व है और श्रद्धालुओं की सुविधा व धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना नगर निगम की प्राथमिकता है。
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मैनपुरी-करहल में भागवत कथा का छठा दिन,गोवर्धन पूजा की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु।

Ajay KumarAjay KumarFollow5m ago
Kanakpur, Uttar Pradesh:करहल/मैनपुरी करहल के किशनी रोड स्थित बंबा की पुलिया के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन लीला का वर्णन किया गया। कथा वाचिका रश्मी शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कराई और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा का संदेश प्रकृति,गौ-सेवा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किया और "जय श्रीकृष्ण"के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। कथा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया,बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार पर कड़ी फटकार, जोधपुर जल प्रदूषण मामले में निर्देश

Jodhpur, Rajasthan: नोट इसमें सुप्रीम कोर्ट के वीडियो लगावे。 जोधपुर। जोजरी नदी में प्रदूषण और इससे प्रभावित करीब 20 लाख लोगों के जीवन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेशों की समयबद्ध और प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही अगली सुनवाई पर 04 अगस्त को मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विक्रमनाथ व जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में जल स्रोतों में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी सामने आ रही घटनाएं बेहद गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय हैं। कोर्ट के समक्ष रखी गई मीडिया रिपोर्ट्स में जोजरी नदी के पास तनावड़ा क्षेत्र में एक तालाब का पानी गुलाबी होने और मानव एवं पशुओं के उपयोग के लिए अनुपयुक्त होने का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने माना कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका असर भूजल, कृषि भूमि, वन्यजीव और जनस्वास्थ्य पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। हाई लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में जोधपुर के मेलबा, धवा, झंवर और लूणी तहसील के आसपास के क्षेत्रों में वन्यजीवों पर प्रदूषण के प्रभाव का भी उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार धावा और डोली क्षेत्र चिंकारा, काला हिरण, लोमड़ी और नीलगाय सहित कई वन्यजीव प्रजातियों का महत्वपूर्ण आवास हैं। स्थानीय लोगों ने कमेटी को बताया कि जोजरी नदी में प्रदूषित पानी के प्रवाह के कारण वन्यजीवों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। कमेटी ने जोधपुर जिले के मेलबा और मोडाथली क्षेत्र की कुछ भूमि को वन विभाग को हस्तांतरित कर वन एवं घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को इन जमीनों के हस्तांतरण के लिए आवश्यक अधिसूचनाएं और आदेश शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सांगारिया स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) में जमा औद्योगिक अपशिष्टयुक्त पानी को लेकर भी सख्ती दिखाई। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल को तकनीकी कार्ययोजना तैयार कर जमा पानी का सुरक्षित उपचार और निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया कमेटी की प्रत्यक्ष निगरानी में होगी और उपचार से पहले तथा बाद में वैज्ञानिक जांच कर यह सुनिश्चित करना होगा कि जहरीले तत्व समाप्त हो चुके हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया की आड़ में बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से राज्य में सामने आए पर्यावरण प्रदूषण के मामलों पर विस्तृत हलफनामा भी मांगा है। इसमें वास्तविक स्थिति, संबंधित अधिकारियों की भूमिका, अब तक की कार्रवाई, जिम्मेदारी तय किए जाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक उपायों की जानकारी देनी होगी। साथ ही कमेटी की दूसरी स्टेटस रिपोर्ट और एसआईटी की पहली रिपोर्ट पर की गई टिप्पणियों का भी जवाब देना होगा। कोर्ट ने बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट के अवैध बहाव को गंभीर अपराध मानते हुए राज्य सरकार से यह भी पूछा कि अब तक की अभियोजन कार्रवाई में भारतीय न्याय संहिता की धारा 272, 326(ए), 326(सी) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से जुड़े कानून के तहत गंभीर धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। कोर्ट ने राज्य सरकार को लंबित और प्रस्तावित सभी अभियोजन मामलों में इन अपराधों को लागू करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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राजस्थान हाईकोर्ट: विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली, भर्ती की त्वरित कार्रवाई की मांग

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर।  प्रदेश में हाल ही में विभिन्न जिलों में प्रसव के दौरान एवं प्रसवोत्तर अवधि में हुई प्रसुताओं की मौतों ने राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ऐसे समय में राजस्थान हाईकोर्ट ने भी प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों के भारी रिक्त पदों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। निरामया ट्रस्ट द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं जस्टिस संजीत पुरोहित ने विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत, कार्यरत एवं रिक्त पदों के विस्तृत संकलन का अवलोकन किया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि प्रस्तुत आंकड़े सही हैं तो इतनी बड़ी संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पद निश्चित रूप से प्रदेश की आम जनता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार इन आंकड़ों का सत्यापन करे तथा यह स्पष्ट करे कि आखिर इतने वर्षों से विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त क्यों पड़े हैं। निरामया ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता वर्षा बिस्सा ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों के सैकड़ों पद रिक्त हैं। स्त्री एवं प्रसूति रोग, एनेस्थीसिया, मेडिसिन, शिशु रोग, रेडियोलॉजी, अस्थि रोग, नेत्र रोग, ईएनटी सहित अनेक महत्वपूर्ण विशेषज्ञताओं में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इन रिक्तियों के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उप जिला अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों में गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है तथा उन्हें मजबूरन उच्च संस्थानों के लिए रेफर करना पड़ता है। ट्रस्ट  की ओर से अधिवक्ता वर्षा बिस्सा ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि हाल ही में प्रदेश में प्रसुताओं की लगातार हुई मौतों ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। यदि जिला एवं उप जिला स्तर पर पर्याप्त संख्या में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट, शिशु रोग विशेषज्ञ तथा अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हों तो अनेक गंभीर प्रसूताओं एवं नवजात शिशुओं को समय रहते उपचार मिल सकता है तथा अनावश्यक रेफरल एवं उपचार में विलंब से होने वाली जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। निरामया ट्रस्ट ने अपनी जनहित याचिका में न्यायालय से आग्रह किया है कि प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उप जिला अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों में वर्षों से रिक्त पड़े जूनियर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदों पर शीघ्र प्रत्यक्ष भर्ती प्रारम्भ करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि प्रदेश की ग्रामीण एवं अर्धशहरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जा सके। मामले में अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को होगी。
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आरएसएमएमएल की 424वीं बोर्ड बैठक: क्रियान्वयन तेज करने के निर्देश

Jaipur, Rajasthan:राजस्थान स्टेट मिन्‌स एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएमएल) की निदेशक मंडल की 424वीं बैठक सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में कंपनी की विभिन्न खनन परियोजनाओं की प्रगति, निवेश प्रस्तावों, प्रशासनिक मामलों तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से खनन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और बोर्ड के निर्णयों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है, इसलिए खनिज संसाधनों का अधिकतम और वैज्ञानिक उपयोग कर परियोजनाओं को गति देना जरूरी है ताकि राज्य के आर्थिक विकास और राजस्व बढ़े। उन्होंने कहा कि कार्यवाही लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण हो और सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए। बैठक में निदेशक मंडल ने पिछली (423वीं) बैठक की कार्यवाही की पुष्टि की तथा पूर्व निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए लंबित बिंदुओं पर तेजी से कार्रवाई करने पर जोर दिया। बोर्ड के निर्णयों का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सभी संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी है। बैठक में कंपनी के निवेश प्रस्तावों और प्रशासनिक विषयों पर भी चर्चा हुई। भविष्य में नई खनन परियोजनाओं, संचालन क्षमता बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में खान एवं पेट्रोलियम विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोड़ा, वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव वैभव गालरिया, आरएसएमएमएल के प्रबंध निदेशक पी. रमेश सहित निदेशक मंडल के सदस्य और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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राजस्थान PSC भर्ती: कृषि विषय 40% कटऑफ आड़े, अदालत में चुनौती

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित लेक्चरर स्कूल शिक्षा (कृषि) भर्ती परीक्षा में प्रत्येक प्रश्नपत्र में अलग-अलग 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य करने की शर्त को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश डॉ. नूपुर भाटी ने राजस्थान लोक सेवा आयोग के सचिव और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता रविंद्र सिंह ने अधिवक्ता बी.एल. स्वामी के माध्यम से रिट याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता ने एमएससी एग्रीकल्चर प्रथम श्रेणी में 73 प्रतिशत अंकों के साथ तथा बीएड प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। आरपीएससी ने लेक्चरर स्कूल शिक्षा (कृषि) के 500 पदों पर भर्ती के लिए 28 अगस्त 2025 को विज्ञापन जारी किया था। भर्ती परीक्षा में सामान्य ज्ञान और कृषि विषय के दो प्रश्नपत्र रखे गए हैं। विज्ञापन में दोनों प्रश्नपत्रों में अलग-अलग न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2018 की भर्ती में ऐसी शर्त नहीं थी। वहीं वर्ष 2022 और 2023 की भर्तियों में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त रह गए थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र का स्तर यूपीएससी और आरएएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप रखा गया है, जबकि कृषि विषय के अभ्यर्थियों का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में कृषि विषय पढ़ाना है। अधिवक्ता बीएल स्वामी ने कोर्ट को बताया कि दोनों प्रश्नपत्रों में अलग-अलग 40 प्रतिशत अंक अनिवार्य करना संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के अधिकार के विपरीत है। इससे कृषि विषय में मेधावी अभ्यर्थी केवल सामान्य ज्ञान में निर्धारित कटऑफ हासिल नहीं कर पाने के कारण चयन से बाहर हो सकते हैं। इससे बड़ी संख्या में पद खाली रहने की आशंका भी है। याचिका में इस शर्त को असंगत, अनुचित और राज्य की रोजगार नीति के विपरीत बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की गई है। परीक्षा का परिणाम अभी जारी होना बाकी है।
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