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जळगाव में भाजपा और शिंदे गट के उम्मीदवार विधानपरिषद चुनाव में चर्चा तेज

Jalgaon, Maharashtra:जळगाव जळगावात विधानपरिषद निवडणुकीसाठी भाजप आणि शिवसेना शिंदे गटाच्या इच्छुकांच्या नावाची राजकीय वर्तुळात चर्चा.. भाजपकडून नंदूकुमार अडवाणी, नंदकिशोर महाजन, अमोल शिंदेंचे नाव चर्चेत शिवसेना शिंदे गटाकडून मंत्री गुलाबराव पाटलांचे चिरंजीव प्रतापराव पाटील यांचे नाव आघाडीवर.. भाजप आणि शिवसेना शिंदे गट हे दोन्ही पक्ष विधानपरिषदेच्या जागेवर दावा करणार असल्याची सूत्रांची माहिती.. दोन्ही पक्षांत एकच उमेदवार देण्यावर एकमत झाले, तर ही निवडणूक महायुतीच्या माध्यमातून लढवली जाईल अशी माहिती. : सूत्र भाजप आणि शिवसेना यांच्यात जागा वाटपाचा तिढा न सुटल्यास आणि दोन्ही पक्षांनी आपापले उमेदवार कायम ठेवल्यास जिल्ह्यात 'मैत्रीपूर्ण' पण थेट लढत होण्याची शक्यता : सूत्र महाविकास आघाडीकडून अद्याप कोणाचेही नाव चर्चेत नाही महायुतीच्या तुलनेत महाविकास आघाडीकडे सध्या मतदारांची संख्या कमी असल्याने मविआकडून उमेदवार देण्याबाबत सध्या तरी सावध भूमिका
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पीरूमदारा में महिलाओं का पुलिस चौकी घेराव, फिर भी जांच में ठोस सबूत नहीं

Noida, Uttar Pradesh:पीरूमदारा में संदिग्ध गतिविधियों के आरोप को लेकर बड़ा हंगामा देखने को मिला, ग्राम प्रधान के नेतृत्व में महिलाओं ने पुलिस चौकी का घेराव कर सख्त कार्रवाई की मांग की, हालांकि पुलिस जांच में फिलहाल कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। रामनगर के पीरूमदारा क्षेत्र में एक घर में कथित संदिग्ध गतिविधियों को लेकर उस समय माहौल गरमा गया, जब स्थानीय महिलाओं ने ग्राम प्रधान ममता सनवाल के नेतृत्व में पीरूमदारा पुलिस चौकी का घेराव कर दिया, महिलाओं ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगी. मामला पीरूमदारा के ग्राम दुल्हेपुरी का बताया जा रहा है, जहां ग्रामीणों का आरोप है कि एक घर में बाहरी युवक-युवतियों का आना-जाना लगा रहता था और दिन-रात शोर-शराबा होता था, विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकियां दिए जाने के भी आरोप लगाए गए हैं। बीते शाम कुछ संदिग्ध लोगों के दिखाई देने पर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा, उन्होंने संबंधित घर का दरवाजा खुलवाने की कोशिश की, लेकिन अंदर मौजूद लोगों ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद आक्रोशित महिलाएं सीधे पुलिस चौकी पहुंचीं और घेराव कर कार्रवाई की मांग करने लगीं। इस दौरान चौकी इंचार्ज वीरेंद्र बिष्ट के साथ महिलाओं की तीखी नोकझोंक भी हुई, महिलाओं का आरोप था कि पुलिस उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रही है, जिससे क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। ग्राम प्रधान ममता सनवाल ने बताया कि उनकी ग्राम सभा में स्थित एक डिफेंस कॉलोनी में लंबे समय से यह गतिविधियां चल रही थीं, हालांकि इसकी जानकारी उन्हें हाल ही में मिली, सूचना मिलते ही उन्होंने तत्काल पुलिस को अवगत कराया, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। प्रधान के अनुसार पुलिस ने मौके से एक महिला और दो युवकों को हिरासत में लिया है, जिन्हें चौकी लाया गया है। वहीं इस पूरे मामले की मुख्य आरोपी बताई जा रही महिला अब तक सामने नहीं आई है, उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए. वहीं मामले में क्षेत्राधिकारी सुमित पांडे ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए घर की तलाशी ली, जांच के दौरान किसी भी प्रकार का आपत्तिजनक सामान या अनैतिक गतिविधियों से जुड़ा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला. हालांकि घर में रहने वाले व्यक्तियों के पास वैध किरायानामा नहीं पाया गया, जिस पर पुलिस ने मकान मालिक का चालान किया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और लोग पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।
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सुप्रिया भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, पश्चिम बंगाल से यूं उठे सवाल

Ranchi, Jharkhand:झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रदेश कार्यालय में आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंन्स में पार्टी के महासचिव सुप्रिया भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि 23 अप्रैल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण दिन साबित हो सकता है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि 1952 में जब देश में पहला आम चुनाव हुआ था, तब देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन ने सीमित संसाधनों और तकनीक के बावजूद सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराया था। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि आज की उन्नत तकनीक के दौर में भी चुनाव आयोग पारदर्शिता बनाए रखने में विफल दिख रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है। उन्होंने दावा किया कि प्रथम चरण के चुनाव में लगभग 14.5 लाख मतदाताओं के नाम संदिग्ध तरीके से प्रभावित हुए, जबकि करीब 12.5 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)” प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका उपयोग मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। भट्टाचार्य ने कहा कि अब तक मतदाता सूची में बदलाव के लिए फॉर्म 6, 7 और 8 जैसी पारंपरिक प्रक्रियाएं होती थीं, लेकिन अब नई प्रक्रियाओं के जरिए लोगों के वोटिंग अधिकार को सीमित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा मकानों की गिनती और पहचान की जा रही है, जिससे मतदाताओं की पहचान और उनके सामाजिक/धार्मिक पहलुओं की जानकारी जुटाने की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि किराए के मकानों में रहने वाले या सरकारी क्वार्टर में रहने वाले लोगों के अधिकारों का क्या होगा। पश्चिम बंगाल की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां चुनाव अब राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल और चुनाव आयोग के बीच होता दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से 72 घंटे पहले मोटरसाइकिल पर दो लोगों के चलने पर रोक लगाई गई, आम लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया, कई इलाकों को खाली कराकर लोगों को स्कूलों में शिफ्ट किया गया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे देश में चुनाव के लिए जहां लगभग 3.5 लाख सुरक्षा बलों की तैनाती होती है, वहीं केवल पश्चिम बंगाल में ही 2.43 लाख सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। अंत में भट्टाचार्य ने चेतावनी दी कि पश्चिम बंगाल में जो हो रहा है, वह “ट्रेलर” है और यदि इसे नहीं रोका गया, तो इसका असर अन्य राज्यों, खासकर झारखंड में भी देखने को मिल सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। बाइट: सुप्रिया भट्टचार्य, झामुमो महासचिव
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वेदांता पावर प्लांट बॉयलर हादसे पर उच्चस्तरीय जांच की मांग, सांसद ने केंद्र को पत्र

Sakti, जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कमलेश जांगड़े ने वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण बॉयलर हादसे की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर तथा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है। पत्र में सांसद ने बताया कि हादसे में श्रमिकों की मौत हुई है, जबकि श्रमिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार विभिन्न अस्पतालों में जारी है। कुछ श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य की इलाज के दौरान मृत्यु हुई। सांसद कमलेश जांगड़े ने पत्र में कहा है कि यह घटना उद्योगों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, प्रशासनिक लापरवाही और श्रमिकों की सुरक्षा में गंभीर कमी को दर्शाती है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए तथा जिले के अन्य उद्योगों की भी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, उन्होंने भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए श्रमिकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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