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जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं? उमंग सिंघार ने किया तीखा हमला

Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल जाति का जनगणना में ओबीसी के कॉलम नहीं होने पर बोले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार अगर जाति का जनगणना कराई जा रही है तो सभी की जाति को शामिल किया जाना चाहिए ओबीसी हो या आदिवासी इसकी जानकारी होनी चाहिए ओबीसी का कॉलम नहीं होना या बीजेपी की दोहरी मानसिकता दर्शाते हैं हर वर्ग का विकास होना चाहिए एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने DPI कार्यालय में गुरुवार देर शाम मचाय था उत्पात पर बोले विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को अब युवाओं, शिक्षकों की याद आ रही है बीजेपी सरकार में 70 हजार से ज्यादा शिक्षक सड़कों पर है आपकी सरकार में ग्राम पंचायतों के कंप्यूटर ऑपरेटर सड़कों पर हैं 13 प्रतिशत पद होल्ड पर है आपकी सरकार है तत्काल आदेश आप निकलवा सकते हैं. बढ़ते शक्कर के दामों पर बोले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भारतीय जनता पार्टी की सरकार अनपढ़ है डॉलर बचाने के लिए एथेनॉल देश के अंदर बनाने की बात बीजेपी ने कही जब इथेनॉल बनना शुरू हुआ तो युवाओं की गाड़ियां खराब होना शुरू हुई 10 साल के बाद शक्कर बाहर से इंपोर्ट करना पड़ रही पहले आप डॉलर बचाने के लिए डीजल पेट्रोल इंपोर्ट की बात करते थे रक्षाबंधन दिवाली इन त्योहारों पर मिठाई महंगी हो जाएगी लोग मुंह मीठा नहीं कर पाएंगे
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हर बेटी में बसी एकता: हिंदुस्तान एक, रंग-भाषा भिन्न

Noida, Uttar Pradesh:लाडो, आप हिंदुस्तान की प्यारी बेटी हो। आपकी बोली अलग हो सकती है, आपकी पोशाक अलग हो सकती है, पर आपके दिल में धड़कने वाला हिंदुस्तान वही है, जो हर भारतीय के दिल में बसता है। देश का हर कोना हमारा है और हर बेटी हमारी अपनी है। हम अलग-अलग रंगों में रंगे हो सकते हैं, पर तिरंगा जब सिर के ऊपर लहराता है, तो हम सबकी पहचान एक हो जाती है। यही हमारे भारत की खूबसूरती है - बोलियाँ अनेक, रंग अनेक, पर दिल एक… हिंदुस्तान एक। लाडो, तू हिंदुस्तान की लाडली-कोडली बेटी सै। तेरी बोली अलग हो सकै सै, तेरी पोशाक अलग हो सकै सै, पर तेरे दिल म्हं धड़कण आला हिंदुस्तान वोए सै, जो हर भारतीय के दिल म्हं बसै सै। देश का हर कोना म्हारा सै और हर बेटी म्हारी अपनी सै। हम अलग-अलग रंगां म्हं रंगे हो सकैं सैं, पर तिरंगा जब सिर के ऊपर लहरावै सै, तो सबकी पहचान एक हो जावै सै। याए म्हारे भारत की खूबसूरती सै - बोली अनेक, रंग अनेक, पर दिल एक… हिंदुस्तान एक।
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खूंटी के सदर अस्पताल में 117 बेड के बावजूद मरीजों की भीड़

Khunti, Jharkhand:रिपोर्ट - ब्रजेश कुमार क्षेत्र - खूँटी। एंकर - खूँटी सदर अस्पताल में इन दिनों मौसमी और संक्रामक बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पताल की व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। 100 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में अतिरिक्त व्यवस्था कर 117 बेड लगाए गए हैं, इसके बावजूद कई बार मरीजों को बेड के लिए इंतजार करना पड़ रहा है。 बरसात के मौसम में मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, बुखार समेत अन्य मौसमी बीमारियों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। जिले के विभिन्न प्रखंडों से प्रतिदिन करीब 300 से 400 मरीज उपचार के लिए सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों के आने से भी अस्पताल पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। जबकि अस्पताल में सरकारी नर्सों की कमी के कारण अनुबंध पर कार्यरत नर्सों और नर्सिंग स्कूल के विद्यार्थी एमरजेंसी वार्ड में मरीजों की देखभाल के लिए लगाए गये हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिन मरीजों को भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं है, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार घर पर उपचार कराने की सलाह दी जा रही है। सदर अस्पताल खूँटी के उपाधीक्षक डॉ. आनंद किशोर उराँव ने कहा कि वर्तमान में जिलेभर से काफी मरीज आ रहे हैं । प्रतिदिन 300-400 मरीज आते हैं। सौ बेड का अस्पताल है लेकिन उसि में 117 बेड एडजस्ट किया गया है। वहीं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। गंभीर और जरूरतमंद मरीजों को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि अगर प्रखंडों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वैसे लोग ईलाज करा लेते तो सदर अस्पताल में बोझ कम होता । जबकि वहाँ भी पर्याप्त चिकित्सक सेवारत हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से अपील की गई है कि सामान्य बीमारियों का उपचार अपने नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराएं। इससे सदर अस्पताल का दबाव कम होगा और गंभीर मरीजों को समय पर बेड और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। बाईट - डॉ आनन्द किशोर उराँव,, उपाधीक्षक सदर अस्पताल, खूँटी।
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बंदी सिंहों की रिहाई के लिए पंजाब बंद: कुराली में जथेबंदियों ने रोड जाम किया

Kurali, Punjab:ਬੰਦੀ ਸਿੰਘਾਂ ਦੀ ਰਿਹਾਈ ਸਬੰਧੀ ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਦੌਰਾਨ ਕੁਰਾਲੀ ਰਿਹਾ ਸੰਪੂਰਨ ਤੌਰ ਤੇ ਬੰਦ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਨੇ ਕੀਤਾ ਰੋਡ ਜਾਮ ਕੁਰਾਲੀ:- ਕੌਮੀ ਇਨਸਾਫ ਮੋਰਚੇ ਵੱਲੋਂ ਬੀਤੇ ਦਿਨੀ ਬੰਦੀ ਸਿੰਘਾਂ ਦੀ ਰਿਹਾਈ ਦੇ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਬੰਦ ਦੀ ਕਾਲ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਸੀ ਇਸ ਦੇ ਚਲਦਿਆਂ ਅੱਜ ਸ਼ਹਿਰ ਕੁਰਾਲੀ ਦੇ ਵਿੱਚ ਦੁਕਾਨਾਂ ਪੂਰਨ ਤੌਰ ਤੇ ਬੰਦ ਰਹੀਆਂ ਇਸ ਮੌਕੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਧਾਰਮਿਕ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੇ ਆਗੂ ਵੱਲੋਂ ਮਿਲ ਕੇ ਰੋਡ ਜਾਮ ਵੀ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਆਗੂ ਰੇਸ਼ਮ ਸਿੰਘ ਵਡਾਲੀ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪਿਛਲੇ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਬੰਦੀ ਸਿੰਘਾਂ ਦੀ ਰਿਹਾਈ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਧਾਰਮਿਕ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਪਰ ਸਰਕਾਰ ਉਹਨਾਂ ਦੀ ਸੁਣਵਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੀ ਉਹਨਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਭਾਈ ਜਗਤਾਰ ਸਿੰਘ ਹਵਾਰਾ ਦੇ ਮਾਤਾ ਕਾਫੀ ਬਿਰਧ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰ ਹਨ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਣ ਦੇ ਲਈ پੈਰੋਲ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਜਾ ਰਿਹੀ ਹੈ ਪਰ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਸਿਰਫ ਦੋ ਦਿਨ ਦੀ ਪੈਰੋਲ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਸਰਾਸਰ ਨਾਇਨਸਾਫੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਪੰਜਾਬ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰਨ ਦਾ ਸੱਦਾ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਸੀ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਲੋਕਾਂ ਵੱਲੋਂ ਪੂਰਨ ਸਹਿਯੋਗ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ।
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फिरोजपुर में सिख जत्थेबंदियों के राष्ट्रीय राजमार्ग जाम, स्कूल- कॉलेज और बैंकों पर असर

Firozpur, Punjab:ਫਿਰੋਜ਼ਪੁਰ ਵਿੱਚ ਵੀ ਸਿੱਖ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਨੈਸ਼ਨਲ ਹਾਈਵੇ ਜਾਮ ਕਰਕੇ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਰੋਸ਼ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ , ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਵਾਰਿਸ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਣੇ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਅਤੇ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਸਾਂਝੇ ਤੌਰ ਤੇ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਨੈਸ਼ਨਲ ਹਾਈਵੇ ਜਾਮ ਕਰਕੇ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ , ਸਕੂਲ ਕਾਲਜ ਬੈਂਕ ਵੀ ਇਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕਰਕੇ ਹੋਏ ਬੰਦ ਫਿਰੋਜ਼ਪੁਰ ਵਿੱਚ ਕੌਮੀ ਇਨਸਾਫ ਮੋਰਚੇ ਵੱਲੋਂ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਬੰਦ ਦੀ ਕਾਲ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖਾਸਾ ਅਸਰ ਦੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ ਅਤੇ ਅਕਾਲੀ ਦਲ ਵਾਰਿਸ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸਮੇਂ ਹੋਰ ਸਿੱਖ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਵੱਲੋਂ ਨੈਸ਼ਨਲ ਹਾਈਵੇ ਜਾਮ ਕਰਕੇ ਰੋਸ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਉੱਥੇ ਹੀ ਬਾਜ਼ਾਰ ਬੰਦ ਨੇ ਐਜੂਕੇਸ਼ਨ ਅਦਾਰੇ ਵੀ ਬੰਦ ਨਜ਼ਰ ਆ ਰਹੇ ਨੇ ਅਤੇ ਬੈਂਕ ਵੀ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬੰਦ ਰੱਖੇ ਗਏ ਨੇ ਇਸ ਬਾਬਤ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਦੇ ਆਗੂਆਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਸਿੱਖਾਂ ਨਾਲ ਧੱਕਾ ਕਰਦੀ ਆਈ ਹੈ ਅਤੇ ਜੋ ਬੰਦੀ ਸਿੰਘ ਆਪਣੀ ਸਜ਼ਾ ਵੀ ਪੂਰੀ ਕਰ ਚੁੱਕੇ ਨੇ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਜਾਣ ਬੁਝ ਕੇ ਜੇਲਾਂ ਵਿੱਚ ਬੰਦ ਕਰਕੇ ਰੱਖਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ ਪਰ ਉਹ ਹੁਣ ਡੱਟ ਕੇ ਕੇਂਦਰ ਦੀਆਂ ਇਸ ਸਿੱਖ ਵਿਰੋਧੀ ਨੀਤੀਆਂ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਨਗੇ ਅਤੇ ਬੰਦੀ ਸਿੰਘਾਂ ਦੀ ਰਿਹਾਈ ਤੱਕ ਇਸ ਤর੍ਹਾਂ ਦੇ ਮੋਰਚੇ ਲੱਗਦੇ ਰਹਿਣਗੇ
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अल्मोड़ा में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए पायलट उपाय लागू होंगे

Almora, Uttarakhand:जंगल से आबादी की ओर वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही और खेतों में फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए अब नए तरीके आजमाने की तैयारी है। इसके लिए अल्मोड़ा में मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में कुछ उपायों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू कर उनकी उपयोगिता परखी जाएगी। जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन्यजीवों को आबादी से दूर रखने और किसानों की फसल बचाने के व्यावहारिक उपायों पर मंथन हुआ। बैठक में वन्यजीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने की घटनाओं को कम करने के लिए जंगलों में फलदार पेड़ लगाने का सुझाव सामने आया। विचार यह है कि जंगलों में ही वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता बढ़ाई जाए, ताकि उनकी आबादी की ओर आवाजाही कम हो सके। इसके अलावा वन्यजीवों से फसलों को बचाने के लिए खेत-खेत अलग तारबाड़ करने के बजाय प्रभावित क्षेत्र को एक क्लस्टर के रूप में लेकर सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर चुनौती है। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार काम करने वाले उपायों की जरूरत है। उन्होंने वन विभाग, उद्यान विभाग और इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के अनुभवों को साथ लेकर ऐसे उपाय चिन्हित करने के निर्देश दिए, जिन्हें जमीन पर आजमाया जा सके। बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष के क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम कर रहे लोगों से उनके अनुभव और सुझाव भी लिए गए। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को सुझावों की व्यावहारिकता जांचकर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। पायलट प्रोजेक्ट में कारगर रहने वाले उपायों को बाद में दूसरे प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
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