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Syed Amir MianSyed Amir MianFollow28 Nov 2024, 03:36 pm

रामपुरः पुलिस अधीक्षक रामपुर विद्यासागर मिश्र ने किया पैदल गस्त, लोगों को दिलाया सुरक्षा का भरोसा

Rampur, Uttar Pradesh:

 आज पुलिस अधीक्षक रामपुर विद्यासागर मिश्र ने अपराध नियंत्रण, कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना कोतवाली और गंज क्षेत्र के भीड़-भाड़ वाले और महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस बल के साथ पैदल गस्त किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। पुलिस अधीक्षक ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क रहने का संदेश दिया। इस पहल से लोगों में सुरक्षा को लेकर विश्वास बढ़ा है।

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प्रयागराज में गंगा मिट्टी से गणेश प्रतिमाओं की डिमांड तेज, चतुर्थी की धूम

Prayagraj, Uttar Pradesh:संगम नगरी प्रयागराज में गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियां तेज़, गणेश चतुर्थी से पहले मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे, गंगा की पवित्र मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं की ज्यादा डिमांड। गणेश चतुर्थी को लेकर संगम नगरी प्रयागराज में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के बाजारों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की मांग भी बढ़ने लगी है। खास बात ये है कि इस बार गंगा की मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं बनाई गईं हैं जो लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। कारीगर भी दिन-रात प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। गणेश चतुर्थी का पर्व नजदीक आते ही प्रयागराज में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। कहीं प्रतिमाओं पर रंग-रोगन का काम चल रहा है, तो कहीं कलाकार गणेश प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इन प्रतिमाओं में खास आकर्षण है गंगा की मिट्टी से तैयार की गई गणेश प्रतImाओं का। कारीगरों के मुताबिक गंगा की मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की इस बार खास डिमांड है। श्रद्धालु ऐसी प्रतिमाएं पसंद कर रहे हैं, जो पूजा के साथ-साथ पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर हैं। प्रयागराज में गणेश प्रतिमा बनाने का काम करने वाले कारीगर कई दिनों पहले से तैयारियों में जुटे हुए हैं। छोटी से लेकर बड़ी प्रतिमाओं को अलग-अलग आकार और आकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है। प्रतिमाओं पर रंग भरने और सजावट का काम भी तेजी से चल रहा है। कारीगरों को उम्मीद है कि गणेश चतुर्थी तक प्रतिमाओं की बिक्री में और तेजी आएगी। वहीं श्रद्धालुओं में भी गणपति बप्पा को घर लाने को लेकर उत्साह नजर आ रहा है। भगवान गणेश की प्रतिमाओं की खरीदारी के लिए भक्त भी कारीगरों के पास पहुंचने लगें हैं। भगवान गणेश के बाल स्वरूप के अलावा बड़ी प्रतिमाओं की ज्यादा डिमांड है।
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कल्पना मिश्रा के न्याय के लिए रीवा में प्रदर्शनकारियों का धरना जारी

Rewa, Madhya Pradesh:धरना स्थल से लोगों से बातचीत रीवा में मृतक कल्पना मिश्रा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर समर्थक सड़क पर उतर आए हैं। अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे परिजनों को हिरासत में लिए जाने के बाद अब धरना स्थल पर भी बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्रदर्शनकारियों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। समर्थकों का कहना है कि पुलिस ने परिजनों को हिरासत में लेकर गलत कार्रवाई की है और इस तरह की कथित तानाशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि कल्पना मिश्रा को न्याय दिया जाए और जिन डॉक्टरों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनके खिलाफ मामला दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। समर्थकों का कहना है कि न्याय की इस लड़ाई को वे हर स्तर तक ले जाने के लिए तैयार हैं। फिलहाल धरना स्थल पर लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है और प्रदर्शनकारियों में खासा आक्रोश नजर आ रहा है।
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नंदीग्राम हिंसा केस: चार्जशीट की प्रक्रिया रोकी, अगली सुनवाई 11 सितम्बर

Haldia, West Bengal:নন্দীগ্রামে ২০২১ এ ভোট-পরবর্তী হিংসা মামলা: অভিযুক্তদের অনুপস্থিতিতে চার্জ গঠন পিছোল, পরবর্তী শুনানি ১১ সেপ্টেম্বর। উপনির্বাচনের মধ্যে চার্জ গঠনের বিষয় সামনে আসতেই হইচই তৃণমূল শিবিরে। হলদিয়া: ২০২১ সালের নন্দীগ্রামের ভোট-পরবর্তী হিংসায় নিহত বিজেপি কর্মী দেবব্রত মাইতি হত্যা মামলায় বুধবার হলদিয়া আদালতে চার্জ গঠনের কথা থাকলেও তা পিছিয়ে গেল। মামলার অন্যতম অভিযুক্ত শেখ সুফিয়ন-সহ দু’জন আদালতে উপস্থিত না থাকায় এবং অভিযুক্তদের মধ্যে ছয়জন মামলা থেকে আবেদনের কারণে চার্জ গঠন হয়নি। মোট ৪২ জনের বিরুদ্ধে দায়ের হওয়া এই মামলায় দীর্ঘদিন ধরে এক অভিযুক্ত নিখোঁজ থাকায় বর্তমানে ৪১ জনের বিরুদ্ধে চার্জ গঠনের প্রক্রিয়া চলছে। আদালত আগামী ১১ সেপ্টেম্বর অব্যাহতির আবেদনগুলি খতিয়ে দেখবে। এরপর চার্জ গঠনের দিন ঘোষণা করা হবে। ২০২১ সালের বিধানসভা নির্বাচনের ফল প্রকাশের পর রাজনৈতিক হিংসার আবহে নন্দীগ্রামে আক্রান্ত হন বিজেপি কর্মী দেবব্রত মাইতি। গুরুতর আহত অবস্থায় হাসপাতালে ভর্তি হওয়ার পর ১৩ মে তাঁর মৃত্যু হয়। পরে এই মামলার তদন্তভার গ্রহণ করে সিবিআই। সিবিআইয়ের আইনজীবী অমিতাভ মৈত্র জানান, অসুস্থতার কারণে দুই অভিযুক্ত অনুপস্থিত থাকায় এবং ছয়জনের আবেদনের কারণে চার্জ গঠন স্থগিত রাখা হয়েছে।
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रवानी कटीरी में VSHF ने उठाई समान न्याय की आवाज, UGC Rollback और स्वर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर

Ajay GargAjay GargFollow4m ago
Bugrasi, Uttar Pradesh:--आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर की समीक्षा और SC/ST अधिनियम में आवश्यक सुधार की भी मांग बुगरासी ( बुलंदशहर )। विश्व सनातन हिन्दु फाउंडेशन (VSHF) के आह्वान पर 8 सितंबर को तहसील स्याना के ग्राम रवानी कटीरी में जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को लेकर ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के सैकड़ों कार्यकर्ता एवं ग्रामवासी शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाते हुए माननीय उपजिलाधिकारी महोदय, स्याना के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति महोदय, भारत सरकार एवं माननीय मुख्यमंत्री महोदय, उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में UGC के विवादित प्रावधानों के तत्काल Rollback, लागू किए जाने वाले प्रावधानों पर व्यापक एवं पारदर्शी परामर्श, आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर की निष्पक्ष एवं व्यापक समीक्षा, आरक्षण के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक प्रभाव का स्वतंत्र अध्ययन तथा राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण आयोग एवं उत्तर प्रदेश में राज्य स्तरीय स्वर्ण आयोग के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही सामान्य/स्वर्ण वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों, युवाओं एवं परिवारों के लिए शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति एवं आर्थिक सहायता की प्रभावी योजनाएं लागू करने तथा SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की व्यापक समीक्षा कर वास्तविक पीड़ितों की सुरक्षा के साथ निष्पक्ष जांच एवं निर्दोष नागरिकों के कानूनी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई। VSHF अध्यक्ष ज्ञानेश चौहान ने कहा कि संगठन की मांग किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं है। संगठन चाहता है कि देश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान न्याय, समान अवसर और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि सरकार को जनभावनाओं और जमीनी परिस्थितियों को गंभीरता से समझते हुए इन विषयों पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए। वास्तविक जरूरतमंद को उसका अधिकार मिले और किसी भी निर्दोष नागरिक के साथ अन्याय न हो, यही हमारी मांग है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पवनेश राघव ने कहा कि आज युवा और आम नागरिक अपने भविष्य, शिक्षा, रोजगार और अवसरों को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं। UGC के प्रावधानों, आरक्षण व्यवस्था और सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों से जुड़े विषयों पर सरकार को तथ्यों एवं आंकड़ों के आधार पर निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए। हमारी मांग किसी का अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की है। उन्होंने कहा कि यदि इन विषयों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो VSHF आगे भी शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से जनजागरूकता और लोकतांत्रिक आंदोलन को आगे बढ़ाएगा। नवनीत सिंह ने कहा कि सरकारी योजनाओं एवं संवैधानिक व्यवस्थाओं का उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगों तक न्याय और अवसर पहुंचाना होना चाहिए। कार्यक्रम में ज्ञानेश चौहान, पवनेश राघव, नवनीत सिंह, हर्षित चौहान, अनिल लोधी, जितेन्द्र सिंह, अभिषेक चौधरी, आशीष चौहान, कृष्ण कुमार, सुनील चौहान, गिरीश चौहान, अनिल राघव, किशन तोमर, घुगरू तोमर, विनय, अतुल, सुमित, तरुण, अजय, छोटू दादा, अमित, राकेश, मोहित टीटू चौहान ,विनोद चौहान ,मुकेश गोस्वामी, शिशपाल लोधी, गंगा राम चौहान ,विजयपाल चौहान, सुखवीर चौहान, जसवंत चौहान, भगतसिंह चौहान, महेश चौहान, योगेंद्र, पुष्पेंद्र, राजीव, दुष्यंत एवं प्रमोद सहित सैकड़ों कार्यकर्ता एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
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बारिश थमी, लेकिन नहीं थमा जलभराव; बुलेट से लाजपत नगर पहुंचे नगर आयुक्त

Bareilly, Uttar Pradesh:बरेली शहर में दो दिन पहले शुरू हुई तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। लगातार बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया, जबकि कई रिहायशी कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। बीते दिन बारिश थमने के बावजूद शहर की कई कॉलोनियों और प्रमुख सड़कों पर अब भी पानी भरा हुआ है। जलभराव के कारण क्षेत्रीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच बारिश से प्रभावित इज्जतनगर क्षेत्र के लाजपत नगर की स्थिति का जायजा लेने नगर आयुक्त संजीव मौर्य बुलेट से मौके पर पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र में घूमकर जलभराव और जल निकासी की स्थिति देखी और स्थानीय लोगों से भी समस्याओं की जानकारी ली।नगर आयुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी जल्द कराने और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर जोर दिया।निरीक्षण के दौरान लाजपत नगर में नाली के पानी की निकासी को लेकर भी शिकायत सामने आई। स्थानीय लोगों पर नाली के ऊपर अवैध रूप से स्लैब बनाए जाने का आरोप लगाया गया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित होने की बात कही गई। नगर आयुक्त ने अधिकारियों को मौके की स्थिति की जांच कर जल निकासी में आ रही बाधाओं को दूर कराने के निर्देश दिए। बारिश थमने के बाद भी कई इलाकों में जलभराव बरकरार रहने से लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की निकासी नहीं होने से उन्हें घरों से निकलने, वाहन चलाने और रोजमर्रा के कामों में परेशानी उठानी पड़ रही है। नगर निगम की टीमें जलभराव वाले इलाकों में पानी निकालने के प्रयास में जुटी हैं।
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बिलासपुर रेलवे मंडल के रनिंग स्टाफ का अनिश्चितकालीन धरना जारी

Bilaspur, Chhattisgarh:बिलासपुर रेल मंडल में ट्रेनों के सुरक्षित संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले लोको पायलट और रनिंग स्टाफ ने अपनी समस्याओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि स्टाफ की कमी के कारण लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ रही है और पर्याप्त आराम भी नहीं मिल रहा है। सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर भी कर्मचारियों ने सवाल उठाए हैं। बिजुरी में पिछले पांच दिनों से धरना चल रहा था, वहीं अब बिलासपुर समेत मंडल की अलग-अलग क्रू लॉबी के सामने रनिंग स्टाफ ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। बिलासपुर रेल मंडल देशभर में अपने बड़े माल लदान के लिए जाना जाता है और ट्रेनों के संचालन में लोको रनिंग स्टाफ की अहम भूमिका रहती है। कर्मचारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी के चलते कई बार 12 से 16 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। उनका आरोप है कि लंबे समय तक काम करने के बाद पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, इसके बावजूद ट्रेनों का संचालन करना पड़ता है। रनिंग स्टाफ ने रनिंग रूम में खाने की व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार खाना खराब या कच्चा मिलने की शिकायत करने पर भी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा शंटिंग और सुरक्षा नियमों को लेकर भी कर्मचारियों ने चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कई स्टेशनों और साइडिंग में पर्याप्त शंटिंग स्टाफ नहीं होने के कारण काम का दबाव बढ़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे सुरक्षा नियमों के मुताबिक काम करते हैं, लेकिन ट्रेन में देरी होने पर जिम्मेदारी उन्हीं पर डाल दी जाती है। रनिंग स्टाफ ने कुछ कर्मचारियों के ट्रांसफर और कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया है। कर्मचारियों ने बिजुरी के लोको पायलट एम.के. विभूति के ट्रांसफर का हवाला देते हुए कहा कि शंटिंग के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने के बावजूद उनका स्थानांतरण कर दिया गया। वहीं शहडोल के लोको पायलट ए.के. पाल के ट्रांसफर को भी रनिंग रूम में खाने की शिकायत से जोड़कर देखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ किसी घटना के बाद लोको पायलटों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप लगाकर कार्रवाई की जाती है, तो दूसरी तरफ नियमों के मुताबिक काम करने पर भी ट्रांसफर और दंड का सामना करना पड़ता है। रनिंग स्टाफ ने अधिकारियों के साथ बातचीत नहीं होने का भी आरोप लगाया है। कर्मचारियों का दावा है कि अपनी समस्याएं बताने के लिए अधिकारियों से संपर्क करने पर भी उन्हें कार्रवाई की चेतावनी मिलने की बात कही जाती है।कर्मचारियों ने काम के बढ़ते दबाव और तनाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका दावा है कि पिछले एक महीने में उनके तीन लोको पायलटों को हार्ट अटैक की घटना हुई है। हालांकि इन घटनाओं का कारण काम का दबाव ही है, इसे लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। बिजури में पांच दिन से चल रहे धरने के बाद अब बिलासपुर, शहडोल, सूरजपुर, रायगढ़, ब्रजराजनगर, पेंड्रा और उसलापुर समेत मंडल की अलग-अलग क्रू लॉबियों के सामने रनिंग स्टाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं पर बातचीत कर समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।
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सीधी की राजनीति में केदारनाथ शुक्ला का चार बार विधायक बनने वाला संघर्षपूर्ण सफर

Sidhi, Madhya Pradesh:सीधी की सियासत में पंडित केदारनाथ शुक्ला का नाम लंबे राजनीतिक सफर और संघर्षों से जुड़ा रहा है। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत, पत्रकारिता से लेकर संगठन की जिम्मेदारियां और फिर विधानसभा तक का सफर—उनकी राजनीतिक यात्रा कई उतार-चढ़ावों से होकर गुजरी। चार बार विधायक रहे केदारनाथ शुक्ला ने संगठन और जन आंदोलनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीधी। मध्यप्रदेश के सीधी जिले की राजनीति में पंडित केदारनाथ शुक्ला एक ऐसा नाम रहे हैं, जिसकी पहचान किसी एक चुनाव या एक कार्यकाल तक सीमित नहीं रही। छात्र राजनीति, journalisticism, संगठनात्मक जिम्मेदारियों, जन आंदोलनों और फिर विधानसभा तक पहुंचने वाली उनकी राजनीतिक यात्रा संघर्षों और उपलब्धियों से भरी रही है। 9 सितंबर 1954 को सीधी जिले में जन्मे केदारनाथ शुक्ला ने विधि की शिक्षा हासिल की। वकालत और कृषि से जुड़े रहने के साथ ही उनका झुकाव सामाजिक सरोकारों और सार्वजनिक जीवन की ओर बढ़ा। साहित्य में रुचि और समाज के कमजोर एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान की भावना भी उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व का हिस्सा रही। छात्र राजनीति और पत्रकारिता से शुरू हुआ सफर केदारनाथ शुक्ला का राजनीतिक सफर सीधे चुनावी मैदान से शुरू नहीं हुआ। छात्र राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े अनुभवों ने उन्हें समाज और राजनीति को करीब से समझने का अवसर दिया। इसके बाद संगठन की राजनीति में सक्रिय होते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1994 से 1997 तक भाजपा के सीधी जिला अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन की जिम्मेदारी संभाली। यह दौर उनके राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण रहा। संगठन को मजबूत करने के साथ उन्होंने स्थानीय राजनीति और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पकड़ को मजबूत किया। आंदोलनों में सक्रियता, जेल यात्राओं से भी नहीं पीछे हटे केदारनाथ शुक्ला के राजनीतिक सफर में जन आंदोलनों का भी अहम स्थान रहा। विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के दौरान उन्हें जेल यात्राएं भी करनी पड़ीं। संघर्ष का यह दौर उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को आकार देने वाला माना जाता है। संगठनात्मक अनुभव, छात्र राजनीति और पत्रकारिता की पृष्ठभूमि के बाद लंबे संघर्ष के बीच वर्ष 1998 में पहली बार विधानसभा पहुंचने का अवसर मिला। 1998 में पहली बार विधानसभा पहुंचे विधानसभा पहुंचने के बाद क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाना उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। हालांकि इसके बाद उनके राजनीतिक जीवन में एक अंतराल भी आया, लेकिन उन्होंने वापसी की और 2008 में दोबारा विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में लगातार जीत ने उन्हें सीधी की राजनीति में एक मजबूत और स्थापित चेहरा बना दिया। चार बार विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विधानसभा की समितियों में भी निभाई जिम्मेदारी केदारनाथ शुक्ला का राजनीतिक अनुभव केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। विधायक रहते हुए उन्होंने विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। वे विधानसभा की कई समितियों के सदस्य रहे। 2015 से 2018 तक कृषि विकास समिति के सभापति के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा भाजपा प्रदेश कार्यसमिति और विधायक दल सहित संगठन के विभिन्न स्तरों पर भी उन्हें जिम्मेदारियां मिलीं। 2023 में बदले राजनीतिक समीकरण केदारनाथ शुक्ला के लंबे राजनीतिक सफर में 2023 का विधानसभा चुनाव एक बड़ा मोड़ लेकर आया। लंबे समय तक भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले केदारनाथ शुक्ला को इस बार पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया। टिकट नहीं मिलने के बाद राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलीं और उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। यह चुनाव उनके लिए वर्षों के राजनीतिक सफर के बाद सामने आई एक नई चुनौती थी。 हालांकि चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा, लेकिन यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का एक अहम अध्याय जरूर बन गया। हार के बाद भी खत्म नहीं होती राजनीतिक कहानी राजनीति में चुनावी हार को किसी लंबे राजनीतिक सफर का अंत नहीं माना जाता। समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलती हैं, समीकरण बदलते रहते हैं और नेताओं की भूमिकाएं भी बदलती रहती हैं। चार बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके पंडित केदारनाथ शुक्ला भले ही आज विधानसभा में सक्रिय भूमिका में नहीं हैं, लेकिन सीधी की राजनीति के एक लंबे दौर के साथ उनका नाम जुड़ा हुआ है। सीधी की सियासत में दर्ज है एक लंबा अध्याय छात्र राजनीति से लेकर पत्रकारिता, संगठन, जन आंदोलन और विधानसभा तक का सफर तय करने वाले केदारनाथ शुक्ला की राजनीतिक कहानी में जीत भी है, संघर्ष भी, उतार-चढ़ाव भी और बदलते राजनीतिक समीकरण भी। उनकी पहचान केवल एक पूर्व विधायक के तौर पर नहीं, बल्कि ऐसे राजनेता के रूप में रही, जिसने लंबे समय तक सीधी की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। राजनीति में पद और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन लंबे सार्वजनिक जीवन से जुड़ी स्मृतियां आसानी से खत्म नहीं होतीं। पंडित केदारनाथ शुक्ला का राजनीतिक सफर भी सीधी की सियासत के इतिहास का ऐसा ही एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें संघर्ष, संगठन, चुनावी जीत और राजनीतिक उतार-चढ़ाव की कई कहानियां छिपी हैं。
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गहलोत का एयरपोर्ट-हाईकोर्ट निर्माण पर तगड़ा निशाना: स्थानीय चुनाव पर भी बड़ा हमला

Jodhpur, Rajasthan:JOdhpur। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज जोधपुर पहुंचे। जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने एयरपोर्ट को लेकर एयरफोर्स क्षेत्र से जुड़े पुराने मामले, नई हाईकोर्ट भवन की निर्माण गुणवत्ता और नगर निकाय चुनाव को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि एयरपोर्ट को लेकर एयरफोर्स से जुड़े मामले में करीब दो साल से चल रहा था। उन्होंने कहा कि सरकार का काम निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करना है। उन्होंने एयरपोर्ट भवन में पहली बारिश में पानी आने और जोधपुर में नई हाईकोर्ट भवन में सामने आई समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नई इमारतों में इस तरह की स्थिति बनना चिंता का विषय है। गहलोत ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट, निचली अदालत और अन्य न्यायालयों की इमारतों के निर्माण में जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले सरकार भवन बनाकर न्यायपालिका को सौंपती थी, जिससे निर्माण और गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदारी तय होती थी। यदि वर्तमान व्यवस्था में न्यायपालिका स्वयं निर्माण कर रही है तो वह भी ठीक है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जो काम सरकार के विभागों के जिम्मे हैं, उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए। नगर निकाय चुनाव को लेकर अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के रोड शो पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में होने चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने स्थानीय चुनावों में इस तरह प्रचार नहीं किया। गहलोत ने दावा किया कि पूरे राजस्थान सहित जोधपुर में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बन चुका है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में उत्साह है और आम जनता कांग्रेस के साथ जुड़ रही है। गहलोत ने यह भी दावा किया कि जिन वर्गों को सरकार अपना पारंपरिक वोट बैंक मानती थी, उनमें भी इस बार नाराजगी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि जनता के सामने स्थानीय मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, उनके कार्यकाल में पट्टे जारी करने, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर काम हुआ, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इन मामलों में अपेक्षित गति नहीं दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर भ्रष्टाचार बढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्थान में भ्रष्टाचार पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की कई योजनाओं को बंद या कमजोर कर दिया गया है। गहलोत ने कहा कि राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में स्कूल, खेल सुविधाएं, पुस्तकालय और छात्रावास जैसी कई इमारतें बनी हुई हैं, लेकिन उनका अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने सरकार से जनता के हित में इन सुविधाओं को प्रभावी रूप से संचालित करने की मांग की। अशोक गहलोत ने कहा कि विपक्ष के रूप में कांग्रेस लगातार आम जनता के मुद्दों को लेकर चिंता कर रही है। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि वह बिना किसी संकोच के अपने मत का इस्तेमाल करे और कांग्रेस को मजबूत बनाए। गहलोत ने दावा किया कि इस बार स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को जनता का समर्थन मिलेगा और सत्तारूढ़ दल को करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जनता के हाथ में सबसे बड़ा अधिकार मतदान का है और जनता अपने वोट के माध्यम से सरकार को जवाब दे सकती है।
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