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Raebareli229001

Raebareli - मार्च में निकलेगी डॉक्टरों की पहली खेप

Jan 10, 2025 03:10:57
Raebareli, Uttar Pradesh

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुके पहले बैच के छात्र-छात्राओं की इंटर्नशिप भी पूरी होने वाली है। मार्च में 40 डॉक्टरों की पहली खेप निकलेगी।अच्छी रैंक लाने वाले छात्र-छात्राओं को एम्स में ही प्लेसमेंट देने की व्यवस्था की गई है। ऐसा होने के बाद उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा । एम्स में ही टॉपरों को मौका मिलने से डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी।

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Dec 30, 2025 05:05:13
Kolkata, West Bengal:

ABID Interiors 2026 hosts its 35th edition in Kolkata, showcasing interior design innovation, materials, and technology to over 80,000 visitors…Kolkata is all set to witness a landmark moment in India’s interior design journey as ABID announced the 35th edition of ABID Interiors 2026. The event is all set to take place from 9th to 12th January, 2026, at Biswa Bangla Mela Prangan in Kolkata…ABID Interiors was established by the interior design fraternity. Now the event stands as one of the oldest, most respected interior exhibitions in the country. For over three and a half decades, the exhibition has grown in scale and credibility. The two qualities that define ABID Interiors are professional depth and cultural relevance. The event is planned and organized by professionals and reflects a combination of intent and innovation along with market reality. The company claims its practitioner-led ethics has attracted manufacturers, designers, and architects year after year…The 35th edition of ABID Interiors is celebrating leadership. This marks a milestone in their journey. ABID Interiors 2026 is aimed as an organized meeting of ideas, craftsmanship and technology. It is offering participants and visitors an experience that goes beyond display…ABID’s landmark 35th edition exhibition serves as a powerful meeting ground for those who influence how spaces are imagined, designed, built, and ultimately lived in. Hosted by the Association of Architects, Builders, Interior Designers & Allied Professionals, this is more than a showcase—it’s a participative platform where ideas take shape and collaborations begin. Professionals travel from across India and around the globe, creating a dynamic exchange of insights, innovation, and global perspectives. With over 80,000 visitors expected, the scale and impact are impossible to ignore. Attendees gain direct access to 10,000+ trade designers sharing creative inspiration, 15,000+ builders and contractors exploring practical, site-ready solutions, 5,000+ architects discovering new materials and technologies, and 50,000+ homeowners seeking informed, confident choices for quality living spaces.

ABID Interiors claims it offers something unique and valuable for manufacturers and brands, which is engagement, with an informed, committed and professional interior designing community. The exhibition helps in creating meaningful, long-term relationships and genuine feedback. These are crucial elements for evolving the interior designing economy…As ABID steps into its 35th year, the exhibition stays rooted in a core belief, that true design excellence flourishes when it is shaped, supported, and advanced by the fraternity itself…ABID Interiors 2026 is not merely another date on the industry calendar. It stands as a benchmark for evolving practices and a unified declaration of purpose from the interior design community…Over the years, the Association of Architects, Builders, Interior Designers & Allied Professionals exhibition has earned its reputation as a premier national platform, uniting design professionals, leading brands, and forward-thinking innovators from across India. The 35th edition is backed by a strong roster of industry leaders, with Kerovit by Kajaria Bathware and Birla Opus coming on board as Platinum Sponsors, reflecting their commitment to innovation and design excellence. Adding further strength to the event’s industry support are Omacme, Greenply, and Havells as Gold Sponsors, reinforcing ABID Interiors’ position as a cornerstone of the design ecosystem.

 

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AJAvinash Jagnawat
Jan 02, 2026 08:25:46
Udaipur, Rajasthan:उदयपुर शहर के सूरजपोल थाना क्षेत्र स्थित गुलाब आइस फैक्ट्री के पास आज एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रॉड पर साइकिल चला रहे एक बच्चे को पीछे से आ रही गुजराती पर्यटक की बलेनो कार की चपेट में ले लिया। बच्चा कार के नीचे फंस गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए। वहीं पास में मौजूद पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से कार को ऊपर उठाकर बच्चे को बाहर निकाला गया। गनीमत यह रही कि बच्चे को ज्यादा चोट नहीं आईं। सूचना पर पहुंची सूरजपोल थाना पुलिस ने कार को जब्त कर लिया। घायल बच्चे को परिजन तत्काल हॉस्पिटल लेकर गए । पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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WJWalmik Joshi
Jan 02, 2026 08:25:11
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DSDanvir Sahu
Jan 02, 2026 08:24:59
Raipur, Chhattisgarh:बालोद, छत्तीसगढ़ में नए साल के मौके पर इको टूरिज्म को नया उड़ान मिली है. प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां सियादेवी के समीप जलाशय में अब बम्बू राफ्टिंग की शुरुआत हो चुकी है. यह पहल स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दे रही है और बालोद के छिपे प्राकृतिक सौंदर्य को दुनिया के सामने ला रही है. छत्तीसगढ़ में बम्बू राफ्टिंग की शुरुआत के बाद यह थीम बालोद तक पहुंच गई है. दशकों से उपेक्षित रहा जलाशय अब स्थानीय पंचायत और प्रशासन के सहयोग से एक आकर्षक पर्यटन केंद्र बन गया है. मां सियादेवी के आंचल में स्थित यह जगह प्रकृति के सानिध्य का अहसास कराती है. इस पहल की नींव गांव के युवा उप सरपंच जगन्नाथ साहू ने रखी, जिन्होंने बताया कि उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार देना और क्षेत्रीय पर्यटन को नई दिशा देना है. बम्बू से बनी नौकाओं का संचालन गांव के ही युवक कर रहे हैं. हर व्यक्ति महज 50 रुपए में इस राफ्टिंग का आनंद ले सकता है. पर्यटकों में इस जगह को लेकर उत्साह है; इसे अनूठा अनुभव बताया गया और कहा गया कि यह जगह छत्तीसगढ़ के नक्शे पर नई पहचान बनाएगी. स्थानीय प्रशासन और पंचायत ने इस स्थान को प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है. यहाँ प्लास्टिक पूरी तरह प्रतिबंधित है और खाने-पीने के लिए पत्तों व दोने-पत्तलों जैसे जैविक विकल्पों का प्रयोग हो रहा है. बालोद में शुरू हुई यह बम्बू राफ्टिंग न सिर्फ एक नया एडवेंचर लाया है, बल्कि यह साबित करती है कि स्थानीय लोग ठान लें तो हर जगह पर्यटन का केंद्र बन सकती है. मां सियादेवी जलाशय अब बालोद का नया आकर्षण बन चुका है.
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UMUJJWAL MISHRA
Jan 02, 2026 08:23:30
Ranchi, Jharkhand:रांची का ऐतिहासिक बड़ा तालाब, जो कभी सर्दियों में साइबेरिया से आने वाले विदेशी पक्षियों से गुलजार रहता था, इस बार बिल्कुल सूना नजर आ रहा है। हर साल हजारों की संख्या में साइबेरियन डक और साइबेरियन सारस यहां पहुंचते थे और इन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पडती थी। लेकिन इस बार सर्दियों का मौसम खत्म होने को है, बावजूद इसके एक भी विदेशी पक्षी बड़ा तालाब में नहीं आया है, जबकि दूसरे राज्यों और जलाशयों में प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी देखी जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तालाब का गंदा पानी, या फिर फिशिंग के लिए लगाए गए जाल और बढ़ता मानव हस्तक्षेप विदेशी पक्षियों को यहां आने से रोक रहे हैं? अब यह चिंता का विषय बन गया है कि क्या बड़ा तालाब अपनी पहचान खोता जा रहा है।
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SKShrawan Kumar Soni
Jan 02, 2026 08:21:59
Barwadih, Jharkhand:पलामू के मेदिनीनगर स्थित ज्वैलरी कारोबारी रंजीत सोनी से एक करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में पलामू पुलिस ने एक और अपराधी को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम ने मेदिनीनगर शहर से देसी कट्टा और गोली के साथ शाहरुख अली नाम के एक अपराधी को गिरफ्तार किया है। मामले में जानकारी देते हुए एसपी रिष्मा रमेशन ने बताया कि गिरफ्तार शाहरुख अली पहले से अपराधिक प्रवृति का है। गिरफ्तार शाहरुख का भगिना अतीक खान जो कुवैत में रहता है वो गैंगस्टर प्रिंस खान के सम्पर्क में है और उसने अपने भगिना के कहने पर ही कारोबारी रंजीत सोनी के दुकान के पास फायरिंग करने वाला था, लेकिन पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए शाहरुख अली को गिरफ्तार कर लिया है। फायरिंग करने के काम के लिए प्रिंस खान से उसे 30 हजार रुपए मिलने वाले थे।
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JCJitendra Chaudhary
Jan 02, 2026 08:21:28
Begusarai, Bihar:जितेंद्र कुमार बेगूसराय एंकर बेगूसराय से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सड़क हादसे में रिफाइनरी मजदूर की मौत के बाद बिहार सरकार के गन्ना मंत्री संजय पासवान सदर अस्पताल पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात की।दरअसल मामला बीरपुर थाना क्षेत्र के फुलकारी चौक का है, जहां घने कोहरे के कारण हुए सड़क हादसे में रिफाइनरी में काम कर रहे मजदूर मोहम्मद बिलाल की दर्दनाक मौत हो गई थी।घटना की जानकारी मिलते ही बिहार सरकार के गन्ना मंत्री संजय पासवान सदर अस्पताल पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात कर हर संभव सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया। इस दौरान मंत्री संजय पासवान ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है, क्योंकि मोहम्मद बिलाल अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था।उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों को नियमानुसार मिलने वाला सरकारी मुआवजा अवश्य दिया जाएगा और सरकार परिवार के साथ खड़ी है।बताया जा रहा है कि मृतक मोहम्मद बिलाल डंडारी थाना क्षेत्र का रहने वाला था। बीती रात वह अपने ससुराल में रुका हुआ था और आज सुबह मोटरसाइकिल से रिफाइनरी ड्यूटी के लिए निकलते समय फुलकारी चौक के पास सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया।मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया है, वहीं पूरे इलाके में शोक का माहौल बना हुआ है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। बाइट संजय पासवान गन्ना मंत्री
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DGDeepak Goyal
Jan 02, 2026 08:20:16
Jaipur, Rajasthan:राजस्थान की शहरी राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां लोकतंत्र की जगह प्रशासनिक व्यवस्था लेने जा रही है۔ जनवरी खत्म होते-होते प्रदेश के 90 चुने हुए नगरीय निकायों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और इसके साथ ही शहरों की कमान पूरी तरह अफसरशाही के हाथों में चली जाएगी। फरवरी में आखिरी बचा हुआ निकाय भी खत्म हो जाएगा। यानी प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा, जब लगभग सभी शहरी निकाय बिना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के चलेंगे। इसके अलावा नवगठित निकायों को छोड़ दें, तो प्रदेश के सभी 196 नगरीय निकायों में कोई भी निर्वाचित बोर्ड नहीं बचेगा। यानी शहरी सरकार की कमान पूरी तरह प्रशासकों (अफसरों) के भरोसे होगी। प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनेगी, जब (नवगठित निकायों को छोड़कर) सभी 196 नगरीय निकायों में निर्वाचित बोर्ड नहीं रहेंगे। अभी तक 105 नगरीय निकायों में प्रशासक नियुक्त हैं। जबकि नवगठित 113 निकायों में की बागडोर पहले से ही प्रशासकों के हाथ में है...पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में 196 नगरीय निकायों में चुनाव हुए थे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव आखिर कब होंगे। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही सरकार को अप्रैल तक नगरीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक चुनाव को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है। इसी अनिश्चितता ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है कि चुनाव जानबूझकर टाले जा रहे हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक जवाबदेही से बचा सके। इसके बाद स्थानीय राजनीति और आम जनता पर प्रशासक व्यवस्था का सबसे बड़ा असर दिखाई दे रहा है। जनता की चिंता यह है कि अब रोजमर्रा की समस्याएं लेकर किसके पास जाएं। कार्यकाल खत्म होने के साथ वार्ड पार्षद और चेयरमैन, मेयर तक पहुंच खत्म हो चुकी है। विकास कार्यों और नीतिगत फैसले अब निर्वाचित प्रतिनिधियों की बजाय प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं, जिससे आम नागरिक खुद को व्यवस्था से कटता हुआ महसूस कर रहा है। कार्यकाल खत्म होने वाले निकायों की बात करें तो अजमेर जिले में (5), बांसवाड़ा (1), बीकानेर (3), भीलवाड़ा (7), बूंदी (6), प्रतापगढ़ (2), चित्तौड़गढ़ (3), चूरू (8), डूंगरपुर (2), हनुमानगढ़ (5), जैसलमेर (1), जालौर (1), झालावाड़ (5), झुंझुनूं (8), नागौर (9), पाली (7), राजसमंद (2), सीकर (7), टोंक (5) और उदयपुर (3) निकाय शामिल है। इसके अलावा काग़ज़ों में यह महज़ कार्यकाल की समाप्ति है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त में यह लोकतंत्र की सबसे नज़दीकी सरकार के ठहराव की कहानी है। प्रदेश के शहर अब ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां चुने हुए प्रतिनिधियों की जगह फाइलें और फैसले अफसरों के हाथों में हैं। अदालतों के आदेश, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जनता की बढ़ती बेचैनी के बीच सवाल वही है कि शहरी लोकतंत्र का यह खालीपन कब तक भरा जाएगा…और क्या जनता को फिर से अपनी आवाज़ चुनने का हक़ समय पर मिलेगा?
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DGDeepak Goyal
Jan 02, 2026 08:19:56
Jaipur, Rajasthan:राजस्थान की शहरी राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां लोकतंत्र की जगह प्रशासनिक व्यवस्था लेने जा रही है। जनवरी खत्म होते-होते प्रदेश के 90 चुने हुए नगरीय निकायों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा और इसके साथ ही शहरों की कमान पूरी तरह अफसरशाही के हाथों में चली जाएगी। फरवरी में आखिरी बचा हुआ निकाय भी खत्म हो जाएगा। यानी प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा, जब लगभग सभी शहरी निकाय बिना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के चलेंगे। जनवरी में प्रदेश के 90 नगरीय निकायों के बोर्ड का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके बाद केवल झुंझुनूं जिले की नगरपालिका विद्याविहार बचेगी, जिसका कार्यकाल भी फरवरी में खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही नवगठित निकायों को छोड़ दें, तो प्रदेश के सभी 196 नगरीय निकायों में कोई भी निर्वाचित बोर्ड नहीं बचेगा। यानी शहरी शासन पूरी तरह प्रशासकों के भरोसे होगा। प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनेगी, जब (नवगठित निकायों को छोड़कर) सभी 196 नगरीय निकायों में निर्वाचित बोर्ड नहीं रहेंगे। यानि, पूरी शहरी व्यवस्था प्रशासनिक अधिकारियों के पास होगी। अभी तक 105 नगरीय निकायों में प्रशासक नियुक्त हैं। जबकि नवगठित 113 निकायों में की बागडोर पहले से ही प्रशासकों के हाथ में है...पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में 196 नगरीय निकायों में चुनाव हुए थे। स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव आखिर कब होंगे। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही सरकार को अप्रैल तक नगरीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक चुनाव को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है। इसी अनिश्चितता ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। विपक्ष सरकार पर आरोप लगा रहा है कि चुनाव जानबूझकर टाले जा रहे हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक जवाबदेही से बचा जा सके। प्रशासक व्यवस्था का सबसे बड़ा असर स्थानीय राजनीति और आम जनता पर दिखाई दे रहा है। जनता की चिंता यह है कि अब रोजमर्रा की समस्याएं लेकर किसके पास जाएं। कार्यकाल खत्म होने के साथ वार्ड पार्षद और चेयरमैन, मेयर तक पहुंच खत्म हो चुकी है। विकास कार्यों और नीतिग निर्णय अब निर्वाचित प्रतिनिधियों की बजाय प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं, जिससे आम नागरिक खुद को व्यवस्था से कटता हुआ महसूस कर रहा है। कार्यकाल खत्म होने वाले निकायों की बात करें तो अजमेर (5), बांसवाड़ा (1), बीकानेर (3), भीलवाड़ा (7), बूंदी (6), प्रतापगढ़ (2), चित्तौड़गढ़ (3), चूरू (8), डूंगरपुर (2), हनुमानगढ़ (5), जैसलमेर (1), जालौर (1), झालावाड़ (5), झुंझुनूं (8), नागौर (9), पाली (7), राजसमंद (2), सीकर (7), टोंक (5) और उदयपुर (3) निकाय शामिल है। काग़ज़ों में यह महज़ कार्यकाल की समाप्ति है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त में यह लोकतंत्र की सबसे नज़दीकी सरकार के ठहराव की कहानी है। प्रदेश के शहर अब ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां चुने हुए प्रतिनिधियों की जगह फाइलें और फैसले अफसरों के हाथों में होंगे। अदालतों के आदेश, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जनता की बढ़ती बेचैनी के बीच सवाल यही है कि शहरी लोकतंत्र का यह खालीपन कब तक भरा जाएगा…और क्या जनता को फिर से अपनी आवाज़ चुनने का हक़ समय पर मिलेगा?
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VSVishnu Sharma1
Jan 02, 2026 08:19:22
Jaipur, Rajasthan:जयपुर के चौमूं में बुलडोजर एक्शन राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक रफीक़ खान का बयान बुलडोजर एक्शन को लेकर कहा, बीजेपी ने बुलडोजर को सिम्बल बना लिया है। आम आदमी पर ज़ुल्म करना बीजेपी की आदत बन गई है. कोर्ट की गाइडलाइन है कि किसी जाति, धर्म या समाज को टारगेट करके बुलडोजर नहीं चलेगा। चौमूं का माहौल राजनीतिक द्वेषता का है। चौमूं से बीजेपी को सफलता नहीं मिली, इसलिए इस तरह के हथकंडे अपनाकर सफलता पाना चाहते हैं। राजस्थान में उपद्रवियों की जगह नहीं है, लेकिन अगर पुलिस ही उपद्रव फैलाने लगे तो उसका ज़िम्मेदार कौन होगा? इस मामले को लेकर हम पुलिस के उच्च अधिकारियों से मिलेंगे। कोई भी आदमी क़ानून अपने हाथ में लेता है तो उस पर कार्रवाई हो, ولكن अगर पुलिस ऐसे हालात बना दे तो? जो ग़लत है, उन पर कार्रवाई हो। क़ानून को हाथ में लेने वालों के साथ कांग्रेस नहीं है। पुलिस को हठधर्मिता नहीं करने देंगे, न्यायपूर्ण कार्रवाई की बात करेंगे। चौमूं में मसला यह है कि बीजेपी विधायक प्रत्याशी और SHO के बीच जंग छिड़ी हुई है, इसलिए आम जनता पिस रही है। SHO, बीजेपी विधायक प्रत्याशी रामलाल शर्मा पर भारी पड़ रहे हैं। चौमूं की जनता SHO को ज़्यादा साफ़ा पहना रही है, रामलाल शर्मा को कम।
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