-देवरिया जिले में अब्दुल शाह गनी बाबा मजार के ध्वस्तीकरण मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है जहा सदर तहसील के लेखपाल विनय कुमार सिंह ने 1993 के दस्तावेजों में कूटरचना के आरोप में तत्कालीन कानूनगो और लेखपाल समेत मजार कमेटी के कई सदस्यों पर सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। FIR के मुताबिक, तत्कालीन कानूनगो राधेश्याम उपाध्याय और तत्कालीन लेखपाल रामानुज सिंह पर बंजर व सरकारी भूमि को फर्जी तरीके से मजार के नाम दर्ज कराने का आरोप है मामले में मजार कमेटी के तत्कालीन सदर शहाबुद्दीन सजक, नायब सदर इरशाद अहमद,नाजिम मुबारक अली और नायब नजीर अख्तर वारसी के नाम भी शामिल हैं चौंकाने वाली बात यह है कि नाजिम मुबारक अली और नायब नजीर अख्तर वारसी का कई साल पहले निधन हो चुका है वही इस मजार से 03 दशकों से जिसका परिवार जुड़ा था उन्होंने एक अहम खुलासा किया है इस परिवार के रहने वाले अली अहमद का कहना है कि पहले मजार मात्र दो गज की कब्र थी,जहां इबादत होती थी, लेकिन बाद में सरकारी अधिकारियों के मिलीभगत कर आसपास की सरकारी जमीन मजार के नाम दर्ज करा ली गई उनके अनुसार,मजार के आसपास पुल, रेलवे, PWD और सरकारी बंजर भूमि थी हमारे परिजन यहां लगभग 03 दशकों से पूजा पाठ किया करते थे लेकिन कुछ दबंग किस्म के लोगों ने हम लोगों को मारपीट कर हटा दिया और उसपर कब्जा जमा लिया पहले इस मजार का नाम सैयद बाबा था लेकिन इन दबंगों ने हजरत सैयद गनी बाबा का नाम रख दिया वही CO सिटी संजय रेड्डी ने बताया कि मजार की भूमि कोर्ट से बंजर भूमि घोषित की गई है उसमें ध्वस्तीकरण कराया गया है लेखपाल के तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है आगे की कार्यवाही चल रही है बाइट: संजय कुमार रेड्डी, CO सिटी बाइट:--अली अहमद, जिसका दावा है कि 03 दशकों पूर्व से हमारे पूर्वज इस मजार पर खादिम है थे