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बरसाना के विश्व प्रसिद्ध लाडली जी मंदिर मैं किया जा लड्डू मार होली का आयोजन.
Mathura, Uttar Pradesh
मथुरा - बरसाना के विश्व प्रसिद्ध लाडली जी मंदिर मैं किया जा लड्डू मार होली का आयोजन. देश के कोने कोने से लाखों की संख्या मे श्रद्धालु पहुंचे बरसाना.
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के किए पुख्ता इंतजाम. कल बरसाने में होगा लट्ठमार होली का आयोजन ।
राधा कृष्ण के प्रेम में रंगने के लिए दूरदराज से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं और लड्डू मार होली के विहंगम दृश्य को देखने के लिए आते रहते हैं. दोपहर होते ही भक्तों का मेला श्रीजी मंदिर में जुड़ जाता है और हाथ ऊपर उठाए राधे राधे की रट लगाए कपाट खुलने का इंतजार करते हैं मन्दिर के कपाट खुलते ही मंदिर में लड्डू मार होली का उत्सव शुरू हो जाता है भक्त श्री जी के दर्शन कर उन्हें गुलाल और लड्डू अर्पित करते हैं नंदगांव से कृष्ण स्वरूप शाखा सज धज कर बरसाने फ़ाग मनाने आते हैं. गोस्वामी उन्हें बूंदी के लड्डडूयो से उनका स्वागत करते हैं. चारों तरफ से लड्डूओं की बरसात होने लगती है. और लड्डुओं को लूटने के लिए असंख्य लोगो के हाथों उपर खड़े हो जाते हैं और उस प्रसाद को पाने के लिए आतुर रहते हैं. समूचा मंदिर प्रांगण राधा कृष्ण के प्रेम में सराबोर हो जाता है. जिसके बाद राधा कृष्ण के भजनों का और होली के गीतों का मंदिर प्रांगण मैं स्वर सुनाई देने लगता है भक्त राधा कृष्ण के प्रेम में सरोवर होकर नाचने लगते हैं.
इस परंपरा का आयोजन द्वापर युग से ही होता चला आ रहा है.समूचा विश्व ब्रज की होलीयो को भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के प्रेम की अनूठी मिसाल मानता है.
आज सुबह पहले बरसाना की राधा न्योता लेकर नंद भवन पहुचती है. जहाँ उस सखी रुपी राधा जोरदार स्वागत किया जाता है . जिसके बाद वह नंद गांव से शाम के समय पन्डा रूपी सखा को राधा रानी के निज महल में भेजते हैं. जो होली के निमत्रण को स्वीकार कर का बताने आते है. जहां पर के गोस्वामी समाज लड्डुओं से उसका स्वागत करते हैं . इसी को लड्डू होली कहा जाता है.
ये परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है. कहा जाता है कि द्वापर में बरसाने से होली खेलने का आमंत्रण लेकर सखी नंदगांव गई थीं. होली के इस न्योते को नंदबाबा ने स्वीकार किया था. उन्होंने अपने पुरोहित के माध्यम से बरसाना में बृषभान जी को इसकी सूचना दी थी. इस पर बाबा बृषभान ने नन्दगांव से आये पुरोहित को खाने के लिए लड्डू दिए. बस, फिर क्या था? बरसाने की गोपियों ने पांडे के गालों पर गुलाल लगा दिया. पांडे के पास गुलाल नहीं था तो वह खाने के लिए दिए गए लड्डुओं को ही गोपियों के ऊपर फेंकने लगा. तभी से यहां हर साल लड्डू होली खेली जाने लगी.
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