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VIJAY CHAURASIYAVIJAY CHAURASIYAFollow28 Apr 2025, 11:26 am

Maharajganj - केन्द्रीय मंत्री ने एक राष्ट्र, एक चुनाव पर अधिवक्ताओं संग किया संवाद

Achal Garh, Uttar Pradesh:

केन्द्रीय मंत्री ने एक राष्ट्र, एक चुनाव पर अधिवक्ताओं संग किया संवाद महाराजगंज, 28 अप्रैल। सोमवार को भारत सरकार के केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जिला बार एसोसिएशन, दीवानी न्यायालय में अधिवक्ताओं के साथ 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विषय पर संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का विचार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने का प्रस्ताव रखता है। इसके तहत मतदाता एक ही दिन अपने निर्वाचन क्षेत्रों में केंद्र और राज्य सरकारों के लिए मतदान कर सकेंगे, हालांकि पूरे देश में मतदान कई चरणों में हो सकता है।

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बेगूं के राघव सोनी का पार्थिव शव कनाडा से पहुंचा, शोक लेकिन श्रद्धांजलि

Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं निवासी प्रकाश सोनी के पुत्र और कंप्यूटर इंजीनियर राघव सोनी की पार्थिव देह 14 दिन बाद कनाडा से उनके गृह नगर पहुंची। राघव की 11 अप्रैल को बोटिंग के दौरान डूबने से मृत्यु हो गई थी। पार्थिव देह को भारत लाने में चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी और विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ सहित जनप्रतिनिधियों के प्रयास अहम रहे। जैसे ही पार्थिव देह बेगूं पहुंची, पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम विदाई के दौरान बहनों ने राघव की कलाई पर राखी बांधकर भावुक श्रद्धांजलि दी। बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी。
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जमुई: एंबुलेंस में ईंधन नहीं, मरीज की मौत; चालक निलंबित, कार्रवाई की मांग

Jamui, Bihar:जमुई जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है,जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर एंबुलेंस में ईंधन नहीं होने के कारण एक मरीज की तड़प-तड़प कर मौत हो जाती है। मृतक धीरज रविदास के पुत्र अजीत कुमार रविदास ने सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह को दिए आवेदन में साफ तौर पर एंबुलेंस कर्मियों की घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि एंबुलेंस में तेल नहीं था, तो मरीज को जमुई से रेफर ही क्यों किया गया? क्या मरीज की जान की कोई कीमत नहीं थी?परिजनों के मुताबिक,जमुई से सिकंदरा के बीच कई पेट्रोल पंप मौजूद हैं, लेकिन चालक ने कहीं भी गाड़ी में ईंधन नहीं भरवाया। करीब 25 किलोमीटर चलने के बाद एंबुलेंस बीच रास्ते में बंद हो गई। चिलचिलाती धूप में मरीज एंबुलेंस के अंदर तड़पता रहा और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की असंवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एंबुलेंस जैसी जीवन रक्षक सेवा बिना बुनियादी तैयारी के चलाई जा रही है? क्या मरीजों की जान भगवान भरोसे छोड़ दी गई है? मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. Ashok कुमार सिंह ने जांच का भरोसा दिया है और चालक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि एंबुलेंस का संचालन पटना स्तर से होता है और इसकी सूचना संबंधित विभाग को दे दी गई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ निलंबन इस मौत का जवाब है? इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक एंबुलेंस चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होना और गिरफ्तारी नहीं होना प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है। क्या किसी की जान जाने के बाद भी सिस्टम इसी तरह सुस्त रहेगा? इस मामले ने सामाजिक और प्रशासनिक दोनों ही स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है। मृतक दलित समाज से थे, ऐसे में यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है। परिजनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सदर अस्पताल में आंदोलन करेंगे। अब नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं—क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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