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Eshan KhanEshan KhanFollow5 Sept 2024, 05:35 am
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कोटा में सिंधी-जाट टिकट बंटवारे पर बढ़ी नाराज़गी, नाम वापसी अंतिम दिन

Kota, Rajasthan:आज नाम वापसी का अंतिम दिन है और इसी के साथ बीजेपी और कांग्रेस दोनों की धड़कनें बढ़ गई हैं। वजह है वार्डों में 100 टिकट के बंटवारे को लेकर सिंधी और जाट समाज की नाराजगी। बीजेपी से सिंधी समाज तो कांग्रेस से जाट समाज नाराज है और दोनों ही समाजों का विरोध अब खुलकर सामने आ चुका है। कोटा पूज्य सिंधी जनरल पंचायत के अध्यक्ष ओम आडवाणी के अनुसार बीजेपी ने सिंधी समाज को सिर्फ एक टिकट दिया है। जिससे समाज में नाराजगी बनी हुई है। इस मुद्दे को लेकर 6 सितंबर को सिंधी समाज की बैठक भी रखी गई है, जिसमें समाज आगे की रणनीति पर निर्णय करेगा। वहीं राजस्थान जाट महासभा कोटा के जिलाध्यक्ष दीपक चौधरी के अनुसार कांग्रेस ने 100 वार्ड में जाट समाज को एक भी टिकट नहीं दिया है। जाट समाज इसका खुलेआम विरोध कर रहा है और उनका कहना है कि चुनाव में भी इस विरोध को जारी रखा जाएगा। टिकट वितरण के बाद से लेकर स्क्रूटनी के बीच दोनों समाजों की नाराजगी लगातार सामने आई है। अब यह विरोध सोशल मीडिया पर भी खुलेआम दिखाई दे रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे माध्यमों के जरिए समाज के लोग अपनी नाराजगी दर्ज करवा रहे हैं। आज नाम वापसी का अंतिम दिन है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस के सामने डैमेज कंट्रोल की बड़ी चुनौती है। अब पार्टियां किसी दूसरे नेता को अपना सिंबल देकर मैदान में नहीं उतार सकतीं। ऐसे में नाराजगी का कोई न कोई रास्ता निकालना होगा। क्योंकि अगर यह विरोध चुनाव तक जारी रहा तो इसका सीधा असर दोनों दलों के प्रत्याशियों पर पड़ सकता है। अब देखना होगा कि बीजेपी सिंधी समाज और कांग्रेस जाट समाज की नाराजगी को किस तरह संभालती हैं。
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पुनपुन नदी के उफान से मसौढ़ी में खेतों तक पानी पहुंचा; प्रशासन अलर्ट

Masaurhi, Bihar:पुनपुन नदी में उफान। खतरे के निशान 50.60 मीटर से बढ़कर 52.81 मीटर तक पहुंची। निचले इलाकों के खेतों में नदी का पानी प्रवेश कर गया। मसौढ़ी प्रखंड से गुजरने वाली पुनपुन नदी तीन दिनो से जबरदस्त उफान पर है। गुरुवार की सुबह यह खतरे के निशान 50.60 से बढ़कर 52.81 मीटर तक पहुंच गया। नदी के तटबंधों में बढ़ते दबाव और ओवरफ्लो के कारण यह कुछ जगहों पर निचले इलाकों के खेतों में पानी प्रवेश कर गया। फिलहाल स्थिति पर जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। मसौढ़ी एसडीएम सहित अन्य पदाधिकारियों ने पुनपुन नदी के किनारे बसे अधिकांश क्षेत्रों का निरीक्षण किया। बता दे कि पुनपुन नदी में दो दिन से दो सेंटीमीटर की वृद्धि रिकॉर्ड की जा रही थी। बुधवार की सुबह से कुछ घंटों तक यह स्थिर रही लेकिन फिर बाद में जलस्तर में हर घंटे एक सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी देखी गई। गुरुवार की सुबह नदी में फिर से दो सेंटीमीटर की वृद्धि रिकॉर्ड की गई। जलस्तर बढ़ने से नदी तटबंधों को पार करता हुआ फहीमचक, बड़हिया कोल, लोदीपुर सहित अन्य जगहों पर निचले इलाकों के खेतों में प्रवेश कर गया। ऐसी जगहों पर स्थानीय लोग प्रशासन की मदद से रेत के बोरे रखकर बहाव को रोकने का प्रयास में जुटे हैं。
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आठ घंटे की वार्ता में निकला हल, भाकियू का लखनऊ पैदल मार्च रद्द

Ajay GargAjay GargFollow22m ago
Kriyawali, Uttar Pradesh:बुगरासी। भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) का लेखपाल राघवेंद्र के खिलाफ कार्रवाई सहित विभिन्न मांगों को लेकर लखनऊ पैदल कूच का हल आठ घंटे की वार्ता के बाद निकला। वार्ता के लिए पहुंचे एसडीएम ने मांगों को पूरी करने तथा आवश्यक जांच करने के आश्वासन के बाद पैदल मार्च रद्द किया गया। पिछले डेढ़ माह में भाकियू का यह तीसरा धरना था। तकरीबन एक महीने पहले लेखपाल राघवेंद्र तथा महिला राजेश देवी के साथ कहासुनी को लेकर एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो वायरल होने के बाद लेखपाल ने महिला राजेश देवी पर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कर दी थी। इसे लेकर तहसील परिसर में भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट) ने धरना प्रदर्शन किया था।। भाकियू का आरोप था कि लेखपाल राघवेंद्र ने महिला के साथ बदसलूकी की है। महिला से गलती मानने के स्थान पर महिला के ही खिलाफ सरकारी काम मे बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कर दिया है। भाकियू लेखपाल को तत्काल निलंबित करते हुए महिला के खिलाफ हुए मुकदमे को वापस लेने की जिद पर अड़ गई थी। उस दौरान तहसील प्रशासन ने मामले की जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दे धरने को समाप्त करा दिया था। 17 अगस्त तक भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील चौहान ने लखनऊ पैदल कुछ का एलान किया था। 18 अगस्त को बुगरासी भाकियू कार्यालय पर पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं को सांकेतिक अरेस्ट कर किया था। इससे नाराज भाकियू ने चौकी के सामने धरना दे डाला जिसके बाद लेखपाल राघवेंद्र को तत्काल प्रभाव से कलेक्ट्रेट अटैच कर दिया गया। इस पर मामला शांत हुआ। अब बुधवार को भाकियू ने फिर से पैदल लखनऊ कुछ करने का एलान किया तो पुलिस-प्रशासन तत्काल सक्रिय हो गया। बुगरासी भाकियू कार्यालय पर सुबह लगभग 10 बजे से ही वार्ता शुरू हो गई। वार्ता के लिए पुलिस आला अधिकारी से लेकर एसडीएम व बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स पहुंच गया। आठ घंटे चली वार्ता में एसडीएम लालजी विश्वकर्मा द्वारा लेखपाल राघवेंद्र के तहसील स्याना क्षेत्र के किसी भी गांव में हस्तक्षेप नहीं करने व महिला राजेश देवी के खिलाफ मुकदमे को वापस लेने का आश्वासन के बाद मामला शांत हो सका। इस दौरान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ग्याज अहमद खान, प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील चौहान, प्रदेश महामंत्री नोमान खान आदि सहित अनेक भाकियू कार्यकर्ता रहे।
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अकोला दरोड़ा मामला: वर्ष से काम कर रहे परिचित ने साजिश रची, तीनों गिरफ्तार

Akola, Maharashtra:दोन दिवसांपूर्वी अकोला शहरातील रायली जिन परिसरात दोन दिवसांपूर्वी भरदिवसा दरोडा पडल्याने शहरात एकच खळबळ उडाली होती. ऑईल मिल व्यावसायिकाच्या ऑफिस आणि घराला आरोपींनी लक्ष्य केले होते. व्यापाऱ्याला ओलिस ठेवून आरोपींनी सर्वप्रथम ऑफिसमधील रोकड लंपास केली. त्यानंतर आरोपींनी व्यापाऱ्याच्या घरात प्रवेश करत त्यांच्या पत्नीला धाक दाखवला आणि रोख रक्कम तसेच सोन्या-चांदीचे दागिने असा सुमारे 34 लाख रुपयांचा मुद्देमाल घेऊन पोबारा केला होता. भरदिवसा घडलेल्या या धाडसी दरोड्याने पोलिसांसमोर मोठे आव्हान निर्माण केले होते. मात्र अकोला स्थानिक गुन्हे शाखेने तपासाचे चक्र वेगाने फिरवत तांत्रिक माहितीच्या आधारे संशयितांचा शोध सुरू केला. तपासादरम्यान गेल्या चार वर्षांपासून व्यापाऱ्याकडे काम करणाऱ्या एका व्यक्तीवर पोलिसांचा संशय बळावला. या व्यक्तीची कसून चौकशी करण्यात आली असता त्याने आपल्या दोन साथीदारांच्या मदतीने दरोड्याचा कट रचून ही लूट केल्याची कबुली दिल्याची माहिती समोर आली आहे.दरम्यान, या प्रकरणातील दोन आरोपी दरोडा टाकल्यानंतर हैदराबादला फरार झाले होते. मात्र पोलिसांनी तंत्रज्ञानाचा वापर करत त्यांचा माग काढला आणि हैदराबादमधील एका लॉजमध्ये लपून बसलेल्या दोन्ही आरोपींना ताब्यात घेतले.पोलिसांनी तिन्ही आरोपींना अटक करत त्यांच्याकडून दरोड्यातील सुमारे 34 लाख रुपयांचा मुद्देमाल जप्त केला आहे. विशेष म्हणजे ज्याच्यावर व्यापाऱ्याने विश्वास ठेवला, गेल्या चार वर्षांपासून ज्याला आपल्या कामावर ठेवले, त्याच परिचित व्यक्तीने साथीदारांच्या मदतीने हा दरोडा टाकल्याचे तपासात उघड झाल्याने या प्रकरणाने सर्वांनाच धक्का बसला आहे.
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उत्तर प्रदेश में विशेष टीईटी: 56,818 शिक्षक अब पात्र होंगे

Lucknow, Uttar Pradesh:लखनऊ उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों तथा विशेष शिक्षकों के लिए जल्द विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित की जाएगी। परीक्षा 150 अंकों की होगी और इसमें ऋणात्मक मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। करीब 56 हजार शिक्षक इस परीक्षा में शामिल होंग। ढाई घंटे में 150 सवाल विशेष टीईटी में 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा और परीक्षा की अवधि ढाई घंटे रहेगी। पास होने के लिए इतने अंक जरूरी सामान्य वर्ग: 90 अंक यानी 60 प्रतिशत एससी/एसटी, ओबीसी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित, भूतपूर्व सैनिक और दिव्यांग: 82 अंक यानी 55 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस सामान्य वर्ग: 82 अंक पर पास प्रमाणपत्र विशेष टीईटी में कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले कार्यरत शिक्षक और विशेष शिक्षक शामिल होंगे। शासन ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को जल्द विज्ञापन जारी कर परीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं। 56,818 शिक्षकों पर लागू होगी परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में करीब 1,42,818 कार्यरत शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता से प्रभावित हुए थे। हाल ही में आयोजित टीईटी में करीब 86 हजार कार्यरत शिक्षक पास हो चुके हैं। इसके बाद लगभग 56,818 शिक्षक ऐसे बचे हैं, जिन्हें विशेष टीईटी पास करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 1 सितंबर के आदेश में सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना अनिवार्य किया था। इसके बाद शिक्षकों की ओर से विशेष परीक्षा कराने की मांग की जा रही थी। शासन ने अब विशेष टीईटी की कार्ययोजना को मंजूरी दे दी है। प्राथमिक स्तर में ये विषय कक्षा 1 से 5 के लिए: बाल विकास एवं शिक्षण विधि हिंदी अंग्रेजी/उर्दू/संस्कृत में से भाषा द्वितीय गणित पर्यावरणीय अध्ययन सभी विषयों से 30-30 प्रश्न पूछे जाएंगे। उच्च प्राथमिक स्तर कक्षा 6 से 8 के लिए बाल विकास एवं शिक्षण विधि, हिंदी, दूसरी भाषा के साथ संबंधित विषय से प्रश्न होंगे। गणित-विज्ञान शिक्षक के लिए गणित एवं विज्ञान और सामाजिक अध्ययन/सामाजिक विज्ञान शिक्षक के लिए संबंधित विषय रहेगा। डेढ़ दशक बाद केवल कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी टीईटी का पहला आयोजन 13 नवंबर 2011 को हुआ था। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद करीब डेढ़ दशक बाद ऐसी विशेष टीईटी होने जा रही है, जिसमें मुख्य रूप से कार्यरत शिक्षक शामिल होंगे।
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