Gorakhpur: पोहिला में चल रही श्री विष्णु पुराण महाकथा
पोहिला में चल रही सप्त दिवसीय श्री विष्णु पुराण महाकथा के पांचवे दिन कथा में बताया गया कि जीवन को केवल एक सफर के रूप में देखना चाहिए क्योंकि अंत केवल शरीर का होता है, आत्मा का नहीं। कथा में यह भी कहा गया कि आत्मा मूल है और इसका सफर अनेक शरीरों के माध्यम से होता है। हर नए शरीर के पीछे कोई उद्देश्य होता है। आत्मा का असली लक्ष्य भटकना नहीं बल्कि मोक्ष प्राप्त करना है।
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