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बेगूसराय में प्रेम-विवाह के बाद दहेज के लिए युवती की हत्या, परिवार ने साजिश का आरोप लगाया

Begusarai, Bihar:एंकर बेगूसराय से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां प्रेम विवाह करने वाली एक युवती की दहेज के लिए कथित तौर पर हत्या कर दी गई। आरोप है कि ससुराल वालों ने पहले गला दबाकर उसकी हत्या की और फिर उसे आत्महत्या का रूप देने के लिए फंदे से लटका दिया। इस घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। मामला बेगूसराय के गढ़हारा थाना क्षेत्र का है, जहां शबनम कुमारी नाम की विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका के परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है। परिजनों के अनुसार, करीब दो साल पहले शबनम की मुलाकात गांव में कंप्यूटर क्लास के दौरान आयुष कुमार से हुई थी। दोनों के बीच दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया। इसके बाद दोनों ने घर से भागकर प्रेम विवाह कर लिया। शुरूआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन कुछ समय बाद पति और उसके परिजनों ने दहेज में 10 लाख रुपये की मांग शुरू कर दी। लड़की के पिता मिथिलेश पासवान का कहना है कि वे मजदूर हैं और इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ थे। आरोप है कि दहेज नहीं मिलने पर शबनम के साथ लगातार मारपीट और प्रताड़ना की जाती थी। परिजनों के अनुसार, इसी वजह से ससुराल वालों ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी और फिर शव को फंदे से लटका कर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। घटना की जानकारी मिलते ही मायके वाले मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। सूचना पर गढ़हारा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया। फिलहाल पुलिस इस मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच में जुट गई है। परिजनों के आरोपों के आधार पर पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। इस घटना के संबंध में मुख्यालय डीएसपी निखिल कुमार ने बताया है कि गढ़हारा थाना क्षेत्र में एक महिला ने गले में फंदा लगाकर लड़की हुई की सूचना मिली। इसी सूचना पर गढ़हारा थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर और एफएसएल टीम को बुलाकर जांच पड़ताल किया गया और जांच पड़ताल करने के बाद कुछ साक्ष्य उसे जगह से खट्टा किया गया। उन्होंने बताया है कि कुछ साल पहले ही दोनों अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था। दोनों में अक्सर बराबर झगड़ा होता था। फिलहाल पुलिस आरोपी पति को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या खुलासा होता है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।
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दमोह कृषि उपज मंडी के सामने किसानों ने लगाया जाम; खरीद बंद पर उग्र प्रदर्शन

Damoh, Madhya Pradesh:दमोह में किसानों ने काटा बबाल.. कृषि मंडी के सामने लगाया जाम.. दमोह सागर स्टेट हाइवे पर जाम किया। दरअसल जिला मुख्यालय पर कृषि उपज मंडी में अपनी फसल बेचने के लिए सैकड़ों किसान हजारों क्विंटल अनाज लेकर पहुंचे। देर रात से यहां किसानों का आना शुरू हो जाता है लेकिन तीन तीन दिन तक उनकी फसल नहीं खरीदी जा रही और इस बात को लेकर किसान परेशान है। मौसम लगातार खराब हो रहा है और बारिश की वजह से किसानों को अनाज भीगने का डर भी सता रहा है। आज सुबह से खरीदी शुरू हुई लेकिन अचानक व्यापारियों ने खरीदी बंद कर दी, व्यापारी मंडी में फैली अव्यवस्थाओं से नाराज थे और उन्होंने खरीदी बंद की तो किसान गुस्से में आ गए उन्होंने पहले तो मंडी परिसर में बबाल काटा और फिर परिसर के बाहर स्टेट हाइवे को जाम कर दिया। जाम की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मोर्चा संभाला और प्रशासन की समझाइश के बाद करीब घंटे भर बाद जाम को हटाया गया। एक बार फिर मंडी में खरीदी शुरू हुई है।
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लखनऊ विभूतिखंड में हाई-प्रोफाइल ड्राइवर ने कार से दो युवकों को कुचला, हालत गंभीर

Noida, Uttar Pradesh:लखनऊ विभूतिखंड में हिट एंड रन का बड़ा मामला रईसजादे ने 2 लोगों को कार से कुचला दिन में 10.30 बजे संस्कार अग्रवाल ने 2 लोगों को कुचला सड़क किनारे खड़े अभिनव शुक्ला,प्रतीक शर्मा को कुचला दोनों युवकों की हालत गंभीर, ICU में भर्ती हैं मौके से गाड़ी छोड़कर भाग गया संस्कार अग्रवाल विभूतिखंड पुलिस ने पूरे मामले में लीपापोती कर दी 2 लोग मौत के मुहाने पर, अज्ञात पर लिखा मुकदमा कार संस्कार पुत्र अशोक अग्रवाल लालकुआं के नाम है गाड़ी पर ओवर स्पीडिंग के 12 चालान पहले से कटे हैं कार से कुचलने वाले रईसजादे पर अबतक कार्रवाई नहीं
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पचपदरा रिफाइनरी लोकार्पण पर कांग्रेस विधायक का आरोप: बीजेपी देरी में लिप्त

Jaipur, Rajasthan:बाड़मेर पचपदरा रिफाइनरी लोकार्पण को लेकर कांग्रेस विधायक रफीक खान ने कहा नंबर लेने में लगे हुए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय रिफाइनरी की शुरुआत बाड़मेर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा की गई। बीजेपी सरकार जब-जब आई तब तक इस प्रोजेक्ट में देरी हुई। जो प्रोजेक्ट 20 से 25 हजार करोड़ रुपए में पूरा हो रहा था, उसकी लागत दो-तीन गुना हो गई। वा वाही लूटने में लगे हुए हैं। एक काम बीजेपी सरकार नहीं बता सकती कि जो उन्होंने किया हो। रिफाइनरी मनमोहन और अशोक गहलोत का सपना था, जो पूरा होने जा रहा है। यह मनमोहन सिंह सरकार का काम है। राजस्थान के इतिहास में कोई भी काम उठाकर देखोगे तो उसकी बुनियाद कांग्रेस सरकार की मिलेगी। बीजेपी ने कोई काम नहीं किया।
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रेवाड़ी में दिशा बैठक: लापरवाह अधिकारी पर कड़ा एक्शन, ओवरब्रिज देरी का ठेकेदार जवाबदेह

Rewari, Haryana:रेवाड़ी में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह एक्शन मोड में....दिशा की महत्वपूर्ण बैठक ने अनुपस्थिति रहने वाले दो अधिकारियों को शोकॉज नोटिस जारी...... सभी विभागों के अधिकारियों को दिए शख्त आदेश बोले; निर्धारित टाइमलाइन में हो काम,कोताही नहीं होगी बर्दाश्त..... दिल्ली- जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के बिलासपुर में हो रहे ओवरब्रिज निर्माण में देरी पर जयपुर के ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया, कहा इसपर कुछ सोचना ही पड़ेगा.... संसद में अचानक घुसी कार के सवाल पर कहा; कहा लोगों की बढ़ गई हैं महत्वकांक्षाएं ऒर उनमें सब्र की जगह बढ़ रहा है बेवजह गुस्सा..... ओलावर्ष्टि से खराब हुई फसलों की गिरदावरी के जल्द होंगे निर्देश.... बनने से पहले सड़कों के टूट जाने के सवाल पर कहा; उत्तम क्वालिटी की निर्माण सामग्री ऒर आधुनिक टैक्नीक की कमी हो सकती है इसका बड़ा कारण.....anker - हरियाणा के रेवाड़ी में दिशा की बैठक लेने पँहुचे केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंदरजीत सिंह ने लापरवाह ऒर गैर जिम्मेदार अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख इख्तियार करते हुए कहा कि दिशा की इस महत्वपूर्ण बैठक में दो अधिकारी अनुपस्थिति रहे जिन्हें शोकॉज नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है, इतना ही नहीं उन्होंने हर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को सचेत करते हुए उनकी हर जिम्मेदारी को समय से पूरा करने के लिए एक टाइमलाइन यानी समय सीमा तक निर्धारित करते हुए कहा दिया कि कोताही नहीं होगी बर्दाश्त।
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दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस मोतीबाग में गैस किल्लत, केंटीन-हॉस्टल में खाना घटा

Delhi, Delhi:दिल्ली विश्वविद्यालय के केंद्रीय कैंटीन और हॉस्टल में गैस की किल्लत से खाने में कमी हो गई है। साऊथ कैंपस मोतीबाग की केटीन का खाना गैस पर नहीं लकड़ड़ी और कोयले की भट्टी पर बन रहा है। साऊथ कैंपस प्रशासन ने कैमरे पर नहीं बोले, ऑफ़ कैमरा बोले हैं कि PNG गैस पाइप लाइन के लिए कई सालों से फाइल चल रही है। लोकेशन: साऊथ कैंपस मोतीबाग। क्लिपिंग: देश में कहीं जगह गैस किल्लत की खबर सामने आई है, लम्बी लाइन लग रही है गैस की किल्लत का असर दिल्ली यूनिवर्सिटी साऊथ कैंपस मोतीबाग की कैंटीन और हॉस्टल पर दिखाई दे रहा है। कैंटीन के मेनेजर ने कैमरे पर नहीं आये, ऑफ कैमरा बोले हैं गैस की किल्लत के चलते गैस मिल नहीं रही है, उसकी जगह लकड़ी और कोयले की भट्टी पर खाना पकाया जा रहा है, साथ ही खाने का मेन्यू घटाया गया है। साऊथ कैंपस प्रशासन ने कैमरे पर नहीं बोले, ऑफ कैमरा बोले हैं कि PNG गैस पाइप लाइन के लिए कई सालों से फाइल चल रही है। छात्रों के अनुसार खाने का समय नहीं मिल रहा है, मेन्यू कटौती की गई है क्योंकि गैस की किल्लत आ रही है। खाना लकड़ी और कोयले की भट्टी पर बन रहा है।
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ईरान-सीज़फ़ायर के बाद कश्मीर के शिया इलाकों में जोरदार जश्न

Chaka, सीज़फ़ायर को ईरान की जीत मानते हुए, कश्मीर और कारगिल में शिया समुदाय ने कई जगहों पर ज़ोरदार जश्न मनाया। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर की घोषणा के बाद, कश्मीर और कारगिल के कई इलाकों—खासकर शिया-बहुल क्षेत्रों—में जश्न का माहौल छा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकार द्वारा की गई इस घोषणा का जश्न मनाने के लिए श्रीनगर में लोगों के बड़े-बड़े समूह सड़कों पर उतर आए। लोगों ने पटाखे फोड़े और इमाम हुसैन (AS) का झंडा तथा ईरान का झंडा फहराया; इन झंडों पर इमाम अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और Hassan Nasrallah सहित ईरान के सभी नेताओं की तस्वीरें बनी हुई थीं। शिया-बहुल इलाकों—जैसे सैदा कदल, असाही बाग और आलमगिरी बाज़ार—में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के समूह बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए; उन्होंने ईरान के झंडे लहराए और ईरान के साथ एकजुटता दिखाते हुए नारे लगाए। लोगों ने मिठाइयाँ बाँटकर और पड़ोसियों के साथ यह ख़बर साझा करके जश्न मनाया। हादी अब्बास, एक स्थानीय निवासी। “हम आज जश्न मना रहे हैं, खासकर डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी को देखते हुए। ट्रंप ने माँग की थी कि ईरान या तो आत्मसमर्पण कर दे या कोई समझौता कर ले, और ऐसा न करने पर तबाही मचाने की धमकी दी थी। लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह (ईश्वर का शुक्र है), इस दबाव के बावजूद ईरान के लोग डटे रहे। वे सड़कों पर उतरे—यहाँ तक कि उन जगहों पर भी इकट्ठा हुए जिन पर कथित तौर पर हमला होने का ख़तरा था—और यह ऐलान किया कि वे ज़ुल्म के आगे कभी अपना सिर नहीं झुकाएँगे।” उन्होंने आगे कहा, “हम शांति के लिए खुश हैं, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है, क्योंकि वह हमेशा भरोसा तोड़ता है।” इसी तरह के दृश्य मध्य कश्मीर के बडगाम में भी देखने को मिले, जहाँ के निवासियों ने सड़कों पर जश्न मनाया और इस संघर्ष विराम को ईरान की जीत माना। समझौते की खबर के बाद शिया बहुल इलाकों में उत्सव जैसा माहौल देखा गया। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के मागम और पट्टन इलाकों, और बांदीपोरा जिले के कुछ हिस्सों में भी जश्नाए गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई कस्बों और गाँवों में लोगों की भीड़ देखी जा सकती थी, जो संघर्ष विराम की घोषणा पर लोगों की व्यापक भावनात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाती थी। मुदासिर ने कहा, "आज हमारी जीत हुई है; इज़राइल को झुकना पड़ा, और इसीलिए अमेरिका को भी झुकना पड़ा।" अब्बास ने कहा, "हम ईरान की जीत के उपलक्ष्य में मिठाइयाँ बाँट रहे हैं; हम बहुत खुश हैं और हम पूरी दुनिया में शांति चाहते हैं।" लद्दाख में, प्रमुख कार्यकर्ताओं ने इस संघर्ष विराम को 'इस्लामिक प्रतिरोध मोर्चे' (Islamic Resistance Front) के लिए एक "बड़ी जीत" बताया। उन्होंने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिका के प्रयास विफल रहे हैं, और उन्होंने इस समझौते का जश्न मनाया। ये जश्न, कश्मीरी शिया समुदाय द्वारा ईरान को दिए गए गहन भावनात्मक और आर्थिक समर्थन के बाद मनाए जा रहे हैं। फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से, कश्मीर के लोगों—जिनमें ज़्यादातर शिया संप्रदाय के लोग शामिल थे—ने एक अभियान चलाया, जिसके तहत सोने के आभूषण, कारें, तांबे के बर्तन और करोड़ों रुपये की नकद राशि एकत्र की गई। "जीत" की यह भावना, घाटी की शिया आबादी और ईरान के बीच गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव में निहित है। कश्मीर का शिया समुदाय ईरान के साथ गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध बनाए रखता है। समुदाय के सदस्यों ने इस संघर्ष विराम को राहत और गर्व का क्षण बताया, और कई लोगों ने उम्मीद जताई कि यह इस क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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दक्षिण कश्मीर में बड़ा IED हमला टला: सेना ने 14 किग्रा विस्फोटक निष्क्रिय किया

Chaka, Major IED Attack Foiled in South Kashmir: 14 Kg Explosive Neutralized by Army In a swift operation, alert troops of 44 Rashtriya Rifles (RR) foiled a major terror plot by recovering and neutralizing a powerful 14.3 kg Improvised Explosive Device (IED) along the Zainapora- chattergam road in South Kashmir early Wednesday morning. The IED, packed with plastic explosives along with a primer, electric detonator, remote trigger, and batteries, was planted roadside in orchards near Zainapora. It was likely intended to target security forces vehicles in the South Kashmir, according to sources. During routine sanitization operations, the RR team spotted the suspicious object and called in bomb disposal squads, who safely neutralized the device, averting a potential tragedy. "A major incident by terrorists to disturb peace in the area was averted," an Army spokesperson said, highlighting the vigilance of the troops. The recovery reflects the ongoing threats from terrorists attempting to disrupt normalcy in the Valley ahead of summer tourism season. In response, RR, Jammu and Kashmir Police, and CRPF have intensified joint operations to track down those responsible for the foiled attempt. Searches continue in the orchards and surrounding villages. This incident follows a pattern of recent IED threats in North Kashmir, where security forces have repeatedly thwarted similar plots through proactive measures.
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दक्षिण कश्मीर में IED हमला नाकाम, सेना ने 14 किलोग्राम विस्फोटक निष्क्रिय किया

Chaka, दक्षिण कश्मीर में एक बड़ा IED हमला नाकाम: सेना ने 14 किलो विस्फोटक निष्क्रिय किया एक त्वरित कार्रवाई में, 44 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) के सतर्क जवानों ने बुधवार तड़के दक्षिण कश्मीर में ज़ैनापोरा-चटरगाम सड़क के किनारे 14.3 किलोग्राम का एक शक्तिशाली इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद कर उसे निष्क्रिय कर दिया, जिससे आतंकवादियों की एक बड़ी साज़िश नाकाम हो गईׅ इस IED में प्लास्टिक विस्फोटक के साथ-साथ एक प्राइमर, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, रिमोट ट्रिगर और बैटरियां भी लगी थीं। इसे ज़ैनापोरा के पास फलों के बागों में सड़क के किनारे लगाया गया था। सूत्रों के अनुसार, इसका मकसद संभवतः दक्षिण कश्मीर में सुरक्षा बलों के वाहनों को निशाना बनाना था। नियमित तलाशी अभियान के दौरान, RR की टीम को यह संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। उन्होंने तुरंत बम निरोधक दस्ते को बुलाया, जिसने सुरक्षित रूप से इस डिवाइस को निष्क्रिय कर दिया और एक संभावित बड़ी त्रासदी को टाल दिया सेना के एक प्रवक्ता ने जवानों की सतर्कता की सराहना करते हुए कहा, "आतंकवादियों द्वारा इलाके की शांति भंग करने की एक बड़ी साज़िश को नाकाम कर दिया गया है।" यह बरामदगी इस बात کا संकेत है कि आतंकवादी अभी भी घाटी में गर्मियों के पर्यटन मौसम से पहले सामान्य जनजीवन को बाधित करने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं इसके जवाब में, RR, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने इस नाकाम हमले के पीछे के दोषियों का पता लगाने के लिए संयुक्त अभियान तेज़ कर दिए हैं। फलों के बागों और आस-पास के गांवों में तलाशी अभियान जारी है यह घटना उत्तरी कश्मीर में हाल ही में सामने आए IED हमलों की धमकियों के ही एक सिलसिले का हिस्सा है, जहां सुरक्षा बलों ने पहले भी सक्रिय उपायों के ज़रिए आतंकवादियों की ऐसी ही कई साज़िशों को बार-बार नाकाम किया है
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ईरान की जीत से कश्मीर-कारगिल के शिया उत्साह: सीज़फ़ायर के बाद जश्न

Chaka, सीज़फ़ायर को ईरान की जीत मानते हुए, कश्मीर और कारगिल में शिया समुदाय ने कई जगहों पर ज़ोरदार जश्न मनाया। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते के सीज़फ़ायर की घोषणा के बाद, कश्मीर और कारगिल के कई इलाकों—खासकर शिया-बहुल क्षेत्रों—में जश्न का माहौल छा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकार द्वारा की गई इस घोषणा का जश्न मनाने के लिए श्रीनगर में लोगों के बड़े-बड़े समूह सड़कों पर उतर आए। लोगों ने पटाखे फोड़े और इमाम हुसैन (AS) का झंडा तथा ईरान का झंडा फहराया; इन झंडों पर इमाम अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई और हसन नसरुल्लाह सहित ईरान के सभी नेताओं की तस्वीरें बनी हुई थीं। शिया-बहुल इलाकों—जैसे सैदा कदल, असाही बाग और आलमगिरी बाज़ार—में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के समूह बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए; उन्होंने ईरान के झंडे लहराए और ईरान के साथ एकजुटता दिखाते हुए नारे लगाए। लोगों ने मिठाइयाँ बाँटकर और पड़ोसियों के साथ यह ख़बर साझा करके जश्न मनाया। बाइट हादी अब्बास, एक स्थानीय निवासी。 “हम आज जश्न मना रहे हैं, खासकर डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी को देखते हुए। ट्रंप ने माँग की थी कि ईरान या तो आत्मसमर्पण कर दे या कोई समझौता कर ले, और ऐसा न करने पर तबाही मचाने की धमकी दी थी। लेकिन अल्हम्दुलिल्लाह (ईश्वर का शुक्र है), इस दबाव के बावजूद ईरान के लोग डटे रहे। वे सड़कों पर उतरे—यहाँ तक कि उन जगहों पर भी इकट्ठा हुए जिन पर कथित तौर पर हमला होने का ख़तरा था—और यह ऐलान किया कि वे ज़ुल्म के आगे कभी अपना सिर नहीं झुकाएँगे।” उन्होंने आगे कहा, “हम शांति के लिए खुश हैं, लेकिन हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं है, क्योंकि वह हमेशा भरोसा तोड़ता है।” इसी तरह के दृश्य मध्य कश्मीर के बडगाम में भी देखने को मिले, जहाँ के निवासियों ने सड़कों पर जश्न मनाया और इस संघर्ष विराम को ईरान की जीत माना। समझौते की खबर के बाद शिया बहुल इलाकों में उत्सव जैसा माहौल देखा गया। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के मागम और पट्टन इलाकों, और बांदीपोरा जिले के कुछ हिस्सों में भी जश्नाए गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई कस्बों और गांवों में लोगों की भीड़ देखी जा सकती थी, जो संघर्ष विराम की घोषणा पर लोगों की व्यापक भावनात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाती थी。 मुदासिर ने कहा, "आज हमारी जीत हुई है; इज़राइल को झुकना पड़ा, और इसीलिए अमेरिका को भी झुकना पड़ा।" अब्बास ने कहा, "हम ईरान की जीत के उपलक्ष्य में मिठाइयाँ बाँट रहे हैं; हम बहुत खुश हैं और हम पूरी दुनिया में शांति चाहते हैं।" लद्दाख में, प्रमुख कार्यकर्ताओं ने इस संघर्ष विराम को 'इस्लामिक प्रतिरोध मोर्चे' (Islamic Resistance Front) के लिए एक "बड़ी जीत" बताया। उन्होंने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिका के प्रयास विफल रहे हैं, और उन्होंने इस समझौते का जश्न मनाया। ये जश्न, कश्मीरी शिया समुदाय द्वारा ईरान को दिए गए हफ्तों के गहन भावनात्मक और आर्थिक समर्थन के बाद मनाए जा रहे हैं। फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से, कश्मीर के लोगों—जिनमें ज़्यादातर शिया संप्रदाय के लोग शामिल थे—ने एक अभियान चलाया, जिसके तहत सोने के आभूषण, कारें, तांबे के बर्तन और करोड़ों रुपये की नकद राशि एकत्र की गई। "जीत" की यह भावना, घाटी की शिया आबादी और ईरान के बीच गहरे धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव में निहित है। कश्मीर का शिया समुदाय ईरान के साथ गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध बनाए रखता है。 समुदाय के सदस्यों ने इस संघर्ष विराम को राहत और गर्व का क्षण बताया, और कई लोगों ने उम्मीद जताई कि यह इस क्षेत्र में स्थाई शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा。
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NH-44 पर भूस्खलन, जम्मू-श्रीनगर मार्ग बंद; कश्मीर में भारी बारिश-बर्फबारी जारी

Chaka, क Kashmir के मैदानी इलाकों में ज़ोरदार बारिश हुई, जबकि पहाड़ों पर ताज़ा बर्फ़बारी हुई। घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली सभी सड़कें यातायात के लिए बंद कर दी गई हैं। बुधवार को जम्मू-कश्मीर में मौसम की अस्थिर स्थिति बनी रही, जिससे कई जगहों पर बारिश और ऊंचे इलाकों में बर्फ़बारी हुई। इसके अलावा, एक बड़े भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) बंद हो गया, जिससे हज़ारों यात्री फंसे हुए। श्रीनगर के मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, घाटी के ज़्यादातर हिस्सों में आसमान आमतौर पर बादलों से घिरा रहा और रुक-रुककर हल्की से मध्यम बारिश होती रही, जबकि ऊंचे इलाकों में बर्फ़बारी हुई। कुछ जगहों पर बिजली कड़कने, ओले गिरने और 40-50 किमी/घंटा की रफ़्तार से तेज़ हवाएं चलने की भी ख़बरें मिलीं। बनिहाल के शलगड़ी इलाके में एक बड़ा भूस्खलन हुआ, जिसके कारण NH-44 को बंद करना पड़ा। यह एकमात्र ऐसी सड़क है जो हर मौसम में क Kashmir को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ती है। अधिकारियों ने पुष्टि की कि भूस्खारण के मलबे से सड़क बंद हो जाने के कारण हल्के और भारी, दोनों तरह के वाहन फंस गए हैं। सड़क से मलबा हटाने का काम जारी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश की वजह से इसमें रुकावट आ रही है। अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि जब तक सड़क पूरी तरह से ठीक न हो जाए, तब तक वे इस राजमार्ग पर यात्रा न करें। मौसम 10 अप्रैल तक अस्थिर रहने की उम्मीद है। इस दौरान कुछ जगहों पर, खासकर दोपहर और शाम के समय, हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। 11 से 12 अप्रैल के बीच मौसम में थोड़ा सुधार होने की संभावना है; आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहेगा और कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है। 13 और 14 अप्रैल के बीच मौसम सूखा रहने की उम्मीद है, जिसके बाद 15 और 16 अप्रैल को एक बार फिर आसमान में बादल छा सकते हैं और हल्की बारिश हो सकती है। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में ओले गिरने, तेज़ हवाएं चलने और भूस्खलन होने की आशंका को देखते हुए चेतावनी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे 9 अप्रैल से अपने खेती-बाड़ी के काम फिर से शुरू कर दें, क्योंकि इस क्षेत्र के कई हिस्सों में दिन का तापमान धीरे-धीरे 4-6°C तक बढ़ने की उम्मीद है। लद्दाख में मौसम आंशिक रूप से या पूरी तरह से बादलों से घिरा रहा, और दिन में बाद में जोज़िला-द्रास मार्ग पर बारिश या बर्फ़बारी होने की संभावना है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में बारिश या बर्फ़बारी के कारण हिमस्खलन हो सकता है, और ज़ोजिला दर्रा अस्थायी रूप से बंद होने का कम से मध्यम जोखिम बना हुआ है। यात्रियों और निवासियों से आग्रह किया गया है कि वे मौसम और यातायात संबंधी आधिकारिक सलाहों के माध्यम से जानकारी से अपडेट रहें, और जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए, तब तक संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचें।
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आतंक के खिलाफ ZERO-TOLERANCE: दो सरकारी कर्मचारी बर्खास्त, जम्मू में कड़ा संदेश

Chaka, आतंक के खिलाफ कार्रवाई जारी, LeT और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के दो सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकारी तंत्र में जमे आतंकी गुर्गों पर कार्रवाई जारी है, इसलिए वे कोई ढील नहीं देंगे लेफ्टिनेंट गवर्नर, मनोज सिन्हा ने अपनी “आतंक को ज़ीरो-टॉलरेंस” पॉलिसी के तहत दो सरकारी कर्मचारियों की सर्विस खत्म कर दी है। ये बर्खास्तगी भारत के संविधान के आर्टिकल 311(2)(c) के तहत की गई। यह सरकारी मशीनरी में घुसे आतंकवादियों को जड़ से खत्म करने की चल रही कोशिश का हिस्सा है। बुधवार का यह कदम सिन्हा के सरकारी तंत्र से चुपके से घुसपैठ कर चुके आतंकवादी तत्वों को खत्म करने के कड़े कदम को दिखाता है। लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने हाल ही में कहा था कि वह तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक सरकारी मशीनरी से आतंक के कैंसर का हर धागा नहीं उखाड़ दिया जाता। उन्होंने यह भी कसम खाई है कि सुरक्षा एजेंसियां ​​आतंकवाद के खतरे को पूरी तरह, पक्के तौर पर और हमेशा के लिए खत्म कर देंगी। आतंकवादियों में से एक, फरहत अली खांडे, रामबन में शिक्षा विभाग का क्लास-IV कर्मचारी था। हालांकि, फरहत आतंकवादी संगठन हिज्ब उल मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था और उसने रामबन और आस-पास के इलाकों में आतंकवाद को फिर से शुरू करने और एक बड़ा आतंकवादी नेटवर्क बनाने के लिए अपनी सरकारी हैसियत का इस्तेमाल कवर के तौर पर किया। सूत्रों ने बताया कि फरहत सबसे पहले सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की नज़र में आया था। 2011 में, जब मारे गए आतंकवादियों के परिवारों को पैसे बांटने वाले एक हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था। बाद में, नए इनपुट से पता चला कि जम्मू डिवीजन में हिज्ब-उल-मुजाहिदीन आतंकवादी नेटवर्क को फिर से शुरू करने और बनाए रखने के लिए टेरर फंड का इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया, “हमें अप्रैल 2011 तक नहीं पता था कि फरहत हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन के लिए काम कर रहा था। उसका नाम अप्रैल 2011 में हिज़्ब-उल-मुजाहिदीन के एक आतंकवादी से पूछताछ के दौरान सामने आया, जिसे J
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