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SamirkumarSamirkumarFollow28 Apr 2025, 02:06 pm

Gorakhpur - चौरीचौरा में रेनबो वाटर पार्क का भव्य शुभारंभ

Chauri Chaura, Uttar Pradesh:

चौरीचौरा में रेनबो वाॅटर पार्क का भव्य शुभारंभ. गर्मी से राहत और मनोरंजन का नया ठिकाना बना रेनबो वाॅटर पार्क. क्षेत्रवासियों के लिए खुशखबरी है. रेनबो वाॅटर पार्क का भव्य शुभारंभ हो गया है। गर्मी से बेहाल लोगों के लिए यह पार्क एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। पार्क के प्रबंधक राधा रमण उर्फ बेचू सिंह ने बताया कि, “गोरखपुर और आसपास के जिलों में इस स्तर का अत्याधुनिक वाॅटर पार्क अब तक नहीं था। तरकुलहा माता मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के नजदीक स्थित यह पार्क पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए भी एक नया आकर्षण बन गया है।

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गोगा नवमी पर मिट्टी प्रतिमाएं बनाने वाले कुम्हारों की परंपरा मजबूत

Didwana, Rajasthan:एंकर औरबतसर modernity के इस दौर में भी ग्रामीण अंचलों में सदियों पुरानी सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराएं पूरी शिद्दत से जीवित हैं। परबतसर उपखंड के राजस्व गांव सिडियास में लोक देवता वीर गोगाजी के पर्व 'गोगा नवमी' की तैयारियां जोरों पर हैं, जहां कुम्हार समाज के लोग पारंपरिक रूप से मिट्टी की प्रतिमाएं बनाने में जुटे हुए हैं। पुरखों की यह सोच धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सराहनीय मिसाल पेश करती है। लोक मान्यता के अनुसार गोगा नवमी के दिन मिट्टी से निर्मित गोगादेव की प्रतिमा को घर या पूजा स्थल पर स्थापित कर पूजन करने से सर्पदंश का भय दूर होता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु वीर गोगाजी की विधिवत पूजा-अर्चना कर उन्हें पारंपरिक पकवान खीर और गुलगुलों का भोग अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गांव के कुम्हार मोहल्ले में करीब आठ परिवारों के एक दर्जन से अधिक सदस्य पर्व से चार-पांच दिन पहले से ही इन प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में रात-दिन लगे हुए हैं। स्थानीय ग्रामीण किशोर के अनुसार, तैयार की गई प्रतिमाएं गोगा नवमी से एक-दो दिन पूर्व गांव के हर घर में पहुंचाई जाती हैं। खास बात यह है कि आज के आर्थिक और व्यावसायिक युग में भी यहां इन प्रतिमाओं की कोई तय कीमत नहीं ली जाती, बल्कि प्राचीन दस्तूर परंपरा के तहत ग्रामीण अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार शगुन की राशि, कपड़े और अनाज भेंट स्वरूप देते हैं। यह परंपरा गांव के सामाजिक ताने-बाने और परस्पर भाईचारे को मजबूती प्रदान कर रही है।
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आबूरोड नगरपालिका चुनाव: ब्राह्मण समाज ने टिकट वितरण के खिलाफ पुतले फूंके, नारे

Sirohi, Rajasthan:एंकर - सिरोही के आबूरोड नगरपालिका चुनाव में टिकट वितरण को लेकर ब्राह्मण समाज ने भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ विरोध जताया। ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित परशुराम धर्मशाला में बैठक के बाद समाजबंधुओं ने दोनों दलों के जिलाध्यक्षों के पुतले फूंके और जमकर नारेबाजी की। समाजबंधुओं ने टिकट वितरण में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों ने समाज को केवल वोट बैंक समझा है। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव में वोट की ताकत से जवाब देने का ऐलान किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष लीलाराम गरासिया ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने वार्ड 10 और 18 में समाज को टिकट दिए हैं। वहीं, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंडारी का पक्ष नहीं मिल सका।
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दिल्ली के होटल में युवती की हत्या; आरोपी अस्पताल में भर्ती

New Delhi, Delhi:दिल्ली के लाहौरी गेट इलाके में होटल के अंदर युवती की हत्या जानकारी के मुताबिक राजस्थान के रहने वाला एक युवक और बिहार की रहने वाली युवती ने बुधवार की शाम को होटल में चेक इन किया, बीती रात युवक के साथ घटना हो चुकी है और वह कमरे से बाहर निकल गया। स्टाफ ने उसे संभाला और जैसे ही कमरे में गए उन्हें लड़की खून से लथपथ नज़र आई। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। युवक फिलहाल अस्पताल में भर्ती है। पुलिस को आशंका है कि युवक ने युवती की चाकू मारकर हत्या की फिर कुछ जहरीला पदार्थ पीकर खुदकुशी की कोशिश की। मामले की जांच जारी। लड़की का नाम शिवानी है, बिहार की रहने वाली है। लड़के का नाम प्रकाश है。
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छत्तीसगढ़ HC: अलग रहने से वैवाहिक दायित्व नहीं टूटते, तलाक की अपील मंजूर

Bilaspur, Chhattisgarh:बिलासपुर। पति-पत्नी के रिश्ते और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई पति अपनी बुजुर्ग और बीमार मां को छोड़कर अलग घर में रहने से इनकार करता है, तो महज इस वजह से उसके इस फैसले को पत्नी के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के बाद भी माता-पिता के प्रति व्यक्ति के नैतिक और कानूनी दायित्व खत्म नहीं होते। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की बेंच ने पति की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया और वैवाहिक संबंध को भंग करने का आदेश दिया।मामला पति-पत्नी के बीच अलग घर में रहने को लेकर विवाद से जुड़ा था। पत्नी की ओर से अलग रहने की मांग की गई थी, जबकि पति अपनी काफी बुजुर्ग और बीमार मां को अकेला छोड़कर अलग रहने के लिए तैयार नहीं था।मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना कि स्वतंत्र घर में रहने की इच्छा अपने आप में गलत नहीं है। परिस्थितियों के अनुसार पति या पत्नी के पास अलग आवास की मांग करने के उचित कारण हो सकते हैं। लेकिन अदालत के सामने यह देखना भी जरूरी है कि कहीं यह मांग दूसरे जीवनसाथी को उसके माता-पिता से अलग करने के अनुचित दबाव में तो नहीं बदल रही है।कोर्ट ने इस मामले में पति की स्थिति को अस्वाभाविक या अनुचित नहीं माना। अदालत ने विशेष रूप से उसकी मां की अधिक उम्र और बीमारी को ध्यान में रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह होने मात्र से किसी व्यक्ति के अपने माता-पिता के प्रति पहले से चले आ रहे कर्तव्य समाप्त नहीं होते।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक जीवन में आने के बाद किसी एक जीवनसाथी को यह असीमित अधिकार नहीं मिल जाता कि वह दूसरे को उसके पारिवारिक दायित्व छोड़ने के लिए मजबूर करे।इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पति की तलाक की अपील मंजूर कर ली और निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें तलाक की याचिका खारिज की गई थी।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले ने वैवाहिक अधिकारों के साथ-साथ बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी को लेकर भी एक महत्वपूर्ण कानूनी संदेश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि शादी के बाद नया परिवार बनता है, लेकिन माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियां खत्म नहीं हो जातीं। खासकर जब माता-पिता बुजुर्ग, बीमार या असहाय हों, तो उनकी देखभाल को नजरअंदाज करना उचित नहीं माना जा सकता।
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गोंडा के तरबगंज में जंगली जानवर पकड़ने के लिए ड्रोन-पिंजरे, भेड़ें गायब

Gonda, Uttar Pradesh:खबर गोंडा से है। जहां गोंडा जिले के तरबगंज तहसील क्षेत्र अंतर्गत चिवरहा गांव में जंगली जानवर के हमले में छह भेड़ों की मौत और पांच भेड़ों के गायब होने के 5 दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक जंगली जानवरों का कोई पता नहीं चला है ना ही उसके पगचिन्ह से वन विभाग अभी तक पहचान कर पाया है। ऐसे में अब जंगली जानवर को पकड़ने के लिए गांव के किनारे 3 पिंजरा लगाया गया है इन पिंजरों की निगरानी के लिए वन विभाग द्वारा कैमरा भी लगाया गया है साथ ही साथ वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है। दूसरी तरफ गांव के किनारे गन्ने और अन्य बड़ी फसलों में जंगली जानवर की तलाश के लिए अलग-अलग दो ड्रोन कैमरा के माध्यम से लगातार तलाश की जा रही है। आज गुरुवार सुबह 10:00 बजे से एक बार फिर यहां पर जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए ड्रोन कैमरे से उसकी तलाश तेज कर दी गई है लगातार ड्रोन कैमरे से तलाश की जा रही है। वन विभाग द्वारा गांव के किनारे और गांव के अंदर एक चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया जिसमें लिखा गया है इस क्षेत्र में जंगली जानवर भेड़िया या तेंदुआ होने की संभावना है। गांव के लोग पूरी तरीके से सुरक्षित रहें सावधानीपूर्वक लोग निकले अपने बच्चों और जानवरों को खुले में ना छोड़े। کوئی بھی جنگلی جانور दिखाई دینے पर तत्काल वन विभाग کو सूचना दें रात्रि में टॉर्च का उपयोग करें दिन में अगर गन्ने की फसल के तरफ जा रहे हैं तो अकेले ना जाए लाठी डंडा लेकर के जाएं। वहीं दूसरी तरफ गायब पांच भेड़ों के अभी तक न मिलने के चलते भेड़ पालक राजाराम काफी परेशान है वह अपने गायब भेड़ों के बरामदगी की मांग कर रहे हैं। जंगली जानवर को पकड़ने में इस गांव के लोग भी वन विभाग का सहयोग कर रहे हैं।
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रेवाड़ी की डॉ. आशा ने एल्ब्रुस और किलिमंजारो पर इतिहास रचा

Rewari, Haryana:6 दिनों में यूरोप और अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी फतह... रेवाड़ी की 48 वर्षीय डॉ. आशा ने रचा इतिहास... माउंट एल्ब्रुस के बाद किलिमंजारो पर लहराया तिरंगा... सरकारी नर्सिंग ऑफिसर डॉ. आशा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया देश का मान.... शिखर से दिया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश... 2017 में किया था माउंट एवरेस्ट फतह.... डॉ. आशा ने 21 अगस्त की सुबह यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर सफलतापूर्वक कदम रखा। शिखर पर पहुंचकर उन्होंने न केवल भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहराया, बल्कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिला सशक्तिकरण” के बैनर व लोगो प्रदर्शित कर दुनिया भर में भारतीय महिलाओं की क्षमता और सम्मान का संदेश प्रसारित किया। एल्ब्रुस फतह के तुरंत बाद वे तंजानिया के लिए रवाना हुईं और बिना रुके अपने दूसरे अभियान की शुरुआत की। 29 अगस्त की सुबह तड़के उन्होंने किलिमंजारो की मुख्य चोटी 'उहुरू पीक' पर विजय प्राप्त की। शून्य से नीचे के तापमान और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच एक के बाद एक दो महाद्वीपों के शिखरों को पार करना उनकी असाधारण शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है।
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भोजपुर में बाढ़ का कहर: पीपरपाती गंगा में समाहित होने को तैयार

Mumbai, Maharashtra:भोजपुर जिले में बाढ़ की विभीषिका एक बार फिर से पिछले साल का इतिहास दोहराने जा रहा है। भोजपुर जिले का जवैनिया गांव जो पूरी तरह से बाढ़ की विभीषिका में पिकल साल गंगा में विलीन हो गया और वहां के लोग अब तक उस त्रासदी को झेलते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अब एक बार फिर से भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखंड का पीपरपाती गांव इतिहास दोहराते हुए गंगा के रौद्र रूप में एक बार फिर से समाहित होने के कगार पर पहुंच गई है। पीपरपाती गांव में गंगा के बढ़ते हुए जलस्तर के कारण लगातार कटाव हो रहा है। जिसमें पीपरपाती गांव के कई घर गंगा में समाहित हो गए हैं। इस गांव के लोग सरकारी स्कूलों में शरण लिए हुए हैं, क्योंकि उनके घर कब गंगा में समाहित हो जाएं यह खुद नहीं जानते हैं। हालांकि सुरक्षा की दृष्टिकोण से लोगों ने अपना आसरा बदल दिया है और सरकारी स्कूलों में अपने घर के सारे सामानों के साथ शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। इस गांव के लोग स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारियों से खासा नाराज दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि इन्हें अभी तक कोई भी मदद नहीं मिला है। हालांकि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जिसके कारण पीपरपाती गांव के लोगों में भय का माहौल है। उनकी स्थिति को देखकर भोजपुर जिले के जवैनिया गांव की याद आ जाती है, क्योंकि वहां के लोग भी इसी तरह से अपने गांव को गंगा में समाहित होते हुए देखते रह गए थे। और उनका गांव पूरी तरह से गंगा में विलीन हो चुका है ।हालांकि बाढ़ की विभीषिका को झेल रहे यह लोग अपने-अपने घरों को याद करते हुए नाम आंखों से मदद की मांग करते हुए दिखाई दे रहे हैं।इस गांव का आलम ये है कि लोग घर छोड़ दूसरे जगह शरण लेने को मजबूर हैं।हालांकि जिला प्रशासन के द्वारा सामुदायिक रसोई,चिकित्सा व्यवस्था सहित तमाम जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्पर है मगर बाढ़ के रौद्र रूप ने सबको डरा सा दिया है।
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