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Pradeep Kumar PandeyPradeep Kumar PandeyFollow19 Jan 2025, 01:28 pm
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करनाल के स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम पर मारपीट, गर्भवती महिला घायल

Karnal, Haryana:करनाल जिले में घरौंडा के स्वास्थ्य केंद्र में हंगामा — एएनएम पर मरीजों से मारपीट के आरोप, गर्भवती महिला को लगी चोट, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस जांच तेज करनाल-घरौंडा : सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। घरौंडा के एक सब सेंटर में तैनात एएनएम पर मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया है और पुलिस जांच में जुट गई है। कार्ड बनवाने आई महिला, विवाद ने लिया उग्र रूप : जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला ममता अपने स्वास्थ्य कार्ड बनवाने के लिए सब सेंटर पहुंची थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर उसकी एएनएम से कहासुनी हो गई। देखते ही देखते यह मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि माहौल तनावपूर्ण हो गया। गर्भवती महिला को चोट, युवक को थप्पड़ मारने का आरोप : ममता का आरोप है कि बहस के दौरान एएनएम ने गुस्से में डंडा उठा लिया, जिससे उसे चोट लगी। महिला ने बताया कि वह दो महीने की गर्भवती है और ऐसी स्थिति में यह घटना बेहद चिंताजनक है। साथ ही, वहां मौजूद एक युवक को भी थप्पड़ मारने की बात सामने आई है। वीडियो रिकॉर्डिंग बनी विवाद की वजह : घटना के दौरान एक युवक मोबाइल से वीडियो बना रहा था। आरोप है कि जैसे ही एएनएम को इसका पता चला, वह और अधिक आक्रोशित हो गई और उसका व्यवहार और आक्रामक हो गया। मौके पर हंगामा, परिजन पहुंचे, पुलिस को दी सूचना : घटना के बाद सब सेंटर परिसर में हंगामा खड़ा हो गया। शोर-शराबा सुनकर महिला के परिजन भी मौके पर पहुंच गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मेडिकल के बाद शिकायत दर्ज, एएनएम ने आरोपों को बताया बेबुनियाद : पीड़िता ममता ने अपना मेडिकल करवाकर पुलिस को लिखित शिकायत दी है। वहीं दूसरी ओर, एएनएम ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है। पुलिस जांच जारी, अधिकारियों की नजर मामले पर : पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो सहित सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
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खेसारी लाल यादव के मेले में भगदड़, मुजफ्फरपुर में पुलिस ने लाठीचार्ज किया

Muzaffarpur, Bihar:बिहार के मुजफ्फरपुर के अराई विधानसभा क्षेत्र के पूर्व भाजपा विधायक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री रामसूरत राय द्वारा आयोजित पशु मेले में बुधवार की शाम भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव के कार्यक्रम के दौरान बवाल हुआ और भगदड़ मच गई. पुलिस को हालत काबू करने के लिए लाठी चार्ज करना पड़ा. भगदड़ में तीन पुलिसकर्मी घायल हैं; अन्य भी चोटिल बताए जा रहे हैं जिनका इलाज जारी है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है; पुलिस ने भगदड़ को लेकर जांच शुरू की है. आयोजक ने आने वाले भीड़ की जानकारी गलत दी थी और बैरिकेडिंग व्यवस्था भीड़ के हिसाब से नहीं थी. मेले में भारी भीड़ के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे. सुरक्षा के लिहाज से मेला प्रबंधन के आंकड़े अलग- अलग बताए जा रहे हैं; एक तरफ मेला प्रशासन के अनुसार 2.5 से 3 लाख लोग मौजूद थे, जबकि आयोजन स्थल पर भीड़ को देखते हुए वैराकेटिंग पर दवाब और व्यवस्था सवालों के घेरे में है. बाय तरफ मेले के स्टेज पर सुरक्षा के बावजूद भीड़ इकट्ठा हो गई और कार्यक्रम के बीच में भगदड़ से बड़ा हादसा हो सकता था. तीन पुलिसकर्मी घायल हैं, इलाज चल रहा है. वायरल वीडियो में लोगों के स्टेज के तरफ जान- बूझकर फेंके गए जूते, चप्पल और पत्थर दिखते हैं. प्रशासन ने घटना की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समीक्षा के संकेत दिए हैं. इसके पूर्व दो दिन पहले अराई में डांसरों के बीच मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ था.
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बारां में हनुमान जन्मोत्सव पर भव्य पदयात्रा, भक्तों का उत्साह चरम पर

Baran, Rajasthan:बारां में हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर आज भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रीराम स्टेडियम से निकली 10वीं विशाल पदयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए, जहां शहरभर में पदयात्रियों का जोरदार स्वागत किया गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। श्रीराम स्टेडियम से शुरू हुई पदयात्रा बड़ां बालाजी धाम के लिए रवाना हुई। पदयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जय श्रीराम और बजरंगबली के जयकारों के साथ आगे बढ़ते नजर आए। शहर के विभिन्न स्थानों पर पदयात्रा का पुष्प वर्षा और शर्बत वितरण के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान अन्ता विधायक एवं पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया भी श्रद्धालुओं के साथ भजनों पर झूमते नजर आए। शाम को मंदिर परिसर में महाप्रसादी, संगीतमय सुंदरकांड पाठ और भव्य महाआरती का आयोजन भी रखा गया है। हनुमान जन्मोत्सव पर निकली इस भव्य पदयात्रा ने पूरे बारां शहर को भक्तिमय माहौल में रंग दिया, जहां हर ओर श्रद्धा और उल्लास का माहौल नजर आया।
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जहानाबाद में गैस की किल्लत और महंगाई पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन

Jehanabad, Bihar:A.INTRO - देश में लगातार बढ़ती महंगाई और एलपीजी गैस की भारी किल्लत के विरोध में आज जहानाबाद की सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। शहर के व्यस्त अरवल मोड़ के समीप कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया, जहाँ कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ​प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजीव कुमार ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि रसोई गैस के दाम अब आम आदमी के नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ कीमतें आसमान छू रही हैं, तो दूसरी तरफ गैस की पर्याप्त उपलब्धता न होने से किल्लत पैदा हो गई है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती दरों ने पहले ही कमर तोड़ रखी थी, अब गैस के संकट ने आम जनता को गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है।​ जिलाध्यक्ष ने भाजपा द्वारा कांग्रेस पर लगाए जा रहे आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष दावा करता है कि कांग्रेस जनता को पैनिक कर रही है, जबकि हकीकत इसके उलट है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में गैस और पेट्रोल की स्थिति को लेकर कहा कि देश में कोरोना जैसे हालात होने वाले हैं। जब देश के मुखिया खुद इस तरह के बयान देकर जनता के बीच डर और पैनिक पैदा कर रहे हों, तो दूसरों पर आरोप लगाना बेमानी है। ​प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही गैस की किल्लत दूर नहीं की गई और कीमतों पर लगाम नहीं लगाया गया, तो कांग्रेस अपना आंदोलन और उग्र करेगी। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने महंगाई मुक्त भारत के नारे लगाए।
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AI से रंगदारी: कौशांबी में साले-बहनोई गिरफ्तार

Gohara Marufpur, Uttar Pradesh:कौशांबी जिले में अपराध का एक नया और हैरान करने वाला तरीका सामने आया है, जहां साले-बहनोई की जोड़ी ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर गैंगस्टर स्टाइल में रंगदारी मांगने की साजिश रची। आरोपियों ने पहले अवैध असलहों के साथ अपनी फर्जी फोटो तैयार की और फिर एक कपड़ा व्यापारी से 5 लाख रुपये की रंगदारी मांग डाली। इतना ही नहीं, पैसे न देने पर सीने पर गोली मारने की धमकी भी दी गई। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामला कोखराज थाना क्षेत्र के भरवारी कस्बे का है, जहां 31 मार्च को कपड़ा व्यापारी प्रज्ज्वल के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया। मैसेज में भेजी गई फोटो में युवक खुद को अवैध असलहों के साथ दिखा रहा था और 5 लाख रुपये की रंगदारी की मांग कर रहा था। साथ ही रकम न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई। धमकी से घबराए व्यापारी ने तुरंत कोखराज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी सर्विलांस व मुखबिर की मदद से आरोपी की पहचान समदा गांव निवासी आबिद के रूप में की। पुलिस ने आबिद को गिरफ्तार कर पूछताछ की, तो उसने खुलासा किया कि इस पूरी साजिश के पीछे उसका बहनोई इसरार अहमद है, जिसने AI की मदद से उसकी फोटो को हथियारों के साथ एडिट कर गैंगस्टर जैसा रूप दिया और उसी फोटो के जरिए रंगदारी मांगी। आबिद की निशानदेही पर पुलिस ने चायल कस्बे से इसरार अहमद को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी पेशे से ऑटो चालक हैं और इनके खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर दोनों ने इस तरह की वारदात को अंजाम देने का प्लान क्यों बनाया। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच में जुटी है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि अब अपराधी AI तकनीक का भी सहारा लेने लगे हैं, जिससे पुलिस के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही
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असम: गोसाईंगांव में JMM उम्मीदवार Fedriction Hansda के लिए जनसभा

Ranchi, Jharkhand:*असम विधानसभा चुनाव में गोसाईंगांव विधानसभा से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा के पक्ष में आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन। विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने कहा कि असम के आदिवासियों के हितों की रक्षा अब जेएमएम करेगी। असम विधानसभा चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं, बल्कि इतिहास बनाने का चुनाव है। यहां की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। श्रीमती कल्पना सोरेन ने कहा कि असम के चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों को उनका हक-अधिकार दिलाने के लिए झामुमो प्रतिबद्ध है और आने वाले समय भी प्रतिबद्ध रहेगा। आपका एक-एक वोट बहुमूल्य है। आपका एक वोट असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को मजबूती प्रदान करेगा। इस अवसर पर सांसद श्रीमती जोबा माझी एवं विधायक श्री सोमेश चंद्र सोरेन ने भी लोगों से जेएमएम प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा को वोट देकर अधिक से अधिक मतों से विजयी बनाने की अपील की।*
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IIT Bombay ने सूखे पत्तों से गैसिफायर बनाकर LPG खर्च में बड़ी बचत करायी

Mumbai, Maharashtra:इस वक़्त अगर कोई आपस कहे कि आपको खाना बनाने के लिए LPG गैस की ज़रुरत नहीं है बल्कि आपके आसपास बिखरे पेड़ पौधों के पत्तो से ही गए बनाई जा सकती है वो भी कीमत में LPG गैस की तुलना में आधी तो आपको लगेगा की शायद कोई आपसे मज़ाक कर रहा है लेकिन इसी बात को सच कर दिखाया है IIT Bombay ने इस समय ईंधन की बढ़ती कीमतें और LPG की संभावित कमी चिंता का एक बढ़ता कारण बन रही हैं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे के पास इसका समाधान मौजूद है, जिसकी मदद से गैस संकट के दौरान भी उसके कैंपस की रसोई बिना किसी रुकावट के चल रही हैं। अपनी खुद की पेटेंटेड बायोमास गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए, इस संस्थान ने अपने कैंपस में गिरे हुए पत्तों, शाखाओं, टहनियों को खाना पकाने के एक भरोसेमंद ईंधन में बदल दिया है। यह इनोवेशन केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफिसर संजय महाजनी के 2014 में शुरू हुए दस साल के रिसर्च का नतीजा है। ग्रीन कैंपस में बड़ी मात्रा में सूखे पत्तों के कचरे को ठिकाने लगाने की चुनौती का सामना करते हुए, उनकी टीम ने इसे इस्तेमाल करने लायक एनर्जी में बदलने के तरीके खोजे। ये कैंपस करीब 500 एकड़ में फैला हुआ हैl यहाँ गिरने वाले कचरे को ठिकाने लगाना एक चुनौती थी क्योकि अंदाज़े के मुताबिक इस इलाके में हर दिन 2-3 टन पेड़ पौधों की सूखी पत्तियां और टहनियां गिरती है जिनका पहले कोई उपयोग नहीं था। उलटे इस सूखे कचरे को उठाने के लिए है साल IIT बॉम्बे को 50 लाख रूपये खर्च करने पड़ते थे इसलिए इन्होने सूखे कचरे को बदलने पर काम करना शुरू किया और एक गैासीफायर बनाया गया शुरूआती ट्रायल में बहुत ज़्यादा धुआँ, और क्लिंकर का बनना—यानी ठोस अवशेष जो आम सिस्टम को जाम कर देते थे जैसी मुसीबते सामने आयी। इन रुकावटों के बावजूद, टीम ने इस टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने का काम जारी रखा। और फिर कई सालो की मेहनत के बाद इनहोंने एक पेटेंटेड गैसिफायर तैयार कर लिया था, जिससे क्लिंकर बनने की समस्या काफ़ी हद तक कम हो गई और यह सिस्टम ज़्यादा व्यावहारिक और असरदार बन गया। आज IIT बॉम्बे की कैंटीन 30% से 40% कम LPG का इस्तेमाल करके चलती है, और लगभग 60% थर्मल एफिशिएंसी हासिल करती है, साथ ही इससे बहुत कम उत्सर्जन होता है। इस टेक्नोलॉजी ने न सिर्फ़ ईंधन की लागत कम की है, बल्कि यह भी पक्का किया है कि अगर LPG की सप्लाई में कोई रुकावट भी आ जाए, तो भी खाना बनाने का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे। इस सिस्टम से हर साल लगभग आठ टन कार्बन-डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होता है। इसकी सफलता के बाद अब हॉस्टल के मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे LPG की खपत में काफ़ी कमी आ सकती है और हर साल ₹50 लाख तक की बचत हो सकती है, साथ ही सैकड़ों टन कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा। यानि पहले तो सूखे कचरे के निपटारन में खर्च होने वाले 50 लाख रूपये बचाये गए और अब बनने वाली गैस के इस्तेमाल से एक साल में करीब 50 लाख रूपये की LPG गैस का इस्तेमाल बचाया जा रहा है यानि IIT Bombay को इस नायाब टेक्नोलॉजी से हर साल 1 करोड़ रूपये की बचत हो रही हैl यह सिस्टम बहुत लचीला है और इसमें अलग-अलग तरह के सूखे कचरे का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें ऐसी चीज़ें भी शामिल हैं जिन्हें रीसायकल नहीं किया जा सकता। टीम ने गैसीफायर और बर्नर, दोनों को खुद ही डिज़ाइन किया है और इसकी पहुँच कैंपस से आगे बढ़ाकर उद्योगों और बड़े पैमाने पर खाना पकाने तक ले जाने की योजना बना रही है। इसका मकसद LPG पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा की ज़रूरतों के लिए एक ज़्यादा साफ़-सुथरा और किफ़ायती विकल्प देना है。
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IIT बॉम्बे की बायोमास गैसीफिकेशन से LPG खपत 40% कम, कैंटीन की रसोई सस्ती

Mumbai, Maharashtra:इस वक़्त अगर कोई आपस कहे कि आपको खाना बनाने के लिए LPG गैस की ज़रूरत नहीं है बल्कि आपके आसपास बिखरे पेड़ पौधों के पत्तों से ही गई बनाई जा सकती है वो भी कीमत में LPG गैस की तुलना में आधी तो आपको लगेगा कि शायद कोई आपसे मजाक कर रहा है लेकिन इसी बात को सच कर दिखाया है IIT बॉम्बे ने। ऐसे समय में जब ईंधन की बढ़ती कीमतें और LPG की संभावित कमी चिंता का एक बढ़ता कारण बन रही हैं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे के पास इसका समाधान मौजूद है, जिसकी मदद से गैस संकट के दौरान भी उसके कैंपस की रसोई बिना किसी रुकावट के चल रही है। अपनी खुद की पेटेंटेड बायोमास गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए, इस संस्थान ने अपने कैंपस में गिरे हुए पत्तों, शाखाओं, टहनियों को खाना पकाने के एक भरोसेमंद ईंधन में बदल दिया है। यह इनोवेशन केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय महाजनी के 2014 में शुरू हुए दस साल के रिसर्च का नतीजा है। ग्रीन कैंपस में बड़ी मात्रा में सूखे पत्तों के कचरे को ठिकाने लगाने की चुनौती का सामना करते हुए, उनकी टीम ने इसे इस्तेमाल करने लायक एनर्जी में बदलने के तरीके खोजे। ये कैंपस करीब 500 एकड़ में फैला हुआ है। यहाँ गिरने वाले कचरे को ठिकाने लगाना एक चुनौती थी क्योंकि अंदाज़े के मुताबिक इस इलाके में हर दिन 2-3 टन पेड़ पौधों की सूखी पत्तियाँ और टहनियां गिरती है जिनका पहले कोई उपयोग नहीं था। उलटे इस सूखे कचरे को उठाने के लिए IIT बॉम्बे को पहले 50 लाख रूपये खर्च करने पड़ते थे; इसलिए इन्होने सूखे कचरे को बदलने पर काम करना शुरू किया और एक गैसीफायर बनाया गया। शुरुआती ट्रायल में बहुत ज़्यादा धुआँ और क्लिंकर जैसी समस्या सामने आयी, लेकिन टीम ने इसे बेहतर बनाने का काम जारी रखा। कई सालों की मेहनत के बाद पेटेंटेड गैसिफ़ायर तैयार हुआ जिससे क्लिंकर बनने की समस्या कम हो गई और सिस्टम ज़्यादा व्यावहारिक बन गया। आज IIT बॉम्बे की कैंटीन 30-40% कम LPG का इस्तेमाल करके चलती है, लगभग 60% थर्मल एफिशिएंसी हासिल करती है, तथा इससे उत्सर्जन कम होता है। इससे ईंधन की लागत कम होने के साथ LPG सप्लाई में कमी आने पर भी खाना बनाने का काम बिना रुकावट चलता रहे। इस सिस्टम से हर साल लगभग आठ टन CO2 का उत्सर्जन कम होता है और अब हॉस्टल के मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना है जो LPG की खपत को और घटाएगी और हर साल करीब 50 लाख रूपये तक बचत होगी, साथ ही सैकड़ों टन CO2 उत्सर्जन भी कम होगा। इसका मकसद LPG पर निर्भरता घटाना और ऊर्जा की ज़रूरतों के लिए साफ़-सुथरा और किफ़ायती विकल्प देना है।
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जेसल पार्क-आरएनपी पार्क में पाइप गैस दो साल बाद भी शुरू नहीं

Mumbai, Maharashtra:मुंबई से सटे मीरा-भायंदर शहर के जेसल पार्क और आरएनपी पार्क समेत 200 से अधिक रिहायशी इमारतों में गैस पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन डेढ़ से दो साल बीत जाने के बाद भी घरों तक गैस की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। पाइपलाइन लगने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें पाइप गैस की सुविधा मिलेगी और सिलेंडर के झंझट से राहत मिलेगी, लेकिन लंबे समय से सप्लाई शुरू न होने के कारण स्थानीय लोगों में नाराज़गी और परेशानी दोनों बढ़ती जा रही है।स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पाइपलाइन बिछाने के बाद उन्हें कई बार भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही गैस सप्लाई शुरू हो जाएगी। लेकिन समय बीतता गया और स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई परिवार अब भी एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं, जबकि उन्हें उम्मीद थी कि पाइप गैस मिलने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी। लगातार देरी के कारण लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. इलाके की महिलाओं का कहना है कि फ्लैट में लकड़ी या कोयले का चूल्हा जलाना संभव नहीं है। ऐसे में अगर घर का गैस सिलेंडर अचानक खत्म हो जाए तो बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है। उनका कहना है कि जब पाइपलाइन पहले से बिछी हुई है, तब भी गैस सप्लाई न मिलना समझ से परे है और इससे घर का कामकाज प्रभावित हो रहा है. जब ज़ी न्यूज़ की टीम महानगर गैस लिमिटेड के मीरा रोड स्थित कार्यालय पहुँची तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर मौजूद थे। कुछ लोगों ने बताया कि वे कई वर्षों से अपनी सोसाइटी में गैस पाइपलाइन लाने के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन अलग-अलग कारण बताकर उन्हें कनेक्शन नहीं दिया गया। अब जब सरकार की ओर से पाइप गैस को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो कंपनी की तरफ से यह कहकर देरी बताई जा रही है कि पर्याप्त वर्कर उपलब्ध नहीं हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार गैस सप्लाई कंपनी से शिकायत की, लेकिन वहां से जवाब मिलता है कि देरी के लिए नगर निगम जिम्मेदार है। वहीं नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि मामला गैस कंपनी के स्तर पर लंबित है। दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पाने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. इस मामले में महानगर गैस लिमिटेड का कहना है कि कंपनी अपने अधिकृत क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है और मार्च 2026 में घरेलू कनेक्शनों की संख्या में फरवरी की तुलना में 200 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है। कंपनी के मुताबिक कई इलाकों में पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन शुरू करने में तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आती हैं, जैसे नालों की मौजूदगी, अन्य एजेंसियों के इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य, संकरी गलियां, ट्रैफिक समस्या और जमीन के नीचे पहले से मौजूद केबल व अन्य यूटिलिटी लाइनों की वजह से काम में देरी होती है। कंपनी का दावा है कि इन सभी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है और आने वाले तीन महीनों में अधिकतम घरों तक पाइप गैस पहुंचाने का प्रयास किया गया है। تاہم इलाके के रहवासी इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पाइपलाइन बिछे दो साल से ज्यादा समय हो चुका है, इसलिए अब जल्द से जल्द गैस सप्लाई शुरू की जानी चाहिए। जेसल पार्क और आरएनपी पार्क के सैकड़ों परिवार फिलहाल इसी इंतजार में हैं कि आखिर कब उनके घरों तक पाइप गैस पहुंचेगी और उन्हें सिलेंडर के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
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ईरान-यूएस-इज़राइल युद्ध का क Kashmir हस्तशिल्प उद्योग पर बड़ा असर, लाखों कारीगर प्रभावित

Chaka, कश्मीर घाटी भी ईरान पर US-इज़राइल युद्ध के असर से अछूती नहीं है। तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ रद्द कर दी गई हैं। 4.5 लाख कारीगर और शिल्पकार, खाड़ी देशों में काम करने वाले लगभग 2 लाख कश्मीरी लोग प्रभावित हुए हैं; 600 ऑर्डर रद्द हो गए हैं और लगभग 400 करोड़ रुपये मध्य पूर्व में अटक गए हैं। ईरान पर US-इज़राइल युद्ध निर्यातकों, कारीगरों, शिल्पकारों और यहाँ तक कि मध्य पूर्व में काम करने वाले कश्मीरी सेल्समैनों को भी एक गंभीर और तत्काल झटका दे रहा है। कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) और कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (KCCI) ने कश्मीर की अर्थव्यवस्था में स्पष्ट गिरावट का संकेत दिया है; उन्होंने कहा कि हज़ारों करोड़ रुपये का स्टॉक जमा हो गया है और लगभग 4.5 लाख कारीगर और शिल्पकार प्रभावित होकर खाली बैठे हैं। हैंडलूम और हस्तशिल्प क्षेत्र सीधे तौर पर 4.5 लाख कारीगरों और शिल्पकारों को सहारा देता है, जिनमें से कई आर्थिक रूप से कमज़ोर ग्रामीण परिवारों से आते हैं। वैश्विक ऑर्डर रुक जाने और प्रदर्शनियाँ रद्द होने के कारण, तैयार माल—जैसे पश्मीना शॉल, कालीन, पेपर-मेशे और अखरोट की लकड़ी का काम—पूरी घाटी में गोदामों और घरों में फँसा हुआ है। उत्पादन के कोई नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, जिससे दिहाड़ी पर काम करने वाले कारीगर बिना काम के खाली बैठे हैं। कैश फ्लो पूरी तरह से रुक गया है, क्योंकि निर्यातक बुनकरों, रंगरेज़ों और कारीगरों का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं; ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने मध्य पूर्व में जो माल निर्यात किया था, उसका भुगतान अभी तक नहीं मिला है और वह पैसा वहीं अटक गया है। हाल के वर्षों में, कश्मीर के कालीन और हस्तशिल्प का निर्यात आमतौर पर सालाना ₹600–700 करोड़ के बीच रहा है। इस साल, युद्ध शुरू होने से पहले रमज़ान और ईद के त्योहारों के दौरान ₹410 करोड़ का व्यापार हुआ था, लेकिन वह सारा पैसा वहीं अटक गया है। अब तक लगभग 600 ऑर्डर रद्द हो चुके हैं। खाड़ी देशों, यूरोप और पूर्वी एशिया के बाज़ारों से—जहाँ पारंपरिक रूप से कश्मीर के बेहतरीन हस्तनिर्मित उत्पादों की सबसे ज़्यादा खपत होती है—व्यापार के कोई भी नए अवसर (leads) नहीं मिल रहे हैं। तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ भी रद्द कर दी गई हैं। डील/एक्सपोर्टर तारिक घोनी ने कहा, “पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। हमारी तीन प्रदर्शनियाँ रद्द हो गईं - एक डेनमार्क में, दूसरी UAE में और तीसरी बीजिंग में।” वसंत का यह समयकालीन-कालीनीन है, क्योंकि कारीगर सर्दियों के दौरान माल (स्टॉक) तैयार करते हैं और अब हम इसे अलग-अलग देशों में प्रदर्शित करते हैं। लगभग 600 ऑर्डर रद्द हो गए हैं, और अगर युद्ध नहीं रुका तो और भी ऑर्डर रद्द हो सकते हैं; इसके अलावा 50 हजार से ज़्यादा लोग जो वहां नौकरी कर रहे हैं, वे भी प्रभावित हुए हैं; अगर युद्ध और बढ़ा तो उनकी नौकरियां भी जा सकती हैं। इसलिए, प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया गया है कि वे पश्चिम एशिया के इस संघर्ष में हस्तक्षेप करें और इसे रुकवाएं। इस संकट का असर न केवल बड़े निर्यातकों पर पड़ा है, बल्कि मध्य-पूर्व में काम कर रहे 2 लाख से ज़्यादा कश्मीरी लोगों की नौकरियां भी खतरे में हैं। कश्मीर के खाड़ी देशों (Gulf) के साथ नौकरियों के मामले में गहरे संबंध हैं, खासकर UAE, सऊदी अरब और कतर में। इस समय, कश्मीर में 4.45 लाख कारीगरों, शिल्पकारों और उनके परिवारों के लिए यह सीधे तौर पर आजीविका का संकट बन गया है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो हजारों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं; व्यापारियों ने इस बारे में खुलकर चेतावनी दी है। कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने कहा, सरकार ने स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की है और विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया है ताकि स्थिति के अनुसार कदम उठाए जा सकें। हस्तशिल्प क्षेत्र इस समय बहुत ज़्यादा दबाव में है; कारीगर खाली बैठे हैं, और उनके परिवार रोज़ाना की मज़दूरी पर निर्भर हैं। KCCI, FCIK और CEPC लगातार सरकार पर ज़ोर डाल रहे हैं कि वह तेज़ी से कार्रवाई करे—जैसे कि ब्याज़-मुक्त लोन देना, कारीगरों को सीधे मदद पहुंचाना और बाज़ार का विस्तार करना। यदि यह संघर्ष जल्द शांत हो जाता है, तो कुछ हफ़्तों या महीनों में हालात सामान्य हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि वे अमेरिका, इज़रायल और दूसरे देशों के साथ भारत के कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करें ताकि मानवीय और आर्थिक आधार पर इस संघर्ष को शांत किया जा सके और खत्म किया जा सके।
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