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Harish Chandra GuptaHarish Chandra GuptaFollow21 Nov 2024, 01:32 pm

जल जीवन मिशन के तहत पानी पहुंचाने का वादा तो किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और

Gonda, Uttar Pradesh:गोंडा जल जीवन मिशन के अंतर्गत विष्णुपुरी कॉलोनी के कुछ भागों में अब तक पानी की सप्लाई के लिए पाइपलाइन नहीं डाली गई है। इस वजह से कॉलोनी के निवासियों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद से मोटर लगाकर पानी लेने को मजबूर हैं। यह समस्या खासतौर पर उन क्षेत्रों में देखने को मिल रही है जहाँ जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने का काम अब तक पूरा नहीं हुआ है स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है
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राज्य में न्याय की गारंटी कर रहे भाजपा और विपक्षी नेता; चंदा घोटाले पर बहस

Patna, Bihar:भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि निश्चित तौर पर राज्य में सबको न्याय मिलेगा. भरत तिवारी के परिवार ने मुख्यमंत्री जी से मुलाकात की और उसके बाद यह कार्रवाई हुई है. उनके साथ गलत नहीं होगा. उनके परिवार के सदस्यों को निश्चित तौर पर न्याय मिलेगा. सरकार किसी को ना बचती है ना फसाती है. वहीं संसद भवन में विपक्ष के नेताओं के द्वारा चंदा चोरी के प्रदर्शन को लेकर कहा कि ऐसे तो गेरुआ वस्त्र धारण करके कोई भी साधु बन जाएगा लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं वह क्या हैं. भारत सरकार उत्तर प्रदेश की सरकार सब देख रही है योगी जी राज्य की मुख्यमंत्री हैं वहां कोई बचेगा आपको लगता है सारे लोग गिरफ्तार हो रहे हैं कार्रवाई हो रही है. जो लोग साधु बना है वह सब लोग खुद चोर है दूसरे की बात कर रहे हैं चरित्र वाला आदमी अगर बात करें ईमानदार और ज्ञानी आदमी बात करें तो समझ में आता है जो कई चीजों की अभियुक्त रहा है उसकी चर्चा करने की क्या बात है माइक्रोस्कोप की से भारत की जनता देखती है कौन कैसा चरित्र का व्यक्ति है पूरा भारत उसको देख रहा है साधु का ड्रेस पहनने से मनुष्य साधु हो जाएगा तो भारत का हर आदमी साधु हो जाएगा निकाल दीजिए. ललन पासवान पूर्व विधायक...
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पलवल की महिलाएं लाडो लक्ष्मी योजना से आत्मनिर्भर बन रही हैं

Palwal, Haryana:पलवल की महिलाओं ने हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी लाडो लक्ष्मी योजना की सराहना करते हुए इसे महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी बताया। महिलाओं का कहना है कि इस योजना से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है और उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिल रही है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं के लिए यह योजना किसी सहारे से कम नहीं है। महिलाएं ने कहा कि मुख्यमंत्री की लाडो लक्ष्मी योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। उनका कहना है कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं ने प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के हित में चलाई जा रही योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी सरकार महिलाओं के sashaktikaran के लिए इसी प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाएं लागू करती रहेगी।
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नई टिहरी में मेडिकल कॉलेज नरेंद्र नगर में बनने पर जनता में आक्रोश

New Tehri, Uttarakhand:नई टिहरी में मेडिकल कॉलेज निर्माण की मांग को लेकर टिहरी मेडिकल कॉलेज निर्माण संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों, राजनीतिक दलों, क्षेत्रीय जनता ने सुमन पार्क से कलेक्ट्रेट तक जनाक्रोश रैली निकाली और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा. प्रदर्शनकारियों ने कहा टिहरी डैम प्रभावित नई टिहरी शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद गंभीर है, वहीं स्वास्थ्य शिक्षा जैसी सुविधाओं की कमी से पलायन हो रहा है. और अब मेडिकल कॉलेज नई टिहरी में निर्माण की घोषणा से कुछ उम्मीद जगी थी, लेकिन अब कहा जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण नरेंद्र नगर के फिपलटी में किया जाएगा जिससे जनता में आक्रोश है और इसका विरोध किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो उग्र आंदोलन भी किया जाएगा, लेकिन मेडिकल कॉलेज को अन्यत्र शिफ्ट नहीं होने देंगे.
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नून में बाईपास मांग के लिए ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, सड़क जाम

Jaipur, Rajasthan:दो युवकों की मौत के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, नून में बाईपास की मांग को लेकर सड़क जाम जालोर। जिले के नून गांव में बाईपास निर्माण की वर्षों पुरानी मांग को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण गांव से गुजरने वाले एमडीआर मार्ग पर एकत्रित हुए और सांथू-आकोली मुख्य मार्ग पर सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर विरोध जताया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक बाईपास निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के बीच से गुजरने वाला एमडीआर मार्ग लगातार हादसों का कारण बन रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क की कम चौड़ाई के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। दो दिन पूर्व हुए दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से बाईपास की मांग की जा रही है। कई बार लिखित और मौखिक रूप से प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि बाईपास बनने से गांव के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही बंद होगी और दुर्घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकेगी। सरपंच अमीर सिंह ने बताया कि पिछले करीब पांच वर्षों से बाईपास निर्माण की मांग लगातार उठाई जा रही है। शुरुआत में प्रशासन ने भूमि उपलब्ध नहीं होने का कारण बताया था। इसके बाद ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर बाईपास के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई। पंचायत की ओर से सेटेलाइट सर्वे के आधार पर प्रस्तावित बाईपास का नक्शा तैयार कर संबंधित विभाग को भेजा गया। इसके अलावा राजस्थान की उपमुख्यमंत्री को भी प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि बाईपास के लिए भूमि आवंटन सहित आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बावजुद विभागीय स्तर पर कार्य आगे नहीं बढ़ाया गया। गांव की आबादी के बीच से गुजर रही एमडीआर सड़क की चौड़ाई मात्र 7 से 8 फुट है, जबकि इस मार्ग पर भारी वाहनों की लगातार आवाजाही रहती है। ऐसे में छोटे-बड़े सड़क हादसे आम बात बन गए हैं और ग्रामीणों की जान हर समय जोखिम में रहती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस संबंध में जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और राज्य सरकार को कई बार ज्ञापन भी सौंपे जा चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। सड़क जाम और टायर जलाकर किए गए प्रदर्शन के कारण सांथू-आकोली मुख्य मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों से वार्ता कर समझाइश का प्रयास किया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक बाईपास निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा。
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बिहार के डिजिटल प्रशासन से सहयोग शिविर में लाखों आवेदनों का त्वरित निस्तारण; क्या है रणनीति?

Patna, Bihar:बिहार सरकार ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में सुशासन, डिजिटल प्रशासन और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की दिशा में बड़े पैमाने पर काम हो रहा है. सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो० सोहेल ने बताया कि सहयोग शिविर मुख्यमंत्री की एक अभिनव पहल है, जिसके माध्यम से लाखों लोगों की समस्याओं का समाधान किया गया है. मुख्य बातें: 19 मई से शुरू हुए सहयोग शिविर में अब तक 5,83,886 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से 5,33,904 आवेदनों का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि शेष मामलों पर कार्रवाई जारी है. पूरी प्रक्रिया डिजिटल है. तय समयसीमा पर कंप्यूटर स्वतः स्पष्टीकरण जारी करता है और संबंधित अधिकारी को ऑनलाइन जवाब देना पड़ता है. अब तक किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी. RTPS सेवाओं पर सरकार का दावा: बिहार लोक सेवा अधिकार (RTPS) अधिनियम के तहत अब तक 53.80 करोड़ से अधिक आवेदनों का निपटारा किया गया. जाति, आय, आवासीय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और मजदूर पंजीकरण जैसी सेवाओं में ऑटो अपील सिस्टम लागू किया गया है. निर्धारित समय सीमा पार होते ही आवेदन स्वतः अपील में चला जाता है. 23 और 26 जुलाई से शुरू हुई इस व्यवस्था में हजारों मामलों का स्वतः निस्तारण हुआ. पंचायत स्तर तक सेवाओं का विस्तार: राज्य की सभी पंचायत सरकार भवनों में 64 से अधिक ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं. लोक शिकायत निवारण: लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत अब तक 19.38 लाख से अधिक शिकायतों का समाधान किया गया. सरकारी एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए लागू शिकायत निवारण प्रणाली में 16,106 शिकायतों का निपटारा किया गया. मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना: IIM बोधगया के साथ MOUs के तहत 107 विशेषज्ञ विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, जो आधुनिक प्रबंधन तकनीकों के आधार पर विभागों को सहयोग दे रहे हैं. सरकारी नियुक्तियां: वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए 1,72,218 रिक्त पदों की अधियाचना विभिन्न आयोगों और चयन संस्थाओं को भेजी गई है. इन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है. HRMS और सूचना प्रणाली: राज्य के 8 लाख कर्मचारियों का डेटा HRMS पर उपलब्ध है. वेतन, सेवा विवरण और संपत्ति संबंधी जानकारी का भी डिजिटल प्रबंधन किया जा रहा है. जिज्ञासा केंद्र के टोल-फ्री नंबर पर अब तक 12,93,887 मामलों में जानकारी उपलब्ध कराई गई है. सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल बनाना है, ताकि आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से मिल सके.
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यमुनानगर में तेंदुआ दिखा: आबादी के पास वीडियो वायरल, वन विभाग से कार्रवाई मांग

Yamuna Nagar, Haryana:एंकर : यमुनानगर में एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। देर रात छछरौली पुल पर एक तेंदुआ दिखाई दिया, जिसका वीडियो वहां से गुजर रहे एक राहगीर ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। बताया जा रहा है कि यह घटना रात करीब 11 बजे की है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। खास बात यह है कि जहां तेंदुआ दिखाई दिया, वहां से आबादी वाला क्षेत्र महज करीब 50 मीटर की दूरी पर है। वीडियो कांग्रेस नेता द्वारा भी बनाई गई बताई जा रही है। स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है और वन विभाग सेजल्द कार्रवाई की मांग की जा रही है। वीओ: वायरल वीडियो में तेंदुआ छछरौली पुल के आसपास टहलता हुआ नजर आ रहा है। देर रात सड़क पर उसकी मौजूदगी से राहगीरों में भय का माहौल बन गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेंदुआ कुछ देर तक पुल के आसपास घूमता रहा और फिर अंधेरे की ओर चला गया। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों ने एक-दूसरे को सतर्क किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तेंदुआ आबादी की ओर बढ़ जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। फिलहाल वन विभाग से इलाके में गश्त बढ़ाने और तेंदुए की तलाश के लिए टीम भेजने की मांग की जा रही है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि यदि कहीं तेंदुआ दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग और पुलिस को सूचना दें।
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ज्ञान भारतम् मिशन से नव नालंदा महाविहार में पांडुलिपियाँ डिजिटाइज़ हो रहीं

Pariaunna, Bihar:भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, कला, संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण तथा उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने 'ज्ञान भारतम् मिशन' शुरू किया है। इस मिशन के तहत देशभर के मंदिरों, गुरुद्वारों, मठों, मस्जिदों, दरगाहों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में सुरक्षित दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटाइजेशन और सूचीकरण किया जा रहा है। यह राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत नालंदा स्थित नव नालंदा महाविहार, डीम्ड यूनिवर्सिटी को बिहार का क्लस्टर सेंटर बनाया गया है। महाविहार राज्य के 13 जिलों में बिखरी अमूल्य पांडुलिपियों की खोज और संरक्षण का कार्य कर रहा है। नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य भारत की हजारों वर्ष पुरानी ज्ञान परंपरा को विश्व के सामने लाना है। देश के अनेक धार्मिक संस्थानों और निजी संग्रहों में आज भी ऐसी पांडुलिपियाँ सुरक्षित हैं, जिनमें अमूल्य ज्ञान निहित है। मिशन के तहत इनका सर्वेक्षण, संरक्षण, डिजिटाइजेशन और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में उन पर व्यापक शोध हो सके। अब तक बिहार के 13 जिलों में लगभग तीन लाख पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। नव नालंदा महाविहार के 26 शिक्षकों की टीम इस कार्य में जुटी है। इनमें से करीब एक लाख 63 हजार पांडुलिपियों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है, जबकि एक हजार से अधिक पांडुलिपियों का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया है। राजगीर के वीरायतन से लगभग 700 दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियाँ प्राप्त हुई हैं। वहीं लखीसराय से लगभग 700 वर्ष पुरानी रामचरितमानस की पांडुलिपि और गया जिले की बीथो शरीफ दरगाह से करीब 300 वर्ष पुरानी पांडुलिपियाँ मिली हैं। यह बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत का प्रमाण है। इन पांडुलिपियों को राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल पर उपलब्ध कराने के बाद देश-विदेश के शोधकर्ताओं को अध्ययन का अवसर मिलेगा। इससे बिहार की सांस्कृतिक, साहित्यिक और धार्मिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिलेगी। ज्ञान भारतम् मिशन भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और बिहार की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में खेल बजट नहीं मिलने से तैयारी प्रभावित

Jaipur, Rajasthan:जयपुर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 के राज्य स्तरीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिताओं का वार्षिक खेल पंचांग जारी कर दिया है। इसके साथ ही स्कूलों में खिलाड़ियों की तैयारी शुरू हो गई है, लेकिन सरकारी विद्यालयों में पिछले दो वर्षों से खेल मद का नियमित बजट और नई खेल सामग्री उपलब्ध नहीं होने से तैयारियों पर असर पड़ रहा है। कई विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक भामाशाहों, ग्रामीणों और व्यक्तिगत परिचितों के सहयोग से खिलाड़ियों के अभ्यास की व्यवस्था कर रहे हैं। विभाग के अनुसार विद्यालय स्तर की 17 एवं 19 वर्ष आयु वर्ग की 33 खेल प्रतियोगिताएं 25 अगस्त तक पूरी कराई जाएंगी। इसके बाद जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं 29 अगस्त से 17 अक्टूबर तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं 9 सितंबर से 29 अक्टूबर तक आयोजित होंगी। ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि समय पर खेल सामग्री और बजट नहीं मिलने से खिलाड़ियों को बेहतर तैयारी कराना चुनौती बन गया है। शारीरिक शिक्षकों के अनुसार पहले उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार, उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10 हजार और प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार रुपये खेल गतिविधियों के लिए मिलते थे, लेकिन पिछले दो सत्रों से यह राशि नियमित रूप से जारी नहीं हुई। फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स और हॉकी जैसे खेलों की सामग्री का अभाव कई विद्यालयों में बना हुआ है। शिक्षाविदों का कहना है कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर देती है, इसलिए विद्यालयों को समय पर खेल बजट और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
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